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भारत एवं AI क्रांति के वैश्विक परिणाम

क्या है भारत की संप्रभु AI रणनीति

समकालीन विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा संचालित एक गहरे परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इसकी तुलना औद्योगिक क्रांति से की जा सकती है, क्योंकि यह समाज को पुनर्गठित करने की अपार क्षमता रखता है।
यह परिवर्तन क्रमिक नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक विच्छेद (structural rupture) जैसा प्रतीत होता है, जिसमें तकनीकी प्रगति शासन, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तीनों को एक साथ रूपांतरित कर रही है।
उन्नत लार्ज लैंग्वेज मॉडल अब तर्क, लेखन और विश्लेषण करने में सक्षम हैं, जो बौद्धिक गतिविधियों में मशीनों की भागीदारी की ओर संकेत करता है। मुख्य चुनौती केवल नवाचार के अनुरूप ढलना नहीं है, बल्कि बढ़ती क्षमता वाले तंत्रों पर मानवीय नियंत्रण बनाए रखना है।

भारत में AI का विकास

भारत के लिए केवल एआई का उपभोक्ता बने रहना पर्याप्त नहीं है; उसे संप्रभु एआई (Sovereign AI) के माध्यम से तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा। हाल ही में बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Sarvam AI द्वारा विकसित मॉडलों Sarvam Vision और Bulbul V3 की सफलता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संप्रभु एआई का अर्थ है कि कोई राष्ट्र अपनी एआई तकनीकों का विकास, संचालन और विनियमन अपने संसाधनों, डेटा और कानूनी ढांचे के आधार पर करे। यह केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रश्न है।

Sarvam Vision और Bulbul की विशेषताए आप टेबल के माध्यम से समझ सकते है:-

पहलूSarvam VisionBulbul V3
मॉडल का प्रकारVision-Language Model (3 बिलियन पैरामीटर)Text-to-Speech (TTS) मॉडल
मुख्य उद्देश्यदस्तावेज़ों और छवियों से ज्ञान निष्कर्षणपाठ को प्राकृतिक आवाज़ में बदलना
प्रमुख कार्यइमेज कैप्शनिंग, दृश्य पाठ पहचान, चार्ट व्याख्या, जटिल तालिकाओं का विश्लेषणटेक्स्ट को स्वाभाविक, क्षेत्र-संवेदनशील आवाज़ में बदलना
विशेष तकनीकी क्षमतापारंपरिक OCR से आगे बढ़कर “Knowledge Extraction”Prosody (विराम, स्वर, बल) को समझना
संरचना समझने की क्षमताशीर्षक, कैप्शन, तालिका क्रम जैसी संरचना पहचान सकता हैभावनात्मक स्वर और लहजे को व्यक्त कर सकता है
भाषाई समर्थन22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं पर प्रशिक्षित11 भारतीय भाषाएँ (22 तक विस्तार की योजना)
मिश्रित भाषा क्षमताहिंदी + अंग्रेज़ी जैसे मिश्रित लिपि दस्तावेज़ संभाल सकता हैकोड-स्विचिंग और क्षेत्रीय विविधता को संभाल सकता है
उपयोग का क्षेत्रपांडुलिपियों, वित्तीय तालिकाओं, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों का डिजिटलीकरणबहुभाषिक डिजिटल संवाद, समावेशन
प्रदर्शनolmOCR-Bench: 84.3%OmniDocBench v1.5: 93.28%35+ पेशेवर गुणवत्ता की आवाज़ें
संबंधित पहलIndiaAI Mission के अंतर्गत₹10,300 करोड़ के IndiaAI Mission का हिस्सा

भारत का पहला स्वदेशी LLM

भारत सरकार ने Sarvam को पहला स्वदेशी Large Language Model (LLM) विकसित करने के लिए चुना है।

तीन संस्करण विकसित किए जा रहे हैं:

  • Sarvam-Large: उन्नत तर्क क्षमता
  • Sarvam-Small: रियल-टाइम अनुप्रयोग
  • Sarvam-Edge: डिवाइस पर चलने वाला मॉडल

