2025 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट ने एक बार फिर फिनलैंड को दुनिया का सबसे खुशहाल देश घोषित किया है। वहीं भारत 118वें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकटों के बावजूद 109वें स्थान पर है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- फिनलैंड लगातार आठवें वर्ष शीर्ष स्थान पर मौजूद है और इसे दुनिया का सबसे खुशहाल देश बताया गया है। इसी प्रकार, अन्य नॉर्डिक देश डेनमार्क, आइसलैंड एवं स्वीडन क्रमशः शीर्ष पर बने हुए हैं।
- इस वर्ष 147 देशों की सूची में यूनाइटेड किंगडम 23वें एवं अमेरिका 24वें स्थान पर है। अमेरिका अब तक के अपने सबसे निचले 24वें स्थान पर है।
- कोस्टा रिका (6वें) एवं मैक्सिको (10वें) ने पहली बार शीर्ष 10 में प्रवेश किया है।
- भारत की स्थिति : भारत को रिपोर्ट में 118वें स्थान पर रखा गया है जबकि पाकिस्तान 109वें स्थान पर है।
रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद पाकिस्तान की अपेक्षाकृत उच्च रैंकिंग उसके नागरिकों के बीच सामाजिक समर्थन की मजबूत भावना को दर्शाता है।
- लगातार चौथे वर्ष 147वें स्थान के साथ अफगानिस्तान सबसे निचले पायदान पर है।
- शीर्ष 5 सबसे खुशहाल देश : फ़िनलैंड > डेनमार्क > आइसलैंड > स्वीडन > नीदरलैंड
- निचले पायदान वाले पांच देश : ज़िम्बाब्वे (143) < मलावी (144) < लेबनान (145) < सिएरा लियोन (146) < अफगानिस्तान (147)
इसकी गणना कैसे की जाती है?
विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट रैंकिंग तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सार्वजनिक डेटा मुख्य रूप से गैलप सर्वेक्षणों से प्राप्त होता है , जो प्रतिभागियों के जीवन मूल्यांकन के लिए कैंट्रिल लैडर आकलन का उपयोग करते हैं। इस प्रणाली में उत्तरदाताओं को 0 से 10 के बीच के अंक चुनकर वर्तमान में अपने जीवन की संतुष्टि का मूल्यांकन करना होता है , जिसमें 0 सबसे बुरे संभावित जीवन अनुभव को दर्शाता है और 10 सबसे अच्छे संभावित जीवन अनुभव को दर्शाता है । प्रसन्नता रैंकिंग का प्रारंभिक बिंदु पूरी तरह से आत्म-मूल्यांकन परिणामों पर निर्भर करता है ।
व्यक्तिपरक कल्याण स्कोर इस अध्ययन के लिए आधार के रूप में कार्य करते हैं जो उन्हें छह मौलिक तत्वों के साथ जोड़ता है जो खुशी के स्तर को संचालित करते हैं ।
- प्रति व्यक्ति जीडीपी रिपोर्ट : प्रत्येक व्यक्ति की खपत या आय का आर्थिक मूल्य खुशी कारक के रूप में काम करता है क्योंकि यहअवसरों के साथ-साथ संसाधनों तक पहुंच को सक्षम बनाता है।
- सामाजिक समर्थन: व्यक्ति सामाजिक समर्थन आकलन के माध्यम से भरोसेमंद और उद्देश्यपूर्ण सामाजिक संबंधों की अपनी भावना को माप सकते हैं ।
- स्वस्थ जीवन प्रत्याशा: लोग आमतौर पर यह मानते हैं कि बीमारी के बिना लंबे जीवन का आनंद लेने की उनकी क्षमता एक महत्वपूर्ण तत्व है जो यह निर्धारित करती है कि वे कितने खुश रहेंगे।
- जीवन में निर्णय लेने की स्वतंत्रता: जब लोगों को सामुदायिक स्वतंत्रता के साथ जीवन में निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है , तो इससे उनके कल्याण के अंक बढ़ जाते हैं।
- उदारता : दूसरों को सहायता प्रदान करने के विस्तृत संकेत सकारात्मक भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और सामुदायिक संबंधों के माध्यम से खुशी और सामुदायिक बंधन बनाते हैं।
- भ्रष्टाचार की धारणा: भ्रष्टाचार में कमी से लोगों को संस्थाओं के प्रति विश्वास स्थापित करने में मदद मिलती है , जिससे समाज अधिक खुशहाल बनता है।
आकंड़ो की विकृति: धारणा की राजनीति
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की 2022 की एक रिपोर्ट में दिखाया गया कि Freedom House जैसे सूचकांक पश्चिमी विशेषज्ञों के सीमित समूह पर निर्भर करते हैं, जिससे उनमें विचारधारात्मक झुकाव आ सकता है।
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट भी इसी कमजोरी से ग्रस्त है।
