राष्ट्रवाद एक राजनीतिक विचारधारा है जो राष्ट्र के हितों, राष्ट्रीय पहचान और राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देती है। यह लोगों में साझा राष्ट्रीय चेतना विकसित करने तथा बाहरी राजनीतिक नियंत्रण का विरोध करने पर बल देता है।
राष्ट्रवाद के विभिन्न रूप
- नागरिक राष्ट्रवाद (Civic Nationalism): यह साझा नागरिकता, संविधान, राजनीतिक संस्थाओं और मूल्यों पर आधारित होता है। इसमें राष्ट्र की सदस्यता जातीय या धार्मिक पहचान के बजाय नागरिकता पर निर्भर करती है।
- जातीय राष्ट्रवाद (Ethnic Nationalism): यह समान वंश, जातीयता, भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान का आधार मानता है।
- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (Cultural Nationalism): इसमें भाषा, संस्कृति, परंपराओं, साहित्य, इतिहास और सामूहिक स्मृतियों को राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में महत्वपूर्ण माना जाता है।

यूरोपीय राष्ट्रवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- यूरोप में आधुनिक राष्ट्रवाद का विकास मुख्य रूप से 19वीं शताब्दी में हुआ। इसके विकास पर फ्रांसीसी क्रांति (1789) का गहरा प्रभाव पड़ा। फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता, जन-संप्रभुता और नागरिकता जैसे विचारों को लोकप्रिय बनाया।
- इससे यह विचार मजबूत हुआ कि राजनीतिक सत्ता का आधार केवल राजा या राजवंश नहीं, बल्कि जनता और राष्ट्र होना चाहिए।
- 19वीं शताब्दी में यूरोप के अनेक क्षेत्रों में लोगों ने साझा भाषा, संस्कृति और इतिहास के आधार पर राजनीतिक एकता की मांग की। इसी प्रक्रिया ने आधुनिक राष्ट्र–राज्य (Nation-State) के विकास को गति दी।
यूरोपीय राष्ट्रवाद के विकास में दो घटनाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण थीं:
इटली का एकीकरण (Unification of Italy)
- इटली अनेक छोटे राज्यों और राजनीतिक इकाइयों में विभाजित था। राष्ट्रवादी आंदोलन ने इन क्षेत्रों को एक राजनीतिक इकाई में संगठित करने का प्रयास किया।
इटली के एकीकरण में तीन प्रमुख व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण थी:
- ज्यूसेपे मैज़िनी (Giuseppe Mazzini) ने राष्ट्रवादी विचारधारा को लोकप्रिय बनाया और Young Italy संगठन के माध्यम से एकीकृत इटली का समर्थन किया।
- ज्यूसेपे गैरीबाल्डी (Giuseppe Garibaldi) एक प्रमुख सैन्य नेता थे। उन्होंने अपने Red Shirts के साथ इटली के एकीकरण के लिए संघर्ष किया।
- काउंट कैमिलो डी कैवूर (Count Camillo di Cavour) ने कूटनीति और राजनीतिक रणनीति के माध्यम से इटली के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 1861 में इटली के राज्य की स्थापना आधुनिक यूरोपीय राष्ट्रवाद की महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।

जर्मनी का एकीकरण
- 19वीं शताब्दी में जर्मन क्षेत्र भी अनेक राज्यों में विभाजित था। जर्मन राष्ट्रवाद ने इन राज्यों को एक राजनीतिक इकाई में संगठित करने की मांग को मजबूत किया।
जोहान गॉटफ्राइड हर्डर (Johann Gottfried Herder)
- हर्डर ने राष्ट्रीय पहचान को भाषा, संस्कृति और लोक–परंपराओं से जोड़ा। उन्होंने Volk तथा Volksgeist की अवधारणाओं के माध्यम से यह विचार प्रस्तुत किया कि प्रत्येक राष्ट्र की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक आत्मा होती है।
ओटो वॉन बिस्मार्क (Otto von Bismarck)
- बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण में निर्णायक राजनीतिक भूमिका निभाई। उन्होंने कूटनीति और युद्ध दोनों का इस्तेमाल किया।
- उनकी नीति को अक्सर “Blood and Iron” अर्थात “रक्त और लौह” की नीति के रूप में जाना जाता है।
- 1871 में जर्मन साम्राज्य की स्थापना के साथ जर्मनी का राजनीतिक एकीकरण पूरा हुआ।
- इस प्रकार इटली और जर्मनी का एकीकरण यूरोप में राष्ट्रवाद और राष्ट्र-राज्य निर्माण के दो महत्वपूर्ण उदाहरण बने।
राष्ट्रवाद के प्रमुख सैद्धांतिक दृष्टिकोण
राष्ट्रवाद की उत्पत्ति और प्रकृति को समझाने के लिए विभिन्न सिद्धांत विकसित हुए हैं।
आदिमतावाद (Primordialism)
- आदिमतावादी दृष्टिकोण के अनुसार राष्ट्रीय पहचान की जड़ें बहुत पुरानी होती हैं। राष्ट्र की भावना को भाषा, धर्म, जातीय संबंध, रक्त-संबंध, परंपराओं और ऐतिहासिक अनुभवों जैसी पुरानी सामाजिक-सांस्कृतिक संरचनाओं से जोड़ा जाता है।
- इस दृष्टिकोण में राष्ट्र को केवल आधुनिक राजनीतिक निर्माण नहीं माना जाता, बल्कि उसके भीतर प्राचीन सामुदायिक संबंधों की निरंतरता देखी जाती है।
आधुनिकतावाद (Modernism)
- आधुनिकतावादी दृष्टिकोण राष्ट्रवाद को आधुनिक युग की उपज मानता है।
इस दृष्टिकोण के अनुसार राष्ट्रवाद के विकास में निम्न प्रक्रियाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
- औद्योगीकरण
- पूंजीवाद
- आधुनिक शिक्षा
- मुद्रण एवं संचार
- केंद्रीकृत प्रशासन
- आधुनिक राज्य का विकास
इस दृष्टिकोण से जुड़े प्रमुख विचारकों में अर्नेस्ट गेल्नर, बेनेडिक्ट एंडरसन और एरिक हॉब्सबॉम शामिल हैं।
बेनेडिक्ट एंडरसन
- एंडरसन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Imagined Communities में राष्ट्र को एक “कल्पित राजनीतिक समुदाय” के रूप में समझाया।
- उनके अनुसार राष्ट्र इसलिए कल्पित समुदाय है क्योंकि अधिकांश सदस्य एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी वे स्वयं को एक साझा समुदाय का हिस्सा मानते हैं।
एथ्नोसिम्बोलिज्म (Ethnosymbolism)
- एथ्नोसिम्बोलिज्म राष्ट्रवाद की व्याख्या में मिथकों, प्रतीकों, ऐतिहासिक स्मृतियों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को महत्वपूर्ण मानता है।
- इस दृष्टिकोण के प्रमुख विचारक एंथनी डी. स्मिथ (Anthony D. Smith) हैं।
- उनके अनुसार आधुनिक राष्ट्रवाद को समझने के लिए पूर्व-आधुनिक जातीय समुदायों, सामूहिक स्मृतियों और सांस्कृतिक प्रतीकों की भूमिका को समझना आवश्यक है।
इटली में राष्ट्रवाद
इटली का राष्ट्रवाद यूरोपीय राष्ट्रवाद के सबसे महत्वपूर्ण उदाहरणों में से एक है।
मैज़िनी: मैज़िनी लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी विचारों के समर्थक थे। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र, एकीकृत और गणतांत्रिक इटली की स्थापना करना था।
- उन्होंने Young Italy की स्थापना की और युवाओं में राष्ट्रवादी चेतना विकसित करने का प्रयास किया।
गैरीबाल्डी: गैरीबाल्डी ने सैन्य संघर्ष के माध्यम से इटली के एकीकरण में योगदान दिया। उनका नेतृत्व विशेष रूप से दक्षिणी इटली के क्षेत्रों के एकीकरण में महत्वपूर्ण था।
कैवूर: कैवूर ने राजनीतिक और कूटनीतिक रणनीतियों के माध्यम से एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने सार्डिनिया-पीडमोंट को एकीकरण का केंद्र बनाया।
- इस प्रकार इटली के राष्ट्रवाद में वैचारिक राष्ट्रवाद, सैन्य संघर्ष और कूटनीतिक राजनीति तीनों का योगदान था।
जर्मन राष्ट्रवाद
- जर्मन राष्ट्रवाद में भाषा, संस्कृति और Volk की अवधारणा महत्वपूर्ण थी।
