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डेविड ईस्टन- ‘राजनीति किसी समाज के लिए मूल्यों का आधिकारिक आवंटन है।’/‘Politics is the authoritative allocation of values for a society’

David Easton’s System Model, Concept of Black Box

बीसवीं सदी के मध्य राजनीति विज्ञान के इतिहास में एक जनसंख्या परिवर्तन माना जाता है। इस काल में राजनीति विज्ञान ने पारंपरिक शास्त्रीय अध्ययन (सांस्कृतिक दृष्टिकोण) से आगे की दिशा में वैज्ञानिक, व्यवहारवादी और अनुभवजन्य (अनुभवजन्य) अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लाए। इससे पूर्व राजनीति विज्ञान का अध्ययन मुख्यत: राज्य, संविधान, सरकार, विधायिका, कार्यपालिका तथा कैथोलिक जेसी सामान्य संप्रदाय तक सीमित था।

तथ्य यह है कि राजनीति के वास्तविक स्वरूप से प्रभावित होती है, क्योंकि राजनीतिक जीवन का एकमात्र आधार सीमित नहीं होता है, बल्कि समाज, राजनीति, संस्कृति, सिद्धांत, हित सिद्धांत और सिद्धांत के सिद्धांतों से भी प्रभावित होता है।

पृष्टभूमि

इसी पृष्ठभूमि में व्यवहारवादी क्रांति ( व्यवहारवादी क्रांति) का उदय हुआ। व्यवहारवादियों का मत था कि राजनीति विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञान की तरह वैज्ञानिक वैज्ञानिक अपनानी और एकमात्र संवैधानिक सिद्धांतों का अध्ययन नहीं करना चाहिए, बल्कि वास्तविक राजनीतिक व्यवहार (राजनीतिक व्यवहार) का अध्ययन करना चाहिए।

इसी आंदोलन के प्रमुख विद्वान डेविड ईस्टन ( David Easton) का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।

  • पूर्वी राजनीति के लिए अलग-अलग कार्य करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह समाज, पर्यावरण और के बीच सतत विकास वाली एक राज्य प्रक्रिया है।
  • उनका यह तर्क है कि किसी भी राजनीतिक व्यवस्था के लिए केवल यही आधार नहीं है कि संसद, अभियोजक या कार्यपालिका कैसे कार्य करती है; बल्कि यह भी आवश्यक है कि समाज से कौन-कौन सी चालें, वे किस प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था तक विभाजित हैं, राजनीतिक व्यवस्था उन्हें किस प्रकार के सार्वजनिक समुदाय (सार्वजनिक समुदाय) में बदल देती है और समग्र समुदाय का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।
  • इसी व्यापक दृष्टिकोण के आधार पर ईस्टन ने सिस्टम मॉडल ( सिस्टम मॉडल) का प्रतिपादन किया, जिसने न केवल राजनीति विज्ञान बल्कि लोक नीति ( सार्वजनिक नीति), लोक प्रशासन ( लोक प्रशासन), कट्टर राजनीति ( कौशल राजनीति) और शासन अध्ययन (शासन अध्ययन) में भी क्रांतिकारी परिवर्तन किया।

आज सार्वजनिक नीति के विश्लेषण में यह मॉडल अधिकतम व्यापक विश्लेषण अनुपातिक ढाँचों में से एक माना जाता है।

उनकी तीन प्रमुख कृतियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं;

  1. राजनीतिक व्यवस्था (1953)
  2. एक संरचना के लिए राजनीतिक विश्लेषण (1965)
  3. राजनीतिक जीवन का एक प्रणालीगत विश्लेषण (1965)

इन निर्मित ग्रंथों ने आधुनिक सार्वजनिक नीति अध्ययन की सैद्धान्तिक श्रृंखला को मजबूत बनाया।

सिस्टम सिद्धांत की पृष्ठभूमि

ईस्टन का सिस्टम मॉडल किसी एक हितैषी का परिणाम नहीं था, बल्कि यह अनेक खंड एकता से विकसित हुआ।

(1) सामान्य प्रणाली सिद्धांत ( सामान्य प्रणाली सिद्धांत): जैव वैज्ञानिक लुडविग वॉन बर्टलानफी ने सामान्य प्रणाली सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनका मत था कि किसी भी सिस्टम को उनके विभिन्न दस्तावेजों के साथ-साथ उनके अध्ययन के लिए सीलॉग की आवश्यकता होती है। ईस्टन ने यही विचार राजनीति विज्ञान में लागू किया।

