लोक प्रशासन (Public Administration) मूल रूप से शासन की कार्यप्रणाली का अध्ययन है यह समझने की प्रक्रिया है कि सरकारें कैसे काम करती हैं, निर्णय कैसे लिए जाते हैं और नागरिकों तक नीतियाँ कैसे पहुँचती हैं।
लोक प्रशासन के विकास के चरण (Stages of Development of Public Administration)
| क्रमांक | काल / चरण | प्रमुख विद्वान / आंदोलन | मुख्य विशेषताएँ | संक्षिप्त व्याख्या |
| 1 | राजनीति–प्रधान चरण (Political Dominance Stage) 1887 – 1926 | वुडरो विल्सन, फ्रैंक गुडनो | लोक प्रशासन को राजनीति से अलग अध्ययन करने का प्रयास | वुडरो विल्सन के निबंध “The Study of Administration” (1887) ने इसे एक अलग अनुशासन के रूप में स्थापित किया। इस चरण में यह माना गया कि राजनीति और प्रशासन दो अलग क्षेत्र हैं। |
| 2 | प्रबंधन–प्रधान चरण (Scientific Management Stage) 1927 – 1937 | एफ.डब्ल्यू. टेलर, हेनरी फेयोल, गुलिक और उर्विक | वैज्ञानिक प्रबंधन सिद्धांतों का प्रयोग | इस चरण में दक्षता (Efficiency), श्रम विभाजन, नियंत्रण, और संगठनात्मक संरचना पर ज़ोर दिया गया। POSDCORB मॉडल (Planning, Organizing, Staffing, Directing, Coordinating, Reporting, Budgeting) का विकास हुआ। |
| 3 | व्यवहारवादी चरण (Behavioural Stage) 1938 – 1950 के दशक तक | हर्बर्ट साइमन, चेस्टर बर्नार्ड, ड्वाइट वाल्डो | मानव व्यवहार, प्रेरणा और निर्णय निर्माण पर ज़ोर | इस चरण में यह माना गया कि प्रशासन केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि मानव व्यवहार को समझने की प्रक्रिया भी है। निर्णय सिद्धांत (Decision Theory) और प्रेरणा सिद्धांतों का विकास हुआ। |
| 4 | तुलनात्मक और विकासशील चरण (Comparative & Development Administration Stage) 1950 के बाद | फ्रेड रिग्स, फेरेल हेडी, ड्वाइट वाल्डो | विभिन्न देशों के प्रशासन की तुलना, विकासशील देशों की समस्याओं पर ध्यान | इस चरण में प्रशासन का वैश्विक अध्ययन शुरू हुआ। तुलनात्मक लोक प्रशासन और विकास प्रशासन के सिद्धांत विकसित हुए। |
| 5 | नव–लोक प्रशासन चरण (New Public Administration) 1968 – 1980 | ड्वाइट वाल्डो, मिनेब्रुक सम्मेलन | “मानव कल्याण” और “सामाजिक न्याय” पर बल | प्रशासन को केवल दक्षता तक सीमित न रखकर, समानता और उत्तरदायित्व का साधन माना गया। |
| 6 | नव–लोक प्रबंधन और शासन चरण (New Public Management & Governance Stage) 1980 से वर्तमान तक | क्रिस्टोफर हूड, डेविड ऑस्बोर्न | निजी क्षेत्र की तकनीकों का प्रयोग, नागरिक-केंद्रित प्रशासन | “अच्छा शासन” (Good Governance), “ई-गवर्नेंस” और “नागरिक भागीदारी” इस चरण की प्रमुख विशेषताएँ हैं। |
द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के बाद, जब विश्व के कई देशों में राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक विकास के नए चरण शुरू हुए, तब यह समझ आवश्यक हो गई कि “क्या सभी देशों के प्रशासन एक ही तरीके से काम करते हैं, या उनकी भिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियाँ प्रशासन को अलग रूप देती हैं?”
