क्षमताओं का दृष्टिकोण (Capability Approach) समकालीन राजनीतिक दर्शन, विकास सिद्धांत, सामाजिक न्याय और मानव कल्याण का एक महत्त्वपूर्ण दृष्टिकोण है। इसका केंद्रीय प्रश्न है ‘व्यक्ति वास्तव में क्या कर सकता है और क्या बन सकता है?’
- इस दृष्टिकोण के अनुसार, किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता का मूल्यांकन केवल उसकी आय, संपत्ति, संसाधनों या आर्थिक विकास के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय यह देखना आवश्यक है कि व्यक्ति के पास सम्मानजनक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, स्वस्थ रहने, राजनीतिक भागीदारी करने, अपनी पसंद के अनुसार जीवन चुनने और अपनी क्षमताओं का विकास करने के कितने वास्तविक अवसर उपलब्ध हैं।
इस दृष्टिकोण के दो प्रमुख विचारक हैं; अमर्त्य सेन (Amartya Sen) और मार्था सी. नुसबाम (Martha C. Nussbaum)। दोनों मानव जीवन की वास्तविक स्वतंत्रताओं और क्षमताओं को महत्त्व देते हैं, लेकिन उनके दृष्टिकोण में कुछ महत्त्वपूर्ण अंतर भी हैं।
अमर्त्य सेन: जीवन परिचय एवं बौद्धिक योगदान
अमर्त्य सेन ने कल्याणकारी अर्थशास्त्र, सामाजिक न्याय, गरीबी, अकाल, मानव विकास और स्वतंत्रता के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें 1998 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
सेन ने विकास को केवल राष्ट्रीय आय या सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि तक सीमित रखने का विरोध किया। उनके अनुसार, विकास का वास्तविक उद्देश्य लोगों की स्वतंत्रताओं और जीवन की संभावनाओं का विस्तार करना होना चाहिए।
उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
- Poverty and Famines: An Essay on Entitlement and Deprivation (1981): गरीबी, अकाल और संसाधनों तक पहुँच के प्रश्न का विश्लेषण।
- Commodities and Capabilities (1985): वस्तुओं, उपयोगिताओं और वास्तविक क्षमताओं के बीच अंतर की व्याख्या।
- Development as Freedom (1999): विकास को स्वतंत्रता के विस्तार के रूप में प्रस्तुत करने वाली प्रमुख कृति।
- The Idea of Justice (2009): न्याय, सार्वजनिक तर्क-विमर्श और वास्तविक अन्याय को कम करने की संभावनाओं पर विचार।
सेन के दृष्टिकोण में व्यक्ति केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करने वाला उपभोक्ता नहीं है, बल्कि वह अपने जीवन के उद्देश्यों का निर्धारण करने वाला स्वतंत्र व्यक्ति और सामाजिक निर्णयों में भाग लेने वाला नागरिक भी है।
मार्था नुसबाम: जीवन परिचय एवं बौद्धिक योगदान
नुसबाम ने मानव गरिमा, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता, शिक्षा, भावनाओं और मानवीय क्षमताओं के विकास पर महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने क्षमताओं के दृष्टिकोण को एक अधिक स्पष्ट नैतिक एवं राजनीतिक ढाँचे के रूप में विकसित किया।
नुसबाम का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को एक गरिमापूर्ण मानव जीवन जीने के लिए कुछ बुनियादी अवसर उपलब्ध होने चाहिए। केवल संसाधन प्रदान कर देना पर्याप्त नहीं है; समाज और राज्य को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यक्ति उन संसाधनों का उपयोग अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए कर सके।
उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं:
- Women and Human Development: The Capabilities Approach (2000): महिलाओं की वास्तविक स्वतंत्रताओं और मानव विकास का विश्लेषण।
- Frontiers of Justice: Disability, Nationality, Species Membership (2006): दिव्यांगता, राष्ट्रीय सीमाओं और अन्य प्राणियों से संबंधित न्याय के प्रश्न।
