भारत ने जैव विविधता संरक्षण (CBD) पर अपनी 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
इसमें भारत की जैव विविधता संरक्षण में प्रगति का मूल्यांकन किया गया है।
- रिपोर्ट में 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य (NBTs) और 142 संकेतकों का आकलन किया गया।
- ये लक्ष्य Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework (KMGBF) के अनुरूप हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार 23 में से केवल 2 लक्ष्य ही सही दिशा में हैं।
रिपोर्ट किसने तैयार की?
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) नें 33 केंद्रीय मंत्रालय, Wildlife Institute of India, National Biodiversity Authority, और UNDP (तकनीकी सहायता) के सहयोग से यह रिपोर्ट तेयार की है।
भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने नीति नियोजन और कुछ विशिष्ट पारिस्थितिक पुनर्प्राप्तियों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
लक्ष्य 1: भूमि उपयोग योजना (Land-Use Planning – NBT1)
- यह लक्ष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- भारत का वन और वृक्ष आवरण देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% तक पहुँच गया है।
लक्ष्य 2: पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन (Ecosystem Restoration – NBT2)
- यह लक्ष्य भी सही दिशा में है।
- भारत ने 24.1 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनर्स्थापित किया है या पुनर्स्थापन की प्रक्रिया में रखा है।
- यह Bonn Challenge के तहत भारत की 26 मिलियन हेक्टेयर की प्रतिबद्धता के बहुत करीब है।
लक्ष्य 3: प्रमुख प्रजातियों की पुनर्प्राप्ति (Flagship Species Recovery)
- भारत में बाघों की संख्या 3,167 तक पहुँच गई है।
- एशियाई सिंहों की संख्या में वृद्धि हुई है।
- एक-सींग वाले गैंडे की आबादी स्थिर बनी हुई है।
लक्ष्य 4: कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration)
- भारत के वन कार्बन भंडार में 81.5 मिलियन टन की वृद्धि हुई है।
- यह दर्शाता है कि जैव विविधता संरक्षण जलवायु परिवर्तन को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लक्ष्य 5: आर्द्रभूमि प्रबंधन (Wetland Management)
- भारत में राष्ट्रीय स्तर पर आर्द्रभूमियों की सूची (inventory) तैयार की जा चुकी है।
- इससे रामसर स्थलों और स्थानीय जल निकायों के संरक्षण के लिए आधारभूत डेटा उपलब्ध हुआ है।
लक्ष्य 6: डिजिटल शासन (Digital Governance)
- PARIVESH 2.0 पोर्टल शुरू किया गया है।
- इससे पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया सरल हुई है और
- जैव विविधता से जुड़े डेटा को बुनियादी ढाँचा योजना में शामिल किया गया है।
भारत की प्रमुख चुनौतियाँ
- पुनर्स्थापन के प्रयासों के बावजूद भारत की 77% भूमि अभी भी क्षरण का शिकार है जैसे राजस्थान और गुजरात के बड़े क्षेत्रों में वनरोपण कार्यक्रमों के बावजूद मरुस्थलीकरण की समस्या बनी हुई है।
- गैर-प्रमुख प्रजातियों जैसे कीट, कवक, छोटे स्तनधारी आदि के मात्रात्मक डेटा की भारी कमी है।
- भारत में औपचारिक संरक्षित क्षेत्र केवल लगभग 5% है, जबकि वैश्विक लक्ष्य 2030 तक 30% है।
- आक्रामक प्रजातियों और कृषि अपवाह (agricultural runoff) की निगरानी के लिए मानकीकृत प्रणाली अभी विकसित नहीं हुई है।
- हाल के वर्षों में ओडिशा और उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग ने पुनर्स्थापित आवासों को नुकसान पहुँचाया है।
Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework क्या है?
