21वीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) ने मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन किए हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्त, न्यायपालिका और प्रशासन से लेकर रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा तक AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। जहाँ एक ओर AI मानव कल्याण, दक्षता और नवाचार का नया युग लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर इसके अनियंत्रित तथा स्वायत्त (Autonomous) उपयोग ने अनेक गंभीर नैतिक, कानूनी एवं वैश्विक सुरक्षा संबंधी प्रश्न भी खड़े कर दिए हैं।
इसी संदर्भ में जुलाई 2026 में “Rome Declaration for an Unarmed and Disarming Peace” सामने आई, जिसने संपूर्ण विश्व को यह संदेश दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता की सहायक हो सकती है, उसका स्थानापन्न (Replacement) नहीं। घोषणा में स्पष्ट रूप से कहा गया कि युद्ध, शांति तथा परमाणु हथियारों के प्रयोग जैसे नैतिक एवं अस्तित्वगत निर्णयों पर अंतिम नियंत्रण सदैव मानव के हाथों में ही रहना चाहिए।
समाचार में क्यों?
- जुलाई 2026 में नोबेल पुरस्कार विजेताओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैज्ञानिकों, धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों तथा वैश्विक नीति-निर्माताओं ने संयुक्त रूप से Rome Declaration for an Unarmed and Disarming Peace पर हस्ताक्षर किए।
- इस घोषणा ने विशेष रूप से उस बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की जिसमें नैतिक एवं मानवीय निर्णयों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों को सौंपा जा रहा है।
रोम घोषणा क्या है?
- रोम घोषणा एक वैश्विक नैतिक, रणनीतिक तथा मानवीय घोषणा है जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सैन्यीकरण (Militarisation of AI) को सीमित करना तथा मानव नियंत्रण को सर्वोच्च बनाए रखना है।
- यह घोषणा किसी कानूनी संधि (Treaty) का स्वरूप नहीं रखती, बल्कि विश्व समुदाय के लिए एक नैतिक दिशा-निर्देशक (Normative Framework) के रूप में कार्य करती है। इसका मूल विचार यह है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास तभी सार्थक है जब वह मानव गरिमा, उत्तरदायित्व और नैतिकता के अधीन रहे।
- घोषणा विशेष रूप से यह मांग करती है कि परमाणु हथियारों के प्रक्षेपण, युद्ध संबंधी निर्णयों तथा अन्य उच्च जोखिम वाले सैन्य कार्यों में AI को अंतिम निर्णयकर्ता नहीं बनाया जाना चाहिए। इन सभी क्षेत्रों में “Meaningful Human Control” अर्थात् सार्थक मानव नियंत्रण अनिवार्य होना चाहिए।
दार्शनिक आधार (Philosophical Foundation)
रोम घोषणा का दार्शनिक आधार पोप लियो XIV की Magnifica Humanitas नामक एन्साइक्लिकल से प्रेरित है। इसका मूल संदेश यह है कि आधुनिक तकनीक का उद्देश्य मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए, न कि उसे कमजोर करना।
यह दर्शन मानता है कि
- मानव केवल बुद्धि से नहीं, बल्कि विवेक, करुणा, संवेदना और नैतिक उत्तरदायित्व से भी निर्णय लेता है।
- मशीनें डेटा का विश्लेषण कर सकती हैं, लेकिन वे न्याय, दया और नैतिक दुविधाओं का अनुभव नहीं कर सकतीं।
- इसलिए AI मानव निर्णय का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक उपकरण होना चाहिए।
रोम घोषणा के प्रमुख उद्देश्य

रोम घोषणा के पाँच प्रमुख सिद्धांत
नैतिक आदेश (Ethical Mandates)
रोम घोषणा पाँच नैतिक आदेश प्रस्तुत करती है;
- परमाणु हथियारों के उपयोग में Meaningful Human Control अनिवार्य हो।
- AI विकास पूर्णतः पारदर्शी एवं उत्तरदायी हो।
- स्वायत्त AI प्रणालियों का ऑडिट संभव हो।
- परमाणु नेटवर्क की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में समयबद्ध वैश्विक वार्ता प्रारंभ की जाए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अभिसारी संकट (Convergent Perils), नैतिक चुनौतियाँ एवं वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव
‘Convergent Perils’ (अभिसारी संकट) की अवधारणा
रोम घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण योगदान “Convergent Perils” (अभिसारी संकट) की अवधारणा को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाना है। किसी भी तकनीक से जुड़े जोखिम अलग-अलग होते हैं और उन्हें स्वतंत्र रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। किन्तु AI के संदर्भ में स्थिति भिन्न है।
यहाँ अनेक तकनीकी, नैतिक, राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंधी जोखिम एक-दूसरे से जुड़कर ऐसे व्यापक संकट का निर्माण करते हैं, जिसका प्रभाव केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि संपूर्ण मानव सभ्यता को प्रभावित करता है।
AI में अभिसारी संकट के प्रमुख घटक

रोम घोषणा की आवश्यकता क्यों पड़ी?
