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सर थॉमस मोर/ Sir Thomas More (1478-1535)

सर थॉमस मोर (1478-1535): एक आदर्श समाज की खोज

Sir Thomas More (1478-1535)

इतिहास में कुछ विचारक ऐसे होते हैं जो केवल अपने समय को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सोच को भी गहराई से प्रभावित करते हैं। सर थॉमस मोर उन्हीं महान विचारकों में से एक थे। उनका दर्शन केवल राजनीतिक विचार नहीं था, बल्कि एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना था जहाँ समानता, नैतिकता और तर्क का राज हो।

सर थॉमस मोर के बारे में

  • सर थॉमस मोर एक अंग्रेज़ वकील, विद्वान, लेखक, संसद सदस्य और हेनरी अष्टम के शासनकाल में लॉर्ड चांसलर थे।
  • Thomas More का जन्म 7 फरवरी 1478 को लंदन में एक सफल वकील के घर हुआ था।
  • बचपन में उन्होंने कुछ समय जॉन मॉर्टन, जो कैंटरबरी के आर्चबिशप थे, के घर में बिताया। बाद में उन्होंने ऑक्सफोर्ड में अध्ययन किया और वकील बने, हालांकि उन्होंने कुछ समय के लिए सन्यासी (मठवासी) बनने के बारे में भी विचार किया था।
  • उन्होंने राजा के सचिव, अनुवादक, भाषण लेखक, मुख्य राजनयिक, सलाहकार और विश्वासपात्र के रूप में कार्य किया। 1521 में उन्हें नाइट की उपाधि मिली, 1523 में वे हाउस ऑफ कॉमन्स के स्पीकर बने और 1525 में डची ऑफ लैंकेस्टर के चांसलर नियुक्त हुए।
  • लगभग 1515 में उन्होंने ‘द हिस्ट्री ऑफ रिचर्ड III’ लिखी, जिसने उस राजा को एक अत्याचारी शासक के रूप में प्रस्तुत किया और इसे अंग्रेज़ी इतिहास लेखन की पहली महान कृति माना जाता है।
  • 1516 में उन्होंने अपनी सबसे महत्वपूर्ण रचना ‘यूटोपिया’ प्रकाशित की, जिसमें एक काल्पनिक राज्य का वर्णन है जो तर्क पर आधारित है और उस समय की यूरोपीय राजनीति की समस्याओं के विपरीत एक आदर्श समाज को दर्शाता है।

सर थॉमस मोर का दार्शनिक आधार: मानववाद (Humanism)

  • Thomas More का दर्शन मुख्य रूप से क्रिश्चियन ह्यूमनिज़्म (Christian Humanism) पर आधारित था। यह विचारधारा मनुष्य की बुद्धि, नैतिकता और शिक्षा को महत्व देती है।
  • Nelson (2004) के अनुसार, More और उनके मित्र एरास्मस ने मानववाद को सामाजिक सुधार और नैतिक जीवन से जोड़ा, जिससे उनका दर्शन केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक भी बन गया।
  • इसका अर्थ यह था कि मनुष्य तर्कशील है, शिक्षा समाज सुधार का साधन है और नैतिक जीवन सबसे महत्वपूर्ण है।

यूटोपिया: सर थॉमस मोर के दर्शन का केंद्र

  • सर Thomas More की प्रसिद्ध कृति ‘यूटोपिया’ (1516) केवल एक काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि यह एक गहन दार्शनिक रचना है जिसमें उन्होंने अपने समय के समाज की समस्याओं का विश्लेषण करते हुए एक आदर्श समाज की कल्पना प्रस्तुत की।
  • यह रचना More के पूरे दर्शन का केंद्र इसलिए मानी जाती है क्योंकि इसमें उनके सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक विचार एक संगठित रूप में दिखाई देते हैं।
  • ‘यूटोपिया’ का उद्देश्य केवल एक आदर्श समाज दिखाना नहीं है, बल्कि यह यह भी बताना है कि वास्तविक समाज में क्या गलत है और उसे कैसे सुधारा जा सकता है।

Wilde (2016) के अनुसार, यह कृति सामाजिक न्याय और नैतिक राजनीति की एक गंभीर दार्शनिक खोज है।

