भारत और कोरिया गणराज्य (ROK) ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान 2026–2030 के लिए एक संयुक्त रणनीतिक दृष्टि प्रस्तुत की है।
यह दृष्टि राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत–ROK विशेष रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत करती है।
- भारत–कोरिया गणराज्य (ROK) संयुक्त रणनीतिक दृष्टि (2026–2030) आर्थिक संबंधों से आगे बढ़कर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा और जलवायु सहयोग तक विस्तारित एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी का संकेत देती है।
- इसकी सफलता व्यापार असंतुलन को दूर करने, रक्षा और तकनीकी सहयोग को गहरा करने तथा भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं के समन्वय पर निर्भर करती है।
भारत–ROK संयुक्त रणनीतिक दृष्टि (2026-2030) के प्रमुख बिंदु क्या हैं?
राजनीतिक और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना:
- वार्षिक शिखर बैठक, विस्तारित मंत्रिस्तरीय संवाद और उद्योग स्तर के सहयोग हेतु भारत–ROK औद्योगिक सहयोग समिति की स्थापना।
- संसदीय आदान-प्रदान, युवा सहभागिता और राज्य-से-प्रांत साझेदारी को बढ़ावा।
- विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद के आधार पर रणनीतिक समन्वय को मजबूत करना।
- रक्षा उद्योग संयुक्त समिति और उप-मंत्री स्तर पर 2+2 संवाद की शुरुआत।
भू–राजनीतिक और रणनीतिक समन्वय:
- Act East नीति और New Southern Policy का समन्वय: आर्थिक संबंधों से आगे बढ़कर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा साझेदारी की ओर संक्रमण।
- मिनी–लैटरल ढांचों में प्रवेश: स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण की पुनः पुष्टि।
- ROK का भारत के इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में भागीदारी।
- आर्थिक सुरक्षा संवाद:
- चीन पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण।
- समुद्री और रक्षा उत्पादन:
- संयुक्त रक्षा अनुसंधान एवं विकास।
- आत्मनिर्भर भारत के तहत सह-उत्पादन।
- KOMEA का मुंबई में कार्यालय।
डिजिटल एकीकरण और नई तकनीक:
- India-Korea Digital Bridge:
- AI, डेटा गवर्नेंस, सेमीकंडक्टर में सहयोग।
- “AI for All” और “MANAV” सिद्धांत।
- सीमा–पार वित्तीय कनेक्टिविटी:
- NPCI और KFTC के बीच समझौता।
- रियल-टाइम भुगतान प्रणाली।
- अंतरिक्ष सहयोग:
- ISRO–KASA संयुक्त कार्य समूह।
- भारत–ROK स्पेस डे (बेंगलुरु, 2026)।
व्यापार और आर्थिक संतुलन:
- CEPA समझौते के उन्नयन को पुनः शुरू करने की घोषणा।
- व्यापार असंतुलन और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर जोर।
जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा:
- दक्षिण कोरिया ने Pax Silica पहल में भारत की भागीदारी की सराहना की, जबकि भारत ने FORGE जैसे मंच में कोरिया की भूमिका को महत्व दिया। यह मंच 2026 में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और विविध बनाना है। दोनों देशों ने यह तय किया कि जरूरत पड़ने पर नेफ्था जैसे जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे और इनका व्यापार बढ़ाएंगे।
- भारत और दक्षिण कोरिया ने तय किया कि वे कार्बन क्रेडिट के व्यापार और प्रदूषण कम करने वाली संयुक्त परियोजनाओं पर साथ काम करेंगे। इसके लिए उन्होंने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 2 के तहत एक व्यवस्था बनाई।
- दक्षिण कोरिया अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का सदस्य बना, और भारत ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट (GGGI) में शामिल हुआ। इससे दोनों देशों का जलवायु और हरित विकास में सहयोग और मजबूत होगा।
वैश्विक सहयोग:
- भारत और दक्षिण कोरिया G20 और WTO जैसे मंचों पर मिलकर काम करेंगे ताकि एक निष्पक्ष और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था बन सके।
- दोनों देश समुद्री स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विवाद समाधान और UNCLOS जैसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने पर सहमत हैं।
- वैश्विक संघर्षों में संवाद और कूटनीति को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत, कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए दक्षिण कोरिया का समर्थन करता है।
- दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर सहमत हैं ताकि यह वर्तमान वैश्विक स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शा सके।
सांस्कृतिक और सॉफ्ट पावर सहयोग:
- सांस्कृतिक और सॉफ्ट पावर सहयोग
- दोनों देशों ने 2026–2030 तक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम बढ़ाने और 2028-29 को “मित्रता वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
- फिल्म, एनिमेशन और VFX के क्षेत्र में मिलकर काम किया जाएगा, जिसमें संयुक्त निर्माण और तकनीक साझा करना शामिल होगा।
- बौद्ध धर्म जैसी साझा सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दिया जाएगा और कलाकृतियों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
- खेलों में प्रशिक्षण, तकनीक और खेल विज्ञान के ज्ञान का आदान-प्रदान होगा।
भारत–ROK संबंध कैसे हैं?
