केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री ने संसद में संघ बजट 2026–27 प्रस्तुत किया। यह बजट नव-उद्घाटित कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला संघ बजट है। यह बजट युवा शक्ति–प्रेरित (Yuva Shakti-driven) बजट के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो विकसित भारत की दृष्टि पर आधारित है। यह दुविधा की जगह कार्रवाई (Action over Ambivalence), नारेबाज़ी की जगह सुधार (Reform over Rhetoric) और लोकलुभावनवाद की जगह जनता (People over Populism) के मार्गदर्शक सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करता है।
यह बजट तीन कर्तव्यों (Kartavyas) से निर्देशित है, जिनका उद्देश्य आर्थिक वृद्धि को तेज़ करना, जन-क्षमताओं का निर्माण करना तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
तीन कर्तव्य (The Three Kartavyas)
- आर्थिक वृद्धि को बनाए रखना (Sustain Economic Growth): उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के विरुद्ध लचीलापन विकसित करने के लिए।
- आकांक्षाओं की पूर्ति (Fulfill Aspirations): युवाओं और नागरिकों की क्षमताओं का निर्माण करना ताकि वे भारत की समृद्धि के मज़बूत साझेदार बन सकें।
- सबका साथ, सबका विकास (Sabka Saath, Sabka Vikas): प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और क्षेत्रक (sector) को संसाधनों एवं अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित करना, विशेष रूप से “अंतिम पायदान (Last Mile)” पर ध्यान केंद्रित करना।
प्रथम कर्तव्य: आर्थिक वृद्धि को तेज़ करना एवं बनाए रखना
- संघ बजट 2026–27 का प्रथम कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को न केवल तेज़ करना बल्कि उसे दीर्घकाल में टिकाऊ बनाए रखना है। इसके अंतर्गत सरकार का प्रमुख लक्ष्य उत्पादकता में वृद्धि, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करना तथा अस्थिर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के विरुद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन क्षमता को बढ़ाना है।
- बजट में विनिर्माण को विकास का केंद्रीय आधार मानते हुए रणनीतिक एवं उभरते क्षेत्रों जैसे जैव-फार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेयर अर्थ खनिज, पूंजीगत वस्तुएँ और वस्त्र उद्योग को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है।
- Biopharma SHAKTI और भारत सेमीकंडक्टर मिशन 0 जैसी पहलें भारत को उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने तथा आयात निर्भरता घटाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।
- साथ ही, MSMEs के लिए ‘चैंपियन MSME’ और SME ग्रोथ फंड के माध्यम से उत्पादन क्षमता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।
- अवसंरचना को “Growth Connectors” के रूप में विकसित करते हुए हाई-स्पीड रेल, फ्रेट कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स सुधारों पर ज़ोर दिया गया है, जिससे लागत घटे और निजी निवेश को प्रोत्साहन मिले।
- कुल मिलाकर, यह कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को निवेश-प्रेरित, निर्यातोन्मुख और रणनीतिक रूप से सुरक्षित बनाने का प्रयास करता है, ताकि भारत बदलते वैश्विक परिदृश्य में स्थिर और सशक्त विकास पथ पर आगे बढ़ सके।
द्वितीय कर्तव्य: आकांक्षाओं की पूर्ति एवं क्षमता निर्माण
- संघ बजट 2026–27 का द्वितीय कर्तव्य युवाओं और नागरिकों की आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए उनकी क्षमताओं का समग्र विकास करना है, ताकि वे भारत की विकास यात्रा के सक्रिय साझेदार बन सकें।
- इस कर्तव्य के अंतर्गत शिक्षा, कौशल, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, खेल, पर्यटन और स्वास्थ्य जैसे मानव-केंद्रित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- ‘ऑरेंज इकॉनॉमी’ की संभावनाओं को पहचानते हुए देशभर के विद्यालयों और महाविद्यालयों में AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना का प्रस्ताव युवाओं को डिजिटल और रचनात्मक उद्योगों के लिए तैयार करेगा।
- पर्यटन और सेवा क्षेत्र की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना तथा मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए क्षेत्रीय मेडिकल हब्स का विकास रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ावा देगा।
- खेलों के क्षेत्र में ‘खेलो इंडिया मिशन’ के माध्यम से प्रतिभा पहचान, कोचिंग, खेल विज्ञान और अवसंरचना का एकीकृत विकास किया जाएगा। इसके साथ ही STEM क्षेत्रों में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु प्रत्येक ज़िले में छात्रावास की व्यवस्था कर लैंगिक समानता और समावेशन को मज़बूत किया गया है।
