अठारहवीं सदी का यूरोप राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक परिवर्तन का युग था।
औद्योगिक क्रांति, अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम और फ्रांसीसी क्रांति ने “स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व” के विचारों को जन्म दिया।
इसी दौर में एक ऐसी लेखिका और विचारक उभरीं जिसने मानव समाज की सबसे प्राचीन असमानता पुरुष और महिला के बीच भेदभाव को चुनौती दी।
मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट (Mary Wollstonecraft, 1759–1797), जिन्हें आधुनिक नारीवाद (Modern Feminism) की संस्थापक या जननी कहा जाता है।
- वोल्स्टनक्राफ्ट का पूरा जीवन महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और स्वतंत्रता की लड़ाई में समर्पित रहा।
उनकी रचनाएँ आज भी लैंगिक समानता, नागरिक अधिकारों और नैतिक स्वतंत्रता की दिशा में मार्गदर्शक हैं।
जीवन परिचय (Life and Background)
- मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट का जन्म 27 अप्रैल 1759 को लंदन में हुआ।
उनका परिवार मध्यम वर्ग का था, किंतु पिता की आर्थिक स्थिति और व्यवहार अस्थिर था।
बचपन में ही उन्होंने घरेलू हिंसा और स्त्रियों पर अत्याचार को प्रत्यक्ष देखा, जिससे उनमें अन्याय के प्रति विद्रोह की भावना जागी। - उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा निजी प्रयासों से प्राप्त की। युवावस्था में उन्होंने शिक्षिका, अनुवादक और लेखिका के रूप में कार्य किया।
वोल्स्टनक्राफ्ट ने विवाह संस्था और समाज में स्त्रियों की स्थिति पर गहराई से चिंतन किया और यही उनके नारीवादी विचारों का आधार बना। - उनकी मृत्यु 1797 में हुई, प्रसव के कुछ दिन बाद। किंतु अपने 38 वर्षों के छोटे जीवन में उन्होंने जो विचार लिखे, वे आने वाली सदियों के लिए स्त्री-मुक्ति के घोषणापत्र बन गए।

प्रमुख कृतियाँ (Major Works of Mary Wollstonecraft)
मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट की रचनाएँ साहित्य, दर्शन और समाजशास्त्र तीनों के संगम पर स्थित हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
- Thoughts on the Education of Daughters (1787)
- यह उनकी पहली पुस्तक थी।
- इसमें उन्होंने लड़कियों की शिक्षा की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की और शिक्षा सुधार की आवश्यकता बताई।
- Mary: A Fiction (1788)
- यह उनका पहला उपन्यास था।
- इसमें एक ऐसी नायिका का चित्रण है जिसे आर्थिक कारणों से एक प्रेमहीन विवाह के लिए बाध्य किया जाता है।
- यह रचना महिलाओं की आर्थिक निर्भरता और सामाजिक विवशता की आलोचना करती है।
- A Vindication of the Rights of Man (1790)
- यह पुस्तक एडमंड बर्क के “Reflections on the Revolution in France” का उत्तर थी।
- इसमें वोल्स्टनक्राफ्ट ने राजशाही, अभिजात वर्ग और भतीजावाद की निंदा की तथा गणतंत्रवाद (Republicanism) की वकालत की।
- उन्होंने यह प्रश्न उठाया कि जब क्रांति “मानव अधिकारों” की बात करती है तो महिलाओं को इसमें क्यों शामिल नहीं किया गया?
