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मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और अन्य अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौते

(1971 से 2026 तक की पर्यावरणीय समझौते एवं प्रोटोकॉल)

16 सितंबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस (World Ozone Day) के अवसर पर ओज़ोन परत के संरक्षण के लिए किए गए वैश्विक प्रयासों, विशेष रूप से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) की ऐतिहासिक उपलब्धियों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित किया गया।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जाता है। इसने ओज़ोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले रसायनों के उत्पादन और उपभोग को नियंत्रित करने तथा उन्हें धीरे-धीरे समाप्त करने के लिए एक वैश्विक कानूनी ढाँचा प्रदान किया।

विश्व ओज़ोन दिवस 2026 – Theme & Focus

Theme: “Global action for a cooler planet – Celebrating 10 years of sustainable cooling under the Kigali Amendment to the Montreal Protocol”

इसका केंद्रीय विचार है – एक ठंडे और अधिक टिकाऊ ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई।

  • 2026 का फोकस विशेष रूप से बढ़ती वैश्विक तापमान वृद्धि के बीच cooling की बढ़ती आवश्यकता और ऐसी cooling technologies के विकास पर है जो ऊर्जा-कुशल हों, जलवायु-अनुकूल हों, कम Global Warming Potential वाले refrigerants का उपयोग करें, HFC emissions को कम करें।
  • यह वर्ष किगाली संशोधन के एक दशक के प्रयासों को भी रेखांकित करता है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल क्या है?

  • 1970 और 1980 के दशकों में वैज्ञानिक शोधों से यह स्पष्ट हुआ कि कुछ मानव-निर्मित रसायन, विशेष रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), पृथ्वी के वायुमंडल में ऊपर जाकर समताप मंडल (Stratosphere) तक पहुँचते हैं।
  • समताप मंडल पृथ्वी की सतह से लगभग 12 से 50 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ वायुमंडलीय क्षेत्र है। यहाँ पहुँचने के बाद इन रसायनों से निकलने वाले क्लोरीन और ब्रोमीन जैसे तत्व ओज़ोन अणुओं को नष्ट करने लगते हैं।
  • इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप विशेष रूप से अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन परत में अत्यधिक क्षरण देखा गया, जिसे सामान्यतः ओज़ोन छिद्र” (Ozone Hole) कहा जाता है।
  • ओज़ोन परत पृथ्वी को सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet/UV) विकिरण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए इसका क्षरण मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिक तंत्र, कृषि और समुद्री जीवन के लिए गंभीर खतरा माना गया।

वियना कन्वेंशन, 1985

  • ओज़ोन परत के क्षरण से संबंधित वैज्ञानिक प्रमाणों के सामने आने के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने 1985 में वियना कन्वेंशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ ओज़ोन लेयर (Vienna Convention) को अपनाया।
  • वियना कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य ओज़ोन परत की सुरक्षा के लिए देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरणीय निगरानी और सूचना के आदानप्रदान का ढाँचा तैयार करना था।
  • यह स्वयं मुख्य रूप से रसायनों के उत्पादन पर कठोर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाने वाला समझौता नहीं था, बल्कि इसने आगे आने वाले मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के लिए संस्थागत और वैज्ञानिक आधार तैयार किया।
  • भारत 1991 में वियना कन्वेंशन का पक्षकार बना।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को 1987 में अपनाया गया। यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी बहुपक्षीय पर्यावरणीय समझौता (Legally Binding Multilateral Environmental Agreement) है।
  • इसका मूल उद्देश्य ओज़ोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों अर्थात् Ozone-Depleting Substances (ODS) के उत्पादन और उपभोग को नियंत्रित करना तथा उन्हें चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है।
  • इसके अंतर्गत लगभग 100 मानवनिर्मित रसायनों को नियंत्रित किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से CFCs – Chlorofluorocarbons, HCFCs – Hydrochlorofluorocarbons, Halons, Carbon Tetrachloride अन्य ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थ शामिल हैं।
  • भारत ने जून 1992 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सदस्यता ग्रहण की।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की प्रमुख विशेषताएँ

() चरणबद्ध समाप्ति Phase-out

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने विभिन्न रसायनों को उनके पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा और विकसित तथा विकासशील देशों के लिए अलगअलग समयसीमा निर्धारित की।
  • इसका उद्देश्य अचानक प्रतिबंध लगाने के बजाय उद्योगों को वैकल्पिक तकनीकों और पदार्थों की ओर संक्रमण का समय देना था।

() विकसित एवं विकासशील देशों के लिए अलगअलग दायित्व

  • प्रोटोकॉल में Common but Differentiated Approach की भावना दिखाई देती है। विकासशील देशों को अपनी तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत अधिक समय दिया गया।
  • इससे वैश्विक पर्यावरणीय दायित्वों और विकास संबंधी आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया।

() उपभोग की गणना

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में “Consumption” को औपचारिक रूप से इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:

