निगरानी पूँजीवाद (Surveillance Capitalism) समकालीन समाज में डिजिटल तकनीक, व्यक्तिगत डेटा, आर्थिक लाभ और सत्ता के बीच संबंधों को समझने की एक महत्त्वपूर्ण आलोचनात्मक अवधारणा है। इसका प्रमुख विकास शोशाना जुबॉफ (Shoshana Zuboff) के कार्यों में हुआ है।
- निगरानी पूँजीवाद ऐसी आर्थिक व्यवस्था को संदर्भित करता है, जिसमें कंपनियाँ व्यक्तियों की ऑनलाइन गतिविधियों, रुचियों, खोजों, स्थान संबंधी जानकारी और व्यवहार से जुड़े डेटा का संग्रह एवं विश्लेषण करके उससे आर्थिक लाभ प्राप्त करती हैं। इस प्रक्रिया में डेटा का उपयोग विज्ञापनों को लक्षित करने, उपभोक्ताओं के व्यवहार का अनुमान लगाने और उनके निर्णयों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
- हालाँकि, प्रत्येक डेटा संग्रह निगरानी पूँजीवाद नहीं है। जुबॉफ की आलोचना विशेष रूप से उस आर्थिक मॉडल पर केंद्रित है, जिसमें व्यक्तियों के अनुभवों और व्यवहार से प्राप्त डेटा को व्यावसायिक संपत्ति में बदल दिया जाता है और उसका उपयोग भविष्य के व्यवहार का अनुमान लगाने या उसे प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
- मुख्य विचार: डिजिटल अर्थव्यवस्था में व्यक्ति केवल उपभोक्ता नहीं रहता, बल्कि उसके व्यवहार और अनुभव भी आर्थिक लाभ के स्रोत बन जाते हैं।
शोशाना जुबॉफ: जीवन परिचय एवं बौद्धिक योगदान
- जुबॉफ ने डिजिटल तकनीक, निगरानी, आर्थिक शक्ति, निजता और मानव स्वायत्तता के बीच संबंधों का आलोचनात्मक अध्ययन किया है।
- उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक The Age of Surveillance Capitalism: The Fight for a Human Future at the New Frontier of Power (2019) है। इसमें उन्होंने बताया कि डिजिटल कंपनियाँ किस प्रकार मानवीय अनुभवों से डेटा प्राप्त करके उसे व्यावसायिक लाभ और व्यवहार संबंधी भविष्यवाणियों में बदल सकती हैं।
- जुबॉफ के अनुसार, निगरानी पूँजीवाद केवल नई तकनीक का परिणाम नहीं है, बल्कि यह पूँजीवाद का एक विशिष्ट आर्थिक रूप है, जिसमें व्यक्तिगत अनुभव डेटा प्राप्त करने का स्रोत बनते हैं और व्यवहार संबंधी जानकारी आर्थिक मूल्य पैदा करती है।
निगरानी पूँजीवाद की प्रमुख विशेषताएँ
- व्यक्तिगत डेटा का व्यावसायीकरण: डिजिटल कंपनियाँ उपयोगकर्ताओं की खोज, क्लिक, पसंद, स्थान और ऑनलाइन गतिविधियों से संबंधित डेटा का उपयोग आर्थिक लाभ के लिए कर सकती हैं। इस प्रकार व्यक्ति का डिजिटल व्यवहार व्यावसायिक संसाधन बन जाता है।
- व्यवहार संबंधी अधिशेष (Behavioral Surplus): जुबॉफ के अनुसार, कंपनियाँ सेवाएँ प्रदान करने के लिए आवश्यक डेटा से आगे बढ़कर अतिरिक्त व्यवहार संबंधी डेटा भी एकत्र कर सकती हैं। इस अतिरिक्त डेटा का उपयोग भविष्य के व्यवहार का अनुमान लगाने वाले उत्पादों और सेवाओं के निर्माण में किया जा सकता है।
- व्यवहार की भविष्यवाणी (Behavioral Prediction): डेटा विश्लेषण के माध्यम से कंपनियाँ अनुमान लगा सकती हैं कि कोई व्यक्ति क्या खरीदेगा, किस सामग्री पर ध्यान देगा या किस विज्ञापन से प्रभावित हो सकता है। इन अनुमानों का व्यावसायिक मूल्य होता है।
- व्यवहार में हस्तक्षेप (Behavioral Modification): निगरानी पूँजीवाद की अधिक गंभीर विशेषता केवल व्यवहार का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यवहार को प्रभावित करने की कोशिश करना है। व्यक्तिगत विज्ञापन, अनुशंसा प्रणालियाँ और लक्षित सामग्री इसके उदाहरण हो सकते हैं।
