समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान में “शक्ति” (Power) एक केन्द्रीय अवधारणा है। यह किसी व्यक्ति या समूह की दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करने की क्षमता को दर्शाती है, चाहे वे इसका विरोध ही क्यों न करें।
शक्ति समाज के संगठन, नीति-निर्माण और वर्ग-संबंधों की दिशा तय करती है।
यह रचनात्मक (developmental) भी हो सकती है और विनाशकारी (oppressive) भी।
प्रमुख विचारक
- कार्ल मार्क्स: “प्रत्येक युग के प्रमुख विचार, उसके शासक वर्ग के विचार होते हैं।”
- मैक्स वेबर: “शक्ति वह संभावना है कि सामाजिक संबंध के भीतर कोई व्यक्ति विरोध के बावजूद अपनी इच्छा पूरी कर सके।”
- मिशेल फूको: “शक्ति हर जगह है; यह सब कुछ निगलती नहीं, बल्कि हर जगह से उत्पन्न होती है।”
- सी. राइट मिल्स: “शक्तिशाली अभिजात वर्ग वे पुरुष हैं जिनकी स्थिति उन्हें पूरे समाज पर प्रभाव डालने की अनुमति देती है।”
शक्ति के प्रमुख सिद्धांत (Theories of Power)
- मार्क्सवादी सिद्धांत (Marxist Theory of Power)
- शक्ति की जड़ आर्थिक संरचना में होती है।
- पूंजीपति वर्ग (Bourgeoisie) उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण रखता है और श्रमिक वर्ग (Proletariat) का शोषण करता है।
- राज्य पूंजीपति वर्ग का औज़ार बन जाता है जो अपने हितों की रक्षा करता है।
- लक्ष्य: वर्ग-संघर्ष के माध्यम से वर्गहीन समाज की स्थापना।
- वेबर का शक्ति सिद्धांत (Weber’s Theory of Authority and Power)
- शक्ति अधिकार (Authority) से उत्पन्न होती है।
- अधिकार के तीन प्रकार:
- पारंपरिक अधिकार: परंपरा, वंश या धार्मिक मान्यता पर आधारित (जैसे राजा)।
- करिश्माई अधिकार: व्यक्ति के व्यक्तित्व, प्रेरणा या आकर्षण पर आधारित (जैसे गांधी)।
- कानूनी–तर्कसंगत अधिकार: नियम, संविधान और कानून पर आधारित (जैसे आधुनिक नौकरशाही)।
- फूको का शक्ति सिद्धांत (Foucault’s Power Theory)
- शक्ति केवल व्यक्ति या संस्थान में केंद्रित नहीं होती; यह सामाजिक प्रथाओं, भाषा, और संवाद में व्याप्त होती है।
- शक्ति का संचालन “ज्ञान” के माध्यम से होता है — जिसे फूको ने कहा, “Knowledge is Power.”
- समाज में अनुशासन (Discipline) और नियंत्रण (Surveillance) शक्ति के रूप हैं।
अभिजात वर्ग सिद्धांत (Elite Theory of Power)
- समाज में शक्ति समान रूप से वितरित नहीं होती, बल्कि कुछ अल्पसंख्यक अभिजात वर्ग के हाथों में केंद्रित रहती है।
- ये अभिजात वर्ग- राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य या धार्मिक हो सकते हैं।
- वे सूचना, मीडिया, शिक्षा और नीति निर्माण पर नियंत्रण रखकर अपने हितों की रक्षा करते हैं।
प्रमुख योगदानकर्ता
- विल्फ्रेडो पेरेटो (Vilfredo Pareto) – अभिजात वर्ग का परिसंचरण
- अभिजात वर्ग स्थायी नहीं होते।
- समय के साथ नए अभिजात वर्ग उभरते हैं और पुराने पतन होते हैं।
- यह “परिसंचरण” (Circulation of Elites) सामाजिक स्थिरता बनाए रखता है।
- गेटानो मोस्का (Gaetano Mosca) – शासक वर्ग सिद्धांत
- हर समाज में एक छोटा शासक वर्ग (Ruling Class) निर्णय लेने की शक्ति रखता है।
- इस वर्ग के पास संसाधनों और बलपूर्वक साधनों का नियंत्रण होता है।
- यह अभिजात वर्ग आम जनता से ऊपर शक्ति बनाए रखता है।
