भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच के संबंध केवल कूटनीति का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक जुड़ाव की कहानी है। दोनों देशों के बीच संबंधों की औपचारिक शुरुआत 1972 में हुई थी, लेकिन 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक यूएई यात्रा ने इन संबंधों को एक नया और शक्तिशाली आयाम दिया। आज यूएई, भारत के लिए न केवल ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख स्रोत है, बल्कि पश्चिम एशिया में भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार भी बनकर उभरा है। दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक पहुँचाया है, जो रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों में विस्तारित हो रही है।

1. आर्थिक और व्यापारिक संबंध: साझेदारी की धुरी
भारत और यूएई के बीच आर्थिक संबंध उनकी साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ हैं। यूएई वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
- व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA): 2022 में दोनों देशों ने CEPA पर हस्ताक्षर किए, जो भारत द्वारा किसी खाड़ी देश के साथ किया गया पहला ऐसा समझौता था। इस समझौते का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय गैर-तेल व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुँचाना है। इससे भारतीय निर्यातकों को यूएई के बाजारों में शून्य शुल्क पहुंच प्राप्त हुई है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): यूएई भारत में चौथा सबसे बड़ा निवेशक है। यूएई ने भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और रसद (Logistics) जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश किया है। अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) जैसी संस्थाएं भारत के नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड (NIIF) में सक्रिय रूप से निवेश कर रही हैं।
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार: हाल ही में दोनों देशों ने अपनी स्थानीय मुद्राओं (रुपया और दिरहम) में व्यापार निपटान करने के लिए एक तंत्र विकसित किया है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और लेनदेन की लागत में गिरावट आएगी।

2. ऊर्जा सुरक्षा: एक रणनीतिक सहयोग
ऊर्जा क्षेत्र में यूएई भारत का एक अपरिहार्य साझेदार रहा है। परंपरागत रूप से यूएई भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश रहा है, लेकिन अब यह संबंध केवल खरीदार और विक्रेता से आगे बढ़ चुका है।
- रणनीतिक तेल भंडार: यूएई भारत के ‘सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) कार्यक्रम में भाग लेने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय भागीदार है। मंगलौर स्थित रणनीतिक तेल भंडार में यूएई की भागीदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करती है।
- नवीकरणीय ऊर्जा: दोनों देश जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए सौर और पवन ऊर्जा जैसे हरित ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत के नेतृत्व वाले ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ (ISA) में यूएई एक सक्रिय सदस्य है।
3. प्रवासी भारतीय: मानवीय संबंधों का सेतु
यूएई में रहने वाले भारतीय प्रवासी दोनों देशों के बीच ‘लिविंग ब्रिज’ के रूप में कार्य करते हैं।
- विशाल जनसंख्या: लगभग 3.5 मिलियन भारतीय यूएई में रहते हैं, जो वहां की कुल जनसंख्या का लगभग 30-35% है। यह यूएई में सबसे बड़ा प्रवासी समूह है।
- प्रेषण (Remittances): यूएई से भारत को प्रतिवर्ष अरबों डॉलर का प्रेषण प्राप्त होता है, जो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है।
- कल्याणकारी उपाय: यूएई सरकार ने भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। साथ ही, वहां भारतीय संस्कृति के प्रसार के लिए अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर (BAPS मंदिर) का निर्माण एक महान सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित हुआ है।
4. सुरक्षा और रक्षा सहयोग: उभरता हुआ मोर्चा
भारत और यूएई के बीच सुरक्षा सहयोग हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जो आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति उनकी साझा चिंताओं को दर्शाता है।
- रक्षा अभ्यास: दोनों देशों की सेनाएं नियमित रूप से संयुक्त अभ्यास करती हैं, जैसे कि ‘जायद तलवार’ (नौसेना अभ्यास)। यह समुद्री सुरक्षा और समन्वय को बेहतर बनाने में मदद करता है।
