21वीं सदी की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति संतुलन का केंद्र धीरे-धीरे पश्चिमी देशों से हटकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की ओर स्थानांतरित हो रहा है। इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और ब्राज़ील दो ऐसे प्रमुख लोकतांत्रिक, बहुलतावादी और उभरती अर्थव्यवस्थाएँ हैं, जो न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की सामूहिक आवाज़ को भी सशक्त बना रही हैं।
भारत और ब्राज़ील के बीच संबंध केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं; वे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, वैश्विक शासन सुधार, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, खाद्य सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता जैसे व्यापक विषयों से जुड़े हुए हैं। 2006 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी को 2026 में ब्राज़ील के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ने नई ऊर्जा प्रदान की।
यह लेख भारत–ब्राज़ील संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान आयाम, प्रमुख उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कूटनीतिक विकास
- भारत और ब्राज़ील के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 1948 में स्थापित हुए। उस समय दोनों देश उपनिवेशवाद से मुक्त होकर अपनी-अपनी राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया में थे।
- भारत ने प्रारंभ में रियो डी जेनेरो (तत्कालीन राजधानी) में अपना दूतावास स्थापित किया, जिसे बाद में 1971 में ब्रासीलिया स्थानांतरित किया गया। ब्राज़ील का भारत में वाणिज्य दूतावास मुंबई में स्थित है।
- शीत युद्ध के दौरान दोनों देशों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की विचारधारा से प्रेरणा ली और सामरिक स्वायत्तता को प्राथमिकता दी। 21वीं सदी में दोनों देश BRICS, IBSA (India-Brazil-South Africa), G20 और G4 जैसे मंचों पर सहयोग करते हुए वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधि के रूप में उभरे।
- 2006 में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) की स्थापना की, जिसने संबंधों को नए आयाम दिए।
रणनीतिक साझेदारी के पाँच प्रमुख स्तंभ
2025 के ब्रासीलिया संयुक्त वक्तव्य और 2026 की राजकीय यात्रा के बाद भारत–ब्राज़ील सहयोग पाँच प्राथमिक स्तंभों पर आधारित है:
- रक्षा और सुरक्षा
- खाद्य एवं पोषण सुरक्षा
- ऊर्जा संक्रमण और जलवायु परिवर्तन
- डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियाँ
- रणनीतिक औद्योगिक साझेदारी
ये स्तंभ न केवल द्विपक्षीय हितों को दर्शाते हैं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की साझा चिंताओं को भी प्रतिबिंबित करते हैं।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
(क) व्यापार की वर्तमान स्थिति: ब्राज़ील लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 15.21 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25% से अधिक वृद्धि दर्शाता है।
भारत के प्रमुख निर्यात: परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि-रसायन, इंजीनियरिंग उत्पाद आदि
ब्राज़ील के प्रमुख निर्यात: कच्चा तेल, सोयाबीन तेल, कच्ची चीनी, सोना, लौह अयस्क
दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 30 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
(ख) MERCOSUR समझौता: भारत और MERCOSUR (ब्राज़ील सहित दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह) के बीच वरीयता व्यापार समझौता (PTA) लागू है। इसे विस्तारित करने और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने पर सहमति बनी है।
(ग) निवेश: भारत का ब्राज़ील में कुल निवेश 15 अरब डॉलर से अधिक है। भारतीय कंपनियाँ आईटी, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और फार्मा क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
डिजिटल साझेदारी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) जैसे आधार, UPI और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल ने वैश्विक स्तर पर प्रशंसा प्राप्त की है।
भारत और ब्राज़ील ने “Digital Partnership for the Future” के अंतर्गत सहयोग बढ़ाया है।
- Open Planetary Intelligence Network (OPIN) की शुरुआत
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन पर सहयोग
- डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा संवाद
दोनों देश AI नैतिकता, डिजिटल समावेशन और बहुपक्षीय डिजिटल शासन के पक्षधर हैं।
रक्षा सहयोग
2003 में रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए और 2006 में इसे अनुमोदित किया गया।
हाल के वर्षों में:
- 2+2 राजनीतिक–सैन्य संवाद की शुरुआत (2024) हुई।
- स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव हेतु त्रिपक्षीय समझौता हुआ।
- संयुक्त सैन्य अभ्यासों की संभावना बनी हुई है।