Consumption = Production + Imports − Exports − Verified Destruction

  • अर्थात् किसी देश में संबंधित पदार्थ का वास्तविक उपभोग उसके उत्पादन और आयात में से निर्यात तथा सत्यापित विनाश को घटाकर निर्धारित किया जाता है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को अक्सर विश्व के सबसे सफल पर्यावरणीय समझौतों में से एक माना जाता है।
  • इसके माध्यम से वैश्विक स्तर पर ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों के उपयोग में भारी कमी लाई गई और लगभग 99% Ozone-Depleting Substances (ODS) के चरणबद्ध उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई।
  • इसकी सफलता यह दिखाती है कि वैज्ञानिक प्रमाणों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत सहयोग, कानूनी प्रतिबद्धताओं और तकनीकी विकल्पों के माध्यम से वैश्विक पर्यावरणीय समस्या का समाधान करने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई संभव है।

भारत की उपलब्धियाँ

भारत ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

भारत ने विशेष रूप से–

  • CFCs को चरणबद्ध रूप से समाप्त किया।
  • Carbon Tetrachloride (CTC) को समाप्त किया।
  • Halons को चरणबद्ध रूप से समाप्त किया।
  • HCFC-141b के उत्पादन, आयात और उपयोग को 1 जनवरी 2020 से पूरी तरह समाप्त किया।
  • 2025 तक HCFC के उत्पादन और उपभोग में उल्लेखनीय कमी हासिल की।

इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ने ओज़ोन संरक्षण से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को अपनी राष्ट्रीय पर्यावरणीय नीतियों और औद्योगिक संक्रमण के साथ जोड़ा है।

सार्वभौमिक अनुसमर्थन Universal Ratification

  • 16 सितंबर 2009 को वियना कन्वेंशन और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
  • दोनों समझौते संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सार्वभौमिक अनुसमर्थन (Universal Ratification) प्राप्त करने वाले पहले पर्यावरणीय समझौतों के रूप में स्थापित हुए।
  • इसका अर्थ है कि संयुक्त राष्ट्र के सभी 198 सदस्य देशों ने इन समझौतों को स्वीकार किया।
  • यह उपलब्धि अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय शासन (Global Environmental Governance) में व्यापक वैश्विक सहमति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

किगाली संशोधन, 2016

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता के बाद जब उद्योगों ने CFCs और HCFCs के स्थान पर वैकल्पिक पदार्थों का उपयोग शुरू किया, तो एक नई पर्यावरणीय चुनौती सामने आई।
  • इन विकल्पों में Hydrofluorocarbons (HFCs) महत्वपूर्ण थे।
  • HFCs ओज़ोन परत को सीधे नुकसान नहीं पहुँचाते, लेकिन इनमें से कई अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases) हैं और उनका Global Warming Potential (GWP) बहुत अधिक होता है।
  • इसलिए HFCs जलवायु परिवर्तन को बढ़ाने में योगदान कर सकते हैं।
  • इस समस्या से निपटने के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पक्षकारों ने 2016 में रवांडा के किगाली में 28वीं Meeting of the Parties (MOP-28) के दौरान किगाली संशोधन (Kigali Amendment) को अपनाया।

भारत और किगाली संशोधन

भारत ने 2021 में किगाली संशोधन का अनुसमर्थन (Ratification) किया।

इसके तहत भारत ने HFC उपभोग को 2028 में स्थिर (Freeze) करने तथा उसके बाद चरणबद्ध रूप से कम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

भारत के लिए HFC Phase-down का लक्ष्य चार चरणों में निर्धारित किया गया है:

2032 → 10% कमी

2037 → 20% कमी

2042 → 30% कमी

2047 → 85% कमी

ये कटौतियाँ निर्धारित baseline की तुलना में हैं।

इसका उद्देश्य भारत में बढ़ती cooling demand को ध्यान में रखते हुए ऊर्जाकुशल, पर्यावरणअनुकूल और कमGWP वाली cooling technologies की ओर संक्रमण को बढ़ावा देना है।

जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव

  • किगाली संशोधन का महत्व केवल ओज़ोन परत तक सीमित नहीं है।
  • HFCs को चरणबद्ध तरीके से कम करने और कम-कार्बन तथा अधिक ऊर्जा-कुशल cooling technologies को बढ़ावा देने से भविष्य में वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने में योगदान मिलने की उम्मीद है।
  • अनुमानों के अनुसार, किगाली संशोधन के प्रभावी कार्यान्वयन से इस सदी के अंत तक लगभग 3–0.5°C तक संभावित वैश्विक तापमान वृद्धि को टाला जा सकता है।
  • इसलिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अब केवल Ozone Protection Treaty नहीं रह गया है, बल्कि यह Climate Change Mitigation के लिए भी महत्वपूर्ण वैश्विक व्यवस्था बन चुका है।

