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वाल्ट्ज़ का संरचनात्मक यथार्थवाद और वालरस्टीन का विश्व-प्रणाली सिद्धांत: एक आलोचनात्मक विश्लेषण

संरचनात्मक यथार्थवाद और विश्व-प्रणाली सिद्धांत

यह लेख मुख्यतः Winner Agung Pribadi द्वारा लिखित “On Structural Theories of International Relations: Examining Waltzian Structural Realism and Wallerstein’s World System Theory” नामक शोध लेख में प्रस्तुत तर्कों, वैचारिक ढाँचे और सैद्धान्तिक विमर्श पर आधारित है। तथापि, प्रस्तुत अध्ययन केवल उक्त लेख का अनुवाद या पुनरुत्पादन नहीं है, बल्कि उसमें व्यक्त संरचनात्मक यथार्थवाद और विश्व-प्रणाली सिद्धांत की आलोचना को Gramsci, Robert W. Cox तथा Alexander Wendt जैसे विद्वानों के दृष्टिकोण से आगे विस्तारित करते हुए एक स्वतंत्र और आलोचनात्मक व्याख्या प्रस्तुत करता है।

अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations – IR) का अध्ययन आरंभ से ही इस प्रश्न के इर्द-गिर्द घूमता रहा है कि विश्व राजनीति को समझने का सबसे उपयुक्त स्तर (level of analysis) क्या है। क्या अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को व्यक्तियों और नेताओं के निर्णयों से समझा जाए, या राज्यों की आंतरिक संरचनाओं से, अथवा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसी किसी व्यापक संरचना से?

इस बहस के केंद्र में संरचना (Structure) और एजेंसी (Agency) का प्रश्न रहा है। कुछ विद्वान यह मानते हैं कि राज्य और व्यक्ति स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं, जबकि अन्य के अनुसार उनकी भूमिका और व्यवहार को एक बड़ी संरचना नियंत्रित करती है। इसी दूसरे दृष्टिकोण से संरचनात्मक सिद्धांतों (Structural Theories) का विकास हुआ।

इस लेख में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के दो प्रमुख संरचनात्मक सिद्धांतों-

  1. केनेथ वाल्ट्ज़ का संरचनात्मक यथार्थवाद (Structural Realism / Neorealism)
  2. इमैनुएल वालरस्टीन का विश्वप्रणाली सिद्धांत (World System Theory)

का तुलनात्मक और आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। दोनों सिद्धांत अलग-अलग बौद्धिक परंपराओं से आते हैं, फिर भी वे इस बात पर सहमत हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझने के लिए संरचना को केंद्रीय स्थान देना आवश्यक है

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संरचनात्मक दृष्टिकोण का विकास

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन में व्यवहारवादी (Behavioralist) दृष्टिकोण का प्रभुत्व रहा। इस दृष्टिकोण का मानना था कि वैज्ञानिक ज्ञान केवल प्रत्यक्ष अवलोकन, मापन और आँकड़ों के विश्लेषण से प्राप्त किया जा सकता है। इसके अंतर्गत अनुमानात्मक (Inductive) पद्धति अपनाई गई अर्थात पहले तथ्यों का संग्रह, फिर सिद्धांत निर्माण।

लेकिन शीघ्र ही इस दृष्टिकोण की आलोचना होने लगी। आलोचकों का तर्क था कि व्यवहारवाद केवल घटनाओं का विवरण देता है, उनके पीछे कार्यरत अदृश्य शक्तियों और संरचनाओं को नहीं समझ पाता। इसी असंतोष से संरचनात्मक दृष्टिकोण (Structural Approach) का उदय हुआ।

संरचनात्मक दृष्टिकोण की विशेषता यह है कि:

  • यह प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न देने वाली संरचनाओं पर ध्यान देता है
  • यह निगमनात्मक (Deductive) पद्धति अपनाता है
  • यह संपूर्ण प्रणाली (System) को विश्लेषण की इकाई मानता है

