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भारत-इथोपिया संबंधों का नया दौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इथियोपिया दौरे ने भारत-इथियोपिया संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। दिसंबर 2025 में संपन्न इस दो दिवसीय यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा प्रदान कर दिया, जो द्विपक्षीय सहयोग के नए द्वार खोलता है। यह दौरा न केवल आर्थिक और व्यापारिक बंधनों को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ की एकजुटता को भी रेखांकित करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और इथियोपिया के संबंध प्राचीन काल से गहरे हैं। प्राचीन ग्रंथों में इथियोपिया को ‘कुष’ या ‘हब्शा’ के रूप में उल्लेखित किया गया है, जो व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है। स्वतंत्रता के बाद 1948 में दोनों देशों ने राजनयिक संबंध स्थापित किए। नेहरू युग में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के तहत इथियोपिया भारत का प्रमुख सहयोगी रहा। 1960 के दशक में इथियोपिया के सम्राट हिले सेलासी की भारत यात्रा ने इन बंधनों को मजबूत किया।

आजादी के बाद भारत ने इथियोपिया को कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में सहायता प्रदान की। भारतीय कंपनियों ने इथियोपिया की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया, विशेष रूप से चमड़ा उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास में। 21वीं सदी में ये संबंध और गहन हुए, जब इथियोपिया अफ्रीकी संघ का प्रमुख सदस्य बन गया। भारत ने इथियोपिया को अफ्रीकी संघ की G20 सदस्यता का समर्थन दिया, जो वैश्विक लोकतंत्र को मजबूत करने का प्रयास है।

इथियोपिया देश के बारे में:

इथियोपिया अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी भाग में स्थित है और यह हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र का एक प्रमुख देश है।

यह एक स्थल-रुद्ध देश है, अर्थात इसकी कोई समुद्री सीमा नहीं है; पहले यह एरिट्रिया के माध्यम से लाल सागर तक पहुँच रखता था।

इथियोपिया की सीमाएँ एरिट्रिया, जिबूती, सोमालिया, केन्या, दक्षिण सूडान और सूडान से मिलती हैं।

ग्रेट रिफ्ट वैली इथियोपिया के मध्य भाग से होकर गुजरती है, जो इसे भूकंपीय और ज्वालामुखीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।

इथियोपिया की औसत ऊँचाई अधिक होने के कारण इसे अक्सर “अफ्रीका की छत” कहा जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी का इथियोपिया दौरा

प्रधानमंत्री मोदी का इथियोपिया दौरा भारत के अफ्रीका के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 15 दिसंबर 2025 को अदीस अबाबा पहुंचते ही इथियोपियाई प्रधानमंत्री आबी अहमद ने उन्हें हवाई अड्डे पर विशेष रूप से स्वागत किया। यह दुर्लभ सम्मान द्विपक्षीय मैत्री का सूचक था। पीएम मोदी ने इथियोपियाई संसद को संबोधित किया, जहां उन्हें खड़े होकर तालियां मिलीं।

दौरे के दौरान द्विपक्षीय वार्ताएं हुईं, जिनमें आठ प्रमुख क्षेत्रों पर समझौते हुए। पीएम मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान’ प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उनके नेतृत्व और भारत की वैश्विक भूमिका की मान्यता है। दौरा भारत-अफ्रीका संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।द्विपक्षीय वार्ताओं का विवरणपीएम मोदी और आबी अहमद के बीच विस्तृत चर्चाएं हुईं। दोनों नेताओं ने रणनीतिक रोडमैप तैयार किया, जिसमें व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल हैं। भारतीय कंपनियों ने इथियोपिया में 5 अरब डॉलर से अधिक निवेश किया है, जिससे 75,000 से ज्यादा नौकरियां सृजित हुई हैं। डेट (Debt) रिस्ट्रक्चरिंग पर MoU पर हस्ताक्षर हुए, जो इथियोपिया की आर्थिक चुनौतियों का समाधान प्रदान करेगा।

द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आयाम

  • आर्थिक और व्यापारिक सहयोग :भारत इथियोपिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दौरे के दौरान व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। प्रमुख क्षेत्रों में फार्मास्यूटिकल्स, चाय निर्यात, टेक्सटाइल और आईटी शामिल हैं। भारत ने इथियोपिया को छात्रवृत्तियां दोगुनी करने का वादा किया। एआई क्षमता निर्माण और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने पर सहमति बनी।इथियोपिया की खाद्य सुरक्षा के लिए भारत ने कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का प्रस्ताव रखा। भारतीय फर्मों ने इथियोपिया में सड़कें, बांध और रेलवे परियोजनाएं पूरी की हैं। यह सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगा।
  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग: क्षेत्रीय शांति के लिए भारत-इथियोपिया प्राकृतिक साझेदार हैं। दौरे में आतंकवाद विरोधी सहयोग पर जोर दिया गया। भारत ने इथियोपिया को साइबर सुरक्षा और खुफिया साझा करने की पेशकश की। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए संयुक्त अभ्यास की योजना बनी।इथियोपिया की BRICS अध्यक्षता के दौरान भारत का समर्थन महत्वपूर्ण रहेगा। दोनों देश सोमालिया और सूडान जैसे मुद्दों पर समन्वय बनाए रखेंगे।
  • सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान : भारत में 1000 से अधिक इथियोपियाई छात्र अध्ययनरत हैं। दौरे में छात्रवृत्तियों का विस्तार और आईआईटी जैसे संस्थानों में प्रवेश आसान करने का निर्णय हुआ। योग दिवस और गांधी जयंती जैसे कार्यक्रम इथियोपिया में लोकप्रिय हैं। सांस्कृतिक केंद्र स्थापना पर चर्चा हुई।

वैश्विक निहितार्थ

  • ग्लोबल साउथ की मजबूती: पीएम मोदी का दौरा ग्लोबल साउथ की एकजुटता को दर्शाता है। भारत ने अफ्रीकी संघ को G20 में स्थायी सदस्यता दिलाई। इथियोपिया BRICS का नया सदस्य है, और 2026 में भारत की अध्यक्षता से पहले यह साझेदारी रणनीतिक है। दोनों देश जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और बहुपक्षीयता पर एकजुट हैं।इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर में इथियोपिया की भागीदारी बढ़ेगी। यह सहयोग अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा में वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत करता है।
  • BRICS और बहुपक्षीय मंच : इथियोपिया की BRICS अध्यक्षता भारत के लिए अवसर है। दौरे में BRICS विस्तार और सुधार पर चर्चा हुई। भारत-अफ्रीका फोरम समिट को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव रखा गया। यह वैश्विक शासन में विकासशील देशों की आवाज मजबूत करेगा।

भविष्य की संभावनाएं

भारत-इथियोपिया संबंधों का नया दौर स्थिरता और समृद्धि का वाहक बनेगा। अगले पांच वर्षों में व्यापार 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। संयुक्त परियोजनाएं अफ्रीकी महाद्वीप में भारत की उपस्थिति बढ़ाएंगी। दोनों देशों के युवा पीढ़ी के नेतृत्व में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों को छुएगी।

पीएम मोदी के दौरे ने साबित किया कि भारत अफ्रीका का सच्चा मित्र है। यह संबंध केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और विकास का आधार हैं। आने वाले समय में ये बंधन और मजबूत होंगे, जो ग्लोबल साउथ को नई दिशा देंगे।


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