- हर्डर ने जर्मन सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को प्रभावित किया। उनके विचारों में भाषा और लोक-संस्कृति राष्ट्रीय पहचान के महत्वपूर्ण आधार थे।
- बाद में बिस्मार्क ने राष्ट्रवाद को राजनीतिक शक्ति और राज्य-निर्माण के साथ जोड़ा।
- इस प्रकार जर्मनी का राष्ट्रवाद केवल सांस्कृतिक आंदोलन नहीं रहा बल्कि राजनीतिक एकीकरण का माध्यम भी बना।
पैन–स्लाववाद (Pan-Slavism)
- पैन-स्लाववाद एक ऐसा राष्ट्रवादी आंदोलन था जिसका उद्देश्य स्लाव जातीय समुदायों को एकजुट करना था।
- इसका प्रभाव विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी यूरोप में दिखाई दिया। बाल्कन क्षेत्र में रहने वाले विभिन्न स्लाव समुदायों की राष्ट्रीय आकांक्षाओं ने इस विचार को मजबूत किया।
- पैन-स्लाववाद ने यूरोपीय साम्राज्यों की राजनीति को भी प्रभावित किया और विशेष रूप से ऑस्ट्रो–हंगेरियन साम्राज्य और ओटोमन साम्राज्य के क्षेत्रों में राष्ट्रीय प्रश्न को महत्वपूर्ण बनाया।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद राष्ट्रवाद
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप की राजनीतिक सीमाओं में बड़े परिवर्तन हुए।
- Treaty of Versailles (1919) तथा अन्य युद्धोत्तर व्यवस्थाओं ने यूरोप के राजनीतिक मानचित्र को पुनर्गठित किया।
- पूर्वी यूरोप में कई नए या पुनर्गठित राष्ट्र-राज्य अस्तित्व में आए। इस दौर में राष्ट्रीय आत्मनिर्णय (National Self-Determination) का विचार महत्वपूर्ण हो गया।
- हालाँकि राष्ट्र-राज्य निर्माण की प्रक्रिया पूरी तरह सरल नहीं थी। अनेक क्षेत्रों में अलग-अलग जातीय, भाषाई और धार्मिक समुदाय एक ही राज्य की सीमाओं के भीतर रहते थे। इससे अल्पसंख्यक प्रश्न और क्षेत्रीय संघर्ष उत्पन्न हुए।
अंतरयुद्ध काल और उग्र राष्ट्रवाद
- दो विश्व युद्धों के बीच के काल में यूरोप के कुछ हिस्सों में राष्ट्रवाद का अत्यधिक उग्र रूप विकसित हुआ।
- विशेष रूप से नाजी जर्मनी में राष्ट्रवाद को नस्लीय विचारधारा, विस्तारवाद और सैन्यवाद के साथ जोड़ा गया।
- यह राष्ट्रवाद लोकतांत्रिक एवं उदार राष्ट्रवाद से अलग था और उसने आक्रामक विदेश नीति तथा नस्लीय श्रेष्ठता के विचारों को बढ़ावा दिया।
- इस प्रकार 20वीं शताब्दी ने यह दिखाया कि राष्ट्रवाद एक ओर राजनीतिक एकता और स्वतंत्रता का माध्यम बन सकता है, जबकि दूसरी ओर उसका उग्र रूप युद्ध, विस्तारवाद और दमन को भी जन्म दे सकता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद राष्ट्रवाद
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में राष्ट्रवाद की प्रकृति में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया।
- यूरोप में शांति और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय संस्थाओं का विकास हुआ, जो आगे चलकर European Union जैसी अतिराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण की दिशा में बढ़ीं।
- साथ ही यूरोपीय उपनिवेशवाद के पतन के साथ एशिया और अफ्रीका में गैर–यूरोपीय राष्ट्रवाद और उपनिवेश–विरोधी आंदोलनों का विस्तार हुआ।
- इस प्रकार राष्ट्रवाद केवल यूरोपीय राज्य-निर्माण तक सीमित नहीं रहा बल्कि वैश्विक स्वतंत्रता आंदोलनों का भी महत्वपूर्ण आधार बना।
राष्ट्रवाद और राष्ट्र–राज्य निर्माण
राष्ट्रवाद ने आधुनिक राष्ट्र-राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- क्षेत्रीय अखंडता: राष्ट्रवाद निश्चित राजनीतिक सीमाओं वाले राष्ट्र-राज्य की स्थापना और उसकी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा पर जोर देता है।
