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अमेरिका की नई आतंकवाद-रोधी रणनीति

सुरक्षा नीति या राजनीतिक विचारधारा?

आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई पिछले दो दशकों से अमेरिका की विदेश और आंतरिक नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर ‘War on Terror’ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य केवल आतंकवादी संगठनों को समाप्त करना नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को हर प्रकार के आतंकवादी खतरे से सुरक्षित करना था।

  • किन्तु हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तुत नई आतंकवाद-रोधी रणनीति (Counter-Terrorism Strategy) ने व्यापक बहस को जन्म दिया है। आलोचकों का मानना है कि यह रणनीति एक निष्पक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज़ कम और राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित घोषणापत्र अधिक प्रतीत होती है।
  • यह रणनीति सेबेस्टियन गोर्का (Sebastian Gorka) के नेतृत्व में तैयार की गई है, जो ट्रंप प्रशासन के आतंकवाद-रोधी सलाहकार माने जाते हैं।
  • गोर्का अपनी आक्रामक भाषा, कट्टर राष्ट्रवादी दृष्टिकोण और विवादास्पद बयानों के लिए प्रसिद्ध हैं। यही कारण है कि इस नई नीति को लेकर यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या इसका उद्देश्य वास्तव में अमेरिका को सुरक्षित बनाना है, या यह केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण को मजबूत करने का प्रयास है।

आतंकवाद (Terrorism) क्या है?

  • आतंकवाद (Terrorism) कोई बिल्कुल नई घटना नहीं है। इसका इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन आधुनिक अर्थों में आतंकवाद 20वीं सदी में तेजी से उभरा। ‘आतंकवाद’ शब्द का अर्थ है राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए डर और हिंसा का इस्तेमाल करना।
  • आतंकवाद राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से पैदा हुआ। आधुनिक दौर में यह वैश्विक शक्ति संघर्ष, कट्टरपंथ और असमानता से जुड़ गया।
  • अमेरिका आतंकवाद का सबसे बड़ा विरोधी भी रहा है और कई आलोचनाओं का केंद्र भी।
    एक ओर उसने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ युद्ध छेड़ा, दूसरी ओर उसकी कुछ नीतियों को आतंकवाद के बढ़ने का कारण भी माना गया।

फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution, 1793–94) के समय ‘Reign of Terror’ शब्द पहली बार प्रसिद्ध हुआ। उस समय सरकार ने विरोधियों में डर फैलाने के लिए हिंसा का उपयोग किया। बाद में राजनीतिक हिंसा और बम हमलों को ‘terrorism’ कहा जाने लगा।

1900 के बाद कई राष्ट्रवादी, अलगाववादी और वैचारिक समूह हिंसक गतिविधियों में शामिल हुए। उदाहरण आयरलैंड में IRA, फिलिस्तीनी संगठन, श्रीलंका में LTTE, यूरोप में वामपंथी उग्रवादी संगठन इनका उद्देश्य सरकारों पर दबाव बनाना या स्वतंत्र राष्ट्र बनाना था।

  • 1979 की ईरानी क्रांति, अफगान युद्ध और मध्य-पूर्व संघर्षों के बाद धार्मिक कट्टरपंथ बढ़ा। इसी दौर में अल-कायदा जैसे संगठन उभरे।
  • 11 सितंबर 2001 (9/11) को अमेरिका पर हुए हमलों ने आतंकवाद को वैश्विक मुद्दा बना दिया। इसके बाद अमेरिका ने ‘War on Terror’ शुरू किया।

सेबेस्टियन गोर्का: व्यक्तित्व और विचारधारा

सेबेस्टियन गोर्का लंबे समय से अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति और सुरक्षा विमर्श से जुड़े रहे हैं। वे आतंकवाद के विरुद्ध कठोर सैन्य कार्रवाई के समर्थक माने जाते हैं।

उनकी भाषा और शैली अत्यंत आक्रामक रही है;

  • पत्रकारों को ‘scumbags’ और ‘punks’ कहना,
  • आतंकवादियों को ‘red mist’ में बदल देने की बात करना,
  • और विरोधियों का मज़ाक उड़ाना,

इन सबने उन्हें विवादों के केंद्र में रखा है।

गोर्का स्वयं इस रणनीति को अपना ‘जीवन का कार्य’ बताते हैं। लेकिन आलोचक मानते हैं कि किसी राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज़ को भावनात्मक और वैचारिक भाषा के बजाय तथ्यों, विश्लेषण और संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए।

