
“भारत और चीन के बीच सीमा विवाद केवल पर्वतों, घाटियों और बर्फीले क्षेत्रों का संघर्ष नहीं है; यह इतिहास, साम्राज्यवाद, राष्ट्रवाद, भू–राजनीति, शक्ति–संतुलन और एशिया More

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं बल्कि लोकतांत्रिक वैधता, जन-प्रतिनिधित्व और संघीय व्यवस्था की आत्मा हैं। More

पाश्चात्य राजनीतिक दर्शन के इतिहास में थॉमस हॉब्स (Thomas Hobbes, 1588–1679) का नाम आधुनिक राजनीतिक चिंतन के सबसे प्रभावशाली विचारकों में लिया जाता है। यदि More

पाश्चात्य राजनीतिक दर्शन के इतिहास में निकोलो मैकियावेली (Niccolò Machiavelli, 1469–1527) का नाम अत्यंत प्रभावशाली और विवादास्पद राजनीतिक विचारकों में लिया जाता है। उन्हें आधुनिक More

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम निर्यात सक्षम बनाने वाली “प्रशासनिक व्यवस्थाओं” More

न्याय की अवधारणा राजनीतिक सिद्धांत के सबसे मौलिक और विवादास्पद विषयों में से एक है। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में जब समकालीन राजनीतिक चिंतन ने More

हालिया वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2025 में विश्व स्तर पर आतंकवादी घटनाओं में लगभग 22% तथा आतंकवाद से होने वाली मृत्यु में 28% की More

आधुनिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों में भी मानवता, न्याय और मानवीय गरिमा के मूलभूत More

1-प्लेटो “न्याय का अर्थ है प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपना स्वाभाविक कार्य करना।” “राज्य व्यक्ति का विस्तृत रूप है।” “दार्शनिक ही शासन करने के सर्वाधिक योग्य More

लेखक: प्लेटो (427–347 ई.पू.) मुख्य पात्र: सुकरात (Socrates) रचना शैली: संवाद (Dialogue) The Republic प्लेटो की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली कृतियों में से एक है। More

जॉन रॉल्स बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक दार्शनिकों में से एक थे। उनका जन्म 1921 में अमेरिका में हुआ और वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय में More

लिंकन का राजनीतिक दर्शन: अमेरिकी राष्ट्रवाद, गृहयुद्ध और लोकतांत्रिक राष्ट्र की अवधारणा ‘किसी राष्ट्र की पहचान केवल उसके भूगोल से नहीं बनती, बल्कि उन मूल्यों More

कार्ल मार्क्स (1818-1883) ने समाज, इतिहास और राजनीति को समझने के लिए जो सैद्धांतिक ढाँचा प्रस्तुत किया, उसके केंद्र में “आर्थिक नियतत्ववाद” की अवधारणा है। More

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं बल्कि लोकतांत्रिक वैधता, जन-प्रतिनिधित्व और संघीय व्यवस्था की आत्मा हैं। More

लोकतंत्र की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी है। यह भागीदारी मुख्य रूप से मतदान के माध्यम से अभिव्यक्त होती है। मतदान More

जुलाई 2026 में गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा लद्दाख के नागरिक समाज संगठनों के साथ हुई बैठकों के आधिकारिक विवरण जारी किए गए, जिनमें केंद्र सरकार More

भारत जैसे विशाल, विविधतापूर्ण और बहुलतावादी देश में राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता केवल राजनीतिक शब्दावली नहीं हैं, बल्कि वे उस सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब हैं जिसने More
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