- संप्रभुता: राष्ट्रवादी विचारधारा यह मानती है कि राष्ट्र को अपने राजनीतिक मामलों पर स्वयं निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।
- राष्ट्रीय आत्मनिर्णय: राष्ट्रवाद का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि किसी राष्ट्र या समुदाय को अपने राजनीतिक भविष्य का निर्धारण करने का अधिकार होना चाहिए।
- एकता और संघर्ष: राष्ट्रवाद लोगों को साझा पहचान के आधार पर एकजुट कर सकता है। लेकिन जब अलग-अलग समूह अपनी विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान के आधार पर अलग राज्य की मांग करते हैं, तो संघर्ष भी उत्पन्न हो सकता है।
बाल्कन क्षेत्र इस द्वैध प्रकृति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय पहचान
राष्ट्रीय पहचान कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक तत्वों से निर्मित होती है।
- भाषा: भाषा राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम है। साझा भाषा लोगों में सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत कर सकती है।
- संस्कृति: साझा परंपराएँ, रीति-रिवाज, साहित्य, कला और लोक-संस्कृति राष्ट्रीय समुदाय की भावना को मजबूत करते हैं।
- धर्म: कुछ समाजों में धार्मिक परंपराएँ राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- इतिहास और सामूहिक स्मृति: साझा ऐतिहासिक घटनाएँ, संघर्ष, नायक और स्मृतियाँ राष्ट्रवादी चेतना को मजबूत करती हैं।
समकालीन यूरोपीय राष्ट्रवाद
- समकालीन यूरोप में राष्ट्रवाद समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि उसने नए राजनीतिक रूप ग्रहण किए हैं।
- दक्षिणपंथी लोकलुभावनवाद: कई यूरोपीय देशों में राष्ट्रवादी राजनीति को आप्रवासन, आर्थिक असुरक्षा, राष्ट्रीय संप्रभुता और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों से जोड़ा गया है।
- Brexit: Brexit यूरोप में राष्ट्रीय संप्रभुता और अतिराष्ट्रीय एकीकरण के बीच तनाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
- ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के समर्थन में राष्ट्रीय निर्णय लेने की क्षमता और संप्रभुता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे।
राष्ट्रवाद बनाम अतिराष्ट्रीयवाद
- European Union सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देता है। इसके विपरीत राष्ट्रवादी शक्तियाँ कई बार राष्ट्रीय संप्रभुता और घरेलू निर्णय लेने की शक्ति को प्राथमिकता देती हैं।
- इसलिए समकालीन यूरोप में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक तनाव Nationalism vs. Supranationalism के रूप में दिखाई देता है।
क्षेत्रीय राष्ट्रवाद और अलगाववाद
यूरोप में राष्ट्रवाद केवल राज्य-स्तर पर नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी दिखाई देता है।
Catalonia: स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र में एक विशिष्ट क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक स्वायत्तता/स्वतंत्रता की मांग ने राष्ट्रवाद के प्रश्न को महत्वपूर्ण बनाया है।
Scotland: स्कॉटलैंड में भी अलग राष्ट्रीय पहचान और यूनाइटेड किंगडम के भीतर उसके राजनीतिक भविष्य को लेकर राष्ट्रवादी राजनीति विकसित हुई है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि एक ही राज्य के भीतर कई राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पहचानें मौजूद हो सकती हैं।