- समग्र रूप से, यह कर्तव्य मानव पूंजी में निवेश को केंद्र में रखता है, जिससे कौशलयुक्त, सशक्त और आकांक्षी भारत के निर्माण की नींव रखी जा सके।
तृतीय कर्तव्य: सबका साथ, सबका विकास
- संघ बजट 2026–27 का तृतीय कर्तव्य ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को साकार करते हुए समावेशी और न्यायसंगत विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुँचे। इस कर्तव्य के अंतर्गत कृषि, ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य, क्षेत्रीय संतुलन और वंचित वर्गों के कल्याण पर विशेष बल दिया गया है।
- कृषि क्षेत्र में ‘भारत-विस्टार’ पहल के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बहुभाषी प्लेटफॉर्म विकसित कर किसानों को फसल, मौसम, बाजार और संसाधनों से जुड़ी वैयक्तिकृत सलाह उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी आय और उत्पादकता में वृद्धि हो सके।
- महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए ‘SHE मार्ट्स’ की स्थापना से ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता और बाज़ार से सीधा जुड़ाव मिलेगा। मानसिक स्वास्थ्य अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए ‘निम्हांस-2’ की स्थापना और क्षेत्रीय संस्थानों का उन्नयन सामाजिक कल्याण की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है।
- क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने हेतु ‘पूर्वोदय’ और उत्तर-पूर्व पर विशेष ध्यान देते हुए बौद्ध सर्किट और ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे प्रकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दिव्यांगजनों के लिए लक्षित सहायता योजनाओं के माध्यम से उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास किया गया है।
- समग्र रूप से, यह कर्तव्य समावेशी विकास की भावना को मजबूत करता है, जिससे आर्थिक प्रगति समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र तक समान रूप से पहुँच सके।
भू–राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और नीतिगत अनिवार्यताएँ
वार्षिक संघ बजट न केवल एक राजकोषीय विवरण होता है, बल्कि अल्पकालिक और मध्यमकालिक आर्थिक चुनौतियों के प्रति सरकार की रणनीतिक प्रतिक्रिया भी दर्शाता है। शीर्ष घोषणाओं से परे, यह आर्थिक नीति की व्यापक दिशा का संकेत देता है विशेष रूप से ऐसे समय में, जब दीर्घकालिक ढाँचे और स्पष्ट लक्ष्यों का अभाव है।
संघ बजट 2026–27 का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह तीव्र होती भू–राजनीतिक अनिश्चितताओं और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र की निरंतर कमजोरियों की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया गया है।
- बजट 2026–27 के आसपास का वैश्विक वातावरण अस्थिरता और स्थापित अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मानदंडों के क्षरण से चिह्नित है।
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद के दूसरे कार्यकाल के दौरान पुनः उभरे तनावों ने वैश्विक व्यापार व्यवस्थाओं को बाधित किया और भारत के बाह्य आर्थिक संबंधों को जटिल बना दिया। - भारत के रूस के साथ रणनीतिक संबंध दबाव में हैं, जबकि श्रम-प्रधान भारतीय निर्यातों पर लगाए गए तीव्र अमेरिकी शुल्कों ने द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार की संभावनाओं को कमजोर किया है।
साथ ही, 2020 के बाद आयात निर्भरता कम करने के प्रयासों के बावजूद चीन से भारत की आयात निर्भरता अब भी काफ़ी अधिक बनी हुई है। - चीन द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों, औद्योगिक मशीनरी और कुशल सेवाओं, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित क्षेत्रों में लगाए गए प्रतिबंधों ने भारत की रणनीतिक कमजोरियों को उजागर किया है।
- इसी पृष्ठभूमि में बजट घरेलू औद्योगिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित करता है।
आयात निर्भरता कम करने, व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर दिया गया जोर आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के बढ़ते समन्वय को दर्शाता है, जिसे आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के इर्द-गिर्द परिभाषित किया गया है।
विनिर्माण में गिरावट और संरचनात्मक कमजोरियाँ
- भारत की हालिया आर्थिक वृद्धि गहरी संरचनात्मक चिंताओं को छिपाए हुए है।
मजबूत GDP वृद्धि के बावजूद अर्थव्यवस्था असमय औद्योगिक क्षरण (Premature Deindustrialisation) का सामना कर रही है। - विनिर्माण का उत्पादन में योगदान या तो स्थिर रहा है या घटा है, जबकि कुल रोजगार की तुलना में विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार में गिरावट आई है।
