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भारत-मलेशिया में ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ रणनीतिक संबंधो का अगला चरण

क्या है Comprehensive Strategic Partnership (CSP)

भारत के प्रधानमंत्री ने मलेशिया की आधिकारिक यात्रा की। इस यात्रा ने भारत–मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership – CSP) की पुनः पुष्टि की तथा उसे क्रियान्वित किया। इस दौरान व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय सहयोग सहित व्यापक समझौते किए गए, जो बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक परिदृश्य के बीच संबंधों को गहरा करने की स्पष्ट मंशा को दर्शाते हैं।

भारतमलेशिया द्विपक्षीय संबंध कैसे हैं?

  • भारत और मलेशिया के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक आधारों पर विकसित हुए हैं। ये संबंध समय के साथ एक सामान्य व्यापारिक साझेदारी से व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) में परिवर्तित हुए हैं।
  • भारत–मलेशिया संबंध एक हजार वर्ष से अधिक पुराने हैं। चोल काल (9वीं–13वीं शताब्दी) में दक्षिण भारत और मलय प्रायद्वीप के बीच सक्रिय समुद्री व्यापार था।
  • राजराजा चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम के समय चोल साम्राज्य का प्रभाव दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला, जिसने सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक संपर्कों की मजबूत नींव रखी।
    आज भी मलेशिया में भारतीय संस्कृति, विशेषकर तमिल परंपरा, का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।
  • मलेशिया, ASEAN क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • दोनों देश स्थानीय मुद्राओं (INR–रिंगिट) में व्यापार को बढ़ावा देकर अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
  • व्यापारिक संबंध MICECA (Malaysia–India Comprehensive Economic Cooperation Agreement) और AITIGA (ASEAN–India Trade in Goods Agreement) के तहत संचालित होते हैं।
  • मलेशिया, भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। और ASEAN–भारत संबंधों में मलेशिया की केंद्रीय भूमिका है।
  • दोनों देश मुक्त, खुला और नियम-आधारित हिंदप्रशांत क्षेत्र के पक्षधर हैं। दक्षिण चीन सागर में स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर साझा हित हैं।

प्रधानमंत्री की मलेशिया यात्रा के प्रमुख परिणाम क्या रहे?

डिजिटल एवं फिनटेक: नेताओं ने फिनटेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, ई-गवर्नेंस और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने हेतु मलेशिया–भारत डिजिटल परिषद (MIDC) को औपचारिक रूप दिया। उन्होंने कम लागत वाली सीमा-पार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सक्षम बनाने के लिए NPCI इंटरनेशनल लिमिटेड (NIPL)–PayNet साझेदारी का स्वागत किया, जिससे व्यापार सुगमता और जन-से-जन संबंधों को बढ़ावा मिलेगा।

व्यापार एवं वित्त: भारतीय रिज़र्व बैंक और बैंक नेगारा मलेशिया के बीच सहयोग के माध्यम से स्थानीय मुद्रा व्यापार निपटान (INR–MYR) को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

ऊर्जा एवं सेमीकंडक्टर सहयोग: नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में सहयोग का विस्तार करने तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D), कौशल विकास और आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ता पर केंद्रित सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला सहयोग को मजबूत करने पर सहमति हुई।

लोक प्रशासन: भारत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और मलेशिया की भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (MACC) के बीच भ्रष्टाचार की रोकथाम और मुकाबले हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

आपदा प्रबंधन: भारत और मलेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग पर MoU हस्ताक्षरित हुआ।

संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना: संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में सहयोग को नवीनीकृत किया गया।

शिक्षा एवं कौशल विकास: दोनों देशों ने मलेशिया तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (MTCP) और भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (ITEC) के अंतर्गत छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत ने मलेशियाई छात्रों को ‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम में आमंत्रित किया।
तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (TVET) में सहयोग मजबूत करने पर भी सहमति बनी, ताकि भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके।

स्वास्थ्य: स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग की पुनः पुष्टि की गई, जिसमें ITEC कार्यक्रम के अंतर्गत पारंपरिक भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञों की तैनाती की योजना शामिल है।
होम्योपैथी में अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए भारत की केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद और यूनिवर्सिटी ऑफ साइबरजया के बीच MoU का स्वागत किया गया।

सामाजिक सुरक्षा: भारत के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और मलेशिया के सामाजिक सुरक्षा संगठन के बीच MoU पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे मलेशिया में कार्यरत भारतीय कामगारों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलेगा।

सांस्कृतिक संबंध: तमिल अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी मलाया में तिरुवल्लुवर चेयर और केंद्र के संचालन का स्वागत किया गया।

  • मलेशियाई नागरिकों के लिए तिरुवल्लुवर छात्रवृत्तियों की शुरुआत की गई, जिससे सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंध मजबूत होंगे।नेताओं ने मलेशिया में तमिल सिनेमा की लोकप्रियता को स्वीकार किया, विशेष रूप से एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की विरासत का उल्लेख किया।

कूटनीतिक विस्तार: भारत ने मलेशिया में एक नया वाणिज्य दूतावास खोलने का निर्णय घोषित किया, जिससे वाणिज्यिक और दूतावासीय सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक गठबंधन में सहयोग

