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आतंकवाद और भारत की आंतरिक सुरक्षा

आतंकवाद प्रकार, इतिहास और उपाय

 दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। आतंकवाद आज भी दुनिया और भारत दोनों के लिए एक जीवित, बदलता हुआ और खतरनाक मुद्दा बन गया है। भारत अब भी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों—लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के निशाने पर है, जबकि माओवादी उग्रवाद और क्षेत्रीय अलगाववादी आंदोलनों से आंतरिक सुरक्षा पर बहुआयामी खतरे उत्पन्न होते हैं।

ऐसे समय में, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ नागरिकों में भी जागरूकता आवश्यक है, क्योंकि आतंकवाद का मूल उद्देश्य भय, अविश्वास और सामाजिक विभाजन फैलाना होता है। इस लेख में आतंकवाद की समझ उसके इतिहास एवं इसको प्रतिबंधित करने के लिए किये गये उपायों का उल्लेख किया गया है।

आतंकवाद की परिभाषा

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद (International Terrorism)

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद वे हिंसक और आपराधिक कृत्य हैं जो ऐसे व्यक्तियों या समूहों द्वारा किए जाते हैं, जो विदेशी घोषित आतंकवादी संगठनों या विदेशी राष्ट्रों (राज्य-प्रायोजकों) से प्रेरित हों या उनसे जुड़े हों। इसमें विदेशी विचारधारा, विदेशी फंडिंग, विदेशी नेटवर्क और राज्य-समर्थन शामिल हो सकता है।

घरेलू आतंकवाद (Domestic Terrorism)

घरेलू आतंकवाद वे हिंसक और आपराधिक कृत्य हैं जो व्यक्तियों या समूहों द्वारा अपने ही देश के भीतर उत्पन्न विचारधाराओं (राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक, नस्लीय या पर्यावरण-संबंधी)

आतंकवाद का इतिहास

आतंकवाद (Terrorism) राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नागरिक आबादी में भय उत्पन्न करने वाली योजनाबद्ध हिंसा है। इसमें बम धमाके, हत्या, अपहरण, आत्मघाती हमले, विमान–अपहरण आदि शामिल होते हैं।

आतंकवाद कोई नया विचार नहीं है इसकी जड़ें हजारों साल पुरानी हैं। परंतु आधुनिक आतंकवाद 19वीं और 20वीं शताब्दी में उभरकर सामने आया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद (1945 के बाद) : आधुनिक आतंकवाद की तीन लहरें

पहली लहर: राष्ट्रवादी / औपनिवेशिक विरोधी आतंकवाद (1945–1970)

इसका लक्ष्य था: औपनिवेशिक सत्ता से मुक्ति और अलग राष्ट्र का निर्माण।

मुख्य उदाहरण:

  • अल्जीरिया FLN (फ्रांस के खिलाफ)
  • इज़राइल Irgun, Lehi (ब्रिटिश शासन के खिलाफ)
  • साइप्रस EOKA (ब्रिटेन के खिलाफ)
  • वियतनाम, फिलिस्तीन, आयरलैंड आदि

परिणाम: इन देशों को बाद में स्वतंत्रता मिली—इसलिए आतंकवाद कभी-कभी राजनीतिक रूप से “सफल” भी माना गया।

(B) दूसरी लहर : वामपंथी / नई वामपंथी आतंकवाद (1968–1990)

यह लहर वियतनाम युद्ध का विरोध, साम्राज्यवाद-विरोध और मार्क्सवाद से प्रेरित थी।

मुख्य उदाहरण:

  • जर्मनी Red Army Faction (RAF)
  • इटली Red Brigades
  • जापान Japanese Red Army
  • अमेरिका Weather Underground, Black Panthers
  • लैटिन अमेरिका Tupamaros, Montoneros

इनमें से कई समूहों को फ़िलिस्तीनी संगठनों से प्रशिक्षण और हथियार मिले थे।

(C) तीसरी लहर : धार्मिकआतंकवाद / इस्लामी आतंकवाद (1979–वर्तमान)

इसकी शुरुआत ईरान की इस्लामी क्रांति (1979) से मानी जाती है ।

इसके पीछे कारण:

  • सोवियत संघ का टूटना
  • अफगान जिहाद
  • अमेरिका–मध्य पूर्व संघर्ष
  • धार्मिक कट्टरपंथ