- Creating Capabilities: The Human Development Approach (2011): क्षमताओं के दृष्टिकोण की व्यवस्थित व्याख्या।
- Sex and Social Justice (1999): लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय से संबंधित विचार।
नुसबाम ने विशेष रूप से यह प्रश्न उठाया कि एक न्यायपूर्ण समाज में प्रत्येक व्यक्ति को न्यूनतम स्तर पर कौन-सी बुनियादी मानवीय क्षमताएँ उपलब्ध होनी चाहिए।
क्षमताओं के दृष्टिकोण की प्रमुख अवधारणाएँ
इस दृष्टिकोण को समझने के लिए कुछ बुनियादी अवधारणाओं के बीच अंतर स्पष्ट होना आवश्यक है।
(क) क्षमता (Capability): क्षमता का अर्थ उन वास्तविक अवसरों और स्वतंत्रताओं से है, जिनके माध्यम से व्यक्ति विभिन्न प्रकार के जीवन जीने और कार्य करने में सक्षम होता है। यह केवल किसी कार्य को करने की योग्यता नहीं, बल्कि उस कार्य को वास्तव में कर पाने का अवसर भी है।
(ख) कार्यसिद्धियाँ (Functionings): कार्यसिद्धियाँ उन अवस्थाओं और गतिविधियों को कहते हैं, जिन्हें व्यक्ति अपने जीवन में वास्तव में प्राप्त करता है या संपन्न करता है। इनमें स्वस्थ रहना, शिक्षित होना, पर्याप्त पोषण प्राप्त करना, सामाजिक संबंध बनाए रखना और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शामिल हो सकते हैं।
मुख्य अंतर: क्षमता व्यक्ति के लिए उपलब्ध वास्तविक विकल्पों को दर्शाती है, जबकि कार्यसिद्धि उन विकल्पों में से प्राप्त अवस्था या गतिविधि को दर्शाती है।
(ग) संसाधन एवं वस्तुएँ (Resources and Commodities): संसाधनों में आय, संपत्ति, भोजन, आवास, परिवहन और अन्य वस्तुएँ शामिल हो सकती हैं। ये मानव कल्याण के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका होना अपने आप में यह सुनिश्चित नहीं करता कि प्रत्येक व्यक्ति समान जीवन जी सकेगा।
उदाहरण के लिए, साइकिल उपलब्ध होने पर भी यदि किसी व्यक्ति के क्षेत्र में सुरक्षित सड़कें नहीं हैं, तो वह साइकिल का पूरा उपयोग नहीं कर पाएगा। इस प्रकार संसाधनों का वास्तविक लाभ व्यक्ति और उसके सामाजिक परिवेश पर निर्भर करता है।
(घ) रूपांतरण कारक (Conversion Factors)
रूपांतरण कारक यह स्पष्ट करते हैं कि समान संसाधन अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग वास्तविक अवसर क्यों उत्पन्न करते हैं।
- व्यक्तिगत कारक: आयु, शारीरिक स्थिति, स्वास्थ्य और दिव्यांगता।
- सामाजिक कारक: लैंगिक भेदभाव, जातिगत असमानता, सामाजिक मान्यताएँ और सुरक्षा।
- पर्यावरणीय कारक: जलवायु, प्रदूषण, परिवहन तथा भौतिक अवसंरचना।
उदाहरण के लिए, समान आय होने पर भी किसी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिला के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना उस व्यक्ति की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है, जिसे सुरक्षित परिवहन और बेहतर शैक्षिक संस्थान उपलब्ध हैं।
(ङ) अभिकर्तृत्व (Agency)
अभिकर्तृत्व का अर्थ व्यक्ति की उस क्षमता से है, जिसके माध्यम से वह अपने उद्देश्यों के अनुसार कार्य करता है और उन लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है जिन्हें वह मूल्यवान मानता है। सेन के विचार में व्यक्ति केवल अपने निजी कल्याण का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सक्रिय भागीदार भी है।
उदाहरण के लिए, किसी नागरिक का स्थानीय शासन में भाग लेना, भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाना या सामूहिक हित में काम करना अभिकर्तृत्व का उदाहरण हो सकता है।
अमर्त्य सेन का क्षमताओं का दृष्टिकोण