संरचनावाद का मूल तर्क यह है कि व्यक्तियों या राज्यों का व्यवहार उस संरचना से निर्धारित होता है, जिसमें वे स्थित होते हैं

संरचनात्मक यथार्थवाद : केनेथ वाल्ट्ज़ का सिद्धांत

केनेथ वाल्ट्ज़ का संरचनात्मक यथार्थवाद, पारंपरिक यथार्थवाद (Classical Realism) की सीमाओं की प्रतिक्रिया के रूप में विकसित हुआ। पारंपरिक यथार्थवाद युद्ध और संघर्ष को मानव स्वभाव की बुराइयों से जोड़ता था। वाल्ट्ज़ ने इस व्याख्या को अवैज्ञानिक और अपर्याप्त माना।

अपनी प्रसिद्ध कृति Man, the State and War (1959) में वाल्ट्ज़ ने युद्ध के तीन स्तर बताए:

  1. व्यक्ति (Man)
  2. राज्य (State)
  3. अंतरराष्ट्रीय संरचना (International System)

वाल्ट्ज़ के अनुसार, युद्ध को सही मायनों में केवल तीसरे स्तर, अर्थात अंतरराष्ट्रीय संरचना के माध्यम से ही समझा जा सकता है।

अराजकता (Anarchy) और संरचना

वाल्ट्ज़ का केंद्रीय तर्क यह है कि अंतरराष्ट्रीय प्रणाली अराजक (Anarchic) है। इसका अर्थ अव्यवस्था नहीं, बल्कि यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई सर्वोच्च सत्ता नहीं है।

इस अराजक व्यवस्था में:

  • सभी राज्य संप्रभु हैं
  • कोई भी राज्य दूसरे को आदेश नहीं दे सकता
  • सभी राज्य अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं (Self-help system)

यह अराजक संरचना राज्यों को शक्ति-संचय, संतुलन (Balance of Power) और संघर्ष की ओर प्रेरित करती है।

संरचना की परिभाषा : वाल्ट्ज़ का न्यूनतावाद

वाल्ट्ज़ संरचना को न्यूनतम (Minimalist) रूप में परिभाषित करते हैं। उनके अनुसार संरचना तीन तत्वों से बनती है:

  1. संगठन का सिद्धांत (Anarchy vs Hierarchy)
  2. इकाइयों की समानता (राज्यों के कार्य समान हैं)
  3. क्षमताओं का वितरण (Distribution of Capabilities)

वे राज्यों की आंतरिक राजनीति, विचारधाराओं, संस्कृति और नेतृत्व को संरचना का हिस्सा नहीं मानते। इस कारण उनका सिद्धांत अत्यंत सारगर्भित और सरल, किंतु साथ ही अत्यधिक संकुचित भी बन जाता है।

विश्वप्रणाली सिद्धांत : इमैनुएल वालरस्टीन

इमैनुएल वालरस्टीन का विश्व-प्रणाली सिद्धांत मार्क्सवादी परंपरा से प्रेरित है। वे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मुख्यतः आर्थिक संरचना के संदर्भ में देखते हैं। वालरस्टीन के अनुसार, 16वीं शताब्दी से एक पूंजीवादी विश्वप्रणाली (Capitalist World System) अस्तित्व में है, जो आज भी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करती है।

विश्वप्रणाली की संरचना

विश्व-प्रणाली को वालरस्टीन तीन भागों में विभाजित करते हैं:

  1. कोर (Core) – विकसित, औद्योगिक, उच्च तकनीक और पूंजी-प्रधान देश
  2. परिधि (Periphery) – अविकसित, श्रम-प्रधान, कच्चा माल निर्यातक देश
  3. अर्धपरिधि (Semi-periphery) – कोर और परिधि के बीच स्थित देश

यह संरचना शोषणात्मक (Exploitative) है, जिसमें अधिशेष मूल्य (Surplus) परिधि से कोर की ओर प्रवाहित होता है।

संरचना और एजेंसी

वालरस्टीन के अनुसार:

