भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र अपनी भौगोलिक विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि और ऐतिहासिक विशिष्टता के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण राज्यों मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा ने 21 जनवरी 1972 को अपना राज्यत्व प्राप्त किया। यह दिन इन राज्यों के इतिहास में लोकतांत्रिक आत्मनिर्णय और संवैधानिक एकीकरण का प्रतीक है। इन तीनों राज्यों की स्थापना North-Eastern Areas (Reorganisation) Act, 1971 के अंतर्गत हुई, जिसने भारत के पूर्वोत्तर भूभाग को एक नई प्रशासनिक संरचना दी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- मणिपुर: लोकतांत्रिक प्रयोगशाला से पूर्ण राज्य तक
- स्वतंत्रता से पूर्व मणिपुर एक स्वतंत्र रियासत था। 1947 में इसने Instrument of Accession पर हस्ताक्षर कर भारत संघ में प्रवेश किया, जबकि आंतरिक प्रशासनिक स्वायत्तता अपने पास रखी।
- 1948 में मणिपुर ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित भारत का पहला चुनाव आयोजित किया, जिससे यह एक संवैधानिक राजतंत्र बना।
- हालांकि 1949 में महाराजा ने बिना निर्वाचित विधानसभा की सहमति के Merger Agreement पर हस्ताक्षर किए और विधानसभा भंग कर दी गई।
- इसके बाद यह Part-C State (1949–1956) और फिर Union Territory बना।
- 1972 में North-Eastern Areas (Reorganisation) Act, 1971 के तहत इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
- संविधान के अनुच्छेद 371C के तहत मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों को विशेष प्रशासनिक संरक्षण प्रदान किया गया।
- त्रिपुरा: राजवंशीय राज्य से लोकतांत्रिक शासन तक
- त्रिपुरा का शासन माणिक्य वंश के अधीन था और यह स्वतंत्र रियासत के रूप में भारत में शामिल हुआ।
- 1949 में महारानी कंचन प्रभा देवी ने त्रिपुरा को भारत में विलय किया।
- यह भी प्रारंभ में Part-C State था और बाद में 1956 में Union Territory बना।
- जनजातीय आबादी की आकांक्षाओं और क्षेत्रीय स्वायत्तता की माँग को ध्यान में रखते हुए 1972 में त्रिपुरा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।
- त्रिपुरा में छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत Tripura Tribal Areas Autonomous District Council (TTAADC) की स्थापना की गई, जो वहाँ की जनजातीय स्वशासन व्यवस्था को मजबूत बनाती है।
- मेघालय: भाषा और संस्कृति की पहचान की जीत
- मेघालय का उद्भव खासी, जयंतिया और गारो जनजातियों की उस माँग से जुड़ा है जिसमें उन्होंने अपनी संस्कृति और भाषा की विशिष्टता की रक्षा के लिए अलग राज्य की माँग की थी।
- असम की भाषा नीति के विरोध ने इस आंदोलन को और बल दिया।
- 1969 में 22वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत मेघालय को असम के भीतर एक स्वायत्त राज्य (Autonomous State) का दर्जा मिला।
- इसके बाद North-Eastern Areas (Reorganisation) Act, 1971 के माध्यम से 21 जनवरी 1972 को मेघालय भारत का 21वाँ राज्य बना।
- यह राज्य पूर्ण रूप से छठी अनुसूची के तहत संचालित है, जहाँ स्वायत्त जिला परिषदें जनजातीय प्रशासन का कार्य संभालती हैं।

North-Eastern Areas (Reorganisation) Act, 1971
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 और उत्तर-पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971, दोनों 30 दिसंबर 1971 को पारित किए गए। इन अधिनियमों ने भारत के पूर्वोत्तर भाग को एक नई प्रशासनिक पहचान प्रदान की। इन कानूनों के माध्यम से असम की पुरानी इकाई का पुनर्गठन किया गया और क्षेत्र के विविध जनजातीय, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए नई प्रशासनिक सीमाएँ तय की गईं।
इन अधिनियमों के तहत भारत के आठ राज्य; अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को आधिकारिक रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र (North-Eastern Region) के रूप में परिभाषित किया गया।
इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी परिषद (North Eastern Council – NEC) की स्थापना की गई, जो एक वैधानिक सलाहकार निकाय (Statutory Advisory Body) है। यह परिषद पूर्वोत्तर राज्यों के बीच विकास योजना, नीति-निर्माण, आर्थिक समन्वय और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का कार्य करती है।
इस प्रकार, इन अधिनियमों ने न केवल प्रशासनिक पुनर्गठन किया, बल्कि पूर्वोत्तर भारत को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाला एक सशक्त संस्थागत ढाँचा भी प्रदान किया।
उप–राष्ट्रीयता की स्वीकृति: यह अधिनियम पूर्वोत्तर क्षेत्र की जनजातीय पहचान, संस्कृति और भाषा की विशिष्टता को संवैधानिक मान्यता देता है।