मुख्य समूह:

  • अलकायदा (Osama bin Laden)
  • तालिबान
  • आईएसआईएस/ISIL
  • बोको हराम, अलशबाब

इनकी रणनीतियाँ: आत्मघाती हमले, बड़े पैमाने पर विस्फोट, इंटरनेट और वैश्विक प्रचार—ने आतंकवाद को अत्यधिक घातक बनाया।

आतंकवाद के प्रकार

  1. मानवजातीयराष्ट्रवादी आतंकवाद (Ethno-Nationalist Terrorism)
  • किसी उप-राष्ट्रीय जातीय या सांस्कृतिक समूह द्वारा पृथक राज्य की मांग या पहचान की रक्षा हेतु की गई हिंसा।
  • उदाहरण: श्रीलंका में तमिल टाइगर्स, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में अलगाववादी आंदोलन।
  1. धार्मिक आतंकवाद (Religious Terrorism)
  • धार्मिक आदेशों, विश्वासों या कट्टरता से प्रेरित हिंसात्मक गतिविधियाँ।
  • आतंकवादी इसे “पवित्र कर्तव्य” मानते हैं।
  • उदाहरण: अल-कायदा, तालिबान, आईएसआईएस।
  1. विचारधारात्मक आतंकवाद (Ideology-Oriented Terrorism)
  • किसी राजनीतिक या सामाजिक विचारधारा को लागू करने हेतु हिंसा का प्रयोग।
    • वामपंथी आतंकवाद: पूंजीवाद विरोधी, क्रांतिकारी परिवर्तन की मांग।
      • उदाहरण: भारत और नेपाल में माओवादी आंदोलन।
    • दक्षिणपंथी आतंकवाद: यथास्थिति बनाए रखना या अतीत की स्थिति को पुनः स्थापित करना।
      • उदाहरण: जर्मनी में नाजीवाद, अमेरिका में केकेके।
  1. राज्यप्रायोजित आतंकवाद (State-Sponsored Terrorism)
  • किसी देश द्वारा दूसरे देश में अस्थिरता फैलाने हेतु आतंकवादी समूहों को समर्थन देना।
  • उदाहरण: पाकिस्तान द्वारा भारत में आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने के आरोप।
  1. अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद (International Terrorism)
  • जब आतंकवादी गतिविधियाँ एक देश की सीमाओं से बाहर जाकर अन्य देशों को प्रभावित करती हैं।
  • उदाहरण: 9/11 का अमेरिका पर हमला।
  1. आर्थिक आतंकवाद (Economic Terrorism)
  • देश की आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से की गई गतिविधियाँ।
  • जैसे: बैंकिंग प्रणाली पर साइबर हमला, व्यापारिक केंद्रों पर हमला।

यहाँ APEC की आतंकवाद-रोधी रणनीति का संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत है:

APEC की आतंकवादरोधी रणनीति

  • 2001-2002: APEC नेताओं ने आतंकवाद से क्षेत्र की सुरक्षा हेतु दो प्रमुख वक्तव्य जारी किए, जिनमें आतंकवाद से लड़ने और विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई।
  • 2003: APEC आतंकवादरोधी कार्य बल (CTTF) की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य था:
    • आतंकवाद-रोधी गतिविधियों की निगरानी
    • क्षमता निर्माण
    • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
  • 2011: APEC समेकित आतंकवादरोधी और सुरक्षित व्यापार रणनीति शुरू की गई, जो चार क्षेत्रों पर केंद्रित थी:
    • सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला
    • सुरक्षित यात्रा
    • सुरक्षित वित्त
    • सुरक्षित अवसंरचना
  • 2013: CTTF को आतंकवादरोधी कार्य समूह (CTWG) में बदला गया, जो ECOTECH के अंतर्गत कार्य करता है।
  • 2018-2022 रणनीतिक योजना:
    • ISIL, अल-कायदा जैसे उभरते खतरों से निपटना
    • विदेशी आतंकवादी लड़ाकों की आवाजाही पर नियंत्रण
    • वैध व्यापार और यात्रा को सुरक्षित बनाना
    • आतंकवादी वित्तपोषण रोकना
    • निजी क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग
  • उपलब्धियाँ:
    • STAR सम्मेलन (2003–2020): सुरक्षित व्यापार पर 11 सम्मेलन
    • CTAPs: सदस्य देशों की आतंकवाद-रोधी कार्य योजनाएँ
    • कार्यशालाएँ: यात्रा, वित्त, अवसंरचना और पर्यटन सुरक्षा पर

भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए आतंकवाद कैसे लगातार खतरा बना हुआ है?