नई आतंकवादरोधी रणनीति की मुख्य बातें

रणनीति तीन प्रमुख प्रकार के आतंकवादी समूहों की पहचान करती है;

  1. नार्कोटेररिस्ट और अंतरराष्ट्रीय अपराधी गिरोह
  2. इस्लामी आतंकवादी संगठन
  3. वामपंथी उग्रवादी समूह

लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसमें दक्षिणपंथी चरमपंथ (Right-Wing Extremism) का लगभग कोई उल्लेख नहीं है, जबकि हाल के वर्षों में अमेरिका में कई हिंसक घटनाएँ दक्षिणपंथी समूहों से जुड़ी रही हैं।

आतंकवाद और राजनीति का मिश्रण

आलोचकों के अनुसार इस रणनीति की सबसे बड़ी समस्या इसका अत्यधिक राजनीतिक स्वरूप है।

  • यह दस्तावेज़ ‘गैर-राजनीतिक’ होने का दावा करता है, लेकिन इसमें डोनाल्ड ट्रंप का नाम बार-बार दिखाई देता है। इससे यह धारणा बनती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को एक राजनीतिक नेता की छवि निर्माण के साधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
  • वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ मैथ्यू लेविट के अनुसार, ‘यह कोई वास्तविक रणनीति नहीं है, बल्कि एक वैचारिक और राजनीतिक दस्तावेज़ है।’
  • राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियाँ सामान्यतः दलगत राजनीति से ऊपर मानी जाती हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य पूरे देश की सुरक्षा होता है। लेकिन जब ऐसी नीतियाँ राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित हो जाती हैं, तब सुरक्षा एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी प्रश्न उठने लगते हैं।

ड्रग कार्टेल को आतंकवाद से जोड़ना

रणनीति का मुख्य फोकस ड्रग कार्टेल और अंतरराष्ट्रीय अपराधी गिरोहों पर है। ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीनों में कैरिबियन और प्रशांत महासागर में कथित ‘नार्को-टेररिस्ट’ नौकाओं पर कई सैन्य हमले किए हैं।

सरकार का दावा है कि;

  • 57 सैन्य हमले किए गए,
  • लगभग 192 लोग मारे गए,
  • और समुद्री ड्रग तस्करी में 90% कमी आई।

लेकिन विशेषज्ञ इस दृष्टिकोण को खतरनाक मानते हैं।

यदि हर अपराधी संगठन को ‘आतंकवादी संगठन’ कहा जाएगा, तो आतंकवाद और सामान्य अपराध के बीच अंतर समाप्त हो जाएगा।

इससे दो गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं;

  1. वास्तविक आतंकवादी संगठनों पर ध्यान कम हो सकता है।
  2. सुरक्षा संसाधनों का गलत उपयोग हो सकता है।

कोलिन क्लार्क जैसे विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि आतंकवाद की परिभाषा को अत्यधिक विस्तृत बना देना सुरक्षा नीति को भ्रमित कर सकता है।

इस्लामी आतंकवाद पर कठोर रुख

रणनीति में अल-कायदा और ISIS जैसे संगठनों को अब भी बड़ा खतरा बताया गया है। ट्रंप प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई के नियमों को अधिक लचीला बनाया है, जिससे हवाई हमलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

उदाहरण: सोमालिया में 2025 के बाद हवाई हमलों की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई।

यह नीति दिखाती है कि ट्रंप प्रशासन ‘आक्रामक सैन्य शक्ति’ को आतंकवाद के विरुद्ध सबसे प्रभावी उपाय मानता है।

यूरोप पर आरोप

  • रणनीति में यूरोप की भी तीखी आलोचना की गई है।
  • दस्तावेज़ के अनुसार, यूरोप की ‘Open Border Policy’ और प्रवासियों के प्रति उदार दृष्टिकोण ने आतंकवाद के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
  • रणनीति यूरोप को ‘आतंकवाद का incubator’ तक कहती है और चेतावनी देती है कि यदि उसने अपनी नीतियाँ नहीं बदलीं तो उसका पतन जारी रहेगा।

यह दृष्टिकोण ट्रंप की व्यापक राष्ट्रवादी और प्रवासी-विरोधी राजनीति के अनुरूप दिखाई देता है।