- रक्षा उत्पादन: दोनों देश अब रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और तकनीक साझा करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
- आतंकवाद विरोध: भारत और यूएई ने कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। खुफिया जानकारी साझा करने और प्रत्यर्पण जैसे मामलों में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग है।
5. कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा: वैश्विक गलियारे
कनेक्टिविटी के क्षेत्र में दोनों देश कुछ सबसे महत्वाकांक्षी वैश्विक परियोजनाओं का हिस्सा हैं।
- IMEC (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा): यूएई इस गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह परियोजना भारत को यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन के माध्यम से यूरोप से जोड़ेगी, जिससे व्यापारिक लागत और समय में भारी कमी आएगी।
- खाद्य सुरक्षा गलियारा: यूएई ने भारत में ‘फूड पार्क्स’ विकसित करने के लिए 2 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इस गलियारे का उद्देश्य भारत के कृषि उत्पादों के लिए यूएई के बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करना और मध्य पूर्व में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।
6. उभरते हुए क्षेत्र: अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी
भारत और यूएई अब भविष्य की तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान में भी हाथ मिला रहे हैं।
- अंतरिक्ष सहयोग: भारत के इसरो (ISRO) और यूएई की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच घनिष्ठ सहयोग है। भारत ने यूएई के ‘नायिफ-1’ जैसे नैनो-सैटेलाइट लॉन्च करने में मदद की है। दोनों देश अब मंगल मिशन और चंद्रमा मिशन से जुड़ी जानकारी साझा करने पर भी चर्चा कर रहे हैं।
- फिनटेक और यूपीआई: भारत के यूपीआई (UPI) और यूएई के घरेलू कार्ड नेटवर्क ‘जवान’ (Jaywan) के बीच एकीकरण से दोनों देशों के नागरिकों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान और तेज हो गई है।
7. बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
भारत और यूएई अब केवल द्विपक्षीय ही नहीं, बल्कि बहुपक्षीय समूहों के माध्यम से भी दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं।
- I2U2 ग्रुप: भारत, इजरायल, यूएई और अमेरिका (I2U2) के इस समूह को ‘मध्य पूर्व का क्वाड’ कहा जाता है। यह समूह मुख्य रूप से जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे छह क्षेत्रों में निवेश और सहयोग पर ध्यान केंद्रित करता है।
- BRICS: हाल ही में यूएई का ब्रिक्स (BRICS) में शामिल होना भारत के लिए एक सकारात्मक विकास है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों का समन्वय और मजबूत होगा।
8. संबंधों के समक्ष चुनौतियां
सकारात्मक प्रगति के बावजूद, कुछ ऐसी चुनौतियां हैं जिन पर दोनों देशों को ध्यान देने की आवश्यकता है:
क्षेत्रीय राजनीति: खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता और ईरान के साथ बढ़ते तनाव कभी-कभी भारत के लिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण कर देते हैं।
चीन का बढ़ता प्रभाव: मध्य पूर्व में चीन के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव पर भारत की नजर है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे: हालांकि यूएई ने कई सुधार किए हैं, लेकिन भारतीय श्रमिकों के अधिकारों, वीजा नियमों और कार्य स्थितियों से जुड़ी समस्याएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
9. भविष्य की राह: साझेदारी का विस्तार
भारत और यूएई के संबंधों का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल दिखाई देता है। अब समय आ गया है कि दोनों देश पारंपरिक क्षेत्रों से निकलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता साझा करें। भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और यूएई की ‘ऑपरेशन 300 बिलियन’ (औद्योगिक रणनीति) एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।
निष्कर्ष
अंततः, भारत और यूएई के संबंध ‘सभ्यतागत मित्रता’ से आगे बढ़कर एक ‘रणनीतिक वास्तविकता’ में बदल चुके हैं। CEPA और IMEC जैसी परियोजनाओं ने इस साझेदारी को एक नई गति दी है। यूएई भारत के लिए पश्चिम एशिया की सुरक्षा और समृद्धि का प्रवेश द्वार है, जबकि भारत यूएई के लिए एक विशाल बाजार और तकनीकी शक्ति का स्रोत है। यदि दोनों देश अपनी चुनौतियों का समझदारी से समाधान करते हैं, तो यह साझेदारी 21वीं सदी की सबसे सफल कूटनीतिक कहानियों में से एक होगी।
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