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कर्पुरी ठाकुर फार्मूला

बिहार में आरक्षण व्यवस्था

भारत की सामाजिक और राजनीतिक संरचना की जटिल बुनावट में, आरक्षण प्रणाली सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। इस प्रणाली में एक उल्लेखनीय, किंतु अक्सर कम चर्चा में आने वाला पहलू है कर्पूरी ठाकुर फार्मूला, जो बिहार में आरक्षण व्यवस्था को एक विभिन्न और विशिष्ट रूप देता है। ऐसे मेंबिहार की आरक्षण व्यवस्था को समझने के लिए कर्पूरी ठाकुर फार्मूला को समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

आरक्षण होने के बावजूद बिहार में कर्पूरी ठाकुर फार्मूला क्यों लाया गया?

1970 के दशक में बिहार में सामाजिक असमानता, जातिगत भेदभाव और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन की गहरी समस्याएँ थीं। उस समय आरक्षण की सुविधा तो उपलब्ध थी, परंतु उसका लाभ कुछ प्रभावशाली OBC जातियाँ (जैसे यादव, कुर्मी, कायस्थ आदि) ही अधिकतर ले रही थीं, जबकि अन्य अत्यंत पिछड़ी जातियाँ (जैसे नाई, धोबी, मल्लाह, कहार, बढ़ई, दर्जी आदि) इससे वंचित रह जा रही थीं।

इन्हीं सामाजिक विषमताओं को दूर करने और न्यायपूर्ण आरक्षण प्रणालीलागू करने के लिए कर्पूरी ठाकुर फार्मूला लाया गया।

 

कर्पूरी ठाकुर फार्मूला क्या है

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भीतर उपवर्ग (Subcategories) बनाए जाएँ, ताकि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक अधिक सटीक रूप से पहुँच सकेजो वास्तव में इसके सबसे अधिक हकदार हैं।

इसके अंतर्गत OBC को दो उपश्रेणियों में बाँटा गया:

1. अत्यंत पिछड़ा वर्ग (Most Backward Classes – MBCs)

इस वर्ग में वे जातियाँ शामिल थीं जो सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ी और हाशिए पर थीं। ये वर्ग OBC के भीतर सबसे अधिक वंचित माने गए।

2. प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग (Dominant OBCs)

यह OBC श्रेणी के वे समुदाय थे जो अपेक्षाकृत अधिक संपन्न, साक्षरऔर संसाधनों तक पहुँच रखने वाले थे।

 

मुख्य उद्देश्य

अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBCs) का सशक्तिकरण
सामाजिक समानता को बढ़ावा देना
भविष्य की नीतियों के लिए प्रेरणा प्रदान करना
शैक्षणिक और रोजगार अवसरों में आरक्षण सुनिश्चित करना
ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना

कौन थे कर्पूरी ठाकुर?

जननायक कर्पूरी ठाकुर एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, और राजनेताथे।
इनका जन्म 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर ज़िले केपितौंझिया ग्राम में हुआ था।
वे बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री (कार्यकाल: 1970–71, 1977–79) रहे।
उनके राजनीतिक संबंध समाजवादी पार्टी, भारतीय लोक दल, औरजनता पार्टी जैसे दलों से रहे।
वे हमेशा सामाजिक न्याय, समता, और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे

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