यहीं से “तुलनात्मक लोक प्रशासन (Comparative Public Administration)” की अवधारणा जन्मी।
इस क्षेत्र का उद्देश्य है विभिन्न देशों की प्रशासनिक प्रणालियों की तुलना करके सिद्धांतों को अधिक वैज्ञानिक, सार्वभौमिक और व्यावहारिक बनाना।
तुलनात्मक लोक प्रशासन का आशय है; “विभिन्न देशों और संस्कृतियों में प्रशासनिक प्रणालियों, प्रक्रियाओं, संरचनाओं और व्यवहारों की तुलना के माध्यम से उनका अध्ययन।”
यह केवल यह नहीं देखता कि कौन-सी नीति सफल रही, बल्कि यह समझने का प्रयास करता है कि किस कारण से, किस राजनीतिक–सांस्कृतिक परिस्थिति में, कोई नीति या प्रशासनिक ढाँचा प्रभावी या अप्रभावी हुआ।
लिंटन कैल्डवेल ने कहा: “तुलनात्मक लोक प्रशासन का उद्देश्य है प्रशासनिक व्यवहार के अध्ययन के लिए एक सार्वभौमिक सिद्धांत का निर्माण करना।”
रॉबर्ट जैक्सन ने इसे “विभिन्न संस्कृतियों में प्रशासनिक ढाँचे और प्रक्रियाओं की कठोर तुलना” कहा है।
इससे यह स्पष्ट है कि यह केवल सिद्धांत नहीं बल्कि अनुभव और वास्तविकता पर आधारित अध्ययन है।
उद्भव की पृष्ठभूमि (Background of Emergence)
1940–1950 के दशक में अधिकांश अनुसंधान अमेरिकी प्रशासनिक प्रणाली पर केंद्रित थे।
वे मानते थे कि जो अमेरिका में काम करता है, वह अन्य देशों में भी उपयोगी होगा।
लेकिन जब अमेरिकी विद्वान (जैसे कि Fred Riggs, Ferrel Heady) तीसरी दुनिया (Asia, Africa, Latin America) में तकनीकी मिशनों पर गए, तो उन्हें पता चला कि “अमेरिकी प्रशासनिक सिद्धांत विकासशील देशों में लागू नहीं होते, क्योंकि वहाँ की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ अलग हैं।”
इस अनुभव ने तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता पैदा की।
इसी अवधि में 1960 में ASPA (American Society for Public Administration) के अंतर्गत Comparative Administration Group (CAG) की स्थापना की गई।
CAG (Comparative Administration Group) का गठन और योगदान
CAG ने तुलनात्मक लोक प्रशासन को एक संगठित दिशा दी।
इसके प्रमुख सदस्य थे Fred Riggs, Ferrel Heady, Dwight Waldo, Alfred Diamant, Ralph Braibanti आदि।
CAG के प्रमुख उद्देश्य:
- तुलनात्मक लोक प्रशासन में अनुसंधान को बढ़ावा देना
- इस विषय का शिक्षण विकसित करना
- विकासशील देशों की नीतियों को वैज्ञानिक दृष्टि से सुधारना
1962 में Ford Foundation से आर्थिक सहायता मिलने के बाद CAG के कार्यों में गति आई।
Fred Riggs ने 10 वर्षों (1960–1970) तक इसके अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रिग्स ने कहा:
“CAG के विद्वान तीसरी दुनिया के उन देशों में कार्यरत थे जहाँ उन्होंने देखा कि अमेरिकी सिद्धांत वहाँ सीमित रूप से ही उपयोगी हैं; इसलिए सिद्धांतों में सुधार आवश्यक है।”
तुलनात्मक लोक प्रशासन के उद्देश्य (Purposes and Aims)
फेरेल हेडी और फ्रेड रिग्स दोनों ने इसके उद्देश्य इस प्रकार बताए:
- सिद्धांत निर्माण:
प्रशासन को केवल अनुभवजन्य नहीं बल्कि सैद्धांतिक रूप से समझना। - विविधता की व्याख्या:
यह समझना कि क्यों एक ही नीति विभिन्न देशों में अलग परिणाम देती है। - सफलता और विफलता के कारण:
प्रशासनिक असफलता के सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय कारणों की पहचान करना। - प्रशासनिक सुधार:
विभिन्न देशों में सुधार के लिए रणनीतियाँ विकसित करना।
उदय के कारण (Factors behind Growth)
- पारंपरिक लोक प्रशासन से असंतोष
- नई स्वतंत्र राष्ट्रों की प्रशासनिक समस्याएँ
- अमेरिकी विद्वानों का विकासशील देशों से परिचय
- वैज्ञानिक अनुसंधान में रुचि
- विश्व स्तर पर पारस्परिक सहयोग की आवश्यकता
- नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में सुधार की खोज
- तकनीकी व सामाजिक परिवर्तन
प्रमुख प्रवृत्तियाँ (Major Trends)
F.W. Riggs ने तुलनात्मक लोक प्रशासन में तीन प्रमुख बदलाव बताए:
| पुराना दृष्टिकोण | नया दृष्टिकोण |
| मानक अध्ययन (Normative) — “क्या होना चाहिए” | अनुभवजन्य अध्ययन (Empirical) — “वास्तव में क्या है” |