(2) व्यवहारवाद ( Behaviouralism): व्यवहारवादियों ने राजनीति विज्ञान को अनुभवजन्य बनाने पर बल दिया। ईस्टन स्वयं व्यवहारवादी आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उन्होंने राजनीतिक व्यवहार, निर्णय-निर्माण और सामाजिक अंतःक्रियाओं को राजनीति के अध्ययन का केंद्र बनाया।

(3) साइबरनेटिक्स ( साइबरनेटिक्स): नॉर्बर्ट वीनर द्वारा प्रतिपादित साइबरनेटिक्स में ‘फीडबैक’ की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण थी। ईस्टन ने इसी विचार को अपनाते हुए प्रतिपुष्टि (फीडबैक) को अपने मॉडल का प्रमुख अंग बनाया।

(4) वास्तुशिल्प कार्यात्मक दृष्टिकोण : टैलकोट पार्सन्स और गेब्रियल बादाम के अर्थशास्त्री-कार्यात्मक दृष्टिकोण का भी ईस्टन पर प्रभाव था। उन्होंने समाज की राजनीतिक व्यवस्था को एक कार्यशील उप-प्रणाली (सबसिस्टम) के रूप में देखा।

राजनीति की ईस्टन की अवधारणा

ईस्टन की सबसे प्रसिद्ध परिभाषा है- ‘राजनीति किसी भी समाज के लिए स्टॉक का आधिकारिक रूप है।’ यह कथन राजनीति विज्ञान के इतिहास में सबसे अधिक उद्धृत कथनों में से एक है।

इस परिभाषा का गहन अर्थ

  • आधिकारिक का अर्थ ऐसा निर्णय है जो वैध (वैध) राजनीतिक सत्ता ग्रहण कर ले और जिसे समाज द्वारा सामूहिक रूप से रखा जाए।
  • भाग का अर्थ है वितरण, अवसर, अधिकार और दायित्व
  • मूल्यों से तात्पर्य केवल नैतिक नैतिकता से नहीं है, बल्कि समाज में धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अवसर, अधिकार और सार्वजनिक सेवाओं जैसे सभी महत्वपूर्ण तत्व उपलब्ध हैं।

इस प्रकार ईस्टन की राजनीति का मूल कार्य समाज में सीमित सामग्री का वैध और अधिकारपूर्ण वितरण करना है।

डेविड ईस्टन का सिस्टम मॉडल ( डेविड ईस्टन का सिस्टम मॉडल)

‘राजनीतिक व्यवस्थाएं निरंतर मांगों और समर्थनों को आधिकारिक निर्णयों में परिवर्तित करने में लगी रहती हैं।’डेविड ईस्टन

सिस्टम ( सिस्टम) की अवधारणा : ईस्टन की राजनीति को समझने का सबसे उपयुक्त तरीका उसे एक सिस्टम ( सिस्टम) के रूप में देखना है। यहां ‘प्रणाली’ का अर्थ किसी भी मशीन से नहीं है, बल्कि उन सभी को आधार, ढोल, नारे, बदमाश और आरोप के साथ समूह से है जो समाज में राजनीतिक निर्णयों का निर्माण करते हैं।

Open System का अर्थ: ईस्टन का मानना था कि कोई भी राजनीतिक व्यवस्था स्वयं में पूर्णतः बंद (Closed) नहीं होती। वह हमेशा अपने वातावरण (Environment) के साथ संपर्क में रहती है।

पर्यावरण (Environment) की अवधारणा: ईस्टन के मॉडल में पर्यावरण (Environment) सबसे पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। उनका मत था कि राजनीतिक व्यवस्था कभी भी निर्वात (Vacuum) में कार्य नहीं करती, बल्कि वह अनेक प्रकार की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से प्रभावित होती रहती है।

निवेश (Inputs) की अवधारणा: ईस्टन के अनुसार राजनीतिक व्यवस्था तभी कार्य करती है जब उसे समाज से लगातार कुछ ‘निवेश’ (Inputs) प्राप्त होते रहें। वे सभी संकेत, माँगें और समर्थन जो समाज सरकार तक पहुँचाता है।

यदि राजनीतिक व्यवस्था को कोई Input ही प्राप्त न हो तो वह नीति निर्माण नहीं कर सकती।

ईस्टन ने Inputs को दो भागों में विभाजित किया;

