भारत ने हाल ही में सक्रिय किए गए पाकिस्तान–चीन सीमा संयुक्त आयोग (Pakistan-China Boundary Joint Commission) को खारिज करते हुए कहा है कि इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। भारत ने पुनः स्पष्ट किया कि संबंधित क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन के बीच ऐसी कोई सीमा नहीं है जिसे भारत कानूनी रूप से मान्यता देता हो।
पाकिस्तान–चीन सीमा संयुक्त आयोग के बारे में
- पाकिस्तान और चीन ने सितम्बर 2026 में इस संयुक्त आयोग को औपचारिक रूप से सक्रिय किया।
- इसकी पहली बैठक इस्लामाबाद में आयोजित की गई।
- आयोग का उद्देश्य सीमा प्रबंधन, संयुक्त सीमा सर्वेक्षण, व्यापारिक आवागमन तथा लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर समन्वय स्थापित करना है।
- पाकिस्तान के अनुसार, आयोग पाकिस्तान–चीन सीमा प्रबंधन व्यवस्था के अंतर्गत सहयोग को बढ़ाने के लिए बनाया गया है।
उत्पत्ति
इस आयोग की पृष्ठभूमि 2013 के चीन–पाकिस्तान Boundary Management System Agreement में मिलती है।
- इस समझौते के अनुच्छेद 45 (Article 45) में सीमा प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक संयुक्त आयोग के गठन का प्रावधान किया गया था।
- 2026 में इसी प्रावधान के आधार पर आयोग की पहली बैठक आयोजित की गई।
भारत का रुख
भारत के विदेश मंत्रालय ने आयोग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि:
- जम्मू–कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न एवं अविभाज्य अंग हैं।
- पाकिस्तान को ऐसे क्षेत्रों के संबंध में किसी प्रकार की व्यवस्था करने का अधिकार नहीं है, जिन्हें भारत अपना क्षेत्र मानता है और जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं।
- भारत ने 1963 के चीन–पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है।
- भारत के अनुसार, इस समझौते का कोई वैध आधार नहीं है और यह भारतीय क्षेत्र से संबंधित है।
1963 का चीन–पाकिस्तान सीमा समझौता
- 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच एक सीमा समझौता हुआ था।
- इसके अंतर्गत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley/Trans-Karakoram Tract) के लगभग 5,180 वर्ग किमी क्षेत्र को चीन को सौंपने की व्यवस्था की थी।
- भारत इस समझौते को अवैध और अमान्य मानता है और स्वीकार नहीं करता।
- भारत के अनुसार, यह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख से संबंधित भारतीय क्षेत्र का हिस्सा है, जो पाकिस्तान के कब्जे में है।

अक्साई चिन
अक्साई चिन भारत-चीन सीमा विवाद का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
- भारत अक्साई चिन को लद्दाख का हिस्सा मानता है।
- चीन इसे अपने शिनजियांग क्षेत्र के होतान प्रान्त का हिस्सा मानता है।
- 1950 के दशक में चीन ने अक्साई चिन से होकर शिनजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण किया।
- यह क्षेत्र बाद में भारत-चीन सीमा विवाद का एक प्रमुख केंद्र बना।
CPEC से संबंध
- यह क्षेत्र चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
- CPEC चीन के काशगर (Xinjiang) को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाली प्रमुख आर्थिक एवं संपर्क परियोजना है।
- भारत CPEC का विरोध करता है क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत जम्मू–कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है।
- भारत की आपत्ति मुख्यतः कानूनी, क्षेत्रीय–संप्रभुता और कूटनीतिक आधार पर है।

वन बेल्ट वन रोड (OBOR)
- CPEC, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक हिस्सा है।
- यह 2013 में शुरू की गई एक मल्टी-मिलियन डॉलर की पहल है।
- इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को भूमि एवं समुद्री मार्गों के नेटवर्क से जोड़ना है।
- इसका उद्देश्य विश्व में बड़ी बुनियादी ढांँचा परियोजनाओं को शुरू करना है जो बदले में चीन के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाएगी।