- सत्ता का असंतुलन: कंपनियों के पास उपयोगकर्ताओं के व्यवहार से संबंधित व्यापक जानकारी हो सकती है, जबकि उपयोगकर्ताओं को यह पूरी तरह ज्ञात नहीं होता कि कौन-सा डेटा एकत्र किया जा रहा है और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।

निगरानी पूँजीवाद और सत्ता का संबंध
- जुबॉफ का दृष्टिकोण राजनीतिक विज्ञान के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिखाता है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में सत्ता केवल राज्य के पास केंद्रित नहीं होती। निजी तकनीकी कंपनियाँ भी सूचना, डेटा और व्यवहार को प्रभावित करने की क्षमता के माध्यम से व्यापक सामाजिक शक्ति प्राप्त कर सकती हैं।
- इससे तीन प्रमुख समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। पहली, निजता का क्षरण, क्योंकि व्यक्तिगत गतिविधियाँ लगातार डेटा संग्रह का हिस्सा बन सकती हैं। दूसरी, स्वायत्तता पर प्रभाव, क्योंकि व्यक्तिगत विकल्पों को प्रभावित करने वाले डिजिटल तंत्र व्यक्ति की स्वतंत्र निर्णय क्षमता को सीमित कर सकते हैं। तीसरी, लोकतांत्रिक जवाबदेही की समस्या, क्योंकि निजी कंपनियों द्वारा अपनाए गए डेटा-संग्रह और व्यवहार-प्रभाव की प्रक्रियाएँ हमेशा सार्वजनिक निगरानी के अधीन नहीं होतीं।
- इसलिए निगरानी पूँजीवाद का अध्ययन केवल अर्थशास्त्र का विषय नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता, निजता और डिजिटल सत्ता के अध्ययन से भी जुड़ा है।
निगरानी पूँजीवाद की आलोचनात्मक समीक्षा
- निगरानी पूँजीवाद की प्रमुख आलोचना यह है कि यह व्यक्तिगत अनुभवों को व्यावसायिक लाभ के साधन में बदल सकता है। इससे व्यक्ति की निजता, स्वतंत्रता और अपने डेटा पर नियंत्रण संबंधी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
- हालाँकि, डेटा संग्रह के सभी रूप हानिकारक नहीं होते। स्वास्थ्य अनुसंधान, सार्वजनिक सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं में डेटा का उपयोग सामाजिक लाभ भी उत्पन्न कर सकता है। समस्या तब अधिक गंभीर होती है, जब डेटा का संग्रह अपारदर्शी हो, सहमति वास्तविक न हो, उपयोगकर्ता के पास प्रभावी विकल्प न हों या डेटा का उपयोग अनुचित व्यवहार-प्रभाव के लिए किया जाए।
- इस अवधारणा की एक सीमा यह भी है कि यह डिजिटल अर्थव्यवस्था के सभी व्यावसायिक मॉडलों की समान रूप से व्याख्या नहीं करती। इसलिए इसे डेटा-आधारित व्यावसायिक गतिविधियों की आलोचनात्मक समझ के लिए उपयोगी दृष्टिकोण मानना चाहिए, न कि हर डिजिटल सेवा का एक जैसा वर्णन।
महत्त्वपूर्ण तथ्य
| आधार | मुख्य तथ्य |
| प्रमुख विद्वान | शोशाना जुबॉफ |
| प्रमुख पुस्तक | The Age of Surveillance Capitalism (2019) |
| केंद्रीय अवधारणा | व्यक्तिगत अनुभवों से डेटा प्राप्त करके आर्थिक लाभ कमाना |
| प्रमुख प्रक्रिया | डेटा संग्रह, व्यवहार संबंधी अधिशेष, भविष्यवाणी और व्यवहार को प्रभावित करने का प्रयास |
| प्रमुख चिंताएँ | निजता, स्वायत्तता, असमान सत्ता और लोकतांत्रिक जवाबदेही |
| संबंधित विषय | डिजिटल पूँजीवाद, डेटा अर्थव्यवस्था, निगरानी और नागरिक स्वतंत्रता |
निष्कर्ष
निगरानी पूँजीवाद शोशाना जुबॉफ द्वारा विकसित एक महत्त्वपूर्ण आलोचनात्मक अवधारणा है, जो डिजिटल तकनीक और आर्थिक सत्ता के बदलते स्वरूप को समझने में सहायता करती है। इसका केंद्रीय तर्क है कि जब व्यक्तियों के व्यवहार और अनुभवों से प्राप्त डेटा को आर्थिक लाभ के लिए व्यवस्थित रूप से इस्तेमाल किया जाता है, तो निजता, स्वायत्तता और लोकतांत्रिक जवाबदेही से संबंधित गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
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