  • मलेशिया ने औपचारिक रूप से भारत-नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) में प्रवेश किया। मलेशिया ने 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता का स्वागत किया, जबकि भारत ने BRICS साझेदार देश के रूप में मलेशिया की भूमिका और उसकी सदस्यता आकांक्षाओं का समर्थन किया।
  • दोनों नेताओं ने ASEAN की एकता और केंद्रीयता के समर्थन की पुनः पुष्टि की तथा 2025 में मलेशिया की ASEAN अध्यक्षता की सराहना की।
  • उन्होंने मुक्त, खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई तथा ASEAN Outlook on the Indo-Pacific (AOIP) और भारत की Indo-Pacific Oceans Initiative (IPOI) के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग

  • दोनों नेताओं ने आतंकवाद, विशेषकर सीमा-पार आतंकवाद, के प्रति शून्य सहिष्णुता की पुनः पुष्टि की और इसके विरुद्ध निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।
  • उन्होंने 2024–2027 कार्यकाल के लिए ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM)-Plus विशेषज्ञ कार्य समूह (EWG) की भारत–मलेशिया सह-अध्यक्षता का स्वागत किया।

भारतमलेशिया आर्थिक साझेदारी

  • मलेशिया, ASEAN में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 86 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा।
  • दोनों देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने हेतु स्थानीय मुद्राओं (INR और रिंगिट) में व्यापार निपटान को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • आर्थिक सहयोग मलेशिया–भारत व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (MICECA) और ASEAN–भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) द्वारा निर्देशित है।

भारतमलेशिया में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

  • संयुक्त सैन्य अभ्यासों में हरिमाऊ शक्ति (थलसेना), समुद्र लक्ष्मणा (नौसेना) और उदारा शक्ति (वायुसेना) शामिल हैं।
  • मलेशिया–भारत सुरक्षा संवाद सुरक्षा मामलों में सहयोग का मंच है। मलेशिया, तेजस एलसीए और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे भारतीय रक्षा प्लेटफार्मों के लिए संभावित प्रमुख बाजार है।

रणनीतिक अभिसरण

  • मलेशिया में लगभग 27 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो विश्व में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा भारतीय मूल समुदाय है, जिनमें अधिकांश तमिलनाडु से संबंधित हैं।
  • मलेशिया, भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
  • दक्षिण चीन सागर में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए मलेशिया जैसे ASEAN देशों के साथ मजबूत संबंध आवश्यक हैं।

राजनीतिक एवं कूटनीतिक मतभेद

  • पूर्व मलेशियाई नेताओं द्वारा अनुच्छेद 370 और नागरिकता संशोधन अधिनियम पर की गई टिप्पणियों से संबंधों में तनाव आया।
  • 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में मलेशिया ने भारत पर कश्मीर पर ‘आक्रमण और कब्ज़ा’ करने का आरोप लगाया था।

पाम ऑयल कूटनीति एवं अस्थिरता

  • मलेशिया भारत को पाम ऑयल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
  • 2019-20 में राजनीतिक तनाव के कारण भारत ने मलेशियाई पाम ऑयल आयात पर प्रतिबंध लगाया था, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ।
  • 2024-25 में लगभग 20 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के बावजूद व्यापार संतुलन मलेशिया के पक्ष में रहा। भारत मुख्यतः पाम ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे तेल का आयात करता है, जबकि उसके निर्यात अपेक्षाकृत कम रहे हैं।
  • सतत पाम ऑयल उत्पादन (वनों की कटाई संबंधी चिंताएँ) पर बढ़ती वैश्विक निगरानी भविष्य में व्यापार को जटिल बना सकती है।

चीन कारक और भूराजनीति

  • चीन, मलेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और उसकी आधारभूत संरचना में प्रमुख निवेशक है (जैसे बेल्ट एंड रोड पहल की ईस्ट कोस्ट रेल लिंक परियोजना)।
  • दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता पर मलेशिया अपेक्षाकृत शांत कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाता है, जबकि भारत (और क्वाड) अधिक assertive रुख अपनाता है।

भारतमलेशिया संबंधों को सुदृढ़ करने के उपाय

  • रक्षा सहयोग को स्तंभ बनाना: सैन्य सहयोग गहरा करना और विश्वसनीय रक्षा निर्यातक बनना।
  • सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर: तमिल भाषा और तिरुवल्लुवर केंद्र के माध्यम से जन-से-जन संबंध मजबूत करना।
  • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA): मलक्का जलडमरूमध्य के महत्व को देखते हुए मलेशिया को भारत के IFC-IOR नेटवर्क से जोड़ना।
  • AITIGA समीक्षा में तेजी: 2026-27 तक समीक्षा पूर्ण कर संरचनात्मक व्यापार समस्याओं को दूर करना।
  • दीर्घकालिक अनुबंध: पाम ऑयल के लिए दीर्घकालिक सरकारी-से-सरकारी (G2G) समझौते।

निष्कर्ष

भारत-मलेशिया संबंधों का भविष्य एक लेन-देन आधारित संबंध (तेल खरीदना) से रणनीतिक संबंध (चिप्स और जेट साथ बनाना) की ओर बढ़ने में निहित है। ऐसा करके दोनों देश अस्थिर हिंद-प्रशांत शताब्दी में अपनी सामरिक स्वायत्तता सुनिश्चित कर सकते हैं।

 


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