उपनिवेशवाद और वि-उपनिवेशीकरण राजनीति विज्ञान, विशेष रूप से तुलनात्मक राजनीति के महत्वपूर्ण विषय हैं। उपनिवेशवाद एक समूह द्वारा दूसरे समूह पर प्रभुत्व स्थापित करने की प्रथा है, जिससे व्यापक सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन होते हैं। वहीं, वि-उपनिवेशीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उपनिवेशित राष्ट्र स्वतंत्रता प्राप्त करते हैं।
उपनिवेशवाद की परिभाषा
उपनिवेशवाद एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को अपने अधीन कर लेता है। इस वर्चस्व में बस्तियाँ बसाना और स्थानीय संसाधनों का दोहन करना शामिल होता है। इसका मुख्य उद्देश्य उपनिवेशित क्षेत्र की राजनीतिक और आर्थिक प्रणालियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना होता है।
उपनिवेशवाद के विभिन्न रूप
- आप्रवासी/बसावट उपनिवेशवाद (Settler Colonialism): इसमें बड़ी संख्या में बसने वाले लोग नए क्षेत्र में स्थायी निवास स्थापित करते हैं।
- उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड।
- विशेषताएँ: मूल निवासियों का विस्थापन और नई शासन प्रणालियों की स्थापना।
- शोषणकारी उपनिवेशवाद (Exploitation Colonialism): इसमें स्थायी बसावट के बिना केवल संसाधनों और श्रम के दोहन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
- उदाहरण: बेल्जियम कांगो और ब्रिटिश भारत।
- विशेषताएँ: न्यूनतम बसावट, भारी आर्थिक शोषण और औपनिवेशिक सत्ता पर आर्थिक निर्भरता।

- बागान उपनिवेशवाद (Plantation Colonialism): नकदी फसलों के उत्पादन के लिए बड़े बागान स्थापित किए जाते हैं, जो अक्सर दास या बंधुआ श्रम पर निर्भर होते हैं।
- उदाहरण: कैरेबियाई द्वीप और दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका।
- विशेषताएँ: बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन और सख्त नस्लीय पदानुक्रम।
- प्रशासनिक उपनिवेशवाद (Administrative Colonialism): इसमें औपनिवेशिक शक्ति नौकरशाही व्यवस्था के माध्यम से सीधे शासन करती है।
- उदाहरण: फ्रांसीसी अल्जीरिया और ब्रिटिश नाइजीरिया।
- विशेषताएँ: केंद्रीकृत प्रशासन और औपनिवेशिक कानूनों को लागू करना।
- सांस्कृतिक उपनिवेशवाद (Cultural Colonialism): उपनिवेशित लोगों पर अपनी संस्कृति, भाषा और मूल्यों को थोपने पर केंद्रित।
- उदाहरण: अफ्रीका में मिशनरी गतिविधियाँ और भारत में ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली।
- विशेषताएँ: स्थानीय संस्कृतियों का ह्रास और पश्चिमी शिक्षा व धर्म को बढ़ावा।
नियंत्रण के प्रमुख साधन (Mechanisms)
- सैन्य विजय: सशस्त्र बलों का उपयोग करके क्षेत्रों पर नियंत्रण करना और स्थानीय प्रतिरोध को कुचलना।
- आर्थिक नियंत्रण: व्यापार एकाधिकार स्थापित करना और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का दोहन करके लाभ मातृ-देश को भेजना।
- कानूनी ढाँचा: अपने नियंत्रण को वैध ठहराने के लिए ऐसे कानून बनाना जो स्थानीय शासन और विरोध को दबाते हों।
- सांस्कृतिक आत्मसातकरण (Cultural Assimilation): भाषा, शिक्षा और धर्म के माध्यम से स्थानीय लोगों को औपनिवेशिक संस्कृति में ढालने का प्रयास।
उपनिवेशवाद के प्रभाव
- आर्थिक विघटन: स्थानीय पारंपरिक अर्थव्यवस्थाओं का विनाश और विदेशी शक्तियों पर निर्भरता का निर्माण।
- सामाजिक स्तरीकरण: नस्ल और जातीयता के आधार पर नए वर्ग विभाजन और दीर्घकालिक सामाजिक तनाव।
