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होरमुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait)

होरमुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait)

होरमुज़ जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और आर्थिक समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा आगे अरब सागर से जोड़ता है। विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का तेल और गैस इसी मार्ग से होकर वैश्विक बाजार तक पहुँचता है। इसलिए इसे अक्सर विश्व की “ऊर्जा जीवनरेखा” कहा जाता है। वर्तमान वैश्विक राजनीति में इस जलडमरूमध्य का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

भौगोलिक स्थिति

होरमुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसके उत्तर में ईरान तथा दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के तट स्थित हैं। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है, जो आगे चलकर अरब सागर और हिंद महासागर से मिलती है। इसकी कुल चौड़ाई लगभग 30 से 35 किलोमीटर के बीच है, जबकि जहाजों के आवागमन के लिए निर्धारित मार्ग लगभग 3 किलोमीटर चौड़ा होता है। इस संकरे समुद्री मार्ग के कारण यहाँ समुद्री गतिविधियाँ अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक मानी जाती हैं।

वैश्विक ऊर्जा व्यापार में महत्व

होरमुज़ जलडमरूमध्य का सबसे बड़ा महत्व वैश्विक ऊर्जा व्यापार से जुड़ा हुआ है। विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल इस जलडमरूमध्य से परिवहन किया जाता है। इसके अतिरिक्त कतर से निर्यात होने वाली बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) भी इसी मार्ग से गुजरती है। इस प्रकार यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रमुख तेल निर्यातक देश

फारस की खाड़ी के कई प्रमुख तेल उत्पादक देश अपने तेल निर्यात के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। इनमें सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर प्रमुख हैं। इन देशों का तेल और गैस मुख्य रूप से एशिया, यूरोप और अमेरिका के बाजारों में निर्यात किया जाता है। यदि किसी कारण से यह मार्ग बंद हो जाए या यहाँ से जहाजों की आवाजाही बाधित हो जाए, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

भू-राजनीतिक महत्व

होरमुज़ जलडमरूमध्य केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय शक्ति संघर्ष का केंद्र रहा है। ईरान, अमेरिका, सऊदी अरब और अन्य पश्चिमी देशों के बीच कई बार इस क्षेत्र को लेकर तनाव उत्पन्न हुआ है। ईरान कई अवसरों पर यह चेतावनी दे चुका है कि यदि उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए या उसकी सुरक्षा को खतरा हुआ, तो वह इस जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। ऐसी स्थिति में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

ईरान-इज़राइल तनाव और ऊर्जा संकट

हाल के वर्षों में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को और अधिक बढ़ा दिया है। यदि इन दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष होता है, तो इसका प्रभाव होरमुज़ जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। युद्ध या सैन्य गतिविधियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हो सकती है। इससे वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है और कई देशों में ऊर्जा संकट उत्पन्न हो सकता है। इस प्रकार यह जलडमरूमध्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो उसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिससे वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगती हैं। इससे महँगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ सकती है। इसके अलावा ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर विशेष रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

भारत के लिए महत्व

भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। भारत के आयातित तेल का एक बड़ा भाग पश्चिम एशिया से आता है और वह भी इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि इस मार्ग में बाधा आती है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, महँगाई बढ़ सकती है और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति

इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का निर्माण किया है ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में कुछ समय तक ऊर्जा आपूर्ति जारी रखी जा सके। इसके अलावा भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दे रहा है। भारत ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने का भी प्रयास कर रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।

निष्कर्ष

होरमुज़ जलडमरूमध्य विश्व की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसकी सामरिक स्थिति और संकरे आकार के कारण यह वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण इस जलडमरूमध्य का महत्व और भी बढ़ गया है। यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह आवश्यक है कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखी जाए। ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक सहयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास के माध्यम से ही भविष्य में इस प्रकार के संकटों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।


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