
वैश्विक व्यवस्था में एक विरोधाभासी स्थिति उभर रही है। एक ओर भारत आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक शक्ति के रूप में निरंतर ऊँचाई की ओर बढ़ More

राजनीतिक सिद्धांत में राजनीतिक दायित्व (Political Obligation) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है। सामान्य रूप से हम मानते हैं कि नागरिक को राज्य के कानूनों का More

राजनीतिक सिद्धांत में राज्य (State) सबसे केंद्रीय अवधारणाओं में से एक है। राजनीति, सत्ता, कानून, नागरिकता, अधिकार, स्वतंत्रता, समानता और न्याय जैसे लगभग सभी प्रश्न More

समकालीन विश्व में युद्धों की प्रकृति में एक विचित्र विरोधाभास देखने को मिल रहा है। आधुनिक हथियार प्रणालियां, सूचना तकनीक और कूटनीतिक तंत्र पहले से More

संयुक्त राष्ट्र महासभा के चल रहे अधिवेशन में फ्रांस ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की कार्यप्रणाली को लेकर More

आज की वैश्विक राजनीति एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहाँ दुनिया एक साथ कई गंभीर संकटों का सामना कर रही है। युद्ध, जलवायु More

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) अब केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं रह गई है। यह तेजी से महाशक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, आर्थिक शक्ति, राष्ट्रीय More

भारत का संविधान एक ऐसा जीवंत दस्तावेज है जिसने देश की विविधता को समायोजित करने के लिए समय समय पर लचीलापन दिखाया है। इसी लचीलेपन More

अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुआ नया सुरक्षा समझौता आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन में एक महत्वपूर्ण, यद्यपि असहज करने वाला, समायोजन है। यह More

राजनीतिक सिद्धांत में राजनीतिक दायित्व (Political Obligation) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है। सामान्य रूप से हम मानते हैं कि नागरिक को राज्य के कानूनों का More

राजनीतिक सिद्धांत में राज्य (State) सबसे केंद्रीय अवधारणाओं में से एक है। राजनीति, सत्ता, कानून, नागरिकता, अधिकार, स्वतंत्रता, समानता और न्याय जैसे लगभग सभी प्रश्न More

युर्गेन हेबरमास का जन्म 1929 में हुआ और वे फ्रैंकफर्ट स्कूल की दूसरी पीढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण विचारकों में माने जाते हैं। उनका चिंतन मुख्यतः More

अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर (J&K) में हुए संवैधानिक एवं राजनीतिक परिवर्तन ने उसके संवैधानिक और राजनीतिक ढाँचे को मूल रूप से बदल दिया। More

भारत का संविधान एक ऐसा जीवंत दस्तावेज है जिसने देश की विविधता को समायोजित करने के लिए समय समय पर लचीलापन दिखाया है। इसी लचीलेपन More

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका को संविधान की संरक्षक, मौलिक अधिकारों की रक्षक और विधि के शासन की आधारभूत संस्था माना जाता है। सामान्यतः More

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाल के बयान ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र More

भारतीय राजनीति और सामाजिक चिंतन के इतिहास में शायद ही कोई प्रश्न आरक्षण जितना विवादास्पद, जितना संवेदनशील और जितना बहुआयामी रहा हो। यह ऐसा विषय More
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