- रॉबर्ट मिशेल्स (Robert Michels) – कुलीनतंत्र का लौह नियम (Iron Law of Oligarchy)
- सभी संगठन अंततः कुछ नेताओं के नियंत्रण में आ जाते हैं।
- संसाधन और जानकारी की असमानता के कारण यह अपरिहार्य है।
- लोकतंत्र भी धीरे-धीरे कुलीनतंत्र में बदल जाता है।
शक्ति के अन्य दृष्टिकोण (Other Theories of Power)
| सिद्धांत | मुख्य विचार |
| बहुलवादी सिद्धांत (Pluralist Theory) | शक्ति कई समूहों में विभाजित होती है; कोई एक समूह पूर्ण नियंत्रण में नहीं। (रॉबर्ट डाहल) |
| प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद (Symbolic Interactionism) | शक्ति सामाजिक अंतःक्रिया और साझा अर्थों से उत्पन्न होती है। |
| नारीवादी सिद्धांत (Feminist Theory) | शक्ति का वितरण लिंग आधारित है; इतिहास में पुरुषों ने महिलाओं को वंचित रखा है। |
| उत्तरआधुनिक सिद्धांत (Postmodern Theory) | शक्ति स्थिर नहीं; यह निरंतर बदलती और संदर्भानुसार परिभाषित होती है। |
समकालीन अभिजात्यवाद (Contemporary Elite Theories)
- सी. राइट मिल्स (C. Wright Mills) – Power Elite (1956)
- अमेरिका जैसे समाजों में एक छोटा परस्पर जुड़ा हुआ वर्ग- सरकारी, कॉर्पोरेट और सैन्य अभिजात वर्ग शासन नियंत्रित करता है।
- रॉबर्ट पुटनम (Robert Putnam) – Elite Networks
- अभिजात वर्ग एक नेटवर्क बनाते हैं जो सूचना साझा करने, नीतियों पर सहयोग करने और अपने हितों की रक्षा करते हैं।
- थॉमस डाई (Thomas Dye) – Iron Triangle
- सरकार, व्यापार और नौकरशाही का त्रिकोणीय गठबंधन नीतिनिर्माण को नियंत्रित करता है।
अभिजात वर्ग और लोकतंत्र (Elites and Democracy)
लोकतांत्रिक अभिजात्यवाद (Democratic Elitism)
- यह मान्यता कि लोकतंत्र में भी अभिजात वर्ग आवश्यक है, नेतृत्व, निर्णय-निर्धारण और स्थिरता के लिए।
- यदि अभिजात वर्ग उत्तरदायी हो और जनहित में कार्य करे, तो यह लोकतंत्र को मज़बूत बनाता है।
- परंतु यदि यह स्वार्थी और गैर–जिम्मेदार हो, तो लोकतंत्र के लिए खतरा बन जाता है।
निष्कर्ष
- शक्ति सामाजिक संगठन का केन्द्रीय तत्व है।
- अभिजात वर्ग सिद्धांत यह दर्शाता है कि शक्ति कुछ व्यक्तियों या समूहों में केंद्रित रहती है।
- आधुनिक युग में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था, मीडिया, और कॉर्पोरेट संरचनाओं ने इस सिद्धांत की प्रासंगिकता बढ़ाई है।
- शक्ति की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि इसका प्रयोग जनहित के लिए हो या स्वहित के लिए।
प्रमुख विचारक और कृतियाँ
| विचारक | मुख्य विचार | प्रमुख कृति |
| विल्फ्रेडो पेरेटो | अभिजात वर्ग का परिसंचरण | The Mind and Society (1916) |
| गेटानो मोस्का | शासक वर्ग | The Ruling Class (1896) |
| रॉबर्ट मिशेल्स | कुलीनतंत्र का लौह नियम | Political Parties (1911) |
| मिशेल फूको | शक्ति सर्वव्यापी | Discipline and Punish (1975) |
| सी. राइट मिल्स | पावर एलीट | The Power Elite (1956) |
| रॉबर्ट डाहल | बहुलवादी शक्ति सिद्धांत | Who Governs? (1961) |
| थॉमस डाई | लौह त्रिकोण सिद्धांत | Top-Down Policymaking (1972) |
| लुसियन पाई | राजनीतिक विकास और आधुनिकीकरण | Aspects of Political Development (1966) |
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