पाश्चात्य राजनीतिक दर्शन के इतिहास में यदि थॉमस हॉब्स ने आधुनिक राज्य की आवश्यकता को दार्शनिक आधार प्रदान किया और जाँ-जाक रूसो ने लोकप्रिय संप्रभुता (Popular Sovereignty) का सिद्धांत विकसित किया, तो जॉन लॉक (John Locke, 1632–1704) ने उदारवाद (Liberalism), प्राकृतिक अधिकार (Natural Rights), सीमित सरकार (Limited Government) तथा संवैधानिक शासन (Constitutional Government) को सैद्धांतिक आधार प्रदान किया। उनकी प्रसिद्ध कृति Two Treatises of Government (1689) आधुनिक उदारवादी राजनीतिक दर्शन की आधारशिला मानी जाती है। यह केवल राजसत्ता की आलोचना करने वाली पुस्तक नहीं है, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता, संपत्ति, नागरिक अधिकारों, शासन की वैधता तथा जनता की संप्रभुता का दार्शनिक घोषणापत्र भी है।
यह कृति विशेष रूप से इंग्लैंड की Glorious Revolution (1688) के बाद प्रकाशित हुई और इसका उद्देश्य निरंकुश राजतंत्र (Absolute Monarchy) का खंडन करते हुए संवैधानिक शासन तथा प्रतिनिधि लोकतंत्र का समर्थन करना था। यही कारण है कि लॉक को “उदारवाद का जनक (Father of Liberalism)” कहा जाता है। आधुनिक लोकतंत्र, मानवाधिकार, विधि का शासन (Rule of Law), सीमित सरकार तथा संवैधानिकता जैसे सिद्धांतों पर इस पुस्तक का गहरा प्रभाव पड़ा। अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा (1776), फ्रांसीसी मानवाधिकार घोषणा (1789) तथा आधुनिक लोकतांत्रिक संविधानों में लॉक के विचार स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
पुस्तक का ऐतिहासिक एवं दार्शनिक संदर्भ
- सत्रहवीं शताब्दी का इंग्लैंड राजनीतिक संघर्षों का केंद्र था। राजा और संसद के बीच सत्ता-संघर्ष, धार्मिक विवाद तथा गृहयुद्ध ने शासन व्यवस्था को अस्थिर बना दिया था। स्टुअर्ट वंश के राजा जेम्स द्वितीय निरंकुश शासन स्थापित करना चाहते थे, जबकि संसद अपने अधिकारों की रक्षा करना चाहती थी। अंततः 1688 की गौरवपूर्ण क्रांति (Glorious Revolution) के परिणामस्वरूप विलियम और मैरी ने संवैधानिक शर्तों के साथ सत्ता ग्रहण की। इस क्रांति ने यह सिद्ध किया कि राजा की शक्ति असीमित नहीं है और शासन जनता तथा संसद की सहमति पर आधारित होना चाहिए।
- इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में लॉक ने Two Treatises of Government की रचना की। यह पुस्तक प्रत्यक्ष रूप से सर रॉबर्ट फिल्मर (Sir Robert Filmer) की पुस्तक Patriarcha का उत्तर थी, जिसमें फिल्मर ने राजा के दैवी अधिकार (Divine Right of Kings) का समर्थन किया था। लॉक ने इस विचार को अस्वीकार करते हुए कहा कि सभी मनुष्य जन्म से स्वतंत्र और समान हैं तथा किसी राजा को ईश्वर द्वारा शासन का विशेष अधिकार प्राप्त नहीं है।

पुस्तक की संरचना
Two Treatises of Government दो स्वतंत्र भागों में विभाजित है
- First Treatise of Government
- Second Treatise of Government
प्रथम ग्रंथ मुख्यतः फिल्मर के दैवी राजाधिकार सिद्धांत का खंडन करता है, जबकि दूसरा ग्रंथ लॉक के सकारात्मक राजनीतिक दर्शन को प्रस्तुत करता है।
प्रथम ग्रंथ (First Treatise of Government)