सेन ने क्षमताओं के दृष्टिकोण को कल्याण और विकास के मूल्यांकन का एक वैकल्पिक आधार बनाया। उनके अनुसार, किसी समाज की प्रगति को केवल इस आधार पर नहीं आँकना चाहिए कि उसकी अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है, बल्कि यह देखना चाहिए कि उसके नागरिक वास्तव में किस प्रकार का जीवन जी सकते हैं।
उनके दृष्टिकोण के प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित हैं।
- पहला, स्वतंत्रता ही विकास का साधन और साध्य है। सेन की पुस्तक Development as Freedom (1999) में विकास को वास्तविक स्वतंत्रताओं के विस्तार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक अवसर और राजनीतिक स्वतंत्रता न केवल विकास के परिणाम हैं, बल्कि विकास को संभव बनाने वाले साधन भी हैं।
- दूसरा, संसाधनों की तुलना में वास्तविक अवसर अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। समान आय या समान संसाधन होने के बावजूद लोग अपने जीवन में अलग-अलग उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए विकास का मूल्यांकन व्यक्ति की वास्तविक क्षमताओं के आधार पर होना चाहिए।
- तीसरा, सार्वजनिक तर्क-विमर्श (Public Reasoning) आवश्यक है। सेन के अनुसार, यह निर्धारित करने के लिए कि कौन-सी क्षमताएँ और स्वतंत्रताएँ सामाजिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं, सार्वजनिक बहस, नागरिक सहभागिता और तर्कपूर्ण विचार-विमर्श की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
- चौथा, सेन एक निश्चित सार्वभौमिक सूची निर्धारित करने के प्रति सावधान हैं। वह इस बात पर बल देते हैं कि क्षमताओं के चयन और उनके महत्त्व का निर्धारण संदर्भ, सार्वजनिक विचार-विमर्श और संबंधित समाज की परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि सेन मानवाधिकारों या सार्वभौमिक मूल्यों को अस्वीकार करते हैं।
- पाँचवाँ, अभाव और वंचना का बहुआयामी अध्ययन। गरीबी केवल कम आय की स्थिति नहीं है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक भागीदारी, राजनीतिक स्वतंत्रता और जीवन के अवसरों से वंचित होने की स्थिति भी है।
सेन के दृष्टिकोण की विशेषता यह है कि वह विकास को व्यक्ति की स्वतंत्रता, विकल्पों और सामाजिक सहभागिता से जोड़ते हैं।
मार्था नुसबाम का क्षमताओं का दृष्टिकोण
नुसबाम ने क्षमताओं के दृष्टिकोण को मानव गरिमा और सामाजिक न्याय के एक अधिक स्पष्ट मानक के रूप में विकसित किया। उनका प्रमुख प्रश्न है ‘एक न्यायपूर्ण समाज को प्रत्येक व्यक्ति के लिए कौन-से न्यूनतम अवसर सुनिश्चित करने चाहिए, ताकि वह गरिमापूर्ण जीवन जी सके?’
नुसबाम के अनुसार, समाज को प्रत्येक व्यक्ति की कुछ केंद्रीय क्षमताओं को न्यूनतम स्वीकार्य स्तर तक विकसित करने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने इन क्षमताओं की एक प्रमुख सूची प्रस्तुत की है।
नुसबाम की दस केंद्रीय मानवीय क्षमताएँ
- जीवन (Life)
- शारीरिक स्वास्थ्य (Bodily Health)
- शारीरिक अखंडता (Bodily Integrity
- इंद्रियाँ, कल्पना और विचार (Senses, Imagination and Thought)
- भावनाएँ (Emotions)
- व्यावहारिक तर्क (Practical Reason)
- संबद्धता (Affiliation)
- अन्य प्रजातियों के प्रति संबंध (Other Species)
- खेल (Play)
- अपने पर्यावरण पर नियंत्रण (Control over One’s Environment)
इसमें राजनीतिक सहभागिता, अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता के साथ संपत्ति रखने, काम करने तथा आर्थिक अवसर प्राप्त करने की क्षमता भी शामिल है।
