न्यायपालिका किसी भी आधुनिक राज्य की संवैधानिक संरचना का महत्वपूर्ण अंग है। इसका मुख्य कार्य संविधान की व्याख्या करना, नागरिक अधिकारों की रक्षा करना तथा शासन की अन्य शाखाओं पर नियंत्रण बनाए रखना है।
Comparative Politics के विद्वानों जैसे Jean Blondel, Giovanni Sartori और Arend Lijphart का मानना है कि विभिन्न देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन हमें यह समझने में सहायता करता है कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ किस प्रकार कार्य करती हैं।
न्यायपालिका की शक्ति के संबंध में विद्वानों के बीच दो प्रमुख दृष्टिकोण पाए जाते हैं:
- Judicial Supremacy Perspective
– जिसमें न्यायपालिका को संविधान का अंतिम रक्षक माना जाता है (अमेरिका)। - Parliamentary Supremacy Perspective
– जिसमें संसद को सर्वोच्च माना जाता है और न्यायपालिका की भूमिका सीमित होती है (ब्रिटेन)।
इन्हीं भिन्न दृष्टिकोणों के आधार पर विभिन्न देशों की न्यायिक संरचनाएँ विकसित हुई हैं।
अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय और न्यायिक पुनरावलोकन/Judicial Review
- संयुक्त राज्य अमेरिका की न्यायपालिका को विश्व की सबसे प्रभावशाली न्यायिक व्यवस्थाओं में से एक माना जाता है।
- अमेरिकी संविधान ने संघीय न्यायपालिका की स्थापना की और इसके शीर्ष पर सुप्रीम कोर्ट को रखा।
- इस न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा आठ सहयोगी न्यायाधीश होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और जिन्हें सीनेट की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है।
- अमेरिकी न्यायपालिका की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) है।
- यह सिद्धांत 1803 के प्रसिद्ध मामले Marbury v. Madison में स्थापित हुआ, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने यह घोषित किया कि यदि कोई कानून संविधान के विरुद्ध है तो न्यायालय उसे अमान्य घोषित कर सकता है। इस निर्णय ने न्यायपालिका को संविधान का अंतिम संरक्षक बना दिया।
- न्यायिक पुनरावलोकन की अवधारणा को लेकर विद्वानों के बीच व्यापक बहस हुई है। अलेक्जेंडर बिकेल ने इसे “counter-majoritarian difficulty” कहा, क्योंकि इससे एक निर्वाचित संसद के निर्णय को एक अनिर्वाचित न्यायालय द्वारा निरस्त किया जा सकता है।
- इसके विपरीत रोनाल्ड ड्वर्किन जैसे विद्वान यह तर्क देते हैं कि न्यायिक पुनरावलोकन लोकतंत्र के लिए आवश्यक है क्योंकि यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है और संविधान की मूल भावना को सुरक्षित रखता है।
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय में:
- 1 मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice)
- 8 सहायक न्यायाधीश (Associate Justices)
न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और सीनेट इसकी पुष्टि करती है।
ब्रिटेन की संसदीय सर्वोच्चता का सिद्धांत
- अमेरिकी न्यायिक प्रणाली के विपरीत ब्रिटेन की न्यायिक व्यवस्था संसदीय सर्वोच्चता के सिद्धांत पर आधारित है।
- ए.वी. डाइसि ने ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्था का विश्लेषण करते हुए यह प्रतिपादित किया कि संसद सर्वोच्च विधायी संस्था है और उसके बनाए गए कानूनों को कोई भी न्यायालय निरस्त नहीं कर सकता।
- ब्रिटेन की न्यायिक संरचना में सर्वोच्च स्थान यूके सुप्रीम कोर्ट का है, जिसकी स्थापना 2009 में हुई। इसके अतिरिक्त कोर्ट ऑफ अपील, हाई कोर्ट और विभिन्न निचली अदालतें न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।
- हालांकि ब्रिटिश न्यायालय संसद के कानूनों को असंवैधानिक घोषित नहीं कर सकते, फिर भी वे प्रशासनिक कार्यों की वैधानिकता की समीक्षा कर सकते हैं।
- आधुनिक विद्वानों के बीच यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या ब्रिटेन की न्यायपालिका वास्तव में इतनी सीमित है जितना पारंपरिक सिद्धांतों में माना जाता था।
- मार्क एलियट जैसे विद्वानों का तर्क है कि मानवाधिकार अधिनियम (1998) और यूरोपीय मानवाधिकार कानूनों के प्रभाव के कारण ब्रिटिश न्यायपालिका की भूमिका पहले की तुलना में अधिक सक्रिय हो गई है।
- इस प्रकार ब्रिटेन में न्यायपालिका और संसद के बीच संबंध समय के साथ विकसित हो रहे हैं।
रूस की न्यायिक व्यवस्था
- रूस की न्यायिक व्यवस्था सोवियत संघ के विघटन के बाद 1993 के संविधान के अंतर्गत पुनर्गठित की गई।
- इस संविधान ने न्यायपालिका को औपचारिक रूप से स्वतंत्र संस्था के रूप में स्थापित किया। रूस में प्रमुख न्यायालयों में संवैधानिक न्यायालय, सुप्रीम कोर्ट और आर्बिट्रेशन कोर्ट शामिल हैं।
- संवैधानिक न्यायालय का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी कानून संविधान के अनुरूप हों।
- सुप्रीम कोर्ट दीवानी, आपराधिक और प्रशासनिक मामलों की सर्वोच्च अपीलीय अदालत के रूप में कार्य करता है।