इस अधिनियम का महत्व
- राजनीतिक सशक्तिकरण: केंद्रशासित प्रदेशों को पूर्ण राज्य का दर्जा देकर उन्हें विधानसभा और मंत्रिपरिषद के माध्यम से नीति-निर्माण का अधिकार दिया गया।
- रणनीतिक आवश्यकता: 1971 के भारत–बांग्लादेश युद्ध के बाद इस अधिनियम का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थिरता लाना था।
‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की सुरक्षा और सीमाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए यह कदम आवश्यक था। - NEFA का एकीकरण: अधिनियम ने North East Frontier Agency (NEFA) को केंद्रशासित प्रदेश अरुणाचल प्रदेश में परिवर्तित किया, जो 1987 में 55वें संविधान संशोधन द्वारा पूर्ण राज्य बना।
- उत्तर–पूर्वी परिषद (North Eastern Council – NEC):
- North Eastern Council Act, 1971 के तहत गठित एक सांविधिक निकाय।
- सदस्य: राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, और राष्ट्रपति द्वारा नामित तीन सदस्य।
- उद्देश्य: पूर्वोत्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास का समन्वय।
- कार्य: DoNER मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय नीति निर्धारण और योजना समन्वय।
उत्तर–पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971
उत्तर-पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971 के तहत भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के लिए एक परिषद की स्थापना का प्रावधान किया गया, जिसे उत्तर-पूर्वी परिषद कहा गया। परिषद के उद्देश्य निम्नलिखित थे:
उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के सभी भागों में सभी क्षेत्रों के संतुलित विकास को सुनिश्चित करना।
- एक एकीकृत और समन्वित क्षेत्रीय योजना तैयार करना।
- परियोजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करना।
- अंतरराज्यीय परिवहन से संबंधित मामलों पर सलाह देना।
- सामान्य हित या चिंता से संबंधित मामलों पर चर्चा करने के लिए।
- पूर्वोत्तर क्षेत्रों में स्थित किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा या भारत सरकार के किसी भी मंत्रालय या विभाग द्वारा संदर्भित किसी भी मामले पर सिफारिशें करना।
परिषद को अपनी कार्यप्रणाली और कामकाज को विनियमित करने के लिए नियम बनाने का अधिकार है। परिषद एक सलाहकार निकाय है जो पूर्वोत्तर राज्यों के बीच परामर्श और सहयोग को सुगम बनाती है। यह अंतर-राज्यीय विवादों के समाधान और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करती है।
दोनों अधिनियमों के प्रावधानों को लागू करने के लिए उठाए गए कदम
- पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 में संशोधन करके 2013 में मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए अलग-अलग उच्च न्यायालयों की स्थापना की गई।
- मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को क्रमशः 1986 और 1987 में मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 और अरुणाचल प्रदेश राज्य अधिनियम, 1986 पारित करके केंद्र शासित प्रदेशों से राज्यों में उन्नत किया गया।
- वर्ष 2002 में पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम 1971 में संशोधन करके सिक्किम को पूर्वोत्तर परिषद के सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
- भारत सरकार द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए अतिरिक्त धनराशि और विशेष पैकेज का आवंटन ।
- पूर्वोत्तर राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति, खेल आदि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न संस्थानों और एजेंसियों की स्थापना।
- उत्तर–पूर्वी राज्यों से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए केंद्रीय स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों का गठन , जैसे कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER), उत्तर पूर्वी क्षेत्र विभाग (DONER), उत्तर पूर्वी विकास वित्त निगम लिमिटेड (NEDFi), आदि।
निष्कर्ष
21 जनवरी 1972 केवल तीन राज्यों का राज्यत्व दिवस नहीं है, बल्कि यह भारत की संघीय भावना, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक सहअस्तित्व का प्रतीक है।
North-Eastern Areas (Reorganisation) Act, 1971 ने न केवल प्रशासनिक एकीकरण किया, बल्कि जनजातीय समुदायों की आकांक्षाओं को संवैधानिक सुरक्षा दी।
आज मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा भारत के विकास, लोकतंत्र और विविधता के अद्भुत उदाहरण हैं, जो यह संदेश देते हैं कि ‘एकता विविधता में नहीं, विविधता में एकता से ही संभव है।’
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