| देश विशेष (Ideographic) | सार्वभौमिक (Nomothetic) |
| गैर-पर्यावरणीय (Non-ecological) | पर्यावरणीय (Ecological) |
इस प्रकार तुलनात्मक लोक प्रशासन: “वैज्ञानिक, पर्यावरण-आधारित और सार्वभौमिक दृष्टिकोण वाला प्रशासनिक अध्ययन” बन गया।
प्रमुख दृष्टिकोण (Approaches / Models)
- नौकरशाही प्रणाली दृष्टिकोण (Bureaucratic System Approach):
- मैक्स वेबर द्वारा प्रतिपादित ‘आदर्श प्रकार’ मॉडल।
- यह सबसे प्रभावशाली दृष्टिकोण माना गया।
- सामान्य प्रणाली दृष्टिकोण (General Systems Approach):
- F.W. Riggs का “Fused–Prismatic–Diffracted” मॉडल, जिसमें समाज के विकास स्तर और प्रशासनिक रूप का संबंध दिखाया गया।
- विकास प्रशासन दृष्टिकोण (Development Administration):
- प्रशासन को सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के साधन के रूप में देखा गया।
- निर्णय–निर्माण दृष्टिकोण (Decision-making Approach):
- निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने पर बल दिया गया।
- संरचनात्मक–कार्यात्मक दृष्टिकोण (Structural–Functional Approach):
- टैलकॉट पार्सन्स के “Social System” सिद्धांत पर आधारित।
पतन (Decline)
1970 के दशक में इस क्षेत्र की गति धीमी पड़ी।
- 1971: फोर्ड फाउंडेशन ने सहायता बंद कर दी
- 1973: CAG भंग कर SICA में मिला दिया गया
- 1974: Journal of Comparative Administration का प्रकाशन बंद
इस गिरावट के दो मुख्य कारण थे:
- अत्यधिक सैद्धांतिक आकांक्षाएँ — “एक सार्वभौमिक सिद्धांत” की खोज असंभव सिद्ध हुई।
- शोध और व्यवहार के बीच दूरी बढ़ गई।
योगदान और महत्व (Contributions and Significance)
रमेश के. अरोड़ा और टी.एन. चतुर्वेदी के अनुसार:
- लोक प्रशासन के अध्ययन का दायरा व्यापक हुआ।
- प्रशासन और राजनीति के बीच संबंध मज़बूत हुआ।
- सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में वैज्ञानिकता आई।
- क्षेत्रीयता और संकीर्णता कम हुई।
- विभिन्न देशों की नीतियों के तुलनात्मक अध्ययन से नीतिगत सुधार संभव हुए।
इस प्रकार तुलनात्मक लोक प्रशासन ने लोक प्रशासन को एक वैश्विक अनुशासन के रूप में विकसित किया।
पुनरुद्धार आंदोलन (Revival Movement)
1980 के दशक में फेरेल हेडी, चार्ल्स गुडसेल, जोंग एस. जून, ओ.पी. द्विवेदी आदि ने पुनः इस क्षेत्र को सक्रिय किया।
उनका उद्देश्य था — तुलनात्मक लोक प्रशासन को केवल विकासशील देशों तक सीमित न रखकर, इसे अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तरों (supra-national और sub-national) पर भी लागू करना।
हेडी का कथन: “अब समय है कि हम अतीत के मूल्यांकन से आगे बढ़ें और नए अवसरों को अपनाएँ।”
भविष्य की संभावनाएँ (Future Prospects)
आज के वैश्वीकरण और सूचना-प्रौद्योगिकी के युग में तुलनात्मक लोक प्रशासन की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
अब इसका अध्ययन निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जा सकता है:
- मानवाधिकार प्रवर्तन
- सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण
- नौकरशाही की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी
- नागरिक चार्टर और पारदर्शिता
- प्रशासनिक सुधारों में जनसहभागिता
- निजी और गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका
- ई-गवर्नेंस और डिजिटलीकरण
- आत्म-सहायता समूहों और सामुदायिक संगठनों की भूमिका
निष्कर्ष (Conclusion)
तुलनात्मक लोक प्रशासन ने लोक प्रशासन को “राष्ट्रीय सीमाओं से ऊपर उठाकर वैश्विक दृष्टिकोण” दिया है।
इसने दिखाया कि “प्रशासन किसी एक देश का विषय नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक मानवीय क्रिया है,
जो संस्कृति, राजनीति और समाज के अनुसार रूप लेती है।”
इसने यह भी सिखाया कि प्रशासन को समझने के लिए हमें अपने देश के अनुभवों से आगे जाकर अन्य देशों की प्रणालियों से सीखना चाहिए।
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