  1. Demands (माँगें)
  2. Supports (समर्थन)

Black Box (ब्लैक बॉक्स) की अवधारणा

  • डेविड ईस्टन के प्रणाली मॉडल का सबसे चर्चित तथा सबसे विवादास्पद तत्व Black Box है। वास्तव में यही वह बिंदु है जहाँ समाज की माँगें (Demands) और समर्थन (Supports) सार्वजनिक नीतियों (Public Policies) में परिवर्तित होते हैं।
  • ईस्टन ने इस प्रक्रिया को Black Box कहा क्योंकि उनके अनुसार बाहरी व्यक्ति यह देख सकता है कि समाज से माँगें सरकार तक पहुँचीं और बाद में सरकार ने कोई नीति बना दी, किन्तु यह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता कि निर्णय वास्तव में कैसे लिया गया
  • निर्णय प्रक्रिया के भीतर अनेक संस्थाएँ, शक्ति-संबंध, राजनीतिक सौदेबाज़ियाँ, प्रशासनिक प्रक्रियाएँ और विचारधारात्मक संघर्ष कार्य करते हैं। यही पूरा क्षेत्र ‘ब्लैक बॉक्स’ कहलाता है।

इस शब्द का प्रयोग ईस्टन ने किसी रहस्यवाद के अर्थ में नहीं किया, बल्कि यह दिखाने के लिए किया कि नीति निर्माण एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसे केवल ‘इनपुट आया और आउटपुट निकल गया’ कहकर नहीं समझा जा सकता।

Black Box के भीतर क्या होता है?

ईस्टन ने विस्तृत रूप से इसका विश्लेषण नहीं किया, किन्तु आधुनिक लोक नीति अध्ययन के आधार पर Black Box के भीतर निम्नलिखित संस्थाएँ एवं प्रक्रियाएँ कार्य करती हैं;

  1. राजनीतिक नेतृत्व: लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित सरकार नीति निर्माण की दिशा निर्धारित करती है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और राजनीतिक दल नीति के व्यापक उद्देश्य तय करते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि सरकार का चुनावी घोषणा-पत्र रोजगार सृजन पर आधारित है, तो नीति निर्माण की प्राथमिकता भी उसी दिशा में होगी।

  1. साकी ( USAMI): राजनीतिक निर्णयों को व्यवहारिक रूप में लेने का कार्य तंत्र तंत्र करता है। मंत्रालय, विभाग, सचिव, विशेषज्ञ समितियाँ और तकनीकी संस्थाएँ कंपनियों का ढाँचा तैयार करती हैं।

इसी कारण से कई विद्वानों का कहना है कि- ‘नीति अक्सर व्यापारियों द्वारा तैयार की जाती है लेकिन स्वामित्व के माध्यम से होती है।’

  1. विधायिका ( विधानमंडल): यदि किसी नीति को कानून बनाया जाता है, तो संसद या विधायिका की भूमिका आवश्यक है।
  2. पुरुवाडा : कई बार पुरुवाडी में भी नीति का निर्माण प्रभावित होता है। उदाहरण: पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, चुनाव सुधार।

आदर्श निर्णय सरकार नई नीतियाँ बना सकती है।

  1. हिट ग्रुप ( हित समूह): व्यावसायिक संगठन, किसान संगठन, श्रमिक संघ, उद्योग मंडल और विभिन्न दबाव समूह नीति निर्माण पर प्रभाव डालते हैं।
  2. विशेषज्ञ अनुसंधान संस्थान : आधुनिक शासन में सार्वजनिक नीति केवल राजनीतिक इच्छा का परिणाम नहीं है कई विशेषज्ञ संस्थाएं, विश्वविद्यालय, थिंक-टैंक और अनुसंधान संगठन भी नीति निर्माण में योगदान दे रहे हैं।

रूपांतरण प्रक्रिया

  • ब्लैक बॉक्स के अंदर जो वास्तविक प्रक्रिया चलती है उसे रूपांतरण प्रक्रिया कहा जाता है।
  • यह वह चरण है जहां मांग → नीति में बदलाव किया गया है।
  • यह परिवर्तन स्वतन्त्रता: नहीं हुआ, बल्कि अनेक चरणों से आरम्भ हुआ।

उत्साह

डेविड ईस्टन का मॉडल लोक नीति स्टैचर का मॉडल ढाँचा है। इसकी सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यह राजनीति को एक गतिशील , गतिशील और संवादात्मक क्रियाशीलता प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है। हालाँकि, इसके ‘ब्लैक बॉक्स’ की पुष्टि, शक्ति-संबंधों के सिद्धांत और सामाजिक कारण चार्ल्स ई. लिंडब्लॉम, हर्बर्ट ए. साइमन, येहेज़केल ड्रोर और पॉल ए। साबेटियर जैसे विद्वान ने इसे आगे विकसित करने का प्रयास किया।


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