International Environmental Agreements

वर्षConvention / Protocol / Agreementमुख्य विषय
1971Ramsar ConventionWetlands संरक्षण
1972Stockholm Conferenceवैश्विक पर्यावरणीय शासन की शुरुआत; UNEP की स्थापना का आधार
1972World Heritage Conventionसांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत संरक्षण
1973CITESसंकटग्रस्त वन्यजीव एवं वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का नियंत्रण
1979CMS / Bonn Conventionप्रवासी वन्यजीवों का संरक्षण
1982UNCLOSसमुद्री पर्यावरण एवं महासागरीय शासन
1985Vienna Conventionओज़ोन परत संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
1987Montreal ProtocolOzone-Depleting Substances का Phase-out
1989Basel ConventionHazardous Waste के सीमा-पार आवागमन एवं निपटान का नियंत्रण
1991Espoo ConventionTransboundary Environmental Impact Assessment
1992UNFCCCClimate Change
1992Convention on Biological Diversity (CBD)Biodiversity Conservation
1992UNCCDDesertification, Land Degradation और Drought
1997Kyoto ProtocolGreenhouse Gas Emission Reduction
1998Rotterdam ConventionHazardous Chemicals & Pesticides में Prior Informed Consent
2000Cartagena ProtocolBiosafety एवं Living Modified Organisms
2001Stockholm ConventionPersistent Organic Pollutants (POPs)
2010Nagoya ProtocolGenetic Resources एवं Access & Benefit Sharing
2013Minamata ConventionMercury Pollution
2015Paris AgreementClimate Change एवं Global Warming
2016Kigali AmendmentHFCs का Phase-down; Climate–Ozone linkage
2022Kunming–Montreal Global Biodiversity Framework2030 Biodiversity Targets
2023BBNJ / High Seas Treatyराष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से बाहर समुद्री जैव विविधता
2024Kunming-Montreal Framework implementationBiodiversity conservation, restoration और resource mobilization पर कार्यान्वयन
2025–26Implementation phaseParis, Kigali, Kunming-Montreal तथा अन्य MEAs के लक्ष्यों का कार्यान्वयन

 

MCQs:

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सही सुमेलित है?

(A) Ramsar Convention — Migratory Species
(B) Cartagena Protocol — Biosafety
(C) Nagoya Protocol — Hazardous Waste
(D) Minamata Convention — Persistent Organic Pollutants (POPs)

सही उत्तर: (B) Cartagena Protocol — Biosafety

प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन 1: Vienna Convention ने ओज़ोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक अनुसंधान का ढाँचा प्रदान किया।

कथन 2: Montreal Protocol ने ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों (ODS) के उत्पादन और उपभोग को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने के लिए बाध्यकारी नियंत्रण व्यवस्था विकसित की।

कथन 3: Kigali Amendment का मुख्य उद्देश्य HFCs को ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थ घोषित करके उनका phase-out करना था।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(A) केवल 1
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (B) केवल 1 और 2

प्रश्न 3. निम्नलिखित अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय व्यवस्थाओं को उनके अपनाए जाने के वर्ष के आधार पर प्राचीन से नवीनतम क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

  1. Kyoto Protocol
  2. Basel Convention
  3. Montreal Protocol
  4. Nagoya Protocol
  5. Paris Agreement

सही क्रम है:

(A) 3 → 2 → 1 → 4 → 5
(B) 2 → 3 → 1 → 4 → 5
(C) 3 → 2 → 4 → 1 → 5
(D) 2 → 1 → 3 → 4 → 5

सही उत्तर: (A) 3 → 2 → 1 → 4 → 5

प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. UNFCCC, CBD और UNCCD तीनों का विकास 1992 के Rio Earth Summit के संदर्भ में हुआ।
  2. Kyoto Protocol UNFCCC से स्वतंत्र एक अलग climate regime था और उसका UNFCCC से कोई संस्थागत संबंध नहीं था।
  3. Paris Agreement ने climate action को Nationally Determined Contributions (NDCs) के माध्यम से आगे बढ़ाने की व्यवस्था को केंद्रीय महत्व दिया।
  4. Kigali Amendment को UNFCCC के अंतर्गत अपनाया गया था।

सही उत्तर चुनिए:

(A) केवल 1 और 3
(B) केवल 2 और 4
(C) केवल 1, 2 और 3
(D) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (A) केवल 1 और 3

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौनसा विकल्प अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय शासन के विकास को सबसे उपयुक्त रूप से दर्शाता है?

(A) Wildlife Conservation → Ozone Protection → Climate Change → Biodiversity & Chemicals Governance

(B) Climate Change → Wildlife Conservation → Ozone Protection → Hazardous Waste

(C) Ozone Protection → Wildlife Conservation → Climate Change → Wetland Conservation

(D) Hazardous Waste → Climate Change → Wetland Conservation → Ozone Protection

सही उत्तर: (A)


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