ईरान युद्ध की अनदेखी

  • रणनीति की सबसे बड़ी कमजोरी यह मानी जा रही है कि इसमें ईरान युद्ध (Iran War) का लगभग कोई उल्लेख नहीं है।
  • हाल के महीनों में अमेरिका में कई हमले ऐसे हुए हैं जिनका संबंध ईरान संघर्ष से प्रेरित माना जा रहा है। इसके बावजूद दस्तावेज़ इस खतरे का गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत नहीं करता।

आलोचना के मुख्य बिंदु

  • FBI के कई एजेंटों को इमिग्रेशन ड्यूटी पर भेज दिया गया।
  • ईरान से जुड़े खतरों पर निगरानी रखने वाली इकाइयों के अधिकारियों को हटाया गया।
  • युद्ध के प्रभावों पर रणनीति में कोई स्पष्ट चर्चा नहीं है।

विशेषज्ञ इसे ‘रणनीतिक अंधापन’ मानते हैं।

वामपंथी उग्रवाद पर अत्यधिक जोर

रणनीति में वामपंथी हिंसा को बढ़ते खतरे के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

  • हालाँकि कुछ राजनीतिक हत्याएँ वास्तव में चिंता का विषय हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे आतंकवाद की श्रेणी में आती हैं या नहीं।
  • इसके बावजूद प्रशासन ने कुछ अस्पष्ट वामपंथी समूहों को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया है।
  • आलोचकों का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का माध्यम बन सकता है।

दक्षिणपंथी आतंकवाद की अनदेखी

  • सबसे गंभीर चिंता यह है कि दस्तावेज़ में दक्षिणपंथी चरमपंथ और श्वेत श्रेष्ठतावादी हिंसा (White Supremacist Violence) का लगभग उल्लेख नहीं है।
  • जबकि पिछले वर्षों में नस्लीय हिंसा, यहूदी-विरोधी हमले, और श्वेत राष्ट्रवादी हमले अमेरिका के लिए गंभीर खतरे रहे हैं।
  • इन खतरों की अनदेखी यह संकेत देती है कि नीति वैचारिक पक्षपात से प्रभावित हो सकती है।

सुरक्षा नीति का वैचारिकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की आतंकवाद-रोधी नीति पहले अपेक्षाकृत गैर-राजनीतिक मानी जाती थी।

लेकिन अब यह आशंका बढ़ रही है कि सुरक्षा एजेंसियों और आतंकवाद विरोधी तंत्र का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

यदि ऐसा होता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं;

  • संस्थाओं की निष्पक्षता कमजोर होगी,
  • जनता का भरोसा घटेगा,
  • और वास्तविक खतरों की पहचान कठिन हो जाएगी।

क्या यह रणनीति अमेरिका को अधिक सुरक्षित बनाएगी?

यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।

समर्थकों का तर्क

  • कठोर सैन्य कार्रवाई आवश्यक है।
  • ड्रग कार्टेल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
  • सीमाओं की सुरक्षा आतंकवाद रोकने में मदद करेगी।

आलोचकों का तर्क

  • रणनीति वास्तविक खतरों का संतुलित विश्लेषण नहीं करती।
  • राजनीतिक विचारधारा सुरक्षा नीति पर हावी है।
  • दक्षिणपंथी हिंसा की अनदेखी खतरनाक है।
  • संसाधनों का गलत उपयोग हो सकता है।

निष्कर्ष

अमेरिका की नई आतंकवाद-रोधी रणनीति केवल सुरक्षा दस्तावेज़ नहीं बल्कि समकालीन अमेरिकी राजनीति का प्रतिबिंब भी है। यह दिखाती है कि किस प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रवासन, राष्ट्रवाद और वैचारिक संघर्ष आज अमेरिकी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ चुके हैं।

हालाँकि रणनीति कठोर कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर देती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसका राजनीतिक और वैचारिक पक्षपात प्रतीत होता है।

यदि आतंकवाद-रोधी नीति संतुलित, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष न हो, तो वह सुरक्षा के बजाय विभाजन और भ्रम को बढ़ा सकती है। इसलिए अमेरिका के लिए वास्तविक चुनौती केवल आतंकवाद से लड़ना नहीं, बल्कि ऐसी नीति बनाना है जो राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों दोनों की रक्षा कर सके।


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