- A Vindication of the Rights of Woman (1792)
- यह उनकी सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक रचना है।
- इसमें उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, स्वतंत्रता और समान राजनीतिक अधिकारों की मांग की।
- उन्होंने कहा कि “शिक्षित महिलाएँ न केवल अच्छी पत्नियाँ और माताएँ होंगी, बल्कि राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएँगी।”
- Maria, or The Wrongs of Woman (1798)
- यह मरणोपरांत प्रकाशित हुई।
- इसमें एक महिला की कहानी है जिसे उसका पति पागलखाने में बंद कर देता है।
- इसे उनकी सबसे कट्टर नारीवादी कृति माना जाता है क्योंकि इसमें विवाह और पुरुष प्रभुत्व की कठोर आलोचना की गई है।
फ्रांसीसी क्रांति और धार्मिक प्रभाव (Influences on Wollstonecraft)
- मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट फ्रांसीसी क्रांति से गहराई से प्रभावित थीं।
- उन्होंने क्रांति के नारों — स्वतंत्रता, समानता, भ्रातृत्व — को महिलाओं पर भी लागू करने की माँग की।
A Vindication of the Rights of Woman में उन्होंने कहा कि “राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं में ऐसा सुधार होना चाहिए जो महिलाओं के जीवन को समान रूप से प्रभावित करे।” - उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति को लैंगिक समानता और स्वतंत्रता की पहली बड़ी अभिव्यक्ति माना।
- इसी कारण उन्हें “फ्रांसीसी क्रांति की संतान” कहा गया।
वोल्स्टनक्राफ्ट “रिचर्ड प्राइस” से प्रभावित थीं, जो Rational Dissenters आंदोलन के प्रमुख नेता थे।
यह आंदोलन चर्च और राज्य के अलगाव तथा तर्कवाद (Rationalism) की प्रधानता का समर्थक था।
रिचर्ड प्राइस के विचारों ने वोल्स्टनक्राफ्ट को यह समझाया कि नैतिकता और स्वतंत्रता तर्कसंगत विचार पर आधारित होनी चाहिए, न कि धार्मिक आदेशों पर।
राजनीतिक और सामाजिक विचार (Political & Social Philosophy)
मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट के विचार आधुनिक लोकतंत्र, समानता और शिक्षा के मूल्यों से जुड़े हुए हैं।
उनके दर्शन के प्रमुख विषय निम्नलिखित हैं —
महिलाओं पर विचार (Views on Women)
- वोल्स्टनक्राफ्ट ने ज्याँ जैक रूसो के इस मत का विरोध किया कि पुरुषों और महिलाओं की प्रकृति अलग-अलग होती है और महिलाएँ केवल “भावनात्मक” प्राणी हैं।
उन्होंने कहा कि “महिलाएँ पुरुषों से कम नहीं हैं, यदि वे कम दिखाई देती हैं तो यह केवल शिक्षा और अवसरों की कमी के कारण है।”
उनका मानना था कि महिलाएँ बुद्धिमान, संवेदनशील और नैतिक निर्णय लेने में पुरुषों के समान सक्षम हैं। - उनकी रचना A Vindication of the Rights of Woman ने यह स्थापित किया कि महिलाएँ भी “व्यक्ति” (Person) हैं, वस्तु नहीं।
उनका यह कथन ऐतिहासिक बन गया —
“I do not wish women to have power over men, but over themselves.”
(“मैं नहीं चाहती कि महिलाओं का पुरुषों पर अधिकार हो, बल्कि खुद पर हो।”)
शिक्षा पर विचार (Views on Education)
- मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट के अनुसार, “शिक्षा वह साधन है जिससे मनुष्य अपने विवेक, तर्क और नैतिकता का विकास करता है।”
उन्होंने कहा कि पुरुष और महिला दोनों को समान शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
उनके अनुसार, “यदि महिलाओं को शिक्षित किया जाए, तो वे बेहतर नागरिक, अच्छी माताएँ और जागरूक मनुष्य बनेंगी।” - उन्होंने Thoughts on the Education of Daughters में यह भी लिखा कि गरीब और मध्यम वर्ग की लड़कियों को व्यावहारिक एवं नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।
उनके लिए शिक्षा केवल पुस्तक ज्ञान नहीं थी, बल्कि स्वतंत्र सोच और नैतिक जिम्मेदारी का प्रशिक्षण था।
स्वतंत्रता और समानता पर विचार (Liberty and Equality)
- वोल्स्टनक्राफ्ट का पूरा राजनीतिक दर्शन “स्वतंत्रता, समानता और सदाचार” (Liberty, Equality and Virtue) के त्रिकोण पर आधारित है।