प्रथम ग्रंथ का उद्देश्य राजा के दैवी अधिकार (Divine Right Theory) का खंडन करना है। फिल्मर का मत था कि संसार की समस्त राजनीतिक सत्ता आदम (Adam) से प्राप्त हुई है। जिस प्रकार परिवार में पिता सर्वोच्च होता है, उसी प्रकार राज्य में राजा सर्वोच्च होना चाहिए। राजा ईश्वर का प्रतिनिधि है, इसलिए उसकी आज्ञा का पालन करना प्रत्येक प्रजा का धार्मिक कर्तव्य है।
लॉक ने इस विचार का तार्किक एवं ऐतिहासिक आधार पर विरोध किया। उन्होंने कहा कि बाइबिल में कहीं भी यह प्रमाण नहीं मिलता कि आदम को संपूर्ण मानवता पर स्थायी राजनीतिक अधिकार प्राप्त था। यदि ऐसा अधिकार था भी, तो यह निर्धारित करना असंभव है कि वर्तमान राजा वास्तव में आदम का वैध उत्तराधिकारी कौन है। इसलिए दैवी अधिकार का सिद्धांत न तो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है और न ही तर्कसंगत।
लॉक के अनुसार राजनीतिक सत्ता का आधार जन्म, वंश अथवा ईश्वरीय आदेश नहीं, बल्कि जनता की सहमति (Consent) है। राजा जनता का सेवक है, स्वामी नहीं। यदि शासन जनता की स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान नहीं करता, तो उसकी वैधता समाप्त हो जाती है।

फिल्मर और लॉक का तुलनात्मक अध्ययन
| आधार | सर रॉबर्ट फिल्मर | जॉन लॉक |
| सत्ता का स्रोत | ईश्वर एवं आदम का अधिकार | जनता की सहमति |
| राजा की स्थिति | सर्वोच्च एवं निरंकुश | सीमित एवं उत्तरदायी |
| नागरिक अधिकार | गौण | सर्वोच्च |
| शासन का आधार | दैवी अधिकार | सामाजिक अनुबंध |
| क्रांति का अधिकार | नहीं | जनता को प्राप्त |
यह तुलना स्पष्ट करती है कि लॉक ने मध्यकालीन राजसत्ता की अवधारणा को समाप्त कर आधुनिक लोकतांत्रिक शासन की नींव रखी।
द्वितीय ग्रंथ (Second Treatise of Government)
यदि प्रथम ग्रंथ नकारात्मक है, तो द्वितीय ग्रंथ लॉक के राजनीतिक दर्शन का सकारात्मक पक्ष प्रस्तुत करता है। इसमें उन्होंने राज्य, सरकार, स्वतंत्रता, संपत्ति, प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक अनुबंध तथा क्रांति के अधिकार जैसे सिद्धांतों का विस्तृत विवेचन किया है।
प्राकृतिक अवस्था (State of Nature)
हॉब्स की भाँति लॉक भी प्राकृतिक अवस्था की कल्पना करते हैं, किन्तु दोनों की अवधारणाओं में मूलभूत अंतर है। हॉब्स के अनुसार प्राकृतिक अवस्था “सभी का सभी के विरुद्ध युद्ध” (War of All Against All) थी, जहाँ जीवन “एकाकी, निर्धन, घृणित, पशुवत् और अल्पकालिक” था।
इसके विपरीत लॉक के अनुसार प्राकृतिक अवस्था शांति, समानता और स्वतंत्रता की अवस्था थी। मनुष्य विवेकशील है तथा प्राकृतिक नियम (Law of Nature) के अनुसार आचरण करता है। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति का सम्मान करता है।
फिर भी इस अवस्था में कुछ व्यावहारिक समस्याएँ थीं। निष्पक्ष न्यायाधीश का अभाव, कानून लागू करने वाली संस्था का न होना तथा दंड देने की व्यक्तिगत व्यवस्था विवादों को जन्म देती थी। इसलिए मनुष्य ने अधिक सुरक्षित जीवन के लिए राज्य की स्थापना की।
हॉब्स और लॉक की प्राकृतिक अवस्था
| आधार | हॉब्स | लॉक |
| मानव स्वभाव | स्वार्थी एवं हिंसक | विवेकशील एवं नैतिक |
| प्राकृतिक अवस्था | युद्ध की स्थिति | शांति एवं स्वतंत्रता |