  • राज्य स्वतंत्र अभिनेता नहीं हैं
  • वे विश्व-पूंजीवादी प्रणाली के उत्पाद हैं
  • उनकी नीतियाँ वैश्विक आर्थिक संरचना से निर्धारित होती हैं

इस दृष्टिकोण में वर्ग (Class) राज्य से अधिक महत्वपूर्ण इकाई बन जाता है।

दोनों सिद्धांतों की तुलना

आधारसंरचनात्मक यथार्थवादविश्वप्रणाली सिद्धांत
प्रमुख निर्धारकराजनीति और सुरक्षाअर्थव्यवस्था
संरचना का स्वरूपअराजकपदानुक्रमित
मुख्य अभिनेताराज्यवर्ग / आर्थिक क्षेत्र
परिवर्तन की संभावनाबहुत सीमितदीर्घकालिक, पर सीमित
दृष्टिकोणन्यूनतावादीसमग्र (Holistic)

संरचनात्मक सिद्धांतों की आलोचना : Gramsci, Robert W. Cox और Alexander Wendt

संरचनात्मक यथार्थवाद (Kenneth Waltz) और विश्व-प्रणाली सिद्धांत (Immanuel Wallerstein) अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संरचना को केंद्रीय विश्लेषणात्मक इकाई मानते हैं। दोनों सिद्धांत यह मानकर चलते हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति का स्वरूप राज्यों या वर्गों की स्वतंत्र इच्छा से नहीं, बल्कि एक व्यापक, वस्तुनिष्ठ और लगभग नियत (deterministic) संरचना से निर्धारित होता है।
किन्तु Gramscian ऐतिहासिक भौतिकवाद, Cox का Critical Theory और Wendt का Constructivism इन दोनों संरचनात्मक सिद्धांतों की तीन बुनियादी कमजोरियों को उजागर करते हैं:

  1. संरचना की नियतात्मक (deterministic) व्याख्या
  2. एजेंसी की भूमिका का ह्रास
  3. विचारधारात्मक (ideational) तत्वों की उपेक्षा

 

Gramsci के दृष्टिकोण से आलोचना: संरचना बनाम वर्चस्व (Hegemony)

(क) Gramsci की केंद्रीय अवधारणा: वर्चस्व (Hegemony)

Antonio Gramsci ने मार्क्सवाद को केवल आर्थिक निर्धारणवाद से बाहर निकालकर विचारधारा, संस्कृति और सहमति (consent) को सत्ता का मूल आधार बताया।
उनके अनुसार सत्ता केवल बल (coercion) से नहीं, बल्कि सहमति के निर्माण से टिकती है।

Gramsci कहते हैं:

“राज्य केवल राजनीतिक संस्था नहीं, बल्कि नागरिक समाज + राजनीतिक समाज का योग है।”

(ख) Waltz की आलोचना: अराजकता बिना विचारधारा के

Waltz का Structural Realism अंतरराष्ट्रीय संरचना को केवल अराजकता के रूप में परिभाषित करता है।
Gramsci के दृष्टिकोण से यह व्याख्या अधूरी है क्योंकि:

  • Waltz यह नहीं बताते कि अराजकता को कैसे वैध (legitimate) बनाया जाता है? क्यों कुछ शक्तियाँ नेतृत्व (leadership) करती हैं और अन्य उसे स्वीकार करती हैं?
  • शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी नेतृत्व केवल सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि उदार लोकतंत्र, मुक्त बाजार और मानवाधिकार की वैचारिक श्रेष्ठता से स्थापित हुआ

Gramsci के अनुसार यह वैचारिक वर्चस्व (ideological hegemony) है, जिसे Waltz पूरी तरह नजरअंदाज करते हैं।

(ग) Wallerstein की आलोचना: अर्थव्यवस्था के बाहर की राजनीति

Wallerstein का World System Theory Gramsci के अधिक निकट प्रतीत होता है, लेकिन फिर भी सीमित है।