(1) निर्णय लेने की समय–सीमा अत्यधिक कम होना
- शीत युद्ध के समय परमाणु संकटों में नेताओं के पास कई घंटे या कई बार दिन तक विचार करने का समय होता था। उदाहरण: 1962 का क्यूबा मिसाइल संकट, 1983 का सोवियत False Alarm
- इन घटनाओं में मानव विवेक ने संभावित परमाणु युद्ध को टाल दिया। किन्तु AI आधारित सैन्य प्रणालियाँ निर्णय लेने का समय घंटों से घटाकर कुछ सेकंड तक ला सकती हैं। इससे मानवीय हस्तक्षेप की संभावना समाप्त हो सकती है।
(2) AI की तकनीकी त्रुटियाँ
- Hallucination: AI ऐसी जानकारी उत्पन्न कर सकता है जो वास्तविकता में मौजूद ही नहीं होती।
- Data Poisoning: यदि प्रशिक्षण डेटा में दुर्भावनापूर्ण परिवर्तन कर दिए जाएँ, तो AI गलत निष्कर्ष निकाल सकता है।
- Sensor Error: गलत उपग्रह चित्र या नेटवर्क सिग्नल को AI वास्तविक परमाणु हमले के रूप में समझ सकता है। ऐसी स्थिति में AI स्वतः प्रतिआक्रमण (Retaliation) प्रारंभ कर सकता है।
(3) वैश्विक हथियार नियंत्रण व्यवस्था का कमजोर होना
- पिछले कुछ वर्षों में अनेक हथियार नियंत्रण संधियाँ कमजोर हुई हैं।
- उदाहरण Open Skies Treaty, New START
- जब देशों के बीच विश्वास कम होता है, तब वे अधिक स्वचालित एवं AI आधारित रक्षा प्रणालियों का विकास करने लगते हैं।इससे हथियारों की नई प्रतिस्पर्धा प्रारंभ होने की संभावना बढ़ जाती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वैश्विक शासन (Global AI Governance): एक नई आवश्यकता
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहती। एक देश में विकसित AI मॉडल दूसरे देश की अर्थव्यवस्था, राजनीति, सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण AI का नियमन केवल राष्ट्रीय कानूनों के माध्यम से संभव नहीं है; इसके लिए वैश्विक शासन व्यवस्था (Global AI Governance) की आवश्यकता है।
रोम घोषणा इसी आवश्यकता को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट करती है कि AI का विकास मानवता के साझा मूल्यों मानव गरिमा, शांति, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता पर आधारित होना चाहिए।
वैश्विक AI नैतिक ढाँचे (Global AI Ethics Frameworks)

भारत का AI शासन ढाँचा (India’s AI Governance Framework)
भारत AI को विकास का साधन मानते हुए “Responsible AI” की अवधारणा पर कार्य कर रहा है।
भारत का दृष्टिकोण पश्चिमी देशों से कुछ भिन्न है। जहाँ अनेक विकसित देश मुख्यतः नियमन (Regulation) पर बल देते हैं, वहीं भारत Innovation with Responsibility अर्थात् नवाचार एवं उत्तरदायित्व के संतुलन पर जोर देता है।
- नीति आयोग की “AI for All” रणनीति
- में नीति आयोग ने National Strategy for Artificial Intelligence प्रस्तुत की।
इसका उद्देश्य था समावेशी विकास, कृषि में AI, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, स्मार्ट शहर, सुशासन
इस रणनीति ने AI को केवल तकनीकी नवाचार नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का साधन माना।
- IndiaAI Mission
भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया IndiaAI Mission देश में AI पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण पहल है।
इसके प्रमुख उद्देश्य;
(क) AI Computing Infrastructure: भारत में उच्च क्षमता वाले कम्प्यूटिंग संसाधनों का विकास।
(ख) भारतीय डेटा सेट: स्थानीय भाषाओं एवं भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप डेटा उपलब्ध कराना।
(ग) AI स्टार्टअप: घरेलू नवाचार को प्रोत्साहित करना।
(घ) कौशल विकास: AI विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं का निर्माण।
(ङ) Safe and Trusted AI: विश्वसनीय एवं नैतिक AI प्रणाली विकसित करना।
- MeitY की AI Governance Guidelines
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने AI शासन हेतु सिद्धांत-आधारित (Principle-Based) दृष्टिकोण अपनाया है।
इसके प्रमुख आधार: विश्वास (Trust), पारदर्शिता (Transparency), निष्पक्षता (Fairness), सुरक्षा (Safety), उत्तरदायित्व (Accountability), मानव-केंद्रित AI (Human-Centric AI)
इसका उद्देश्य नवाचार और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना है।
रोम घोषणा का भारत के लिए महत्व

रोम घोषणा की सीमाएँ
यद्यपि घोषणा अत्यंत महत्वपूर्ण है, फिर भी इसकी कुछ सीमाएँ हैं;
- यह घोषणा अभी केवल नैतिक अपील है, कोई बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं।
- अमेरिका, चीन एवं रूस जैसे देश AI आधारित रक्षा प्रणालियों में भारी निवेश कर रहे हैं।
- ऐसी स्थिति में वैश्विक सहमति बनाना कठिन होगा। AI का विकास कानूनों से कहीं अधिक तेज़ी से हो रहा है।
- यह निर्धारित करना कठिन होगा कि कोई देश वास्तव में AI आधारित हथियार विकसित कर रहा है या नहीं।
- Google, Microsoft, OpenAI तथा अन्य बड़ी कंपनियाँ AI विकास में अग्रणी हैं। इनकी भूमिका के बिना वैश्विक AI शासन अधूरा रहेगा।
आगे की राह (Way Forward)
- न्यायपालिका, चिकित्सा, सैन्य एवं प्रशासनिक निर्णयों में अंतिम निर्णय मानव द्वारा ही लिया जाए।
- AI प्रणाली ऐसी हो जिसकी कार्यप्रणाली स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा समझी और जाँची जा सके।
- जैसे पर्यावरण प्रभाव आकलन किया जाता है, उसी प्रकार प्रत्येक उच्च जोखिम वाले AI मॉडल का नैतिक प्रभाव मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
- AI विकास का मूल उद्देश्य मानव गरिमा, स्वतंत्रता और समानता की रक्षा होना चाहिए।
- Lethal Autonomous Weapon Systems (LAWS) पर संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में बाध्यकारी वैश्विक संधि बनाई जानी चाहिए, जिससे मशीनों को जीवन-मृत्यु का निर्णय लेने से रोका जा सके।
निषकर्ष
रोम घोषणा केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि तकनीकी युग में मानव सभ्यता के नैतिक भविष्य का घोषणापत्र है। यह हमें स्मरण कराती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जितनी शक्तिशाली होगी, उतनी ही अधिक आवश्यकता मानवीय विवेक, नैतिक उत्तरदायित्व और वैश्विक सहयोग की होगी।
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