राष्ट्रवाद की आलोचनाएँ
राष्ट्रवाद को लेकर उदारवादी, समाजवादी, नारीवादी और विश्वनागरिक दृष्टिकोणों से विभिन्न आलोचनाएँ की गई हैं।
Xenophobia और Racism: उग्र राष्ट्रवाद विदेशी समुदायों, प्रवासियों या अल्पसंख्यकों के प्रति भय, असहिष्णुता और बहिष्करण की भावना को बढ़ा सकता है।
Cosmopolitanism: विश्वनागरिक दृष्टिकोण राष्ट्रीय सीमाओं से परे मानवता की सार्वभौमिक एकता पर जोर देता है। इसके अनुसार राजनीतिक और नैतिक दायित्व केवल अपने राष्ट्र तक सीमित नहीं होने चाहिए।
Unity vs. Division: राष्ट्रवाद अपने राष्ट्र के भीतर एकता पैदा कर सकता है, लेकिन उसी प्रक्रिया में “हम” और “वे” का विभाजन भी पैदा हो सकता है।
इसलिए राष्ट्रवाद की सबसे महत्वपूर्ण आलोचनाओं में से एक यह है कि जो विचार अंदरूनी एकता पैदा करता है, वही बाहरी विभाजन को भी बढ़ा सकता है।
फ्रांस में राष्ट्रवाद
- फ्रांसीसी राष्ट्रवाद का विकास फ्रांसीसी क्रांति और गणतांत्रिक परंपरा से गहराई से जुड़ा है।
- फ्रांस में Laïcité अर्थात धर्मनिरपेक्षता राज्य और सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण अवधारणा है।
- फ्रांसीसी राष्ट्रवाद में नागरिकता, गणतंत्र, समानता और धर्मनिरपेक्षता को राष्ट्रीय पहचान के महत्वपूर्ण तत्वों के रूप में देखा जाता है।
यूनाइटेड किंगडम में राष्ट्रवाद
यूनाइटेड किंगडम में ब्रिटिश पहचान के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रीय राष्ट्रीय पहचानों का भी विकास हुआ है।
विशेष रूप से:
- Scottish Nationalism
- Welsh Nationalism
- Northern Irish Nationalism
ने ब्रिटिश संघ की प्रकृति और भविष्य को प्रभावित किया है।
इसलिए UK राष्ट्रवाद का अध्ययन बहुस्तरीय राष्ट्रीय पहचान के उदाहरण के रूप में किया जा सकता है।
बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद
- बाल्कन यूरोपीय राष्ट्रवाद के संघर्षपूर्ण रूप को समझने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
- यहाँ विभिन्न जातीय, भाषाई और धार्मिक समुदायों की राष्ट्रीय आकांक्षाएँ एक-दूसरे से टकराती रही हैं।
- पैन-स्लाववाद, जातीय राष्ट्रवाद, साम्राज्यवादी राजनीति और क्षेत्रीय दावों ने बाल्कन की राजनीति को प्रभावित किया।
- इसलिए बाल्कन को अक्सर राष्ट्रवाद की एकीकरणकारी तथा विघटनकारी दोनों शक्तियों को समझने के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
यूरोपीय और गैर–यूरोपीय राष्ट्रवाद में अंतर
| आधार | यूरोपीय राष्ट्रवाद | गैर–यूरोपीय राष्ट्रवाद |
| ऐतिहासिक संदर्भ | राष्ट्र-राज्य का निर्माण | औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष |
| प्रमुख उद्देश्य | राजनीतिक एकीकरण और राज्य निर्माण | स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय |
| प्रमुख चुनौती | साम्राज्य, राजवंश और आंतरिक विभाजन | औपनिवेशिक एवं साम्राज्यवादी नियंत्रण |
| प्रमुख आधार | भाषा, संस्कृति, क्षेत्र और इतिहास | संस्कृति, पहचान, स्वतंत्रता और उपनिवेश-विरोध |
| प्रमुख उदाहरण | इटली और जर्मनी | भारत, चीन, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका |
गैर-यूरोपीय राष्ट्रवाद अक्सर यूरोपीय राष्ट्रवाद से प्रभावित हुआ, लेकिन उसने इन विचारों को अपने औपनिवेशिक और सामाजिक संदर्भों के अनुसार पुनर्गठित किया।
Related MCQ
- ‘Imagined Communities’ की अवधारणा किस विचारक से संबंधित है?