साथ ही, आधिकारिक विनिर्माण वृद्धि आँकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंताएँ बनी हुई हैं। - वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) से प्राप्त वैकल्पिक आँकड़े कहीं धीमी उत्पादन वृद्धि का संकेत देते हैं, जो अंतर्निहित कमजोरियों की ओर इशारा करते हैं।
- स्थिर पूंजी निवेश, विशेष रूप से अचल पूंजी में कमजोर निवेश, औद्योगिक क्षमता के क्षरण का एक प्रमुख कारण रहा है।
पूंजीगत और मध्यवर्ती वस्तुओं के आयात पर बढ़ती निर्भरता ने घरेलू उत्पादन को और अधिक बाधित किया है। - उलटी शुल्क संरचना (Inverted Duty Structure) जहाँ मध्यवर्ती वस्तुओं पर शुल्क अंतिम उत्पादों से अधिक है ने घरेलू मूल्य संवर्धन को हतोत्साहित किया है।
- ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और उत्पादन-संLinked प्रोत्साहन (PLI) जैसी प्रमुख पहलों के बावजूद, कुछ चुनिंदा असेंबली-आधारित लाभों को छोड़कर इन प्रवृत्तियों को पलटने में सीमित सफलता मिली है।
बजटीय उपाय और उनकी सीमाएँ
लक्षित शुल्क युक्तिकरण (Targeted Tariff Rationalisation)
- संघ बजट 2026–27 इन कमजोरियों को लक्षित शुल्क युक्तिकरण और प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से दूर करने का प्रयास करता है।\
- पूंजीगत और मध्यवर्ती वस्तुओं पर सीमा शुल्क कम करके यह उन विकृतियों को सुधारने का प्रयास करता है, जो घरेलू उत्पादन को हतोत्साहित करती हैं।
- बंदरगाहों पर देरी कम करने और आयात प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उपाय उत्पादन दक्षता और व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार ला सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स पर विशेष ध्यान
- बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स पर विशेष जोर दिया गया है, यह वह क्षेत्र है जिसमें चीन पर निर्भरता सबसे अधिक है।
- खनिज-समृद्ध राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव घरेलू खनन, प्रसंस्करण और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने का प्रयास है।
- लिथियम-आयन बैटरी उत्पादन में प्रयुक्त पूंजीगत वस्तुओं पर कर छूट जारी रखना उभरते उद्योगों के लिए आवश्यक आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन देता है।
श्रम–प्रधान क्षेत्रों पर ध्यान
- बजट श्रम-प्रधान क्षेत्रों को व्यापार एकीकरण और विविधीकरण के प्रमुख इंजन के रूप में प्राथमिकता देता है।
- नए औद्योगिक क्लस्टरों, पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण और पूंजी बाज़ारों तक बेहतर पहुँच के माध्यम से MSMEs को समर्थन उत्पादकता बढ़ा सकता है।
- हालाँकि, पैमाने, कौशल और अवसंरचना में पूरक निवेश के बिना ये उपाय अपर्याप्त सिद्ध हो सकते हैं।
निवेश और राजकोषीय समन्वय में अंतराल
- अपने घोषित उद्देश्यों के बावजूद, बजट उच्च-स्तरीय औद्योगिक प्रौद्योगिकी में भारत की कमी को दूर करने में अपेक्षाकृत सतर्क दिखाई देता है।
उन्नत विनिर्माण क्षमताएँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों और विदेशी पूंजी से गहराई से जुड़ी होती हैं, किंतु हाल के वर्षों में GDP के अनुपात में शुद्ध FDI प्रवाह में तीव्र गिरावट आई है। - बजट इस प्रवृत्ति को उलटने हेतु सीमित प्रोत्साहन प्रदान करता है, जो संभवतः वैश्विक निवेश वातावरण की अनिश्चितताओं को दर्शाता है।
- SEZs में स्थित कंपनियों को घरेलू बाज़ार में आंशिक बिक्री की अनुमति देने का निर्णय प्रतिकूल प्रतीत होता है।
निर्यात-संबंधी बाधाओं को दूर करने के बजाय यह निर्यात उन्मुखता को कमजोर कर सकता है और दीर्घकालिक निर्यात क्षमता को नुकसान पहुँचा सकता है। - एक अन्य उल्लेखनीय कमी केंद्र–राज्य राजकोषीय संबंधों पर चर्चा का अभाव है।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शीघ्र आने वाली हैं, फिर भी राजकोषीय संघवाद और समन्वित सार्वजनिक निवेश जैसे मुद्दे जो अस्थिर वैश्विक वातावरण में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं असुलझे बने हुए हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
संघ बजट 2026–27 भारत के औद्योगिक ठहराव और आयात-आधारित रणनीतिक निर्भरता से निपटने का एक सतर्क लेकिन सोचा–समझा प्रयास प्रस्तुत करता है।
शुल्क सुधार, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और MSME समर्थन पर इसका फोकस संरचनात्मक बाधाओं के प्रति जागरूकता को दर्शाता है।
हालाँकि, इन उपायों की प्रभावशीलता उनके सूक्ष्म डिज़ाइन और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
मजबूत निवेश गति, विदेशी पूंजी प्रवाह के पुनरुद्धार और बेहतर राजकोषीय समन्वय के बिना, भारत के औद्योगिक आधार के रूपांतरण की महत्वाकांक्षा आंशिक रूप से ही साकार हो सकती है।
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