हालाँकि रक्षा सहयोग अभी प्रारंभिक अवस्था में है, परंतु इसमें व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।
ऊर्जा संक्रमण और जैवईंधन सहयोग
भारत और ब्राज़ील को “नवीकरणीय ऊर्जा महाशक्ति” कहा जाता है।
ब्राज़ील गन्ना आधारित एथेनॉल उत्पादन में अग्रणी है, जबकि भारत जैवईंधन मिश्रण लक्ष्यों को बढ़ा रहा है।
दोनों देश:
- ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (GBA) के संस्थापक सदस्य है।
- राष्ट्रीय जैवईंधन नीति (भारत) और RenovaBio कार्यक्रम (ब्राज़ील) में समान उद्देश्य है।
- टिकाऊ विमानन ईंधन (SAF) गलियारे की स्थापना पर विचार कर रहे है।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय सहयोग
ब्राज़ील ने COP30 (2025, बेलेम) की मेजबानी की।
- Tropical Forests Forever Facility (TFFF) की शुरुआत
- “Belém 4x Pledge” – 2035 तक टिकाऊ ईंधनों का उपयोग चार गुना
भारत और ब्राज़ील दोनों जलवायु न्याय (Climate Justice) के समर्थक हैं और विकसित देशों से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता की मांग करते हैं।
बहुपक्षीय मंचों पर भारत–ब्राज़ील सहयोग
| मंच | प्रकृति / स्वरूप | सहयोग के प्रमुख क्षेत्र | भारत–ब्राज़ील की भूमिका | महत्व |
| BRICS | उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह | वित्तीय सुधार, NDB, डिजिटल अर्थव्यवस्था, AI, साइबर सुरक्षा | संस्थापक सदस्य; वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूत करना | बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा |
| G20 | वैश्विक आर्थिक शासन मंच | ऋण संकट समाधान, जलवायु वित्त, DPI, खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा | हालिया अध्यक्षता (भारत 2023, ब्राज़ील 2024); विकास एजेंडा पर जोर | वैश्विक आर्थिक नीतियों में दक्षिणी देशों की भागीदारी |
| G4 समूह | UNSC सुधार हेतु गठबंधन (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान) | सुरक्षा परिषद विस्तार, स्थायी सदस्यता | संयुक्त रणनीति; टेक्स्ट-आधारित वार्ता | वैश्विक शासन का लोकतंत्रीकरण |
| ISA (अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन) | सौर ऊर्जा सहयोग मंच | सौर परियोजनाएँ, तकनीकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण | नवीकरणीय ऊर्जा में साझेदारी | स्वच्छ ऊर्जा व जलवायु न्याय को बढ़ावा |
| CDRI | आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन | जलवायु लचीलापन, आपदा प्रबंधन, तकनीकी सहयोग | आपदा जोखिम कम करने में सहयोग | सतत व सुरक्षित अवसंरचना विकास |
भविष्य की संभावनाएँ
- भारत–ब्राज़ील के बीच प्रत्यक्ष समुद्री गलियारा स्थापित कर व्यापार लागत और समय कम किया जाए।
- दिल्ली/मुंबई–साओ पाउलो के बीच सीधी उड़ानें शुरू कर पर्यटन, निवेश और व्यापार बढ़ाया जाए।
- प्राथमिक वस्तुओं के बजाय उच्च मूल्य वर्धित उत्पादों (आईटी, फार्मा, इंजीनियरिंग) पर ध्यान दिया जाए।
- MERCOSUR समझौते का विस्तार कर संयुक्त उद्यमों और MSME सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर संयुक्त अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएँ।
- हरित प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाकर आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन सुनिश्चित किया जाए।
- रक्षा तकनीक के सह-विकास और संयुक्त उत्पादन (ड्रोन, नौसैनिक उपकरण) पर औपचारिक समझौता किया जाए।
- संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा स्टार्टअप सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाए।
- छात्रवृत्ति कार्यक्रमों और विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी को बढ़ाया जाए।
- पुर्तगाली और हिंदी भाषा प्रशिक्षण को प्रोत्साहित कर जन-से-जन संपर्क मजबूत किया जाए।
- BRICS, G20, G4 और ISA में संयुक्त रूप से वैश्विक शासन सुधार की वकालत की जाए।
- जलवायु न्याय, विकास वित्त और वैश्विक दक्षिण के मुद्दों पर साझा कूटनीतिक रुख अपनाया जाए।
निष्कर्ष
भारत–ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रही है।
डिजिटल परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, रक्षा सहयोग और बहुपक्षीय सुधार के क्षेत्र में बढ़ती निकटता दोनों देशों को वैश्विक दक्षिण के सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित कर सकती है।
हालाँकि भौगोलिक दूरी, व्यापार असंतुलन और चीन कारक जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, परंतु दीर्घकालिक दृष्टि, संरचनात्मक सुधार और संस्थागत सहयोग के माध्यम से इन बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
भारत और ब्राज़ील का सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंध नहीं, बल्कि एक नई विश्व व्यवस्था की परिकल्पना का आधार है, जहाँ विकासशील देशों की आवाज़ अधिक सशक्त, समावेशी और न्यायपूर्ण होगी।
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