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प्लेटो का दार्शनिक राजा (Philosopher King)

प्लेटो का दार्शनिक राजा (Philosopher King)

यह एक ऐसा शासक है जो बुद्धिमान दार्शनिक भी है और न्यायपूर्ण राजा भी। प्लेटो कहते हैं: “जब तक दार्शनिक राजा न बनें, दुनिया में शांति नहीं आएगी।” यह विचार उनके ग्रंथ रिपब्लिक (The Republic) में है।

मूल विचार 

  • सामान्य राजा: पैसा, ताकत, वोट के लिए शासन करते हैं। गलतियां करते हैं क्योंकि अज्ञानी होते हैं।

  • दार्शनिक राजा: सच्चाई जानते हैं। वे दुनिया के पीछे छिपे सच्चे नियम (Forms/The Ideas) समझते हैं—जैसे सच्चा न्याय, सच्ची भलाई।

  • उदाहरण: जैसे डॉक्टर बीमारी समझकर इलाज करता है, वैसे दार्शनिक राजा समाज की समस्याओं का सही इलाज करते हैं।

  • क्यों जरूरी? प्लेटो कहते हैं—लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) में भीड़ गलत नेता चुनती है। असली शासक वही जो ज्ञानी हो।

1. उत्पत्ति: प्लेटो को यह आइडिया क्यों आया? 

प्लेटो (427-347 BC) एथेंस के थे। वहां:

  • पेलोपोनेसियन युद्ध हारे।

  • लोकतंत्र में सुकरात (उनके गुरु) को जहर देकर मार दिया।

  • प्लेटो निराश: “लोग अज्ञानी हैं, गलत राजा चुनते हैं।”
    समाधान: राज्य त्रिभागी (3 भाग):

  • शासक (1%): दिमाग (बुद्धि)

  • योद्धा (सहायक): दिल (साहस)

  • किसान/व्यापारी: पेट (इच्छाएं)
    हर वर्ग अपना काम करे = न्याय

गुफा की कहानी (Allegory of Cave – सबसे आसान):

  • लोग गुफा में बंधे, दीवार पर छाया देखते हैं—सोचते यही सच्चाई

  • एक व्यक्ति बाहर निकलता है, सूरज (सच्चाई) देखता है।

  • लौटकर बताता है, लोग मारने को तैयार।
    मतलब: दार्शनिक राजा = बाहर निकला व्यक्ति। समाज को सच्चाई दिखाने लौटते हैं।

2. मुख्य गुण: ऐसा राजा कैसा हो? 

  • ज्ञान प्रेमी: पैसा/ताकत नहीं, सच्चाई चाहते।

  • निष्काम: शासन करना पसंद नहीं, कर्तव्य से करते।

  • आत्मा का राजा: आत्मा 3 भाग—तर्क जीतता है (दिमाग > दिल > पेट)।

  • डॉक्टर जैसा: कानून लचीले, परंपरा अज्ञान है। समाज के रोग ठीक करते।
    उदाहरण: IAS अधिकारी जो भ्रष्टाचार रोकने ईमानदारी से काम करे।

3. चयन और शिक्षा: कैसे बनें? (Selection & Education – 50 साल का कोर्स!)

जन्म से चयन: “स्वर्ण आत्मा” (Myth of Metals)—जैसे सोना, चांदी।

  • रक्षक वर्ग: कोई पैसा/परिवार नहीं (सब शेयर)। महिलाएं बराबर।
    शिक्षा स्टेज (बिल्कुल स्टेप बाय स्टेप):

  1. 0-18 साल: गाना-बजाना (आत्मा शुद्ध) + व्यायाम (शरीर मजबूत)।

  2. 18-20: सेना ट्रेनिंग।

  3. 20-30: मैथ्स (ज्यामिति, नंबर्स)—दिमाग अमूर्त सोच।

  4. 30-35: डायलेक्टिक (सवाल-जवाब)—सच्चे Forms समझो।

  5. 35-50: प्रैक्टिस—जज, आर्मी लीड।

  6. 50+: राजा बनो!

खास: शादी/बच्चे राज्य तय करे (eugenics—अच्छे बच्चे)।

4. आदर्श राज्य में भूमिका (Role in Kallipolis)

  • शासक क्लास लीड: कानून बनाओ, वर्ग बैलेंस रखो।

  • न्याय: हर वर्ग अपना काम (डॉक्टर सर्जरी न करे व्यापार)।

  • पूर्ण शक्ति लेकिन अच्छी: ज्ञान है तो भ्रष्ट नहीं होंगे।
    उदाहरण: भारत का IAS—मेरिट से चुने, देश सेवा।

 

6. आलोचनाएं: क्यों परफेक्ट नहीं? 

प्लेटो के समय:

  • Aristotle (गुरु की आलोचना!): “अव्यावहारिक। दार्शनिक सोचते हैं, काम नहीं करते। पैसा शेयर? असंभव। मिडिल क्लास भूल गए।”

आधुनिक आसान आलोचनाएं:

  • Elitist (अभिजात्य): सिर्फ 1% शासक? किसान बेवकूफ? समानता खत्म

  • Totalitarian (तानाशाही): पूर्ण शक्ति—no checks। दार्शनिक भी भ्रष्ट हो सकते (“Power corrupts”)।

  • Karl Popper (1945): “प्लेटो तानाशाहों का पिता।”

    • Holism: व्यक्ति > समाज? नहीं, व्यक्ति को कुर्बान करो।

    • Censorship: किताबें/गीत बैन—फ्री स्पीच मरेगी।

    • Caste: कांस्य आत्मा = गुलाम जैसा।

    • उदाहरण: हिटलर/स्टालिन ने “वैज्ञानिक शासन” कहा।

  • Women Equality?: सिर्फ कागज पर—महिलाएं “कमजोर पुरुष”।

  • भारत में: विविध देश में 1 मॉडल? लोकतंत्र में वोट जरूरी।

समर्थन: प्लेटो ने भ्रष्ट लोकतंत्र देखा। आज टेक्नोक्रेट्स (सिंगापुर) सफल।


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