| राज्य की आवश्यकता | सुरक्षा हेतु | अधिकारों की रक्षा हेतु |
| सरकार | निरंकुश | सीमित |
प्राकृतिक अधिकार (Natural Rights)
लॉक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान प्राकृतिक अधिकारों (Natural Rights) का सिद्धांत है। उनके अनुसार प्रत्येक मनुष्य जन्म से तीन मूल अधिकार लेकर जन्म लेता है—
- जीवन (Life)
- स्वतंत्रता (Liberty)
- संपत्ति (Property)
ये अधिकार राज्य द्वारा प्रदान नहीं किए जाते, बल्कि मानव स्वभाव से उत्पन्न होते हैं। इसलिए कोई भी सरकार इन्हें मनमाने ढंग से समाप्त नहीं कर सकती।
यही सिद्धांत आगे चलकर आधुनिक मानवाधिकारों का आधार बना।

सामाजिक अनुबंध (Social Contract)
- लॉक के अनुसार राज्य की स्थापना सामाजिक अनुबंध के माध्यम से हुई। लोगों ने अपनी संपूर्ण स्वतंत्रता सरकार को नहीं सौंपी, बल्कि केवल इतना अधिकार दिया कि वह उनके प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा कर सके।
- इस प्रकार सरकार जनता की सेवक है, मालिक नहीं। यदि सरकार अपने उद्देश्य से भटक जाती है तो उसका नैतिक एवं राजनीतिक औचित्य समाप्त हो जाता है।
संपत्ति का सिद्धांत (Theory of Property)
- लॉक का संपत्ति संबंधी सिद्धांत उनकी सबसे मौलिक देन माना जाता है। उनके अनुसार ईश्वर ने पृथ्वी सभी मनुष्यों के लिए बनाई है, लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने श्रम (Labour) को किसी वस्तु से जोड़ देता है, तो वह उसकी निजी संपत्ति बन जाती है।
अर्थात् “श्रम ही संपत्ति का आधार है।“
यद्यपि लॉक निजी संपत्ति का समर्थन करते हैं, वे यह भी कहते हैं कि व्यक्ति उतनी ही संपत्ति ग्रहण करे जितनी वह उपयोग कर सके। बाद में मुद्रा (Money) के विकास के कारण संपत्ति के संचय की प्रक्रिया बढ़ गई।
सीमित सरकार (Limited Government)
लॉक का मानना था कि सरकार की शक्तियाँ असीमित नहीं होनी चाहिए। सरकार का कार्य केवल कानून बनाना, न्याय स्थापित करना तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। यदि सरकार इन सीमाओं का उल्लंघन करती है तो वह वैध नहीं रह जाती।
यही सिद्धांत आधुनिक संवैधानिक लोकतंत्र तथा Rule of Law का आधार है।
क्रांति का अधिकार (Right to Revolution)
लॉक का सबसे क्रांतिकारी विचार यह था कि यदि सरकार जनता के प्राकृतिक अधिकारों का हनन करे, कानून का उल्लंघन करे अथवा निरंकुश बन जाए, तो जनता को उसे हटाने का अधिकार है।
यह विचार अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम तथा फ्रांसीसी क्रांति पर अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ।
रूसो, लॉक और हॉब्स की तुलना
| आधार | हॉब्स | लॉक | रूसो |
| प्राकृतिक अवस्था | युद्ध | शांति | आदर्श एवं स्वतंत्र |
| अनुबंध का उद्देश्य | सुरक्षा | अधिकारों की रक्षा | सामान्य इच्छा की स्थापना |
| सरकार | निरंकुश | सीमित | जनता सर्वोच्च |
| क्रांति का अधिकार | नहीं | है | जनता की संप्रभुता |

पुस्तक का आलोचनात्मक मूल्यांकन