- सांस्कृतिक ह्रास: स्थानीय भाषाओं, परंपराओं और पहचान का नुकसान।
- राजनीतिक दमन: स्वदेशी शासन प्रणालियों को समाप्त करना और राजनीतिक अधिकारों का हनन।
वि–उपनिवेशीकरण (Decolonization)
वि-उपनिवेशीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उपनिवेशों ने स्वतंत्रता और संप्रभुता प्राप्त की। इसमें राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक पुनर्गठन शामिल रहा।
- राष्ट्रवादी आंदोलन: भारत में महात्मा गांधी और दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं ने स्वतंत्रता के लिए जन आंदोलन चलाए।
- वैश्विक राजनीतिक बदलाव: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्थापना ने उपनिवेशित देशों को स्वतंत्रता की मांग के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान किया।
- अंतर्राष्ट्रीय दबाव: अन्य देशों और वैश्विक संगठनों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और कूटनीतिक प्रयासों ने स्वतंत्रता आंदोलनों को बल दिया।
समकालीन प्रासंगिकता
- नव–उपनिवेशवाद (Neocolonialism): प्रत्यक्ष शासन समाप्त होने के बावजूद पूर्व औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा आर्थिक नीतियों और सांस्कृतिक प्रभाव के जरिए विकासशील देशों पर नियंत्रण बनाए रखना।
- क्षतिपूर्ति और सांस्कृतिक वापसी: औपनिवेशिक शोषण के लिए मुआवजे और लूटी गई ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों को लौटाने की मांगें।
- आधुनिक राजनीति में विरासत: आधुनिक राष्ट्रों की सीमाओं, आंतरिक संघर्षों, सामाजिक असमानताओं और शासन व्यवस्थाओं पर औपनिवेशिक इतिहास की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है।
उपनिवेशवाद–विरोधी संघर्ष (Anti-Colonial Struggles)
उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने और स्वतंत्रता प्राप्त करने के उद्देश्य से चलाए गए महत्वपूर्ण आंदोलन हैं। ये आंदोलन आत्मनिर्णय की इच्छा और विदेशी प्रभुत्व के विरुद्ध प्रतिरोध से उपजे हैं। इन्होंने कई देशों के राजनीतिक परिदृश्य को आकार दिया है और आज भी संप्रभुता व पहचान से जुड़ी बहसों को प्रभावित करते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
उपनिवेशवाद-विरोधी आंदोलनों ने 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी में तीव्र गति पकड़ी। इसके पीछे प्रमुख वैश्विक कारक थे:
- प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध: इन युद्धों ने औपनिवेशिक महाशक्तियों को आर्थिक व सैन्य रूप से कमजोर किया और उपनिवेशों में राष्ट्रवादी भावनाओं को जगाया।
- महामंदी (The Great Depression): 1930 के दशक के आर्थिक संकट ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ व्यापक जन-असंतोष पैदा किया।
- राष्ट्रवादी विचारधाराओं का उदय: स्वशासन, संप्रभुता और राष्ट्रीय पहचान के विचारों का वैश्विक स्तर पर प्रसार हुआ।

प्रमुख विशेषताएँ
- राष्ट्रवाद: एक मजबूत राष्ट्रीय पहचान की भावना, जिसने जन-आंदोलनों को एकजुट किया।
- जन–गोलबंदी (Mobilization): किसान, मजदूर, महिलाएं और बुद्धिजीवी वर्ग सहित समाज के विभिन्न वर्गों की व्यापक भागीदारी।
- विविध रणनीतियाँ: अहिंसक विरोध प्रदर्शन, सविनय अवज्ञा, सशस्त्र संघर्ष और राजनीतिक वार्ताओं जैसे तरीकों का उपयोग।
प्रमुख उपनिवेशवाद–विरोधी आंदोलन
- भारत
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू इसके प्रमुख नेता थे।