- ये दस केंद्रीय क्षमताएँ नुसबाम की पुस्तक Women and Human Development (2000) तथा उनके बाद के लेखन में विकसित दृष्टिकोण का महत्त्वपूर्ण भाग हैं। Creating Capabilities (2011) में भी वह इस दृष्टिकोण को स्पष्ट करती हैं।
- नुसबाम का तर्क है कि इन क्षमताओं को केवल सामूहिक उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा से जुड़े अवसरों के रूप में समझना चाहिए। किसी समाज की औसत उपलब्धि अच्छी होने पर भी यदि उसके कुछ नागरिक बुनियादी क्षमताओं से वंचित हैं, तो न्याय का प्रश्न बना रहता है।
अमर्त्य सेन और मार्था नुसबाम के विचारों में अंतर
दोनों विचारक मानव कल्याण का मूल्यांकन वास्तविक स्वतंत्रताओं और क्षमताओं के आधार पर करते हैं, लेकिन उनके सिद्धांतों के उद्देश्य और पद्धति में कुछ अंतर हैं।
| तुलना का आधार | अमर्त्य सेन | मार्था नुसबाम |
| प्रमुख कृति | Development as Freedom (1999) | Women and Human Development (2000) |
| मुख्य उद्देश्य | विकास, स्वतंत्रता और कल्याण का मूल्यांकन | मानव गरिमा और न्याय के न्यूनतम मानक निर्धारित करना |
| केंद्रीय प्रश्न | व्यक्ति वास्तव में क्या कर सकता है और क्या बन सकता है? | प्रत्येक व्यक्ति को कौन-सी केंद्रीय क्षमताएँ मिलनी चाहिए? |
| क्षमताओं की सूची | एक निश्चित सार्वभौमिक सूची पर बल नहीं; सार्वजनिक तर्क-विमर्श महत्त्वपूर्ण | दस केंद्रीय मानवीय क्षमताओं की सूची प्रस्तुत |
| लोकतंत्र की भूमिका | सार्वजनिक तर्क-विमर्श, सहभागिता और स्वतंत्रता के विस्तार पर बल | गरिमा और केंद्रीय क्षमताओं की रक्षा के लिए न्यायपूर्ण संस्थाओं पर बल |
| न्याय का आधार | वास्तविक स्वतंत्रताओं और वंचनाओं का मूल्यांकन | प्रत्येक व्यक्ति के लिए केंद्रीय क्षमताओं का न्यूनतम स्तर |
| प्रमुख क्षेत्र | विकास अर्थशास्त्र, गरीबी, अकाल, मानव विकास | राजनीतिक दर्शन, मानव गरिमा, लैंगिक न्याय, सामाजिक न्याय |
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण अंतर: सेन क्षमताओं के चयन में सार्वजनिक तर्क-विमर्श और संदर्भगत मूल्यांकन को अधिक महत्त्व देते हैं, जबकि नुसबाम न्यायपूर्ण समाज के लिए दस केंद्रीय क्षमताओं का स्पष्ट मानक प्रस्तुत करती हैं। दोनों के दृष्टिकोण में समानता है, लेकिन उनकी पद्धतियाँ पूरी तरह समान नहीं हैं।
क्षमताओं का दृष्टिकोण और अन्य राजनीतिक सिद्धांत
(क) उपयोगितावाद (Utilitarianism)
उपयोगितावाद सामान्यतः सुख, संतुष्टि या उपयोगिता के अधिकतमकरण के आधार पर सामाजिक कल्याण का मूल्यांकन करता है। सेन इस बात की ओर ध्यान दिलाते हैं कि व्यक्ति लंबे समय तक अभाव में रहने के कारण अपनी अपेक्षाओं और इच्छाओं को कम कर सकता है। इसलिए केवल उसकी व्यक्तिपरक संतुष्टि से वास्तविक वंचना का पता नहीं चलता।
उदाहरण के लिए, शिक्षा से वंचित व्यक्ति यदि अपनी स्थिति को सामान्य मानकर संतुष्ट है, तब भी उसके वास्तविक अवसर सीमित हो सकते हैं। क्षमताओं का दृष्टिकोण इस प्रकार जीवन की वास्तविक संभावनाओं पर ध्यान देता है।
(ख) जॉन रॉल्स का न्याय सिद्धांत (John Rawls)
रॉल्स ने न्याय के सिद्धांत में मूल स्वतंत्रताओं, अवसरों की निष्पक्ष समानता और प्राथमिक सामाजिक वस्तुओं (Primary Social Goods) पर बल दिया। प्राथमिक सामाजिक वस्तुओं में अधिकार, स्वतंत्रताएँ, अवसर, आय, संपत्ति और आत्मसम्मान के सामाजिक आधार शामिल हैं।
सेन इस दृष्टिकोण से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं: यदि दो व्यक्तियों के पास समान संसाधन हों, तो क्या वे समान वास्तविक स्वतंत्रताओं का उपयोग कर पाएँगे? स्वास्थ्य, दिव्यांगता, सामाजिक भेदभाव और पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण उनका उत्तर नकारात्मक हो सकता है।
