
इक्कीसवीं शताब्दी की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति संतुलन का स्वरूप निरंतर परिवर्तित हो रहा है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के मध्य बढ़ती प्रतिस्पर्धा, More

आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में यदि किसी एक अवधारणा का नाम लिया जाए, तो वह है—नागरिकता। नागरिकता केवल किसी देश की सदस्यता More

चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) ने जुलाई में अपने 35 वर्षों के संवाद संबंधों की वर्षगांठ मनाई। यह एक अत्यंत सफल साझेदारी More

इक्कीसवीं शताब्दी का पश्चिम एशिया तीव्र भू-राजनीतिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। एक समय यह क्षेत्र मुख्यतः तेल, इस्लामी राजनीति और अरब–इज़राइल संघर्ष More

हाल के वर्षों में शिक्षा, रोजगार, किसानों, पर्यावरण, महिला अधिकारों तथा सामाजिक न्याय से जुड़े आंदोलनों ने पुनः यह स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र केवल More

इतिहास की तुलनाएं सदैव सावधानी से की जानी चाहिए, क्योंकि कोई भी दो कालखंड पूर्णतः समान नहीं होते। फिर भी 1990-91 में भारत के सामने More

बलूचिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है। हाल के वर्षों में बलूच राष्ट्रवादी संगठनों ने समय-समय पर स्वतंत्र बलूचिस्तान की घोषणा, समानांतर More

बीसवीं शताब्दी के मध्य तक तुलनात्मक राजनीति (Comparative Politics) का अध्ययन मुख्यतः संवैधानिक व्यवस्थाओं, सरकारी संस्थाओं और औपचारिक राजनीतिक संरचनाओं तक सीमित था। यह माना More

पाश्चात्य राजनीतिक दर्शन के इतिहास में यदि थॉमस हॉब्स ने आधुनिक राज्य की आवश्यकता को दार्शनिक आधार प्रदान किया और जाँ-जाक रूसो ने लोकप्रिय संप्रभुता More

आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में यदि किसी एक अवधारणा का नाम लिया जाए, तो वह है—नागरिकता। नागरिकता केवल किसी देश की सदस्यता More

डगलस मैकग्रेगर (Douglas McGregor) मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में प्रबंधन के प्रोफेसर थे। उन्होंने 1960 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘The Human Side of Enterprise’ More

लेखक: प्लेटो (427–347 ई.पू.) मुख्य पात्र: सुकरात (Socrates) रचना शैली: संवाद (Dialogue) The Republic प्लेटो की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली कृतियों में से एक है। More

जॉन रॉल्स बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक दार्शनिकों में से एक थे। उनका जन्म 1921 में अमेरिका में हुआ और वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय में More

आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में यदि किसी एक अवधारणा का नाम लिया जाए, तो वह है—नागरिकता। नागरिकता केवल किसी देश की सदस्यता More

हाल के वर्षों में शिक्षा, रोजगार, किसानों, पर्यावरण, महिला अधिकारों तथा सामाजिक न्याय से जुड़े आंदोलनों ने पुनः यह स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र केवल More

भारत के दल-बदल विरोधी कानून में सुधार: लोकतांत्रिक जनादेश और जवाबदेही की पुनर्स्थापना भारत में दल-बदल विरोधी कानून को लागू हुए लगभग चार दशक हो More

भारत में संसदीय प्रतिनिधित्व और परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गया है। यह बहस केवल सीटों की संख्या More
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