- अर्नेस्ट गेल्नर
B. बेनेडिक्ट एंडरसन
C. एंथनी डी. स्मिथ
D. एरिक हॉब्सबॉम
उत्तर: B. बेनेडिक्ट एंडरसन
- निम्नलिखित में से किसे ‘Ethnosymbolism’ से प्रमुख रूप से जोड़ा जाता है?
- अर्नेस्ट गेल्नर
B. कार्ल मार्क्स
C. एंथनी डी. स्मिथ
D. बेनेडिक्ट एंडरसन
उत्तर: C. एंथनी डी. स्मिथ
- राष्ट्रवाद को आधुनिकता एवं औद्योगीकरण की प्रक्रिया से जोड़ने वाले विचारक कौन हैं?
- अर्नेस्ट गेल्नर
B. ज्यूसेपे मैज़िनी
C. जोहान हर्डर
D. एंथनी डी. स्मिथ
उत्तर: A. अर्नेस्ट गेल्नर
- निम्नलिखित में से कौन–सा युग्म सही सुमेलित है?
| विचारक | अवधारणा |
| A. हर्डर | Volk |
| B. एंडरसन | Blood and Iron |
| C. बिस्मार्क | Imagined Communities |
| D. मैज़िनी | Ethnosymbolism |
उत्तर: A. हर्डर – Volk
- ‘Blood and Iron’ की नीति किससे संबंधित है?
- ज्यूसेपे मैज़िनी
B. ओटो वॉन बिस्मार्क
C. गैरीबाल्डी
D. कैवूर
उत्तर: B. ओटो वॉन बिस्मार्क
- इटली के एकीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन–सा सही है?
- मैज़िनी – Young Italy
B. गैरीबाल्डी – Red Shirts
C. कैवूर – कूटनीतिक भूमिका
D. उपर्युक्त सभी
उत्तर: D. उपर्युक्त सभी
- ‘Young Italy’ संगठन की स्थापना किसने की थी?
- गैरीबाल्डी
B. कैवूर
C. मैज़िनी
D. बिस्मार्क
उत्तर: C. ज्यूसेपे मैज़िनी
- ‘Volk’ तथा ‘Volksgeist’ की अवधारणाएँ मुख्यतः किस विचारक से संबंधित हैं?
- हर्डर
B. रूसो
C. बिस्मार्क
D. एंडरसन
उत्तर: A. जोहान गॉटफ्राइड हर्डर
- निम्नलिखित में से कौन–सा राष्ट्रवाद के आधुनिकतावादी दृष्टिकोण की विशेषता है?
- राष्ट्र को शाश्वत और प्राकृतिक मानना
B. राष्ट्रवाद को आधुनिक सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का परिणाम मानना
C. राष्ट्र को केवल धार्मिक समुदाय मानना
D. राष्ट्रवाद को केवल जैविक संबंधों पर आधारित मानना
उत्तर: B. राष्ट्रवाद को आधुनिक सामाजिक–आर्थिक परिस्थितियों का परिणाम मानना
- पैन–स्लाववाद (Pan-Slavism) का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
- यूरोप में समाजवाद स्थापित करना
B. स्लाव लोगों को एकजुट करना
C. जर्मनी को विभाजित करना
D. फ्रांस में गणतंत्र स्थापित करना
उत्तर: B. स्लाव लोगों को एकजुट करना
- 11. जर्मनी के राजनीतिक एकीकरण में निर्णायक भूमिका किसने निभाई?
- मैज़िनी
B. गैरीबाल्डी
C. बिस्मार्क
D. हर्डर
उत्तर: C. ओटो वॉन बिस्मार्क
- 12. निम्नलिखित में से कौन–सा राष्ट्रवाद और राष्ट्र–राज्य के संबंध को सबसे उपयुक्त रूप से व्यक्त करता है?
- राष्ट्रवाद हमेशा राज्य-विरोधी होता है।
B. राष्ट्रवाद ने आधुनिक राष्ट्र-राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
C. राष्ट्रवाद का राज्य निर्माण से कोई संबंध नहीं है।
D. राष्ट्रवाद केवल धार्मिक पहचान पर आधारित है।
उत्तर: B. राष्ट्रवाद ने आधुनिक राष्ट्र–राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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