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परमाणु ऊर्जा के सतत उपयोग एवं उन्नयन विधेयक (SHANTI) Act, 2025: भारत की परमाणु ऊर्जा परिदृश्य का रूपांतरण

The Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act, 2025

  • भारत 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 8,000 MW से बढ़ाकर 100 GW करने का लक्ष्य रखता है, जो ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है ।
  • SHANTI Act, 2025 इस दिशा में एक ऐतिहासिक सुधार है, जो परमाणु क्षेत्र में सरकारी एकाधिकार को समाप्त कर निजी और विदेशी निवेश को अनुमति देता है
  • भारत की ऊर्जा रणनीति दो प्रमुख लक्ष्यों से संचालित है-Viksit Bharat 2047 और Net Zero 2070, जिनके लिए स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा आवश्यक है ।
  • परमाणु ऊर्जा को ‘clean firm power’ के रूप में देखा जा रहा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की अस्थिरता (intermittency) को संतुलित कर सकती है।

 

SHANTI Act, 2025 – परमाणु क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव

  • SHANTI Act (Safeguards for Harnessing Atomic Nuclear Transformation in India) भारत के परमाणु क्षेत्र में एक game-changer reform है।
  • यह अधिनियम Department of Atomic Energy (DAE) के एकाधिकार को समाप्त करता है, जिससे निजी कंपनियाँ परमाणु संयंत्रों के निर्माण, स्वामित्व और संचालन में भाग ले सकती हैं।
  • यह अधिनियम Atomic Energy Act, 1962 और CLNDA, 2010 जैसे पुराने कानूनों को प्रतिस्थापित करता है।
  • इसमें Atomic Energy Regulatory Board (AERB) को वैधानिक दर्जा देकर नियामक प्रणाली को मजबूत किया गया है।
  • Exam Fact: SHANTI Act = Liberalisation + Regulation + Liability Reform
  • इसका मुख्य उद्देश्य 2047 तक 100 GW nuclear target को प्राप्त करना है।

भारत का ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) – दोहरे लक्ष्य

  • भारत की ऊर्जा नीति दो प्रमुख लक्ष्यों पर आधारित है:
    • Viksit Bharat (2047): आर्थिक विकास
    • Net Zero (2070): जलवायु परिवर्तन नियंत्रण
  • जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, ऊर्जा की मांग भी तेजी से बढ़ेगी, विशेष रूप से बिजली की मांग बढ़ेगी।
  • वर्तमान में भारत की per capita electricity consumption ≈ 1,418 kWh है, जो विकसित देशों से काफी कम है।
  • इसका अर्थ है कि भविष्य में बिजली की मांग कई गुना बढ़ेगी।
  • Exam Fact: ‘India’s growth is electricity-intensive growth.’

वर्तमान ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) – क्षमता बनाम वास्तविक उत्पादन

  • जून 2025 तक भारत की कुल स्थापित क्षमता ≈ 476 GW है।
  • इसमें:
    • Thermal (coal आदि) → 240 GW
    • Renewable → 227 GW
    • Nuclear → ~8.8 GW
  • हालांकि, उत्पादन (generation) में अंतर है:
    • Thermal → 75%
    • Renewables → 22%
    • Nuclear → 3%
  • इसका कारण है कि renewable energy intermittent (अनियमित) होती है।
  • Exam Fact: Installed Capacity ≠ Actual Generation

Baseload Challenge और Storage समस्या

  • Thermal और nuclear ऊर्जा ‘baseload power’ प्रदान करती हैं, यानी निरंतर बिजली प्रदान करती है।
  • Renewable sources (solar, wind) मौसम पर निर्भर हैं, इसलिए स्थिर आपूर्ति नहीं दे सकते।
  • इस समस्या को हल करने के लिए energy storage systems (battery आदि) की आवश्यकता होती है, जो अभी महंगे हैं।
  • लगभग 40 GW renewable projects PPA के बिना अटके हुए हैं, जो नीति और बाजार की समस्या को दर्शाता है।
  • Exam Term: Intermittency vs Baseload

परमाणु ऊर्जा का महत्व (Role of Nuclear Energy)

  • भारत को Viksit Bharat बनने के लिए 2000 GW से अधिक बिजली क्षमता की आवश्यकता हो सकती है।
  • Renewable ऊर्जा भूमि-गहन (land-intensive) है और कोयला पर्यावरणीय दृष्टि से अस्थिर है।
  • इसलिए परमाणु ऊर्जा को ‘clean baseload alternative’ के रूप में देखा जा रहा है।
  • Exam Statement: Nuclear = Low carbon + High reliability