- इनमें निम्नलिखित छह आर्थिक गलियारे शामिल हैं:
- न्यू यूरेशियन लैंड ब्रिज, जो पश्चिमी चीन को पश्चिमी रूस से जोड़ता है
- चीन-मंगोलिया-रूस गलियारा, जो मंगोलिया के माध्यम से उत्तरी चीन को पूर्वी रूस से जोड़ता है
- चीन-मध्य एशिया-पश्चिम एशिया गलियारा, जो मध्य और पश्चिम एशिया के माध्यम से पश्चिमी चीन को तुर्की से जोड़ता है
- चीन-इंडोचीन प्रायद्वीप गलियारा, जो भारत-चीन के माध्यम से दक्षिणी चीन को सिंगापुर से जोड़ता है
- चीन-पाकिस्तान गलियारा, जो दक्षिण-पश्चिमी चीन को पाकिस्तान के माध्यम से अरब सागर के मार्गों से जोड़ता है
- बांग्लादेश-चीन-भारत-म्याँमार गलियारा, जो बांग्लादेश और म्याँमार के रास्ते दक्षिणी चीन को भारत से जोड़ता है
- इसके अतिरिक्त समुद्री सिल्क रोड सिंगापुर-मलेशिया, हिंद महासागर, अरब सागर और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से तटीय चीन को भूमध्य सागर से जोड़ता है।
- इनमें निम्नलिखित छह आर्थिक गलियारे शामिल हैं:
भारत की आपत्ति के प्रमुख आधार
- भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य क्षेत्र मानता है। इसलिए भारत के अनुसार पाकिस्तान को इन क्षेत्रों से संबंधित किसी तीसरे देश के साथ सीमा-समझौता करने का अधिकार नहीं है।
- पाकिस्तान ने 1963 में चीन के साथ सीमा समझौते के माध्यम से शक्सगाम घाटी के लगभग 5,180 वर्ग किमी क्षेत्र के संबंध में चीन को क्षेत्र सौंपने की व्यवस्था की थी। भारत ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया है।
- भारत का तर्क है कि पाकिस्तान स्वयं जिस क्षेत्र को चीन के साथ सीमा-व्यवस्था में शामिल कर रहा है, उसका एक हिस्सा भारत के दावे वाले क्षेत्र में आता है। इसलिए पाकिस्तान को उस क्षेत्र के संबंध में संधि या प्रशासनिक व्यवस्था करने का अधिकार नहीं है।
- भारत के अनुसार, पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को जिस सीमा-व्यवस्था के आधार पर बनाया जा रहा है, वह उन क्षेत्रों पर लागू नहीं हो सकती जिन्हें भारत अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है। इसलिए भारत आयोग को अपने क्षेत्रीय दावों के संदर्भ में कानूनी मान्यता नहीं देता।
- चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों से होकर गुजरता है। भारत इसी कारण CPEC का भी विरोध करता रहा है। नए सीमा-समन्वय तंत्र से उस क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान सहयोग और संपर्क परियोजनाओं को संस्थागत रूप मिलने की चिंता भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग का गठन केवल सीमा-प्रबंधन से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता, जम्मू–कश्मीर एवं लद्दाख पर उसके दावे और चीन–पाकिस्तान रणनीतिक सहयोग से भी जुड़ा हुआ है। भारत द्वारा 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते तथा शक्सगाम घाटी से संबंधित व्यवस्थाओं को मान्यता न देना उसकी दीर्घकालिक नीति के अनुरूप है। ऐसे में भारत के लिए आवश्यक है कि वह कूटनीतिक माध्यमों, सीमा–प्रबंधन, क्षेत्रीय संपर्क एवं रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से अपने हितों की रक्षा करे। साथ ही, भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उसके क्षेत्रीय दावों और संप्रभुता की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट एवं प्रभावी रूप से प्रस्तुत होती रहे।
MCQs
- चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) किन दो प्रमुख स्थानों को जोड़ता है?
A. बीजिंग और कराची
B. काशगर और ग्वादर
C. शंघाई और लाहौर
D. उरुमची और इस्लामाबाद
उत्तर: B. काशगर और ग्वादर
- चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) किस व्यापक पहल का हिस्सा है?
A. QUAD
B. SCO
C. बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)
D. ASEAN
उत्तर: C. बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)
- CPEC का पाकिस्तान में प्रमुख समुद्री टर्मिनल कौन–सा है?
A. कराची बंदरगाह
B. ओरमारा बंदरगाह
C. ग्वादर बंदरगाह
D. पोर्ट कासिम
उत्तर: C. ग्वादर बंदरगाह
- भारत CPEC का विरोध मुख्यतः किस कारण से करता है?
A. इसमें भारत को सदस्य नहीं बनाया गया है
B. CPEC का एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से होकर गुजरता है
C. यह केवल समुद्री परियोजना है
D. इसमें केवल ऊर्जा परियोजनाएँ शामिल हैं
उत्तर: B. CPEC का एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत जम्मू–कश्मीर से होकर गुजरता है
- निम्नलिखित में से CPEC का प्रमुख उद्देश्य कौन–सा है?
A. केवल सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना
B. चीन और पाकिस्तान के बीच अवसंरचना एवं कनेक्टिविटी को बढ़ाना
C. दक्षिण एशिया में एक साझा मुद्रा लागू करना
D. केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना
उत्तर: B. चीन और पाकिस्तान के बीच अवसंरचना एवं कनेक्टिविटी को बढ़ाना
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