- असहयोग आंदोलन (1920): ब्रिटिश नीतियों और शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर बहिष्कार।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): नमक सत्याग्रह के माध्यम से औपनिवेशिक कानूनों का अहिंसक विरोध।
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942): अंग्रेजों को तत्काल भारत छोड़ने का खुला आह्वान।
- अफ्रीका
अफ्रीकी देशों में एकता और मुक्ति के लिए ‘पैन-अफ्रीकनवाद’ (Pan-Africanism) का उदय हुआ।
- प्रमुख नेता: क्वामे न्क्रूमा (घाना के पहले राष्ट्रपति), जोमो केन्याटा (केन्याई स्वतंत्रता सेनानी), और नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी नेता)।
- प्रमुख घटनाएं: केन्या में ब्रिटिश शासन के खिलाफ ‘माउ माउ विद्रोह’ और अल्जीरिया का स्वतंत्रता संग्राम (1954–1962)।
- दक्षिण–पूर्व एशिया
- वियतनाम: हो ची मिन्ह के नेतृत्व में फ्रांसीसी और बाद में अमेरिकी ताकतों के खिलाफ लंबा संघर्ष।
- इंडोनेशिया: सुकर्णो के नेतृत्व में डच (नीदरलैंड) उपनिवेशवाद के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम।
- मध्य पूर्व
अरब राष्ट्रवाद ने ओटोमन और यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों के खिलाफ आंदोलनों को प्रेरित किया, जैसे 1952 की मिस्र की क्रांति जिसने ब्रिटिश प्रभाव को समाप्त किया।
वैचारिक आधार
- साम्राज्यवाद–विरोध (Anti-Imperialism): औपनिवेशिक शोषण और विदेशी नियंत्रण का पूर्ण विरोध।
- मार्क्सवाद (Marxism): वर्ग संघर्ष और पूंजीवादी शोषण से मुक्ति के विचार, जिसने एशिया और अफ्रीका के कई मुक्ति आंदोलनों को प्रभावित किया।
- राष्ट्रवाद (Nationalism): साझा सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और संप्रभुता पर बल।
अंतर्राष्ट्रीय समर्थन और प्रभाव
- संयुक्त राष्ट्र (UN): द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उपनिवेशों की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का समर्थन किया।
- शीत युद्ध का प्रभाव: अमेरिका और सोवियत संघ ने अपने रणनीतिक हितों के अनुसार विभिन्न मुक्ति आंदोलनों को समर्थन दिया।
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM): नव-स्वतंत्र देशों ने महाशक्तियों के गुटों से अलग रहकर स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने का मार्ग चुना।
आंदोलनों के परिणाम और चुनौतियाँ
- नए राष्ट्र–राज्यों का उदय: 20वीं सदी के मध्य में दर्जनों देशों ने स्वतंत्रता और संप्रभुता प्राप्त की।
- विभाजन और आंतरिक संघर्ष: स्वतंत्रता के साथ अक्सर सीमा विवाद और आंतरिक जातीय/सांप्रदायिक हिंसा (जैसे भारत का विभाजन) देखने को मिली।
- उत्तर–औपनिवेशिक चुनौतियाँ: नव-स्वतंत्र देशों को संस्था निर्माण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और गरीबी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।
समकालीन प्रासंगिकता
- नव–उपनिवेशवाद: प्रत्यक्ष औपनिवेशिक नियंत्रण खत्म होने के बाद भी आर्थिक नीतियों और व्यापारिक निर्भरता के जरिए अप्रत्यक्ष प्रभुत्व जारी है।
- क्षतिपूर्ति और न्याय की मांग: पूर्व उपनिवेशों द्वारा ऐतिहासिक अन्याय के लिए मुआवजे और सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी की मांग तेज हो रही है।
- वैश्वीकरण का प्रभाव: वैश्विक आर्थिक असमानताओं ने विकासशील देशों के सामने संप्रभुता बनाए रखने की नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।