- Kunming–Montreal Global Biodiversity Framework (KMGBF) जैव विविधता संरक्षण के लिए 2022 में CBD COP-15 (Montreal) में अपनाया गया एक ऐतिहासिक वैश्विक समझौता है।
- इसका उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकना और 2050 तक “Living in Harmony with Nature” की स्थिति प्राप्त करना है।
- यह फ्रेमवर्क चार दीर्घकालिक वैश्विक लक्ष्यों (Goals) और 23 कार्यात्मक लक्ष्यों (Targets) पर आधारित है, जो देशों को नीतिगत और व्यावहारिक कदम उठाने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।
KMGBF का मुख्य मिशन है:
- 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकना और उलटना
- पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली (Restoration)
- जैव संसाधनों का सतत उपयोग
- मानव विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना
यह फ्रेमवर्क पहले के Aichi Biodiversity Targets (2011-2020) को प्रतिस्थापित करता है और वैश्विक जैव विविधता नीति के लिए नया रोडमैप प्रदान करता है।
KMGBF की संरचना
KMGBF दो स्तरों पर काम करता है:
- दीर्घकालिक लक्ष्य (Goals) – 2050: ये दीर्घकालिक विज़न बताते हैं कि भविष्य में दुनिया किस स्थिति तक पहुँचना चाहती है।
- कार्यात्मक लक्ष्य (Targets) – 2030: ये कार्रवाई योग्य लक्ष्य (Action-oriented targets) हैं जिनके माध्यम से 2050 के विज़न तक पहुँचना संभव होगा।
KMGBF का वैश्विक महत्व
वैज्ञानिकों के अनुसार यह फ्रेमवर्क कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- यह पेरिस जलवायु समझौते के समान ही वैश्विक पर्यावरणीय समझौता है।
- यह पहली बार स्पष्ट और मापनीय जैव विविधता लक्ष्यों को प्रस्तुत करता है।
- यह सरकारों, निजी क्षेत्र और समाज को एक साथ लाता है।
भारत के लिए महत्व
भारत के लिए KMGBF महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- भारत विश्व के 17 मेगाडायवर्स देशों में से एक है
- भारत को अपने राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य (NBTs) को KMGBF के अनुरूप बनाना होता है
- भारत की प्रगति CBD को राष्ट्रीय रिपोर्ट के माध्यम से बताई जाती है।
महत्वपूर्ण पर्यावरण सम्मेलन और प्रोटोकॉल की सूची | ||
| अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन | स्थापना वर्ष | संगठन |
| रामसर कन्वेंशन | 1971 | अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन |
| वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन (CITES) | 1973 | अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध |
| बॉन कन्वेंशन | 1979 | संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम |
| मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल | 1987 | बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता |
| वियना कन्वेंशन | 1988 | बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता |
| बेसल कन्वेंशन | 1989 | बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता |
| जैविक विविधता पर सम्मेलन (सीबीडी) | 1992 | बहुपक्षीय संधि |
| जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) | 1992 | अंतर-सरकारी संधि |
| रियो शिखर सम्मेलन | 1992 | संयुक्त राष्ट्र |
| मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीसीडी) | 1994 | संयुक्त राष्ट्र |
| क्योटो प्रोटोकोल | 1997 | यूएनएफसीसीसी |
| रॉटरडैम कन्वेंशन | 1998 | संयुक्त राष्ट्र संधि |
| जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना प्रोटोकॉल | 2000 | सीबीडी पर पहला प्रोटोकॉल |
| स्टॉकहोम कन्वेंशन | 2001 | स्टॉकहोम, स्वीडन |
| संयुक्त राष्ट्र REDD | 2008 | संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम |
| नागोया प्रोटोकॉल | 2010 | सीबीडी पर दूसरा प्रोटोकॉल |
| मिनमाता कन्वेंशन | 2013 | अंतर्राष्ट्रीय संधि |
| किगाली संशोधन | 2016 | अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध |
निष्कर्ष
भारत की सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट यह दर्शाती है कि देश ने नीतिगत ढाँचे और प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण में मजबूत आधार तैयार किया है, विशेष रूप से बाघ जैसे करिश्माई मेगाफौना के संरक्षण में सफलता मिली है। हालाँकि, राष्ट्रीय लक्ष्यों के 90% से अधिक हिस्से में योजनाओं से वास्तविक परिणामों तक की प्रगति अभी धीमी है।
2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को वन पुनर्स्थापन और भूमि क्षरण रोकने के बीच संतुलन बनाना होगा। और संरक्षण का दायरा बढ़ाकर जैव विविधता के सभी स्तरों (प्रजाति, आनुवंशिक और पारिस्थितिकी तंत्र) को शामिल करना होगा।
Discover more from Politics by RK: Ultimate Polity Guide for UPSC and Civil Services
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