Kautsky (1959) के अनुसार, यह कृति समाजवाद और मानववाद के प्रारंभिक रूपों को दर्शाती है, जहाँ निजी संपत्ति का अभाव और सामूहिक जीवन पर जोर दिया गया है।

यूटोपिया के मुख्य विचार

  1. निजी संपत्ति का विरोध और आर्थिक समानता का सिद्धांत
  • More के दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहलू है- निजी संपत्ति का पूर्ण विरोध। ‘यूटोपिया’ में कोई भी व्यक्ति निजी संपत्ति का मालिक नहीं होता। सभी वस्तुएँ, भूमि, उत्पादन और संसाधन सामूहिक रूप से नियंत्रित होते हैं।
  • इस विचार के पीछे More का यह मानना था कि निजी संपत्ति ही समाज में असमानता, गरीबी और अपराध का मूल कारण है।
  • Park (1971) के अनुसार, यूरोप में भूमि के निजी स्वामित्व (enclosure system) के कारण गरीबों की स्थिति अत्यंत खराब हो गई थी, और More ने उसी की आलोचना की।
  • ‘यूटोपिया’ में जब कोई व्यक्ति अधिक धन या संपत्ति इकट्ठा नहीं कर सकता, तो लालच, प्रतिस्पर्धा और शोषण स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
  • Adams (1941) के अनुसार, More का यह विचार आर्थिक समानता के माध्यम से सामाजिक न्याय स्थापित करने का प्रयास है।
  • लेकिन यहाँ एक बड़ा विवाद भी है कि क्या बिना निजी संपत्ति के समाज वास्तव में कार्य कर सकता है?
    कुछ विद्वान इसे प्रारंभिक समाजवाद (proto-socialism) मानते हैं, जबकि अन्य इसे एक अव्यवहारिक आदर्श मानते हैं।
  1. आदर्श राजनीतिक व्यवस्था और नैतिक शासन
  • ‘यूटोपिया’ में More ने एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की कल्पना की है जो न केवल लोकतांत्रिक है, बल्कि गहराई से नैतिक भी है। यहाँ शासक जनता द्वारा चुने जाते हैं और उनका मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि समाज का कल्याण होता है।
  • इस व्यवस्था में निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और सत्ता का दुरुपयोग नहीं होता। Gerard & Sterling (2005) के अनुसार, यह एक ऐसी प्रणाली है जहाँ शासन ‘समानता’ और ‘तर्क’ पर आधारित है, न कि शक्ति और धन पर।
  • More यह स्पष्ट करना चाहते थे कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का साधन नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह नैतिकता और न्याय का माध्यम होनी चाहिए।
  • यहाँ भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि क्या वास्तविक दुनिया में इतनी आदर्श और भ्रष्टाचार-मुक्त राजनीति संभव है?
  1. श्रम, कार्य और अवकाश का संतुलन
  • More ने ‘यूटोपिया’ में कार्य और जीवन के बीच संतुलन को अत्यधिक महत्व दिया है। इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति को केवल 6 घंटे काम करना पड़ता है, जो कि उस समय के यूरोप की तुलना में बहुत कम था।
  • इसका उद्देश्य यह था कि मनुष्य केवल जीविका कमाने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने बौद्धिक और नैतिक विकास के लिए भी समय निकाल सके।
  • Zuzanek (2017) के अनुसार, यह विचार आधुनिक ‘work-life balance’ की अवधारणा का प्रारंभिक रूप है।
  • यूटोपिया में लोग खाली समय में अध्ययन करते हैं, कला और विज्ञान में रुचि लेते हैं और समाज के लिए उपयोगी कार्य करते है।
  • इससे यह स्पष्ट होता है कि More के लिए ‘सुखी जीवन’ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि मानसिक और बौद्धिक विकास भी है।
  1. सामाजिक समानता और वर्गहीन समाज
  • ‘यूटोपिया’ में समाज पूरी तरह से समानता (equality) पर आधारित है। यहाँ कोई ऊँच-नीच, अमीर-गरीब या जन्म पर आधारित वर्ग नहीं है।
  • सभी लोग समान अवसर प्राप्त करते हैं और समाज में उनका मूल्य उनके कार्य और योगदान के आधार पर होता है। Thelin (2026) के अनुसार, यह व्यवस्था सामाजिक न्याय और समानता को सुनिश्चित करने का प्रयास है।
  • हालाँकि, यह समानता पूर्ण स्वतंत्रता के साथ नहीं आती। समाज में अनुशासन और नियम भी हैं, जिन्हें सभी को मानना पड़ता है।
  • यहाँ एक महत्वपूर्ण दार्शनिक प्रश्न है कि क्या पूर्ण समानता संभव है? और यदि है, तो क्या यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित कर देती है?
  1. धार्मिक सहिष्णुता और नैतिकता
  • More के ‘यूटोपिया’ में धर्म का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह कट्टरता पर आधारित नहीं है। यहाँ सभी लोगों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है।
  • Kessler (2002) के अनुसार, More ने धार्मिक सहिष्णुता को सामाजिक शांति और स्थिरता का आधार माना। यूटोपिया में विभिन्न धर्मों के लोग साथ रहते हैं, किसी पर धर्म थोपना मना है और सभी एक सर्वोच्च शक्ति में विश्वास करते हैं।
  • यह विचार उस समय के यूरोप के धार्मिक संघर्षों के बिल्कुल विपरीत था। लेकिन एक विरोधाभास भी है कि More स्वयं वास्तविक जीवन में कैथोलिक धर्म के कट्टर समर्थक थे और उन्होंने विधर्मियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए।
  1. स्वतंत्रता और अनुशासन का द्वंद्व