इसलिए क्षमताओं का दृष्टिकोण संसाधनों के साथ-साथ उन वास्तविक अवसरों का भी मूल्यांकन करता है, जिन्हें व्यक्ति प्राप्त कर सकता है।
(ग) मानव विकास दृष्टिकोण (Human Development Approach)
मानव विकास दृष्टिकोण लोगों के विकल्पों और जीवन की गुणवत्ता को विकास का केंद्र बनाता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की मानव विकास रिपोर्टों ने स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे आयामों के माध्यम से विकास के मूल्यांकन को लोकप्रिय बनाया है।
सेन के विचारों ने इस दृष्टिकोण को बौद्धिक आधार प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि मानव विकास सूचकांक (HDI) क्षमताओं के दृष्टिकोण का संपूर्ण माप नहीं है; यह कुछ प्रमुख आयामों का संक्षिप्त संकेतक है।
क्षमताओं के दृष्टिकोण की आलोचनाएँ एवं सीमाएँ
- क्षमताओं का मापन कठिन है: आय और उत्पादन को संख्यात्मक रूप में मापना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन स्वतंत्रता, गरिमा, सामाजिक भागीदारी और वास्तविक अवसरों का मूल्यांकन जटिल है। इसलिए विभिन्न क्षमताओं को मापने के लिए उपयुक्त संकेतकों की आवश्यकता होती है।
- क्षमताओं की प्राथमिकता निर्धारित करना कठिन है: यदि स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वतंत्रता, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी सभी महत्त्वपूर्ण हैं, तो सीमित संसाधनों की स्थिति में इनके बीच प्राथमिकता कैसे निर्धारित की जाए? सेन का सार्वजनिक तर्क-विमर्श इस समस्या का समाधान खोजने का एक माध्यम है, लेकिन इससे हर विवाद स्वतः समाप्त नहीं होता।
- सार्वभौमिकता और सांस्कृतिक विविधता का प्रश्न: नुसबाम की केंद्रीय क्षमताओं की सूची के संबंध में प्रश्न उठता है कि क्या सभी समाजों में समान मानक लागू किए जाने चाहिए। नुसबाम मानव गरिमा के आधार पर सार्वभौमिक न्यूनतम क्षमताओं का समर्थन करती हैं, जबकि सेन चयन और मूल्यांकन में सार्वजनिक विचार-विमर्श को विशेष महत्त्व देते हैं।
- राज्य की भूमिका और संसाधनों की सीमा: वास्तविक क्षमताओं को विकसित करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं में निवेश आवश्यक है। लेकिन निर्धन राज्यों के पास सीमित संसाधन हो सकते हैं, जिससे सभी लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त करना कठिन हो जाता है।
- क्षमता और वास्तविक उपलब्धि में अंतर: किसी व्यक्ति को स्वतंत्र चुनाव का अवसर देना और उसकी ओर से किसी निश्चित जीवनशैली को अनिवार्य कर देना अलग बातें हैं। यदि राज्य व्यक्ति को केवल एक प्रकार के जीवन के लिए बाध्य करे, तो वह स्वतंत्रता की अवधारणा के विरुद्ध जा सकता है।
- इन सीमाओं के बावजूद, क्षमताओं का दृष्टिकोण सामाजिक नीति, मानव विकास और न्याय का मूल्यांकन करने के लिए एक प्रभावशाली वैकल्पिक ढाँचा प्रदान करता है।
निष्कर्ष
क्षमताओं का दृष्टिकोण विकास, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय को समझने का एक महत्त्वपूर्ण वैकल्पिक ढाँचा है। अमर्त्य सेन ने यह स्पष्ट किया कि विकास का मूल्यांकन व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रताओं और अवसरों के आधार पर होना चाहिए, जबकि मार्था नुसबाम ने मानव गरिमा की रक्षा के लिए दस केंद्रीय क्षमताओं का व्यवस्थित मानक प्रस्तुत किया।
इस दृष्टिकोण के अनुसार, न्यायपूर्ण समाज वह नहीं है जिसमें केवल संसाधनों का वितरण समान हो, बल्कि वह है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के मूल्यवान उद्देश्यों को प्राप्त करने का वास्तविक अवसर मिले।
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