  • Wallerstein: वर्चस्व को केवल आर्थिक शोषण में सीमित कर देते हैं
  • Gramsci: दिखाते हैं कि कोर देश केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि शैक्षिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक संस्थाओं के माध्यम से भी प्रभुत्व स्थापित करते हैं

उदाहरण:

  • IMF, World Bank, WTO केवल आर्थिक संस्थाएँ नहीं,
  • बल्कि नव-उदारवादी विचारधारा को सामान्य (common sense) बनाने के उपकरण हैं

इस प्रकार Gramsci यह स्पष्ट करते हैं कि
विश्व व्यवस्था केवल आर्थिक या सैन्य संरचना नहीं, बल्कि वैचारिक संरचना भी है

  1. Robert W. Cox की आलोचना : Problem-Solving Theory बनाम Critical Theory

Robert W. Cox ने Waltz और Wallerstein दोनों को एक साझा श्रेणी में रखा—
Problem-Solving Theories

उनका प्रसिद्ध कथन है: “Theory is always for someone and for some purpose.”

(क) Waltz पर Cox की आलोचना

Cox के अनुसार: मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को स्वाभाविक और अपरिवर्तनीय मानता है शक्ति-संतुलन को समस्या नहीं, बल्कि समाधान मानता है

Cox पूछते हैं: यह संरचना किसके हित में है? अराजकता किसके लिए लाभकारी है?

Cox के अनुसार Waltz का सिद्धांत: अमेरिकी वर्चस्व (US hegemony) को वैज्ञानिक तटस्थता के नाम पर वैध ठहराता है

(ख) Wallerstein पर Cox की आलोचना

हालाँकि Wallerstein स्वयं को आलोचनात्मक मानते हैं, फिर भी Cox उन्हें भी सीमित मानते हैं:

  • World System Theory: पूंजीवाद को एक सर्वग्राही प्रणाली के रूप में प्रस्तुत करता है जिससे राजनीतिक प्रतिरोध (resistance) की संभावना कम हो जाती है

Cox के अनुसार: यदि संरचना इतनी सर्वशक्तिमान है, तो सामाजिक परिवर्तन कैसे संभव है?

इस प्रकार Wallerstein भी अनजाने में
संरचनात्मक नियतत्ववाद (structural determinism) के शिकार हो जाते हैं।

  1. Alexander Wendt की आलोचना : Agent–Structure Problem

(क) Wendt का मूल तर्क

Alexander Wendt का प्रसिद्ध कथन है: “Anarchy is what states make of it.” यह कथन Waltz के पूरे सिद्धांत को चुनौती देता है।

(ख) Waltz की आलोचना: अराजकता का सामाजिक निर्माण

Waltz: अराजकता को एक वस्तुनिष्ठ, अपरिवर्तनीय तथ्य मानते हैं

Wendt: अराजकता स्वयं राज्यों की परस्पर अंतःक्रियाओं (interactions) से निर्मित होती है

उदाहरण:

  • अमेरिका–कनाडा संबंध
  • अमेरिका–क्यूबा संबंध

भौतिक शक्ति समान होते हुए भी संबंध अलग हैं

निष्कर्ष (Conclusion)

संरचनात्मक यथार्थवाद और विश्व-प्रणाली सिद्धांत, दोनों ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण वैचारिक उपकरण प्रदान करते हैं। इन्होंने यह स्पष्ट किया कि राज्य और समाज किसी शून्य में कार्य नहीं करते, बल्कि एक व्यापक संरचना के भीतर स्थित होते हैं।

फिर भी, इन सिद्धांतों की संरचनात्मक कठोरता, एजेंसी की उपेक्षा, और विचारात्मक तत्वों की अनदेखी उन्हें अधूरा बनाती है। समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझने के लिए आवश्यक है कि हम संरचना और एजेंसी, भौतिक और वैचारिक तत्वों, तथा निरंतर परिवर्तनशील वास्तविकताओं को एक साथ देखें। अतः कहा जा सकता है कि ये सिद्धांत पूर्ण व्याख्या नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिल पहेली के महत्वपूर्ण टुकड़े हैं।

 

 


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