लक्ष्य: 70 बिलियन-पैरामीटर मॉडल, जो भारतीय भाषाओं में बड़े पैमाने पर उपयोग हेतु सक्षम हो।

AI एक सामान्य प्रयोजन तकनीकी क्रांति के रूप में

  • AI एक सामान्य प्रयोजन तकनीक (General-Purpose Technology) के रूप में कार्य करता है, जो मानव गतिविधि के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित करता है।
  • यह विशाल डेटा का विश्लेषण कर भविष्यवाणी आधारित अंतर्दृष्टि प्रदान करते हुए संचार, निर्णय-निर्माण और संस्थागत कार्यप्रणाली को परिवर्तित कर रहा है।
  • सरकारें और न्यायालय, जो क्रमिक विकास के लिए बनाए गए हैं, तीव्र गति से बढ़ती तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
  • वाणी, दृष्टि और तर्क की मशीन द्वारा पुनरावृत्ति मानव और मशीन की संज्ञानात्मक क्षमताओं के बीच की सीमा को धुंधला कर रही है।
  • AI प्रणालियाँ प्रशासन, आर्थिक लेन-देन और ज्ञान-उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं।
  • संस्थाएँ समायोजन का प्रयास कर रही हैं, परंतु तकनीकी क्षमता और नियामक तैयारी के बीच बढ़ती खाई जवाबदेही और विश्वसनीयता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न कर रही है।

AI और वैश्विक राजनीति का रूपांतरण

  • इक्कीसवीं सदी में भू-राजनीति अब क्षेत्रीय नियंत्रण के बजाय तकनीकी क्षमता से परिभाषित हो रही है।
  • विशेष रूप से अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब AI नेतृत्व, उन्नत एल्गोरिद्म और सूचना नेटवर्क के नियंत्रण पर केंद्रित है।
    राष्ट्र तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने के लिए घरेलू अवसंरचना जिसे प्रायः “सॉवरेन स्टैक” कहा जाता है का निर्माण कर रहे हैं, ताकि निर्भरता से बचा जा सके।
    AI कूटनीति, खुफिया और आर्थिक प्रभाव का प्रमुख साधन बन चुका है।
    सूचना, कंप्यूटिंग शक्ति और नेटवर्क प्रणालियों तक पहुँच रणनीतिक प्रभाव को निर्धारित करती है।
    जो राज्य AI में महारत हासिल करेंगे, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों और आर्थिक प्रवाह को आकार दे सकते हैं, जबकि अन्य रणनीतिक असुरक्षा और तकनीकी निर्भरता के जोखिम में पड़ सकते हैं।

AI और युद्ध में क्रांति

सैन्य मामलों में परिवर्तन

  • AI युद्ध को मानव-नियंत्रित प्रणालियों से स्वचालित और स्वायत्त प्रणालियों की ओर स्थानांतरित कर रहा है।
  • मानवरहित वाहन, बुद्धिमान निगरानी और साइबर हथियार युद्धक्षेत्र की प्रकृति को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं।
  • सैन्य रणनीतियों में अब स्वचालित लक्ष्य-निर्धारण, पूर्वानुमान विश्लेषण और मशीन-सहायता प्राप्त कमान संरचनाएँ शामिल हैं।

असममित युद्ध का उदय

  • AI शक्ति-संतुलन को बदल रहा है, जिससे छोटे बल भी उन्नत प्रणालियों के माध्यम से पारंपरिक सेनाओं को चुनौती दे सकते हैं।
  • हाल के संघर्षों में ड्रोन और स्वचालित लक्ष्य-प्रणालियों ने पारंपरिक सैन्य श्रेष्ठता को कमजोर किया है। अब शक्ति केवल भारी हथियारों से नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर, सेंसर और वास्तविक समय विश्लेषण तक पहुँच से निर्धारित होती है।

