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‘भारत क्यों मायने रखता है’/’Why Bharat Matters’ – डॉ. एस. जयशंकर

पुस्तक Why Bharat Matters (2024) डॉ. एस. जयशंकर द्वारा लिखी गयी है।

डॉ. एस. जयशंकर की किताब ‘Why Bharat Matters’ बताती है कि आज की वैश्विक दुनिया में भारत की अहमियत कितनी बढ़ गई है। यह किताब उनकी पिछली किताब The India Way (2020) का विस्तार है, जिसमें भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।

इस किताब में 11 अध्याय हैं, जिनमें भारत की विदेश नीति, उसकी चुनौतियाँ और अवसरों पर चर्चा की गई है। इसमें यह दिखाया गया है कि भारत कैसे अपने हितों के आधार पर नए समूहों (जैसे QUAD, I2U2, इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर, आदि) से जुड़ रहा है और बहुपक्षीय दुनिया में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

जयशंकर बताते हैं कि केवल विदेश नीति ही काफी नहीं है, बल्कि मज़बूत नेतृत्व भी ज़रूरी है ताकि भारत जटिल वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक बदलावों का सामना कर सके। किताब में भारत को पहला मददगार देश, विकास साझेदार, और सांस्कृतिक शक्ति के रूप में भी दिखाया गया है।

लेखक ने महाकाव्यों (रामायण, महाभारत) और कौटिल्य के अर्थशास्त्र से उदाहरण लेकर यह बताया है कि भारत की परंपरागत सोच आज की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी कितनी उपयोगी है।

यह किताब पश्चिमी सोच पर आधारित विश्लेषणों को चुनौती देती है और एक भारतीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसमें भारत को ‘विश्वमित्र’ (दुनिया का मित्र) और विकसित एवं विकासशील देशों के बीच सेतु के रूप में दिखाया गया है।

किताब की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है क्योंकि इसमें कोविड-19 महामारी, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष जैसे मुद्दों के बीच भारत की भूमिका का मूल्यांकन किया गया है। लेखक बताते हैं कि भारत अब ‘ग़ैर-गुटनिरपेक्ष’ (non-alignment) से ‘बहु-गुट सहयोग’ (multi-alignment) की ओर बढ़ा है।

हालाँकि, किताब में कुछ सीमाएँ भी हैं। इसमें बहुत ज़्यादा राष्ट्रवादी दृष्टिकोण अपनाया गया है और भारत की आंतरिक चुनौतियों (जैसे दक्षिण एशिया में छोटे पड़ोसी देशों के साथ संबंध, घरेलू राजनीतिक व सामाजिक समस्याएँ) पर कम ध्यान दिया गया है।

फिर भी, यह किताब भारत की विदेश नीति और बदलती वैश्विक राजनीति को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है। यह न सिर्फ विद्वानों के लिए, बल्कि भारत की कूटनीति और वैश्विक राजनीति में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए उपयोगी है।

भारत के महत्व बढ़ने के कारण (Causes)

भारत का वैश्विक महत्व कई वजहों से तेज़ी से बढ़ रहा है। सबसे बड़ा कारण उसकी भौगोलिक स्थिति है। भारत हिंद महासागर के बीचोंबीच स्थित है, जहाँ से एशिया, यूरोप और अफ्रीका आपस में जुड़ते हैं। यही कारण है कि भारत दुनिया की व्यापारिक, रणनीतिक और सुरक्षा नीतियों में एक अहम भूमिका निभाता है।

इसके अलावा, भारत की अर्थव्यवस्था भी बहुत तेज़ गति से बढ़ रही है और आज वह दुनिया की सबसे मज़बूत अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है। स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, ऊर्जा के नए स्रोत और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत का योगदान उसकी स्थिति को और मज़बूत बनाता है।

भारत की युवा आबादी भी एक बड़ा कारण है। जनसंख्या का बड़ा हिस्सा युवाओं का होने से भारत के पास न केवल मज़दूर शक्ति है बल्कि एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार भी है, जिससे विदेशी कंपनियों और देशों की नज़र भारत पर रहती है।

साथ ही, कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ जैसी योजनाओं से दुनिया को टीके उपलब्ध कराए और विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित लाने के लिए कई ऑपरेशन्स (गंगा, कावेरी, देवी शक्ति) चलाए।

