in ,

कमजोर होता WTO और वैश्विक व्यापार का बदलता स्वरूप

WTO और वैश्विक व्यापार

  • वैश्विक व्यापार बहुपक्षवाद (trade multilateralism) की प्रणाली द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अपने सबसे गंभीर संकटों में से एक का सामना कर रही है।
  • विशेष रूप से अमेरिका द्वारा बढ़ती एकतरफा कार्रवाइयों (unilateral actions) ने Most-Favoured Nation (MFN) जैसे मूलभूत सिद्धांतों के क्षरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
  • इस संदर्भ में, मार्च 2026 में याउंडे (Yaoundé) में आयोजित WTO की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) से अपेक्षा थी कि वह नियम-आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली को मजबूत करेगी।
  • हालांकि, इस सम्मेलन ने प्रणाली को सुदृढ़ करने के बजाय गहरे मतभेदों और संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर कर दिया।

सहमति प्राप्त करने में विफलता (Failure to Achieve Consensus)

  • MC14 की सबसे बड़ी निराशा यह रही कि इसके 166 सदस्य देश एक संयुक्त मंत्रीस्तरीय घोषणा (ministerial declaration) पर सहमत नहीं हो सके।
  • ऐसी घोषणाएँ वैश्विक व्यापार शासन के लिए दिशा और समन्वय प्रदान करती हैं।
  • सहमति का अभाव सदस्य देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है और WTO की वार्ता मंच के रूप में घटती प्रभावशीलता को उजागर करता है।
  • तथाकथित ‘याउंडे पैकेज’, जिसमें केवल प्रारूप निर्णय (draft decisions) शामिल हैं, संगठन की ठोस परिणाम देने में असमर्थता को दर्शाता है।

प्रमुख मोरेटोरियम (Moratoriums) का समाप्त होना

  1. कॉमर्स मोरेटोरियम
  • MC14 में एक महत्वपूर्ण घटना कॉमर्स पर कस्टम शुल्क लगाने के मोरेटोरियम का समाप्त होना था।
  • 1998 से WTO सदस्य देशों ने डिजिटल लेनदेन पर शुल्क न लगाने पर सहमति जताई थी।
  • अब इसके समाप्त होने से देश ऐसे शुल्क लगा सकते हैं, जिससे:
    • विकासशील देशों को राजस्व बढ़ाने का अवसर मिल सकता है
    • लेकिन व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ सकती है
  • इसके अलावा, 66 देशों ने अलग से एक समझौता किया, जिसमें ऐसे शुल्कों को प्रतिबंधित किया गया है।
  • इससे दो समानांतर व्यवस्थाएँ बन गई हैं:
    • WTO के भीतर → शुल्क की अनुमति
    • WTO के बाहर → शुल्क पर प्रतिबंध
  • यह वैश्विक व्यापार नियमों की एकरूपता को कमजोर करता है।
  1. TRIPS गैरउल्लंघन शिकायतें
  • दूसरा समाप्त हुआ मोरेटोरियम TRIPS समझौते के तहत non-violation complaints से संबंधित था।
  • यह प्रावधान देशों को उन नीतियों को चुनौती देने की अनुमति देता है, जो नियमों का उल्लंघन नहीं करतीं लेकिन अपेक्षित लाभ को प्रभावित करती हैं।
  • इस सुरक्षा के समाप्त होने से विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए चिंता बढ़ गई है।
  • खासकर सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियाँ विकसित देशों द्वारा चुनौती दी जा सकती हैं।
  • हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे मामलों में सफलता की संभावना कम होती है, फिर भी यह नीति निर्माण में अनिश्चितता पैदा करता है।

बहुपक्षीय समझौतों की चुनौतियाँ (Challenges of Plurilateral Agreements)

  • MC14 में एक प्रमुख मुद्दा था कि Investment Facilitation for Development (IFD) समझौते को WTO ढांचे में शामिल नहीं किया जा सका।
  • 129 देशों के समर्थन के बावजूद, भारत ने इसका विरोध किया।
  • भारत की चिंता थी कि WTO में ऐसे plurilateral agreements को शामिल करने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं हैं
  • यह एक व्यापक दुविधा को दर्शाता है:
    • plurilateral agreements → प्रगति को तेज कर सकते हैं
    • लेकिन बहुपक्षीय प्रणाली की समावेशिता को कमजोर कर सकते हैं

सुधार के रोडमैप का अभाव (Lack of Reform Roadmap)

  • WTO की dispute settlement system की अपीलीय व्यवस्था (Appellate Body) अभी भी बहाल नहीं हो सकी है।
  • यह संस्थागत गतिरोध (institutional paralysis) संगठन की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।
  • इतिहास बताता है कि जब बहुपक्षीय प्रणाली कमजोर होती है, तो अमेरिका जैसे देश एकतरफा कदम उठाते हैं।
  • उदाहरण: Trade Act, 1974 का Section 301

वैश्विक व्यापार के भविष्य पर प्रभाव (Implications)

  • MC14 की विफलता से WTO के बाहर वैकल्पिक व्यापार समझौतों की प्रवृत्ति बढ़ेगी।
  • देश अलग-अलग समझौते करेंगे, जिससे WTO की केंद्रीय भूमिका कमजोर होगी।
  • इससे वैश्विक व्यापार प्रणाली:
    • अधिक अस्थिर (less predictable)
    • अधिक असमान (more unequal) हो सकती है।
  • WTO को प्रासंगिक बने रहने के लिए:
    • नए और नवाचारी दृष्टिकोण अपनाने होंगे
    • plurilateral agreements के लिए स्पष्ट ढांचा बनाना होगा
  • भारत इसमें सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

वैश्विक दक्षिण की रणनीतियाँ

(i) कानूनी उपायों का प्रभावी उपयोग

  • केवल विवाद जीतना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्णयों को लागू करवाना भी आवश्यक है।

(ii) व्यापार घाटे का रणनीतिक उपयोग

  • व्यापार घाटे को कमजोरी न मानकर इसे वार्ता में लाभ के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

(iii) सामूहिक सहयोग

  • विकासशील देशों को मिलकर कार्य करना चाहिए ताकि उनकी वार्ता शक्ति बढ़ सके।

(iv) नियमों का पालन एक सुरक्षा के रूप में

  • मानकों, सब्सिडी और मूल के नियमों का उपयोग अपने हितों की रक्षा के लिए किया जा सकता है।

उदाहरण:

भारत संतुलित रणनीति अपनाता है जिसमें वह विवाद समाधान और वार्ता दोनों का उपयोग करता है।

ब्राज़ील और वियतनाम जैसे देश भी सामूहिक रणनीतियों और क्षेत्रीय सहयोग का उपयोग कर रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

  • WTO की MC14 बैठक वैश्विक व्यापार प्रणाली को मजबूत करने का एक खोया हुआ अवसर साबित हुई।
  • सहमति की कमी, मोरेटोरियम का समाप्त होना और सुधार एजेंडा का अभाव यह दर्शाते हैं कि व्यापार बहुपक्षवाद गहरे संकट में है
  • यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो:
    • बहुपक्षीय सहयोग कमजोर होगा
    • और उसकी जगह एकतरफावाद (unilateralism) ले लेगा
  • इसलिए WTO को मजबूत करना और नियम-आधारित प्रणाली को बनाए रखना वैश्विक व्यापार की स्थिरता और न्यायसंगतता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

 


Discover more from Politics by RK: Ultimate Polity Guide for UPSC and Civil Services

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

What do you think?

मॉन्टेस्क्यू/Montesquieu (1689-1755)

भारतीय राजनीतिक चिंतन में राष्ट्र की अवधारणा