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मोदी सरकार के 12 वर्ष: सुशासन के नए प्रतिमान और निरंतरता का संकल्प

भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ कालखंड ऐसे होते हैं जो न केवल वर्तमान को आकार देते हैं, बल्कि भविष्य के लिए नए मानक भी स्थापित करते हैं। मोदी सरकार के शासन का 12वां वर्ष इसी श्रेणी में आता है। यह वर्ष केवल एक सत्ता की निरंतरता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक मजबूत इच्छाशक्ति वाली सरकार अपनी नीतियों और कार्यान्वयन के माध्यम से राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के संकल्प को दोहरा सकती है। इस अवधि के दौरान सरकार ने न केवल अपनी पुरानी सफलताओं को सुदृढ़ किया है, बल्कि सुशासन, नवाचार और समावेशी विकास के ऐसे नए मापदंड निर्धारित किए हैं, जिन्हें पार करना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

राजनीतिक स्थिरता और सुशासन का समन्वय:

मोदी सरकार के 12वें वर्ष की सबसे बड़ी विशेषता राजनीतिक स्थिरता और सुधारवादी नीतियों के बीच का अनूठा तालमेल है। अक्सर यह देखा जाता है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारें जड़ता का शिकार हो जाती हैं, लेकिन इस शासनकाल में इसके विपरीत एक नई ऊर्जा और सक्रियता देखने को मिली है। सरकार ने ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के अपने मूल मंत्र को धरातल पर उतारने के लिए डिजिटल क्रांति का सहारा लिया है। प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए तकनीक का जो व्यापक उपयोग किया गया है, उसने बिचौलियों की भूमिका को लगभग समाप्त कर दिया है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक सीधे सहायता पहुँचाना एक ऐसा चमत्कार है, जिसने न केवल सरकारी खजाने की बर्बादी को रोका है, बल्कि नागरिकों का लोकतंत्र में विश्वास भी बहाल किया है।

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और कानूनी सुधार

इस 12वें वर्ष की एक ऐतिहासिक उपलब्धि भारत की कानूनी प्रणाली का ‘भारतीयकरण’ है। दशकों से चले आ रहे औपनिवेशिक काल के कानूनों (IPC, CrPC और Evidence Act) को बदलकर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लागू करना केवल नाम बदलना नहीं था। यह भारत की न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने और दंड की जगह ‘न्याय’ को प्राथमिकता देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह सुधार सरकार के उस बड़े दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसके तहत वह भारत को पुराने औपनिवेशिक बोझ से मुक्त कर एक स्वाभिमानी राष्ट्र के रूप में स्थापित करना चाहती है।

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बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव और आधुनिक भारत का उदय:

भारत के भौतिक परिदृश्य में पिछले कुछ वर्षों में जो बदलाव आया है, वह अभूतपूर्व है। बुनियादी ढांचे का निर्माण अब केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक गतिशीलता को नई उड़ान देने का माध्यम बन गया है। गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत परिवहन के विभिन्न माध्यमों को एक साथ जोड़ना सरकार की दूरगामी सोच का परिणाम है। एक्सप्रेसवे का जाल, रेलवे का आधुनिकीकरण और नए हवाई अड्डों का निर्माण न केवल यात्रा को सुगम बना रहा है, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत को कम करके वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बढ़ा रहा है। यह 12वां वर्ष उन बड़ी परियोजनाओं के पूरा होने का साक्षी रहा है, जो दशकों से लंबित थीं।

आर्थिक सशक्कीकरण और ‘मेक इन इंडिया’ की नई ऊंचाई:

आर्थिक मोर्चे पर भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। मोदी सरकार ने इस 12वें वर्ष में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लाई गई पीएलआई (PLI) योजनाओं ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। आज भारत न केवल अपने लिए उत्पादन कर रहा है, बल्कि मोबाइल फोन से लेकर रक्षा उपकरणों तक का निर्यात भी कर रहा है। सरकार की आर्थिक नीतियों ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक नई दिशा दी है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन गया है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सामरिक मजबूती:

सरकार के 12वें वर्ष में रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ की गूँज पूरी दुनिया में सुनाई दी है। रक्षा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने न केवल घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया, बल्कि रक्षा निर्यात के मामले में भी नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। ‘आईएनएस विक्रांत’ जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत और ‘तेजस’ जैसे लड़ाकू विमानों की सफलता ने भारत की सामरिक शक्ति को एक नई पहचान दी है। सीमाओं पर बुनियादी ढांचे का निर्माण, विशेष रूप से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में, यह सुनिश्चित करता है कि भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

सामाजिक समावेश और अंतिम व्यक्ति तक पहुँच:

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ के विचार को मोदी सरकार ने अपने 12वें वर्ष में पूरी संवेदनशीलता के साथ लागू किया है। सरकार की योजनाएं अब किसी वर्ग या जाति विशेष के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए हैं जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया था। ‘नल से जल’, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं ने ग्रामीण भारत के जीवन स्तर में आमूल-चूल परिवर्तन किया है। स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और दवाओं की कीमतों में कमी ने गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच प्रदान किया है। नारी शक्ति को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियां, जैसे मुद्रा योजना और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन, ने समाज के मौलिक ढांचे में एक सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण और गौरव की बहाली:

मोदी सरकार के इस कालखंड को भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के रूप में भी देखा जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प और उज्जैन के महाकाल लोक का विस्तार—ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की वापसी के प्रतीक हैं। सरकार ने यह संदेश दिया है कि आधुनिकता और विकास का अर्थ अपनी जड़ों को भूलना नहीं है। यह सांस्कृतिक आत्मविश्वास ही है जो आज भारत को वैश्विक मंच पर सिर उठाकर बात करने की शक्ति देता है।

वैश्विक पटल पर भारत का उदय और रणनीतिक स्वायत्तता:

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि अब एक ऐसी शक्ति की है जो केवल दूसरों के निर्णयों का अनुसरण नहीं करती, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करती है। मोदी सरकार के 12वें वर्ष में भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए प्रमुख वैश्विक देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित किया है। ग्लोबल साउथ की आवाज बनना और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दुनिया का नेतृत्व करना भारत की नई पहचान बन गई है। भारत आज दुनिया के लिए एक ‘संकटमोचक’ और ‘विश्व मित्र’ के रूप में उभरा है।

निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर एक दृढ़ कदम

निष्कर्षतः, मोदी सरकार का 12वां वर्ष केवल उपलब्धियों की एक सूची नहीं है, बल्कि यह एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक दृढ़ कदम है। सरकार ने यह सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व स्पष्ट हो और संकल्प अटूट, तो जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान संभव है। यह शासनकाल भविष्य के लिए सुशासन का एक ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है जो आने वाले कई दशकों तक भारत की प्रगति का आधार बनेगा। 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की यात्रा में यह वर्ष एक मील का पत्थर साबित होगा। यह शासन न केवल आंकड़ों में बदलाव ला रहा है, बल्कि देश की सामूहिक चेतना और आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दे रहा है।


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