इन प्रयासों ने भारत की छवि एक जिम्मेदार और भरोसेमंद देश के रूप में स्थापित की। इसके साथ ही, जब अमेरिका और चीन जैसे महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे संकट आए, तब दुनिया बहुध्रुवीय (Multipolar) होने लगी। इस नए माहौल में भारत एक ऐसा देश बनकर उभरा जो कई शक्तियों के बीच संतुलन बनाता है और अपनी स्वतंत्र नीति पर चलता है।

भारत की विदेश नीति को प्रभावित करने वाले कारक (Factors)

भारत की विदेश नीति कई महत्वपूर्ण कारकों से प्रभावित होती है। सबसे पहला और अहम कारक है चीन का उदय। भारत और चीन के बीच सीमाई विवाद और एशिया में शक्ति संतुलन का सवाल हमेशा विदेश नीति का बड़ा हिस्सा रहा है। चीन की आक्रामक नीतियों के जवाब में भारत ने QUAD और I2U2 जैसे नए गठबंधनों में अपनी सक्रियता बढ़ाई है।

दूसरा बड़ा कारक है तकनीकी और डिजिटल युग, आज के समय में डेटा सुरक्षा, साइबर अपराध, 5G नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी चुनौतियाँ हर देश की विदेश नीति का हिस्सा बन चुकी हैं। भारत भी आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) की ओर बढ़ते हुए इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहता है।

ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन भी अहम भूमिका निभाते हैं। भारत सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन में दुनिया को नेतृत्व दे रहा है और ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ जैसे मंचों से जलवायु संकट से निपटने की कोशिश कर रहा है।

चौथा अहम कारक है नेतृत्व, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व शैली और विदेश मंत्री जयशंकर का व्यावहारिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण विदेश नीति को नए आयाम देते हैं। एक और कारक है पश्चिमी देशों का प्रभुत्व। पश्चिमी शक्तियाँ लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हावी रही हैं, लेकिन अब भारत एक नई ‘डिकॉलोनाइज़्ड’ सोच के साथ सामने आता है और पश्चिम-केंद्रित विश्व दृष्टिकोण को चुनौती देता है।

बदलते हालात के परिवर्तनशील तत्व (Variables)

भारत की भूमिका और विदेश नीति समय-समय पर कई परिवर्तनशील तत्वों से प्रभावित होती रहती है। सबसे बड़ा तत्व है वैश्विक संकट। कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की अस्थिरता और इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष जैसे संकटों में भारत ने अपने दृष्टिकोण और नीतियों को बदलते हालात के अनुसार ढाला। इन संकटों ने भारत को और अधिक सक्रिय और लचीला बनने के लिए प्रेरित किया।

दूसरा बड़ा परिवर्तनशील तत्व है भारत की आंतरिक स्थिति। घरेलू राजनीति, सामाजिक एकता, और आर्थिक मजबूती सीधे विदेश नीति को प्रभावित करती है। पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ रिश्तों का भारत की वैश्विक छवि पर असर पड़ता है।

तीसरा परिवर्तनशील तत्व है नई साझेदारियाँ। भारत अब केवल गुटनिरपेक्ष नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि QUAD, I2U2 और India-Middle East-Europe Economic Corridor जैसे मंचों में सक्रिय होकर बहु-गुट सहयोग की राह पर है।

चौथा परिवर्तनशील तत्व है वैश्विक आपूर्ति शृंखला। कोरोना के बाद दुनिया ने ‘चीन-प्लस-वन’ रणनीति अपनाई, यानी चीन के विकल्प के रूप में दूसरे देशों की तलाश। इस माहौल में भारत को तकनीक, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर मिला।

निष्कर्ष (Conclusion)

कुल मिलाकर, डॉ. जयशंकर बताते हैं कि भारत की बढ़ती ताक़त का कारण उसकी भौगोलिक स्थिति, आर्थिक विकास, जनसंख्या, और संकटों में जिम्मेदार भूमिका है। विदेश नीति को चीन, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु और नेतृत्व जैसे कारक प्रभावित करते हैं, जबकि वैश्विक संकट, घरेलू राजनीति, नई साझेदारियाँ और सप्लाई चेन जैसे तत्व उसकी नीतियों को बदलते रहते हैं। यही वजह है कि भारत आज ‘विश्वमित्र’ (Vishwamitra) बनकर न केवल अपने बल्कि दुनिया के हितों की रक्षा करने की क्षमता दिखा रहा है।


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