- रूसी न्यायपालिका की वास्तविक स्वतंत्रता को लेकर विद्वानों में मतभेद पाया जाता है।
- रिचर्ड साक्वा जैसे विद्वान यह तर्क देते हैं कि यद्यपि संविधान न्यायपालिका को स्वतंत्रता प्रदान करता है, परंतु व्यवहार में कार्यपालिका का प्रभाव अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
- दूसरी ओर कुछ विद्वानों का मानना है कि रूस में न्यायिक संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में सुधारात्मक प्रयास किए गए हैं।
फ्रांस की न्यायिक व्यवस्था: द्वैत न्यायिक प्रणाली
- फ्रांस की न्यायिक प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसका द्वैत न्यायिक ढांचा है। यहाँ सामान्य न्यायालय और प्रशासनिक न्यायालय अलग-अलग कार्य करते हैं।
- सामान्य न्यायालय नागरिक और आपराधिक मामलों की सुनवाई करते हैं, जबकि प्रशासनिक न्यायालय राज्य और नागरिकों के बीच उत्पन्न विवादों का निपटारा करते हैं।
- फ्रांस में Constitutional Council एक विशेष संस्था है जो कानूनों की संवैधानिकता की समीक्षा करती है। हालांकि यह पारंपरिक अर्थों में न्यायालय नहीं है, फिर भी यह संवैधानिक नियंत्रण की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- फ्रांसीसी न्यायिक व्यवस्था के संबंध में विद्वानों के बीच यह बहस है कि क्या यह प्रणाली न्यायिक स्वतंत्रता को पर्याप्त रूप से सुनिश्चित करती है।
- जॉन बेल का मत है कि फ्रांस की प्रशासनिक न्यायिक प्रणाली राज्य की शक्ति और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक विशिष्ट मॉडल प्रस्तुत करती है।
- वहीं कुछ विद्वानों का तर्क है कि Constitutional Council की संरचना में राजनीतिक तत्वों की उपस्थिति न्यायिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।
स्विट्ज़रलैंड की संघीय न्यायपालिका
- स्विट्ज़रलैंड की न्यायिक व्यवस्था उसकी संघीय संरचना और प्रत्यक्ष लोकतंत्र की परंपरा से प्रभावित है। यहाँ सर्वोच्च न्यायिक संस्था फेडरल सुप्रीम कोर्ट है, जिसका मुख्यालय लॉज़ान में स्थित है।
- यह न्यायालय संघीय कानूनों की व्याख्या करता है, राज्यों (कैंटनों) के बीच विवादों का समाधान करता है और नागरिक अधिकारों की रक्षा करता है।
- हालाँकि स्विट्ज़रलैंड में न्यायालयों को संघीय संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को असंवैधानिक घोषित करने का अधिकार नहीं है। यह व्यवस्था इस विचार पर आधारित है कि स्विट्ज़रलैंड में जनमत संग्रह और प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ ही अंतिम निर्णय का स्रोत हैं।
- एरेंड लाइजहार्ट का मत है कि स्विट्ज़रलैंड में न्यायपालिका की सीमित शक्ति इस देश की सहमति-आधारित राजनीतिक संस्कृति और प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं के कारण है।
- इस व्यवस्था में नागरिकों को कानूनों पर सीधे निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है, इसलिए न्यायपालिका की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित रखी गई है।
तुलनात्मक विश्लेषण
- इन पाँच देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि न्यायपालिका की शक्ति और संरचना प्रत्येक देश की संवैधानिक परंपरा और राजनीतिक संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है।
- अमेरिका में न्यायपालिका अत्यंत शक्तिशाली है और न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करती है। इसके विपरीत ब्रिटेन में संसदीय सर्वोच्चता के कारण न्यायपालिका की शक्ति सीमित है।
- रूस और फ्रांस की व्यवस्थाएँ इन दोनों के बीच एक मध्य मार्ग प्रस्तुत करती हैं, जहाँ न्यायिक संस्थाओं को संवैधानिक भूमिका तो दी गई है लेकिन राजनीतिक संरचना के कारण उनकी कार्यप्रणाली पर कुछ सीमाएँ भी मौजूद हैं। स्विट्ज़रलैंड में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की परंपरा न्यायपालिका की शक्ति को सीमित करती है, क्योंकि अंतिम निर्णय जनता के हाथ में होता है।
निष्कर्ष
इस तुलनात्मक अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका की भूमिका और शक्ति का स्वरूप किसी भी देश की संवैधानिक संरचना, राजनीतिक इतिहास और लोकतांत्रिक परंपरा पर निर्भर करता है। अमेरिका में न्यायपालिका संविधान की सर्वोच्च संरक्षक के रूप में उभरती है, जबकि ब्रिटेन और स्विट्ज़रलैंड में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसद को अधिक महत्व दिया गया है। रूस और फ्रांस की व्यवस्थाएँ इन दोनों मॉडल के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती हैं।
अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि न्यायपालिका केवल एक कानूनी संस्था नहीं है, बल्कि वह राजनीतिक प्रणाली का भी एक महत्वपूर्ण अंग है जो राज्य की शक्ति के संतुलन और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
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