वि–उपनिवेशीकरण (Decolonization)
वि-उपनिवेशीकरण (Decolonization) राजनीति विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जो औपनिवेशिक शासन से स्वशासन में परिवर्तन की प्रक्रिया को दर्शाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई, जिसने दुनिया भर के कई देशों के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया।
वि–उपनिवेशीकरण की परिभाषा
वि-उपनिवेशीकरण का अर्थ औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने और उपनिवेशित राष्ट्रों को उनकी संप्रभुता पुनः सौंपने की प्रक्रिया है। इसके मुख्य आयाम निम्नलिखित हैं:
- राजनीतिक: स्वतंत्र और स्वशासित सरकारों की स्थापना।
- आर्थिक: प्राकृतिक संसाधनों, व्यापार और आर्थिक नीतियों पर स्थानीय नियंत्रण स्थापित करना।
- सांस्कृतिक: स्थानीय परंपराओं, भाषाओं और पहचान को पुनर्जीवित करना।
ऐतिहासिक संदर्भ
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वि-उपनिवेशीकरण को व्यापक गति मिली। युद्ध के कारण यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियाँ कमजोर हो चुकी थीं, जिससे उनके लिए उपनिवेशों पर नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो गया। उसी समय उपनिवेशित देशों में मजबूत राष्ट्रवादी आंदोलन उभरे। इसके अलावा, शीत युद्ध (Cold War) के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने के लिए इन आंदोलनों को अलग-अलग स्तरों पर समर्थन दिया।
वि–उपनिवेशीकरण के प्रमुख चरण
- 20वीं सदी की शुरुआत: एशिया और अफ्रीका में शुरुआती आंदोलनों की शुरुआत हुई (जैसे भारत में कांग्रेस और चीन में सन यात-सेन के नेतृत्व में स्वशासन की मांग)।
- 1945 के बाद का काल: द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद एशिया और अफ्रीका में स्वतंत्रता की लहर तेज हुई, जिसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के चार्टर से भी समर्थन मिला।
- 1960 का दशक: 1960 को “अफ्रीका का वर्ष” (Year of Africa) कहा जाता है, जिसमें अकेले एक वर्ष में नाइजीरिया, सेनेगल सहित 17 अफ्रीकी देशों को स्वतंत्रता मिली।

वि–उपनिवेशीकरण के प्रमुख सिद्धांत (Major Theories)
- आधुनिकीकरण सिद्धांत (Modernization Theory): यह मानता है कि समाज पारंपरिक अवस्था से आधुनिक अवस्था की ओर एक सीधी रेखा (Linear path) में विकसित होते हैं।
- निर्भरता सिद्धांत (Dependency Theory): यह तर्क देता है कि उपनिवेशवाद ने एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था बनाई जिससे विकासशील देश विकसित व पूर्व औपनिवेशिक शक्तियों पर आर्थिक रूप से हमेशा निर्भर रहें।
- उत्तर–औपनिवेशिक सिद्धांत (Postcolonial Theory): यह उपनिवेशवाद के सांस्कृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों का अध्ययन करता है और विश्लेषण करता है कि औपनिवेशिक इतिहास कैसे आज भी पहचान और सत्ता संरचनाओं को प्रभावित करता है।
प्रमुख घटनाएँ एवं मील के पत्थर
- भारत (1947): ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने वाला पहला बड़ा एशियाई देश बना, जिसने अन्य देशों के लिए एक मिसाल कायम की।
- अफ्रीकी स्वतंत्रता आंदोलन (1950–1970 का दशक): घाना (1957), केन्या (1963), और अल्जीरिया (1962) ने वार्ताओं और सशस्त्र संघर्षों के जरिए स्वतंत्रता हासिल की।
- वियतनाम (1954): डिएन बिएन फू (Dien Bien Phu) की लड़ाई में फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन का अंत हुआ।