भारत का परमाणु कार्यक्रम विकास और वर्तमान स्थिति

  • भारत का पहला परमाणु संयंत्र Tarapur (1969) में शुरू हुआ।
  • वर्तमान में NPCIL 24 reactors संचालित करता है (~8,780 MW)
  • प्रमुख रिएक्टर प्रकार:
    • BWR (पुराने)
    • VVER (रूसी डिजाइन – Kudankulam)
    • PHWR (स्वदेशी और प्रमुख)
  • PHWR क्षमता 220 MW → 540 MW → 700 MW तक विकसित हुई है।
  • Exam Fact: PHWR = India’s backbone nuclear technology

लागत और निवेश की चुनौती

  • भारत में 700 MW PHWR की लागत ≈ $2 million/MW, जो वैश्विक स्तर पर कम है।
  • 100 GW लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ≈ $200 billion (₹18 लाख करोड़) निवेश की आवश्यकता होगी।
  • केवल सरकारी निवेश से यह संभव नहीं है।
  • इसलिए SHANTI Act के माध्यम से private + foreign investment को आकर्षित किया गया है।

बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी (Stalled Projects)

  • 2017 में 10 × 700 MW reactors को मंजूरी मिली, लेकिन प्रगति धीमी है।
  • प्रमुख परियोजनाएँ:
    • Jaitapur (EDF, France)
    • Kovvada (US)
    • Mithi Virdi (Japan)
  • ये परियोजनाएँ महंगी (~$5 million/MW) और तकनीकी रूप से जटिल हैं।
  • Exam Issue: Cost escalation + Policy delays

Small Modular Reactors (SMRs) और औद्योगिक उपयोग

  • भारत ने SMRs के लिए ₹20,000 करोड़ का बजट रखा है।
  • SMRs (5–200 MW) छोटे, लचीले और सुरक्षित माने जाते हैं।
  • उद्योग (steel, cement, data centres) अपने captive power के लिए nuclear विकल्प में रुचि दिखा रहे हैं।
  • Exam Concept: Decentralised nuclear energy

तीनस्तरीय रणनीति (Three-Front Strategy)

(i) Indigenisation

  • विदेशी तकनीक महंगी है, इसलिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना आवश्यक है।
  • चीन ने इसी रणनीति से लागत कम की है।

(ii) R&D (SMRs + Thorium)

  • भारत को thorium आधारित तकनीक विकसित करनी चाहिए (भारत में थोरियम भंडार अधिक है)।
  • HALEU जैसे ईंधन विकल्प महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

(iii) PHWR का विस्तार

  • 220 MW PHWR को modular बनाकर उद्योगों में उपयोग किया जा सकता है।
  • निजी कंपनियों को इसमें शामिल किया जा सकता है।

विश्व भर में परमाणु ऊर्जा की वर्तमान स्थिति क्या है?

  • परमाणु ऊर्जा के संदर्भ मे  1950 के दशक से बिजली उत्पादन के लिये विकसित परमाणु ऊर्जा, वर्तमान में वैश्विक बिजली का लगभग 9% योगदान देती है और यह न्यून कार्बन उत्सर्जन वाली विद्युत ऊर्जा का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है, जो विश्व की न्यून कार्बन बिजली का लगभग एक चौथाई हिस्सा प्रदान करता है। यह स्वच्छ ऊर्जा और सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • मुख्य आँकड़े:
    • विश्व स्तर पर 440 रिएक्टर संचालित हैं, जिनसे वर्ष 2023 तक 2602 TWh विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया गया।
    • 14 देश अपनी बिजली का 25% से अधिक उत्पादन परमाणु ऊर्जा से करते हैं (फ्राँस~70%)
    • शीर्ष उत्पादक: संयुक्त राज्य अमेरिका (779.2 TWh), चीन (406.5 TWh), फ्राँस (323.8 TWh)
    • वर्ष 2025 में रिएक्टर निर्माण: लुफेंग 1 (चीन), लेनिनग्राड 2-4 (रूस)
    • शटडाउन: डोएल 1 (बेल्जियम)
    • उभरते परमाणु राष्ट्र: बांग्लादेश, तुर्की (पहले संयंत्र निर्माणाधीन)।

प्रमुख चुनौतियाँ (Core Challenges)

  • नियामक स्पष्टता (regulatory clarity) की कमी
  • वित्तपोषण (financing) और उच्च लागत
  • परमाणु दायित्व कानून (liability issues)
  • भूमि अधिग्रहण और सामाजिक विरोध
  • कुशल मानव संसाधन की कमी

Exam Fact: ‘Implementation, not policy, is the real challenge.’

निष्कर्ष (Conclusion)

  • भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र अब एक नए संक्रमण (transition phase) में प्रवेश कर चुका है, जहाँ यह केवल सरकारी नियंत्रण वाला क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि इसमें निजी और विदेशी भागीदारी को भी शामिल किया जा रहा है।
  • SHANTI Act, 2025 इस परिवर्तन का केंद्र है, जो यह दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति को अधिक लचीला (flexible), निवेश-अनुकूल (investment-friendly) और प्रतिस्पर्धी (competitive) बनाना चाहता है।

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