कार्ल मार्क्स के प्रमुख आलोचक
1. मार्क्स के आर्थिक आलोचक
यूजेन बॉम-बावर्क (ऑस्ट्रियन स्कूल)
- प्रमुख कृति: Karl Marx and the Close of His System (1896)
- मुख्य आलोचना:
- मार्क्स का श्रम मूल्य सिद्धांत आंतरिक रूप से असंगत है।
- यदि मूल्य केवल श्रम से तय होता है, तो बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव कैसे समझाया जाए?
- पूँजी से लाभ केवल शोषण से नहीं, बल्कि जोखिम, समय-प्राथमिकता और निवेश से भी आता है।
कार्ल मेंगर और अल्फ्रेड मार्शल
- इन्होंने सीमांत उपयोगिता सिद्धांत प्रस्तुत किया।
- मूल्य उपभोक्ता की व्यक्तिगत पसंद से तय होता है, न कि केवल श्रम से।
- कीमतें मांग और आपूर्ति के संयुक्त प्रभाव से बनती हैं।
प्रमुख आर्थिक आपत्तियाँ
- श्रम ≠ मूल्य
- लाभ हमेशा शोषण नहीं होता
- पूँजीवाद स्वयं को सुधारने की क्षमता रखता है (कल्याणकारी राज्य, कानून, सुधार)
2. मार्क्स के दार्शनिक आलोचक
फ्रेडरिक नीत्शे
- मार्क्सवाद मानव जीवन को केवल आर्थिक संघर्ष में सीमित कर देता है।
- समानता की अवधारणा को उन्होंने दुर्बलता से उत्पन्न नैतिकता कहा।
- रचनात्मकता, शक्ति और व्यक्तित्व की उपेक्षा।
कार्ल पॉपर
- प्रमुख कृति: The Open Society and Its Enemies
- मार्क्सवाद को अवैज्ञानिक कहा क्योंकि यह परीक्षण योग्य (falsifiable) नहीं है।
- इतिहास को पूर्व-निर्धारित मानने की प्रवृत्ति की आलोचना।
हैना अरेंड्ट
- मार्क्स ने मानव जीवन को केवल श्रम-केन्द्रित बना दिया।
- ऐतिहासिक अनिवार्यता पर जोर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को नष्ट करता है।
- मार्क्सवाद से सर्वसत्तावादी राज्य को वैचारिक आधार मिला।
प्रमुख दार्शनिक आपत्तियाँ
- अत्यधिक निर्धारणवाद
- मानव स्वतंत्रता और नैतिकता की उपेक्षा
- विज्ञान होने का दावा, पर वैज्ञानिक कसौटी पर असफल
3. समाजशास्त्रीय और राजनीतिक आलोचक
मैक्स वेबर
- प्रमुख कृति: The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism
- आर्थिक निर्धारणवाद को अस्वीकार।
- धर्म, संस्कृति और विचार भी आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
- नौकरशाही और तर्कसंगतता पर जोर।
एमिल दुर्खीम
- समाज को केवल आर्थिक ढाँचे तक सीमित करना गलत।
- नैतिकता, सामाजिक एकजुटता और सामूहिक चेतना महत्त्वपूर्ण।
रॉबर्ट मिशेल्स
- प्रमुख सिद्धांत: ओलिगार्की का लौह नियम
- हर संगठन, यहाँ तक कि समाजवादी दल भी, अंततः अभिजात वर्ग पैदा करते हैं।
- वर्गहीन समाज एक भ्रम।
प्रमुख समाजशास्त्रीय आपत्तियाँ
- समाज बहुआयामी है
- संस्कृति और संस्थाएँ स्वतंत्र भूमिका निभाती हैं
- पूर्ण समानता व्यावहारिक नहीं
4. आंतरिक एवं उत्तर-मार्क्सवादी आलोचक
एंतोनियो ग्राम्शी
- सांस्कृतिक प्रभुत्व की अवधारणा।
- शासक वर्ग केवल आर्थिक शक्ति से नहीं, बल्कि विचारधारा से शासन करता है।
- मार्क्स का आर्थिक संकुचनवाद अपर्याप्त।
जॉर्ज लुकाच
- वर्ग चेतना को केंद्रीय महत्व।
- क्रांति के लिए केवल आर्थिक संकट नहीं, चेतना आवश्यक।
लुई अल्थूसर
- अर्थव्यवस्था अंतिम स्तर पर निर्णायक है, पर राजनीति और संस्कृति को सापेक्ष स्वायत्तता।
- मानवतावादी मार्क्सवाद की आलोचना।
फ्रैंकफर्ट स्कूल
- प्रमुख विचारक: अडोर्नो, हॉर्कहाइमर, मार्क्युज़
- जनसंचार माध्यम और संस्कृति को नियंत्रण का साधन बताया।
- पूँजीवाद झूठी आवश्यकताएँ पैदा करता है।
5. आधुनिक और उत्तर-आधुनिक आलोचक
मिशेल फूको
- शक्ति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ज्ञान और विमर्श के माध्यम से काम करती है।
- जेल, स्कूल, अस्पताल – सभी सत्ता के उपकरण।
जाँ फ्रांसुआ ल्योतार
- मार्क्सवाद को महावृत्तांत कहा।
- इतिहास को एक ही संघर्ष में समेटना गलत।
जैक्स देरिदा
- मार्क्सवाद का विघटन।
- मार्क्स पूरी तरह मृत नहीं, बल्कि आधुनिकता में “भूत” की तरह मौजूद।
6. अनुभवजन्य और ऐतिहासिक आलोचना
भविष्यवाणियों की विफलता
- विकसित देशों में सर्वहारा क्रांति नहीं हुई।
- पूँजीवाद ढहा नहीं, बल्कि अनुकूलित हुआ।
मध्यवर्ग का उदय
- द्विवर्गीय मॉडल (पूँजीपति–मजदूर) अपर्याप्त।
- मध्यवर्ग का विस्तार।
समाजवादी राज्यों का पतन
- सोवियत संघ और पूर्वी यूरोप का विघटन।
- नौकरशाही, अक्षमता और दमन।
निष्कर्ष
मार्क्स एक महान विचारक थे, लेकिन उनके सिद्धांत
- आर्थिक रूप से सीमित
- दार्शनिक रूप से निर्धारणवादी
- समाजशास्त्रीय रूप से संकुचनवादी
सिद्ध हुए।
आधुनिक सामाजिक विज्ञान में मार्क्स को पूरी तरह नकारा नहीं गया, बल्कि संशोधित, आलोचित और पुनर्व्याख्यायित किया .
| Type of Critic | Major Figures | Main Objection |
|---|---|---|
| Economic | Böhm-Bawerk, Marshall | Value not based on labor; capitalism adaptable |
| Philosophical | Popper, Nietzsche, Arendt | Determinism, pseudoscience, loss of freedom |
| Sociological | Weber, Durkheim, Michels | Overemphasis on economy; neglect of culture |
| Post-Marxist | Gramsci, Althusser, Frankfurt School | Ignored ideology and culture’s autonomy |
| Postmodern | Foucault, Lyotard, Derrida | Rejection of grand narratives; focus on discourse |
| Empirical | Various historians, economists | Predictive failures, rise of middle class |
Discover more from Politics by RK: Ultimate Polity Guide for UPSC and Civil Services
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