उन्होंने तर्क दिया कि स्त्री और पुरुष दोनों में “तर्क” की समान क्षमता है, इसलिए दोनों को समान अधिकार मिलने चाहिए।
उनका विश्वास था कि किसी समाज की नैतिकता तभी पूर्ण हो सकती है जब उसमें महिलाएँ भी बराबर की सहभागी हों। - उन्होंने आर्थिक स्वतंत्रता का समर्थन किया और कहा कि “स्त्रियों को आत्मनिर्भर बनाना ही समाज को नैतिक रूप से मजबूत बनाएगा।”
वे जॉन लॉक और एडम स्मिथ की तरह मुक्त उद्यम (Free Enterprise) और प्रगति (Progress) की समर्थक थीं।
अधिकार और प्रतिनिधित्व पर विचार (Rights and Representation)
- वोल्स्टनक्राफ्ट ने महिलाओं के अधिकारों को “मानव अधिकारों” का हिस्सा बताया।
उनका कहना था कि “महिलाओं की मुक्ति पुरुषों की मुक्ति से अलग नहीं हो सकती — दोनों की स्वतंत्रता एक-दूसरे से जुड़ी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएँ केवल परिवार या घर की इकाई नहीं हैं, बल्कि वे समाज की पूर्ण नागरिक हैं। - उनके अनुसार महिलाओं के अधिकार एक “सामाजिक समझौता” (Social Compact) के रूप में देखे जाने चाहिए, जिसमें उन्हें प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त हो।
विवाह और परिवार पर दृष्टिकोण (Marriage & Family)
- वोल्स्टनक्राफ्ट ने विवाह को “साझेदारी और सहचर्य का बंधन” माना, न कि केवल एक सामाजिक अनुबंध।
उनका मानना था कि विवाह में प्रेम, करुणा और समानता का स्थान होना चाहिए।
उन्होंने परिवार को राज्य की नींव कहा, लेकिन यह भी जोड़ा कि परिवार तभी मजबूत होगा जब उसमें दोनों साथी बराबर हों।
नारीवाद में योगदान (Contribution to Feminism)
मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट की सबसे बड़ी देन यह थी कि उन्होंने महिलाओं के लिए समानता की माँग “भावनाओं” नहीं बल्कि “तर्क” के आधार पर की।
उनका नारीवाद केवल सामाजिक नहीं, बल्कि दार्शनिक भी था।
- उन्होंने यह स्थापित किया कि महिलाओं की अधीनता प्राकृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से थोपी गई है।
- उनकी रचना A Vindication of the Rights of Woman ने उदार नारीवाद (Liberal Feminism) की नींव रखी।
- 19वीं और 20वीं शताब्दी के नारीवादी आंदोलनों जैसे सुफ्राजेट आंदोलन (Suffragette Movement) और स्त्री शिक्षा आंदोलन ने उनके विचारों से प्रेरणा ली।
महत्व और विरासत (Legacy and Influence)
- मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट की मृत्यु 1797 में प्रसव के दौरान हुई, लेकिन उनकी विचारधारा ने आने वाली पीढ़ियों को दिशा दी।
उनकी पुत्री मैरी शेली (Mary Shelley) प्रसिद्ध उपन्यास Frankenstein की लेखिका थीं जो स्वयं महिला सृजनशीलता का प्रतीक बनीं। - आज भी नारीवाद के अध्ययन में वोल्स्टनक्राफ्ट को एक मूल विचारक के रूप में पढ़ाया जाता है।
उनकी रचनाएँ महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नागरिकता के विमर्श का आधार हैं।
उन्होंने समाज को यह सिखाया कि “समानता केवल अधिकार नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व भी है।”
निष्कर्ष (Conclusion)
मैरी वोल्स्टनक्राफ्ट केवल एक लेखिका नहीं, बल्कि मानवता की आवाज़ थीं।
उन्होंने उस समय बोलने का साहस किया जब समाज महिलाओं की शिक्षा और स्वतंत्रता को पाप समझता था।
उनका जीवन संदेश देता है कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब स्त्रियाँ बराबर भागीदार हों।
उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना A Vindication of the Rights of Woman आज भी यह प्रश्न पूछती है “क्या महिलाएँ मनुष्य नहीं हैं?” उनका उत्तर था “हाँ, वे हैं और उन्हें वैसा ही सम्मान मिलना चाहिए।”
वोल्स्टनक्राफ्ट की विचारधारा आज भी प्रासंगिक है क्योंकि लैंगिक समानता की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई।
उनकी लेखनी हमें सिखाती है कि स्वतंत्रता, समानता और न्याय केवल तब सार्थक होंगे जब समाज में स्त्रियों को भी समान अवसर और सम्मान मिलेगा।
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