ऐतिहासिक संबंध:
- 48 ईस्वी में अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना का कोरिया जाना : कोरियाई ग्रंथ Samguk Yusa के अनुसार, अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना (Heo Hwang-ok) कोरिया जाकर राजा किम-सुरो से विवाह करती हैं, जिससे दोनों देशों के बीच प्राचीन सांस्कृतिक और वंशीय संबंध स्थापित होते हैं; आज भी कई कोरियाई स्वयं को भारतीय मूल से जोड़ते हैं।
- बौद्ध धर्म एक मजबूत कड़ी: भारत से उत्पन्न बौद्ध धर्म चीन के माध्यम से कोरिया पहुँचा, जिसने कोरिया की संस्कृति, दर्शन, कला और सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया; यह दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है।
- रवींद्रनाथ टैगोर की कविता “Lamp of the East”: 1929 में टैगोर द्वारा लिखी गई इस कविता ने जापानी उपनिवेश काल के दौरान कोरिया को आशा और आत्मगौरव का संदेश दिया; आज भी यह कोरिया में लोकप्रिय है और भारत–कोरिया के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।
- कोरियाई युद्ध में भारत की भूमिका: 1950–53 के कोरियाई युद्ध के दौरान भारत ने चिकित्सा सहायता प्रदान की, युद्धबंदियों की वापसी हेतु Neutral Nations Repatriation Commission की अध्यक्षता की तथा शांति स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और कूटनीतिक संबंध मजबूत हुए।
आर्थिक संबंध:
- 2010 CEPA के बाद व्यापार में वृद्धि।
- 2024 में व्यापार: 25.1 बिलियन डॉलर।
- ROK भारत का 15वां सबसे बड़ा FDI निवेशक।
- प्रमुख कंपनियाँ:
- Samsung, Hyundai, Kia, LG
- Make in India के तहत उत्पादन और निर्यात।
रक्षा सहयोग:
- K-9 Vajra: L&T और Hanwha Defense द्वारा निर्मित।
- 2025 में पहला नौसैनिक अभ्यास।
सांस्कृतिक संबंध:
- भारतियों की संख्या: ~18,000
- Korean Wave (Hallyu):
- K-pop, K-drama, K-beauty
मुख्य चुनौतियाँ और समाधान
- भारत–कोरिया व्यापार में असंतुलन बना हुआ है, जहाँ दक्षिण कोरिया का निर्यात अधिक है, जिससे भारत का लगातार बढ़ता व्यापार घाटा चिंता का विषय है।
- 2010 के CEPA को अपडेट करने की वार्ताएँ लंबे समय से रुकी हुई हैं, जिससे व्यापार
- K-9 Vajra जैसे कुछ सफल उदाहरणों को छोड़कर, तकनीकी हस्तांतरण (ToT) और संयुक्त विकास में कमी बनी हुई है।
- दक्षिण कोरिया की चीन पर आर्थिक निर्भरता और उत्तर कोरिया की सुरक्षा चिंताएँ, भारत के साथ खुले रणनीतिक सहयोग को सीमित करती हैं।
- कई समझौते (MoUs) और योजनाएँ कागज पर रह जाती हैं, जिससे नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता।
- दोनों देशों के बीच सीमित जन–से–जन संपर्क (people-to-people contact) और कम प्रवासी समुदाय संबंधों को गहरा होने से रोकते हैं।
- संबंध अभी भी मुख्यतः FDI और असेंबली आधारित हैं, उच्च स्तरीय अनुसंधान और नवाचार में सहयोग सीमित है।
- भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में कोरियाई कंपनियों के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (GVCs) में जुड़ना चाहिए।
- व्यापक समझौते के बजाय सेक्टर–विशिष्ट सुधार (जैसे फार्मा, IT, कृषि) पर ध्यान देना चाहिए ताकि तेजी से परिणाम मिलें।
- Buyer–seller मॉडल से हटकर joint R&D और technology transfer पर आधारित सह-उत्पादन को बढ़ावा देना चाहिए।
- India–ROK–US या ASEAN जैसे समूहों में लचीला और मुद्दा–आधारित सहयोग बढ़ाना चाहिए, खासकर Indo-Pacific में।
- भारत में कोरिया-विशिष्ट औद्योगिक क्लस्टर और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs) विकसित करने चाहिए ताकि निवेश और उत्पादन बढ़े।
- स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा और प्रोफेशनल मोबिलिटी को बढ़ाकर people-to-people ties मजबूत किए जाएँ।
- AI, 6G, semiconductor जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और IP-sharing framework विकसित करना चाहिए।
निष्कर्ष
भारत–ROK संयुक्त रणनीतिक दृष्टि पारंपरिक आर्थिक संबंधों से आगे बढ़कर एक बहुआयामी साझेदारी की ओर संकेत करती है।
तकनीक, व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक शासन में मजबूत समन्वय के साथ दोनों देश इंडो-पैसिफिक और वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में हैं।
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