- सत्तावादी देश बेहतर अंक पा सकते हैं क्योंकि वहाँ नागरिक खुलेआम असंतोष व्यक्त नहीं कर सकते।
इसके विपरीत, लोकतंत्रों को कम अंक मिलते हैं क्योंकि खुले विमर्श, आलोचना और मीडिया जांच से समस्याएँ सामने आती हैं।
भारत के स्कोर अक्सर राजनीतिक बहसों या चुनावी उथल-पुथल के दौरान गिरते हैं जो पारदर्शिता दर्शाते हैं, न कि दुख। - पिछले दशक में भारत की रैंकिंग 94 से 144 के बीच उतार-चढ़ाव करती रही है, लेकिन ये बदलाव आर्थिक प्रदर्शन से मेल नहीं खाते।
वे ज़्यादा जन-भावना और सामाजिक विमर्श को दर्शाते हैं।
इस प्रकार, वैश्विक रैंकिंग अक्सर लोकतांत्रिक बहस को सामाजिक असंतोष समझ लेती हैं।
विश्वास, न्याय और कल्याण की अदृश्य संरचना
- सच्चा कल्याण आय से नहीं, बल्कि विश्वास पर निर्भर करता है संस्थानों, समुदायों और पड़ोसियों पर विश्वास।
फिनलैंड की ऊँची रैंकिंग का कारण यही गहरा संस्थागत विश्वास है वहाँ खोया बटुआ लौटने की संभावना अधिक होती है, जो निष्पक्षता की संस्कृति को दर्शाता है। - भारत का विश्वास तंत्र असमान है। संस्थागत विश्वास कमज़ोर हो सकता है, पर सामाजिक और पारिवारिक भरोसा मजबूत है यही अनौपचारिक सुरक्षा जाल वैश्विक सूचकांक नहीं मापते।
कोविड-19 संकट के दौरान जब लाखों लोग गाँवों की ओर लौटे, तो यह उसी समुदाय-आधारित सुरक्षा का प्रमाण था। - पश्चिमी ढाँचे अक्सर WEIRD पूर्वाग्रह (Western, Educated, Industrialised, Rich, Democratic) से प्रभावित होते हैं, जो व्यक्तिवादी भरोसे को प्राथमिकता देते हैं और सामूहिक प्रणालियों को नज़रअंदाज़ करते हैं।
भारत, अपनी पारिवारिक और सामुदायिक संरचना के कारण, इन पैमानों में सहज नहीं बैठता। - फिर भी भारत बदल रहा है – Tele-MANAS, कार्यस्थल कल्याण कार्यक्रम, और मानसिक स्वास्थ्य अभियानों जैसी पहलें दिखाती हैं कि अब भावनात्मक स्वास्थ्य को सार्वजनिक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
एक समग्र मार्ग की ओर
- सामाजिक पूंजी का पुनर्निर्माण: भारत को मजबूत समुदाय, साझा सार्वजनिक स्थल, पीढ़ीगत संवाद और सामूहिक गतिविधियों की आवश्यकता है।
अनुसंधान बताता है कि बड़े परिवार और सामुदायिक दयालुता में विश्वास खुशी को बढ़ाते हैं। - संस्थागत विश्वास की पुनर्स्थापना: सरल और पारदर्शी सार्वजनिक सेवाएँ विश्वास बनाती हैं। जब रोजमर्रा की व्यवस्थाएँ जैसे राशन कार्ड या परिवहन प्रणाली भरोसेमंद ढंग से काम करती हैं, नागरिक सम्मानित और सुरक्षित महसूस करते हैं।
- आर्थिक रणनीति में मानसिक स्वास्थ्य का समावेश: WHO के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च किए हर डॉलर से चार डॉलर की उत्पादकता बढ़ती है। इसका अर्थ है कि मानसिक स्वास्थ्य अब आर्थिक आवश्यकता है।
रिपोर्ट के बारे में
- पहला संस्करण : वर्ष 2012
- जारीकर्ता : संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (UN-SDSN) द्वारा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर की साझेदारी में वार्षिक स्तर पर
- मूल्यांकन : स्व-मूल्यांकित जीवन संतुष्टि के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक मानदंडों पर आधारित
- प्रमुख संकेतक :
- सामाजिक समर्थन
- प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद
- स्वस्थ जीवन प्रत्याशा
- स्वतंत्रता
- उदारता
- भ्रष्टाचार की अनुपस्थिति
निष्कर्ष
हैप्पीनेस रैंकिंग केवल खुशी नहीं मापती यह अपेक्षाओं, मूल्यों और सांस्कृतिक गतिशीलताओं को पकड़ती है। भारत की रैंकिंग दुःख का संकेत नहीं, बल्कि महत्वाकांक्षा का प्रतीक है, स्वच्छ हवा, बेहतर शासन और पूर्ण जीवन की चाह का प्रतिबिंब।
भारत का असंतोष निराशा नहीं, आकांक्षा की भाषा है। जैसा कि The Pursuit of Happyness कहती है, खुशी एक संपत्ति नहीं, एक यात्रा है। भारत की यह यात्रा जारी है, एक ऐसा देश जो बहस करता है, प्रश्न उठाता है और सपने देखता है, वह दुखी नहीं बल्कि अपूर्ण, निर्माणाधीन और जीवंत है।
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