इस लेख में भारत और पश्चिम एशिया (West Asia) के बीच बदलते कूटनीतिक समीकरणों को समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे भारत ने अपने पारंपरिक तेल और प्रवासी आधारित संबंधों से आगे बढ़कर अब एक बहु-आयामी रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) का निर्माण किया है, जो ऊर्जा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, संस्कृति और कूटनीति के विभिन्न स्तंभों पर आधारित है।
भारत–पश्चिम एशिया रणनीतिक पुनर्संरेखन (Strategic Reset)
भारत की पश्चिम एशिया नीति अब ‘आर्थिक संकीर्णता’ से आगे बढ़कर एक ‘सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में विकसित हुई है। अब यह केवल तेल, गैस और प्रवासी भारतीयों तक सीमित नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, डिजिटल वित्तीय जुड़ाव, और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन तक विस्तृत है।
प्रधानमंत्री की निरंतर उच्चस्तरीय यात्राओं और द्विपक्षीय बैठकों ने भारत को इस क्षेत्र में एक ‘स्थिरता प्रदाता’ (Stabilising Force) के रूप में स्थापित किया है। भारत ने संतुलित कूटनीति के माध्यम से सऊदी अरब, यूएई, इज़राइल और ईरान सभी के साथ समानांतर और स्वतंत्र संबंध बनाए रखे हैं।
भारत–पश्चिम एशिया संबंधों में प्रमुख उपलब्धियाँ
- रणनीतिक डि–हाइफनेशन (Strategic De-hyphenation)
भारत अब एक साथ अरब देशों (जैसे यूएई, सऊदी अरब) और इज़राइल–ईरान से जुड़ाव रखता है।
- उदाहरण: इज़राइल–हमास युद्ध के दौरान भारत ने आतंकवाद विरोधी रुख के साथ-साथ फिलिस्तीन को मानवीय सहायता भी दी, जिससे उसका संतुलित दृष्टिकोण स्पष्ट हुआ।
- अप्रैल 2025 में भारत–सऊदी रणनीतिक साझेदारी परिषद की दूसरी बैठक से रक्षा और सुरक्षा सहयोग और मजबूत हुआ।
- संस्थागत आर्थिक एकीकरण (Institutional Economic Integration)
भारत अब केवल तेल खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
- CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreements) के माध्यम से भारत–यूएई व्यापार 2021 के $50 अरब से बढ़कर 2024 में $85 अरब हो गया।
- दिसंबर 2025 में भारत–ओमान मुक्त व्यापार समझौते की कैबिनेट मंज़ूरी एक नया मील का पत्थर है।
- ऊर्जा सुरक्षा 2.0 – हाइड्रोकार्बन से ग्रीन हाइड्रोजन तक
भारत अब पारंपरिक तेल निर्भरता से आगे बढ़कर ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग कर रहा है।
- फरवरी 2024 में भारत–कतर के बीच $78 अरब का दीर्घकालिक LNG समझौता (2048 तक) हुआ।
- यूएई और सऊदी अरब के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और बिजली ग्रिड जोड़ने के समझौते भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति को मजबूत करते हैं।
- रणनीतिक संपर्क (Connectivity) – IMEC और चाबहार
भारत, पाकिस्तान को बाईपास करते हुए और चीन की BRI का संतुलन बनाते हुए वैकल्पिक व्यापार गलियारों का निर्माण कर रहा है।
- मई 2024 में भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह (शहीद बेहेश्ती टर्मिनल) के संचालन के लिए 10 वर्षीय अनुबंध किया।
- भारत $120 मिलियन का उपकरण निवेश और $250 मिलियन की क्रेडिट लाइन देगा।
International North-South Transport Corridor – INSTC
- भारत, ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारी निवेश कर रहा है, जो मध्य एशिया और रूस तक पहुंच के लिए रणनीतिक द्वार है।
- मई 2024 में भारत ने चाबहार बंदरगाह के 10-वर्षीय संचालन समझौते पर हस्ताक्षर किए।
India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC)
- 2023 के G20 शिखर सम्मेलन में घोषित यह परियोजना भारत को UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इज़राइल और यूरोप से जोड़ती है।
- यह चीन की Belt and Road Initiative (BRI) का संतुलन मानी जा रही है।
Ashgabat Agreement
- भारत ने 2018 में इस बहुपक्षीय ट्रांजिट समझौते में प्रवेश किया, जिससे फारस की खाड़ी और मध्य एशिया के साथ संपर्क विकल्प विस्तारित हुए।
- रक्षा ‘मिनिलेटरिज्म’ और सुरक्षा सहयोग