- Two Treatises of Government आधुनिक उदारवादी राजनीतिक दर्शन की सबसे प्रभावशाली कृतियों में से एक है। लॉक ने पहली बार शासन की वैधता को जनता की सहमति से जोड़ा और व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों को राज्य से ऊपर स्थान दिया। उनकी विचारधारा ने आधुनिक लोकतंत्र, मानवाधिकार, संवैधानिक शासन तथा विधि के शासन को सैद्धांतिक आधार प्रदान किया।
- फिर भी इस पुस्तक की कुछ सीमाएँ भी हैं। लॉक ने समानता की बात तो की, किंतु महिलाओं, मजदूरों और उपनिवेशित समाजों के अधिकारों पर पर्याप्त चर्चा नहीं की। निजी संपत्ति के समर्थन ने आगे चलकर आर्थिक असमानता और पूँजीवाद को भी वैचारिक आधार प्रदान किया। कार्ल मार्क्स ने इस सिद्धांत की आलोचना करते हुए कहा कि निजी संपत्ति सामाजिक शोषण का प्रमुख स्रोत बन जाती है। इसी प्रकार रूसो का मत था कि संपत्ति ही सामाजिक असमानता की जड़ है, जबकि लॉक इसे स्वतंत्रता का आधार मानते थे।
बाद के विचारकों पर प्रभाव
लॉक के विचारों ने मोंटेस्क्यू, जे. एस. मिल, थॉमस जेफरसन, जेम्स मैडिसन, टी. एच. ग्रीन तथा आधुनिक उदारवादी चिंतन को गहराई से प्रभावित किया। अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा में उल्लिखित “Life, Liberty and the Pursuit of Happiness” की अवधारणा लॉक के प्राकृतिक अधिकार सिद्धांत से प्रेरित मानी जाती है। फ्रांसीसी मानवाधिकार घोषणा तथा आधुनिक लोकतांत्रिक संविधानों में भी उनके विचार स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं।
निष्कर्ष
Two Treatises of Government केवल एक राजनीतिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आधुनिक लोकतांत्रिक शासन की वैचारिक आधारशिला है। इस पुस्तक ने राजाओं के दैवी अधिकार को चुनौती देकर जनता की संप्रभुता, प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक अनुबंध, सीमित सरकार और क्रांति के अधिकार जैसे सिद्धांतों को स्थापित किया। यद्यपि संपत्ति और समानता संबंधी उनके विचारों की आलोचना की गई है, फिर भी उदार लोकतंत्र, मानवाधिकार और संवैधानिक शासन की चर्चा लॉक के बिना अधूरी मानी जाती है।
Question 1.
जॉन लॉक की प्रसिद्ध पुस्तक कौन–सी है?
A. लेवायथन (Leviathan)
B. द सोशल कॉन्ट्रैक्ट (The Social Contract)
C. टू ट्रीटीज़ ऑफ गवर्नमेंट (Two Treatises of Government)
D. द प्रिंस (The Prince)
उत्तर: C
Question 2.
Assertion (A): हॉब्स ने जनता को क्रांति का अधिकार दिया।
Reason (R): हॉब्स संप्रभुता को जनता में निहित मानते थे।
- दोनों सही
B. दोनों गलत
C. A सही, R गलत
D. A गलत, R गलत
उत्तर: D
Question 3.
Assertion (A): रूसो के अनुसार सामान्य इच्छा (General Will) सर्वोच्च है।
Reason (R): सामान्य इच्छा सम्पूर्ण समुदाय के हित का प्रतिनिधित्व करती है।
- दोनों सही तथा R सही व्याख्या है।
B. दोनों सही लेकिन R व्याख्या नहीं है।
C. A सही, R गलत।
D. A गलत, R सही।
उत्तर: A
Question 4. निम्नलिखित का सही मिलान कीजिए:
| सूची–I | सूची–II |
| (a) हॉब्स | (i) सामान्य इच्छा |
| (b) लॉक | (ii) लेवायथन |
| (c) रूसो | (iii) प्राकृतिक अधिकार |
| (d) फिल्मर | (iv) दैवी राजाधिकार |
कूट:
- a-ii, b-iii, c-i, d-iv
B. a-i, b-ii, c-iii, d-iv
C. a-iii, b-ii, c-iv, d-i
D. a-iv, b-i, c-ii, d-iii
उत्तर: A
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