  1. सीमापार आतंकवाद और प्रॉक्सी वॉरफेयर
  • पाकिस्तान जैसे राज्यप्रायोजक तत्व अब भी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे गैर-राज्य तत्वों के माध्यम से भारत में आतंक फैलाते हैं।
  • इन संगठनों द्वारा 2001 संसद हमला और 2016 उरी हमला जैसी घटनाएँ की गईं।
  • 2025 के पहलगाम हमले द्वारा भी यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान-आधारित आतंकवादी ढाँचे अब भी सक्रिय हैं।
  • ISI लंबे समय से धार्मिक कट्टरता, अलगाववाद और युवाओं के ब्रेनवॉश का उपयोग कर रही है, खासकर कश्मीर में।
  • चीनपाकिस्तान की साझेदारी भारत के खिलाफ हाइब्रिड युद्ध का बड़ा खतरा बनी हुई है।

साइबर आतंकवाद

  • आतंकवादी भर्ती, धन जुटाने, प्रचार और हमलों की योजना बनाने के लिए तकनीक और इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं।
  • साइबर आतंकवाद भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के लिए बड़ा खतरा है।
  • क्रिप्टोकरेंसी, डार्क वेब, ऑनलाइन कट्टरता—इनकी वजह से आतंकवाद को फंडिंग ट्रैक करना कठिन हो गया है।

संगठित अपराध और आतंकवाद का गठजोड़

  • भारत में आतंकवाद को ड्रग्स, नकली मुद्रा, तस्करी आदि के माध्यम से फंड मिलता है।
  • ISI इन चैनलों का उपयोग आतंक संचालन के लिए करती है।
  • भारत की भौगोलिक स्थिति—अफगानिस्तान और म्यांमार जैसे ड्रग उत्पादन क्षेत्रों के पास—इस तस्करी को आसान बनाती है।

भारत का नया आतंकवादरोधी सिद्धांत (Counterterrorism Doctrine)

यह नया सिद्धांत ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया, जो पहले की नरमी वाली नीति से हटकर अधिक आक्रामक और दंडात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

मुख्य सिद्धांत

  1. निर्णायक प्रतिकार (Decisive Retaliation)
  • भारत अब हर आतंकी हमले का जवाब अपनी शर्तों पर देता है।
  • आतंकवादियों के ठिकानों को वहीं निशाना बनाना, जहाँ वे सुरक्षित समझते हैं।
  • यह रणनीति पाकिस्तान तथा PoJK में स्थित LeT और JeM ठिकानों पर किए गए हमलों में दिखी।
  1. परमाणु ब्लैकमेल के लिए शून्य सहनशीलता
  • यदि आतंकवादी परमाणु छाया के नीचे छिप भी जाएँ, भारत कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
  • यह पूर्व की ‘रणनीतिक संयम’ नीति से प्रमुख बदलाव है।
  1. आतंकियों और उनके प्रायोजकों में कोई भेद नहीं
  • आतंकवादी संगठन और उन्हें समर्थन देने वाली राज्य प्रणाली—दोनों को भारत समान रूप से लक्ष्य मानता है।
  • ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के अंदर गहराई तक की गई कार्रवाई इसका उदाहरण है।

दोवाल सिद्धांत (Doval Doctrine)

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोवाल द्वारा निर्मित यह सिद्धांत सैन्य शक्ति, खुफिया तंत्र, कूटनीति और मनोवैज्ञानिक युद्ध का मिश्रण है।

मुख्य सिद्धांत

  • Proactive National Defense – पहले हमला करने या निर्णायक प्रतिकार करने का अधिकार।
  • Whole-of-Government Approach – सेना, खुफिया एजेंसियों, पुलिस, विदेश मंत्रालय आदि का एकीकृत ढाँचा।
  • Security Linked with Development – सुरक्षा + विकास (जैसे: अनुच्छेद 370 हटाना, LWE क्षेत्रों में विकास)।
  • Defensive–Offense Strategy – प्रतिद्वंद्वी को महँगा साबित करने वाली रणनीतिक आक्रामकता।

 


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