- क्यूबा की क्रांति (1959): फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में लैटिन अमेरिका में एक समाजवादी राज्य की स्थापना हुई।
प्रमुख नेता
- महात्मा गांधी: भारत में अहिंसक सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिसने वैश्विक नागरिक अधिकार आंदोलनों को प्रेरित किया।
- क्वामे न्क्रूमा: घाना के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता, देश के पहले राष्ट्रपति और पैन-अफ्रीकनवाद के प्रमुख प्रवर्तक।
- नेल्सन मंडेला: दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) विरोधी संघर्ष के प्रतीक और देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति।
- हो ची मिन्ह: फ्रांसीसी और अमेरिकी वर्चस्व के खिलाफ वियतनामी स्वतंत्रता संग्राम के साम्यवादी नेता।
वि–उपनिवेशीकरण का प्रभाव
- नए राष्ट्र–राज्यों का उदय: दर्जनों स्वतंत्र राष्ट्रों का गठन और वैश्विक स्तर पर नई राष्ट्रीय पहचानों का निर्माण।
- आर्थिक चुनौतियाँ: नव-उपनिवेशवाद (Neocolonialism) के कारण कई नव-स्वतंत्र देश आर्थिक रूप से कमजोर और पूर्व औपनिवेशिक शक्तियों पर निर्भर रहे।
- सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता: औपनिवेशिक काल में खींची गई कृत्रिम सीमाओं के कारण कई देशों में जातीय संघर्ष और गृहयुद्ध हुए।
- अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का विस्तार: संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर विकासशील देशों की आवाज मजबूत हुई और गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का उदय हुआ।
प्रमुख केस स्टडीज
- भारत: 1947 में स्वतंत्रता के साथ देश का विभाजन हुआ, जिसने भीषण सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन की त्रासदी झेली।
- अल्जीरिया: फ्रांसीसी शासन के खिलाफ 1954 से 1962 तक चला सशस्त्र संघर्ष अत्यंत हिंसक रहा, जिसमें भारी मानवीय क्षति हुई।
- कांगो: 1960 में तेजी से हुए वि-उपनिवेशीकरण के तुरंत बाद राजनीतिक संकट गहराया और पहले प्रधानमंत्री पैट्रिस लुमुम्बा की हत्या कर दी गई।
- दक्षिण अफ्रीका: 1990 के दशक में रंगभेद से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण समानता और मानवाधिकारों की बड़ी जीत बना।
समकालीन प्रासंगिक मुद्दे
- मूल निवासियों के अधिकार (Indigenous Rights): दुनिया भर के मूल निवासी समूह अपने अधिकारों, पहचान की रक्षा और ऐतिहासिक अन्यायों की भरपाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- क्षतिपूर्ति (Reparations) की बहस: पूर्व औपनिवेशिक ताकतों द्वारा किए गए आर्थिक व सांस्कृतिक शोषण के बदले मुआवजे और लूटी गई धरोहरों की वापसी की मांग।
- वैश्वीकरण और संप्रभुता: वैश्वीकरण के युग में बहुराष्ट्रीय कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के प्रभाव के बीच वास्तविक आर्थिक संप्रभुता बनाए रखने की चुनौती।
Related MCQs
- निम्नलिखित में से किस वर्ष को “अफ्रीका का वर्ष” (Year of Africa) कहा जाता है, जिसमें 17 अफ्रीकी देशों ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी?
(A) 1947
(B) 1955
(C) 1960
(D) 1971
उत्तर: (C) 1960
- उस व्यवस्था को क्या कहा जाता है जिसमें प्रत्यक्ष राजनीतिक नियंत्रण समाप्त होने के बाद भी पूर्व औपनिवेशिक शक्तियाँ विकासशील देशों पर आर्थिक व सांस्कृतिक नियंत्रण बनाए रखती हैं?
