Transparency International ने भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025 जारी किया, जिसमें 182 देशों का सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इसमें शून्य (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (बहुत स्वच्छ) तक का पैमाना उपयोग किया गया। यह रिपोर्ट वैश्विक भ्रष्टाचार रुझानों, उनके मूल कारणों, सामाजिक प्रभावों तथा क्रियान्वित किए जा सकने वाले सुझावों का व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) क्या है?
- भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (Corruption Perceptions Index, CPI) एक वैश्विक सूचकांक है जो विभिन्न देशों में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कथित (perceived) स्तर को मापता है।
- इसे हर वर्ष Transparency International द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाला एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नागरिक समाज संगठन है।
- CPI का उद्देश्य यह समझना है कि सरकारी संस्थानों, प्रशासन और सार्वजनिक नीति-निर्माण में भ्रष्टाचार किस हद तक मौजूद है, ताकि सरकारों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज को सुधार के लिए दिशा मिल सके।
CPI की शुरुआत और विकास
- भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक की शुरुआत 1995 में की गई थी। इसे पहली बार 45 देशों के साथ जारी किया गया था। समय के साथ इसमें अधिक देशों को शामिल किया गया और अब यह विश्व के अधिकांश देशों और क्षेत्रों को कवर करता है।
- ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की स्थापना 1993 में पीटर आइगेन ने की थी। इसका मुख्यालय बर्लिन (जर्मनी) में स्थित है और 100 से अधिक देशों में इसकी राष्ट्रीय शाखाएँ कार्यरत हैं। यह संगठन भ्रष्टाचार के विरुद्ध शोध, नीति-वकालत (advocacy) और जागरूकता कार्यक्रम चलाता है।
CPI कैसे काम करता है? (कार्यप्रणाली)
- धारणा आधारित मापन: CPI प्रत्यक्ष भ्रष्टाचार की घटनाओं को नहीं गिनता, बल्कि विशेषज्ञों, व्यवसायिक सर्वेक्षणों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के आकलन के आधार पर भ्रष्टाचार की धारणा को मापता है। यह इसलिए किया जाता है क्योंकि भ्रष्टाचार अक्सर छिपा हुआ होता है और उसका प्रत्यक्ष डेटा उपलब्ध नहीं होता।
- बहु–स्रोत डेटा: सूचकांक तैयार करने के लिए विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, थिंक टैंक, विकास एजेंसियाँ और निजी सर्वेक्षण से डेटा लिया जाता है। इन स्रोतों को सांख्यिकीय रूप से संयोजित करके अंतिम स्कोर निकाला जाता है।
- 2012 की नई पद्धति: 2012 में CPI की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए ताकि वर्षों के बीच तुलना अधिक विश्वसनीय हो सके।
नई पद्धति में शामिल हैं:
- स्रोत डेटा का चयन
- डेटा का पुनर्संतुलन
- समेकन (aggregation)
- अनिश्चितता को दर्शाने वाला सांख्यिकीय माप
- गुणवत्ता नियंत्रण (दो आंतरिक और दो स्वतंत्र शोधकर्ताओं द्वारा सत्यापन)
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025
2025 में वैश्विक औसत CPI घटकर 42 हो गया, जबकि 122 देशों का स्कोर 50 से कम है, जो व्यापक भ्रष्टाचार को दर्शाता है।


- 2025 में भारत 39/100 स्कोर के साथ 91वें स्थान पर रहा, जो 2024 के 96वें स्थान से थोड़ा सुधार दर्शाता है।
- लोकतंत्रों का स्कोर (औसत 71) अधिनायकवादी व्यवस्थाओं (32) से अधिक है, जिससे सिद्ध होता है कि संस्थागत मजबूती भ्रष्टाचार को नियंत्रित करती है।
- सिफारिशों में स्वतंत्र न्यायपालिका, राजनीतिक पारदर्शिता, नागरिक क्षेत्र की सुरक्षा तथा अवैध वित्तीय प्रवाह के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया गया है।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025 के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?
- वैश्विक औसत में गिरावट: एक दशक से अधिक समय में पहली बार वैश्विक औसत घटकर 100 में से 42 रह गया। अधिकांश देशों (182 में से 122) का स्कोर 50 से नीचे है, जो गंभीर भ्रष्टाचार समस्याओं को दर्शाता है।
- उच्च प्रदर्शन करने वाले देशों की संख्या में कमी: 80 से अधिक स्कोर वाले देशों की संख्या एक दशक पहले 12 थी, जो इस वर्ष घटकर केवल 5 रह गई (डेनमार्क, फिनलैंड, सिंगापुर, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे)।

- शीर्ष और निम्न प्रदर्शनकर्ता: डेनमार्क (स्कोर 89) लगातार 8वीं बार शीर्ष स्थान पर है, जबकि सोमालिया और दक्षिण सूडान (9) सबसे नीचे हैं। वेनेज़ुएला (10) तथा अन्य संघर्षग्रस्त या दमनकारी शासन वाले देश निम्न स्तर पर हैं।
क्षेत्रीय औसत:
- पूर्ण लोकतंत्र: 71
- त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र: 47
- अधिनायकवादी शासन: 32
यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और भ्रष्टाचार नियंत्रण के बीच मजबूत संबंध दर्शाता है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भूमिका
- ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी संगठन है जिसका उद्देश्य सरकार, व्यवसाय और समाज के सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
- यह संगठन रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अन्य रूपों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर अभियान चलाता है।
- इसका वित्तपोषण सरकारों, निजी दानदाताओं, संस्थानों और व्यक्तियों से प्राप्त दान से होता है। संगठन का अंतरराष्ट्रीय सचिवालय बर्लिन में स्थित है।
हालाँकि CPI व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं:
- यह धारणा पर आधारित है, इसलिए वास्तविक भ्रष्टाचार का पूर्ण चित्र नहीं देता।
- निजी क्षेत्र या छोटे स्तर के भ्रष्टाचार को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
- सांस्कृतिक और संदर्भगत अंतर परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
रिपोर्ट में पहचाने गए भ्रष्टाचार के कारण क्या हैं?