‘यूटोपिया’ में एक महत्वपूर्ण दार्शनिक समस्या है – स्वतंत्रता और अनुशासन के बीच संतुलन

यहाँ लोगों को कई प्रकार की स्वतंत्रता मिलती है, लेकिन साथ ही:

  • कठोर नियम हैं
  • सामाजिक नियंत्रण है
  • व्यक्तिगत जीवन भी कुछ हद तक नियंत्रित है

Kenyon (1983) के अनुसार, यह दिखाता है कि पूर्ण स्वतंत्रता और पूर्ण समानता एक साथ बनाए रखना कठिन है।

यही ‘यूटोपिया’ का सबसे गहरा दार्शनिक प्रश्न है।

क्या यूटोपिया सच में आदर्श है?

  • यहाँ एक दिलचस्प सवाल उठता है कि क्या More सच में इस समाज को आदर्श मानते थे?
  • Bradshaw (1981) और Wegemer (1990) के अनुसार, ‘Utopia’ केवल एक आदर्श समाज नहीं, बल्कि एक व्यंग्य (satire) भी हो सकता है, जो उस समय के यूरोपीय समाज की कमियों को उजागर करता है।
  • यानी यह एक आदर्श भी है और एक आलोचना भी

आधुनिक समय में प्रासंगिकता

  • Thomas More की ‘यूटोपिया’ भले ही 16वीं शताब्दी में लिखी गई थी, लेकिन इसके विचार आज के 21वीं सदी के समाज में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।
  • यह कृति केवल एक काल्पनिक आदर्श समाज का वर्णन नहीं करती, बल्कि यह आधुनिक समस्याओं जैसे आर्थिक असमानता, मानसिक तनाव, राजनीतिक भ्रष्टाचार और धार्मिक संघर्ष के समाधान के लिए भी मार्गदर्शन देती है।
  • आज के वैश्विक समाज में अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बढ़ती जा रही है। कुछ लोगों के पास अत्यधिक संपत्ति है, जबकि बड़ी संख्या में लोग गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं।
  • More ने ‘यूटोपिया’ में पहले ही इस समस्या को पहचान लिया था और इसका समाधान निजी संपत्ति के उन्मूलन और संसाधनों के समान वितरण में देखा। Mong (2018) के अनुसार, आधुनिक वैश्विक असमानता को समझने के लिए ‘यूटोपिया’ एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करती है।
  • आज भले ही पूरी तरह सामूहिक संपत्ति संभव न हो, लेकिन वेलफेयर स्टेट (welfare state), समाजवादी नीतियाँ, सार्वभौमिक मूल आय (UBI) जैसी अवधारणाएँ More के विचारों से प्रभावित दिखाई देती हैं।

 


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