स्वायत्त हथियार और नैतिक चिंताएँ

  • स्वायत्त हथियार गंभीर नैतिक दुविधाएँ उत्पन्न करते हैं।
  • जब मशीनें स्वतंत्र रूप से लक्ष्य चुनती हैं, तो जवाबदेही का प्रश्न उठता है।
  • मानवीय निर्णय के अभाव में युद्ध से संबंधित स्थापित कानूनी और नैतिक ढाँचे कमजोर पड़ सकते हैं।
  • एल्गोरिद्म-आधारित युद्ध पारंपरिक जिम्मेदारी और नियंत्रण की अवधारणाओं को चुनौती देता है।

युद्धक्षेत्र से परे AI और अस्तित्वगत जोखिम

सामाजिक और संस्थागत प्रभाव

  • सैन्य उपयोग से आगे, AI निगरानी, वित्त, स्वास्थ्य सेवा और शासन को प्रभावित कर रहा है।
    तेज स्वचालन दक्षता बढ़ाता है, परंतु प्रणालीगत जोखिम भी उत्पन्न करता है।
  • न्यायालय और प्रशासनिक निकाय तब चुनौती का सामना करते हैं जब मशीन-निर्मित परिणामों में त्रुटियाँ या काल्पनिक सूचनाएँ होती हैं।
  • संस्थाएँ धीरे-धीरे विकसित होती हैं, जबकि तकनीकी क्षमता तीव्र गति से बढ़ती है। यह असंतुलन कानूनी और प्रशासनिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।
  • विश्वास बनाए रखने और स्वचालित निर्णय-निर्माण के दुरुपयोग को रोकने के लिए शासन संरचनाओं में अनुकूलन आवश्यक है।

अस्तित्वगत जोखिम: मानव नियंत्रण का क्षरण

  • एक गहरी चिंता यह है कि कहीं स्वायत्तता मानवीय नियंत्रण से आगे न निकल जाए।
    स्व-शिक्षण में सक्षम उन्नत प्रणालियाँ अप्रत्याशित व्यवहार कर सकती हैं, विशेषकर साइबर सुरक्षा और सूचना प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में।
  • जटिल मशीन नेटवर्क में शक्ति का केंद्रीकरण अनपेक्षित परिणामों का जोखिम पैदा करता है।
    संभावित परिदृश्यों में ड्रोन झुंडों द्वारा समन्वित हमले या बड़े पैमाने पर जनमत-प्रभाव शामिल हो सकते हैं।
  • ऐसी स्थिति में तकनीक सहायक उपकरण के बजाय स्वतंत्र क्रियाशील शक्ति बन सकती है, जो मानवीय एजेंसी और नैतिक जिम्मेदारी को चुनौती देती है।

आगे की राह: वैश्विक शासन और निगरानी की आवश्यकता

  • जोखिमों के बावजूद, AI संकट प्रबंधन, चिकित्सा अनुसंधान और संघर्ष-निवारण में लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इसलिए प्रभावी विनियमन अत्यंत आवश्यक है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नैतिक ढाँचे और समन्वित शासन संरचनाएँ विकास को दिशा दें।
  • वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और संस्थानों को सुरक्षा उपाय और साझा मानक स्थापित करने चाहिए।
  • संतुलित निगरानी यह सुनिश्चित कर सकती है कि तकनीकी प्रगति कल्याण को बढ़ाए और अस्थिरता को रोके।

निष्कर्ष

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की निर्णायक शक्ति बनती जा रही है। यह राजनीतिक शक्ति, सैन्य क्षमता और सामाजिक संगठन को पुनर्गठित कर रही है। भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि समाज नवाचार को कितनी जिम्मेदारी से एकीकृत करते हैं।
उचित निगरानी और सहयोगात्मक ढाँचे AI को स्थिरता का साधन बना सकते हैं, जबकि उपेक्षा वैश्विक अस्थिरता को बढ़ा सकती है। मूलभूत दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी प्रगति मानव मूल्यों और सामूहिक सुरक्षा के अनुरूप रहे।


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