भारत अब ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में उभर रहा है।
- Exercise Desert Flag-10 (यूएई, 2025) और Exercise Cyclone (मिस्र) में भागीदारी से यह प्रदर्शित हुआ।
- ब्रह्मोस और पिनाका जैसे हथियारों की बिक्री पर बातचीत भारत की रक्षा निर्यात क्षमताओं को दर्शाती है।
- फिनटेक कूटनीति और सॉफ्ट पावर
भारत ने अपने Digital Public Infrastructure को पश्चिम एशिया से जोड़ना शुरू किया है।
- UPI अब यूएई और क़तर में चालू है, जिससे प्रवासी भारतीयों को तुरंत भुगतान की सुविधा मिल रही है।
- अबू धाबी में BAPS हिंदू मंदिर का उद्घाटन भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर का प्रतीक है।
I2U2 और खाद्य सुरक्षा गलियारा
भारत, इज़राइल, यूएई और अमेरिका के I2U2 समूह ने खाद्य सुरक्षा हेतु संयुक्त निवेश किया है।
- यूएई ने भारत में ‘फूड पार्क्स’ विकसित करने हेतु $2 अरब निवेश की घोषणा की, जिससे ‘फूड–फॉ–एनर्जी’ मॉडल बना।
- Look West Policy” (2005)/ पश्चिम की ओर दृष्टि नीति
भारत ने 2005 में Look West Policy को अपनाया, ताकि ऐतिहासिक-सांस्कृतिक जुड़ाव को आधुनिक आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग में परिवर्तित किया जा सके।
- इसका उद्देश्य केवल साझा अतीत तक सीमित रहना नहीं, बल्कि साझा चुनौतियों और साझा भविष्य पर आधारित संबंध विकसित करना था।
- यह नीति GCC (Gulf Cooperation Council) की Look East Policy के पूरक रूप में कार्य करती है, जिससे भारत और खाड़ी देशों के बीच द्विपक्षीय समझ मजबूत हुई।
भारत–पश्चिम एशिया संबंधों की चुनौतियाँ
- रणनीतिक तटस्थता पर तनाव: गाज़ा संघर्ष में भारत का तटस्थ रुख ‘अरब स्ट्रीट’ को नाखुश करता है।
- अमेरिकी प्रतिबंध और चाबहार दुविधा: अमेरिका की नीति अस्थिरता निवेश को प्रभावित करती है।
- OIC की आलोचना: कश्मीर मुद्दे पर OIC के विरोध से भारत को बार-बार कूटनीतिक पूंजी खर्च करनी पड़ती है।
- व्यापार असंतुलन: तेल पर निर्भरता के कारण व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है।
- श्रमिक अधिकार: ‘कफाला’ प्रणाली के कारण भारतीय कामगारों के शोषण के उदाहरण (जैसे कुवैत मंगाफ आग, 2024) सामने आते हैं।
- रेड सी सुरक्षा संकट: हूती हमलों के कारण भारत को अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ानी पड़ी है।
- चीन का बढ़ता प्रभाव: सऊदी–ईरान मध्यस्थता में चीन की भूमिका से भारत की कूटनीतिक जगह सीमित हो रही है।
भारत को अपनाने योग्य रणनीतियाँ
- 2+2 संवाद तंत्र का संस्थानीकरण: सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के साथ रक्षा–विदेश मंत्रालय स्तर पर नियमित संवाद शुरू करना।
- IMEC के ‘पूर्वी गलियारे’ पर ध्यान: भारत–अरब खंड को प्राथमिकता देकर व्यावहारिक परियोजनाओं पर फोकस करना चाहिए।
- ग्रीन एनर्जी इंटरडिपेंडेंस: ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में संयुक्त निवेश करना चाहिए।
- ‘मैनपावर’ से ‘ह्यूमन कैपिटल’ की ओर: कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन सामंजस्य द्वारा उच्च मूल्य रोजगार पर कार्य करना चाहिए।
- फिनटेक एकीकरण: UPI को सऊदी के SADAD जैसी प्रणालियों से जोड़ना चाहिए।
- रक्षा समाधान प्रदाता के रूप में भूमिका: संयुक्त रक्षा निर्माण और मरम्मत केंद्र स्थापित करना।
- स्पेस और साइबर कूटनीति: ISRO की क्षमताओं का उपयोग करते हुए संयुक्त अंतरिक्ष मिशनों और साइबर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत।
निष्कर्ष
भारत की पश्चिम एशिया नीति अब ‘तेल और प्रवासी’ के लेन-देन से आगे बढ़कर एक सर्वसमावेशी रणनीतिक साझेदारी में बदल गई है। यह न केवल भारत के $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को गति देगी, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) में स्थिरता का स्तंभ भी बनेगी। भारत की ‘संतुलित कूटनीति’ ने उसे एक विश्वसनीय, बहु-ध्रुवीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।
Discover more from Politics by RK: Ultimate Polity Guide for UPSC and Civil Services
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