(A) प्रत्यक्ष उपनिवेशवाद (Direct Colonialism)
(B) नव-उपनिवेशवाद (Neocolonialism)
(C) प्रशासनिक उपनिवेशवाद (Administrative Colonialism)
(D) अधिनायकवाद (Authoritarianism)
उत्तर: (B) नव–उपनिवेशवाद (Neocolonialism)
व्याख्या: नव-उपनिवेशवाद की अवधारणा को घाना के प्रथम राष्ट्रपति क्वामे न्क्रूमा ने अपनी पुस्तक ‘Neo-Colonialism: The Last Stage of Imperialism’ में प्रमुखता से परिभाषित किया था।
- सूची–I को सूची–II से सुमेलित कीजिए:
| सूची–I (नेता) | सूची–II (देश/आंदोलन) |
| (a) क्वामे न्क्रूमा | 1. वियतनाम |
| (b) जोमो केन्याटा | 2. दक्षिण अफ्रीका (रंगभेद विरोधी) |
| (c) हो ची मिन्ह | 3. घाना |
| (d) नेल्सन मंडेला | 4. केन्या |
कूट:
(A) a-3, b-4, c-1, d-2
(B) a-4, b-3, c-1, d-2
(C) a-3, b-4, c-2, d-1
(D) a-1, b-2, c-3, d-4
उत्तर: (A) a-3, b-4, c-1, d-2
- ‘निर्भरता सिद्धांत‘ (Dependency Theory) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन–सा कथन सही है?
(A) यह मानता है कि सभी राष्ट्र एक समान रेखीय मार्ग (Linear Path) से विकसित होते हैं।
(B) यह तर्क देता है कि केंद्र (विकसित देश) द्वारा परिधि (विकासशील देश) के संसाधनों का दोहन किया जाता है।
(C) यह पूर्णतः मुक्त बाज़ार और पश्चिमीकरण का समर्थन करता है।
(D) यह उपनिवेशवाद के मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर केंद्रित है।
उत्तर: (B) यह तर्क देता है कि केंद्र (विकसित देश) द्वारा परिधि (विकासशील देश) के संसाधनों का दोहन किया जाता है।
- 1954 में किस ऐतिहासिक लड़ाई ने वियतनाम में फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन के अंत पर मुहर लगाई?
(A) प्लासी का युद्ध
(B) अल्जीयर्स की लड़ाई
(C) डिएन बिएन फू की लड़ाई (Battle of Dien Bien Phu)
(D) स्वेज नहर संकट
उत्तर: (C) डिएन बिएन फू की लड़ाई
- कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर सही विकल्प चुनिए:
कथन (A): द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एशिया और अफ्रीका में वि-उपनिवेशीकरण की प्रक्रिया में तीव्र गति आई।
कारण (R): विश्व युद्ध ने ब्रिटेन और फ्रांस जैसी यूरोपीय शक्तियों को आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर कर दिया था।
(A) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
(D) (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
उत्तर: (A) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
प्रश्न 7. ‘माउ माउ विद्रोह‘ (Mau Mau Uprising) किस देश में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध लड़ा गया एक सशस्त्र संघर्ष था?
(A) नाइजीरिया
(B) केन्या
(C) जिम्बाब्वे
(D) मिस्र
उत्तर: (B) केन्या
प्रश्न 8. ‘द रैचेड ऑफ द अर्थ‘ (The Wretched of the Earth, 1961) पुस्तक के लेखक कौन हैं, जिन्होंने वि–उपनिवेशीकरण और हिंसा की भूमिका का विश्लेषण किया?
(A) एडवर्ड सईद
(B) फ्रांत्ज़ फैनन (Frantz Fanon)
(C) गायत्री स्पिवाक
(D) एंटोनियो ग्राम्शी
उत्तर: (B) फ्रांत्ज़ फैनन
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