- कमजोर न्याय व्यवस्था और विधि का शासन: न्यायिक नियुक्तियों का राजनीतिकरण, अभियोजन में हस्तक्षेप, संसाधनों की कमी और स्वतंत्रता का अभाव दंडहीनता पैदा करते हैं। जब न्याय व्यवस्था पर कब्जा हो जाता है, तो कानून जनता के बजाय शक्तिशाली लोगों की रक्षा करते हैं।
- राजनीतिक निर्णय–निर्माण पर अनुचित प्रभाव: अपारदर्शी राजनीतिक वित्तपोषण, अनियमित लॉबिंग, हितों का टकराव और धनाढ्य दाताओं का प्रभाव निजी हितों को सार्वजनिक सत्ता पर हावी होने देता है। इससे “ग्रैंड करप्शन” और राज्य कब्जा होता है।
- सिकुड़ता नागरिक क्षेत्र और मीडिया स्वतंत्रता: कठोर NGO कानून, बदनाम करने के अभियान, निगरानी, सेंसरशिप और पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा निगरानी तंत्र को कमजोर करते हैं। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही घटती है।
- लोक वित्त प्रबंधन की विफलताएँ: बजट, खरीद और ऋण प्रबंधन में निगरानी की कमी तथा संरक्षण नेटवर्क सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और रिश्वत के अवसर पैदा करते हैं।
भ्रष्टाचार के परिणाम क्या हैं?
- न्याय और मानवाधिकारों का क्षरण: दंडहीनता विधि के शासन को कमजोर करती है, पीड़ितों को न्याय से वंचित करती है और न्याय तक पहुँच में बाधाएँ बढ़ाती है।
- लोकतांत्रिक गिरावट और राज्य कब्जा: भ्रष्टाचार चुनावों, संसद और निगरानी संस्थाओं को कमजोर करता है, जिससे नीति कब्जा, जन विश्वास में कमी और राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है।
- नागरिक क्षेत्र और मीडिया का दमन: पत्रकारों और नागरिक समाज पर हमले जवाबदेही घटाते हैं और भ्रष्टाचार को छिपने देते हैं।
- सार्वजनिक सेवाओं की गिरावट और बढ़ती असमानता: धन के दुरुपयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना जैसी सेवाएँ कमजोर होती हैं। अनौपचारिक भुगतान गरीबों पर प्रतिगामी कर जैसा बोझ डालते हैं।
- व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव: भ्रष्टाचार आर्थिक अस्थिरता बढ़ाता है, निवेश को हतोत्साहित करता है, जलवायु जोखिम बढ़ाता है और सार्वजनिक असंतोष को जन्म देता है। चरम स्थितियों में यह राज्य की कमजोरी और संघर्ष का कारण बनता है।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए CPI 2025 की सिफारिशें क्या हैं?
- स्वतंत्र और पारदर्शी न्याय संस्थाएँ: न्यायिक नियुक्तियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाना, पर्याप्त संसाधन देना और पीड़ितों को न्याय दिलाने के तंत्र मजबूत करना।
- राजनीतिक निर्णय–निर्माण पर अनुचित प्रभाव से निपटना: राजनीतिक वित्तपोषण को पारदर्शी बनाना, दान पर सीमा लगाना, लॉबिंग का खुलासा करना और हितों के टकराव को नियंत्रित करना।
- न्याय तक आसान पहुँच: भ्रष्टाचार से प्रभावित व्यक्तियों और समुदायों के लिए कानूनी मार्ग उपलब्ध कराना, विशेषकर वंचित समूहों के लिए सहायता।
- नागरिक क्षेत्र और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन: अभिव्यक्ति, संगठन और सूचना की स्वतंत्रता की रक्षा; पत्रकारों, व्हिसलब्लोअर्स और NGOs की सुरक्षा।
- वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और निगरानी: संसदीय निगरानी, स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक खर्च, उधारी व खरीद पर नियंत्रण मजबूत करना।
- भ्रष्टाचार की रोकथाम, पहचान और दंड: मजबूत प्रवर्तन, चोरी की संपत्ति जब्त करना, सीमा-पार मनी लॉन्ड्रिंग रोकना और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाना।
निष्कर्ष
CPI 2025 वैश्विक स्तर पर चिंताजनक रुझान दर्शाता है, जहाँ औसत स्कोर दशक में पहली बार 42 पर आ गया है। लोकतांत्रिक गिरावट, सीमित नागरिक स्वतंत्रता और कमजोर संस्थाएँ इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। पारदर्शी शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका और सशक्त नागरिक समाज को तुरंत लागू करना आवश्यक है ताकि इस प्रवृत्ति को पलटा जा सके।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक वैश्विक शासन की गुणवत्ता को समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह न केवल भ्रष्टाचार के स्तर को उजागर करता है बल्कि सुधार की दिशा भी सुझाता है। यद्यपि इसकी कुछ सीमाएँ हैं, फिर भी CPI नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के लिए एक विश्वसनीय संदर्भ बना हुआ है। पारदर्शिता, मजबूत संस्थाएँ और सक्रिय नागरिक भागीदारी ही भ्रष्टाचार को कम करने की कुंजी हैं।
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