प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की आधिकारिक यात्रा 15 से 20 मई 2026 तक आयोजित हुई । इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाना था।इस यात्रा के पांच प्रमुख पड़ाव देश थे:
1- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
2- नीदरलैंड
3- स्वीडन
4- नॉर्वे
5- इटली
प्रमुख समझौते:
भारत और यूएई:
- रणनीतिक तेल भंडार: इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच समझौता हुआ। इसके तहत भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व में यूएई की भागीदारी बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल (3 करोड़ बैरल) तक की जाएगी।
- रणनीतिक गैस रिजर्व स्थापित किया जाएगा।
- दोनों देशों ने एक नए रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढांचे को संस्थागत रूप दिया।
- भारत के सी-डैक (C-DAC) और यूएई की जी-42 (G-42) के बीच 8 एक्सफ़्लॉप सुपरकंप्यूट क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता।
भारत और नीदरलैंड:
- नीदरलैंड और भारत दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी‘ के स्तर पर अपग्रेड किया।
- ‘भारत-नीदरलैंड्स रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा (2026-2030)’ को अपनाया गया।
- धोलेरा (गुजरात) में भारत का पहला वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने के लिए एक बड़ा समझौता।
- ‘भारत-नीदरलैंड्स ग्रीन हाइड्रोजन विकास रोडमैप’ लॉन्च किया गया।
- नीदरलैंड की लेडेन यूनिवर्सिटी से 11वीं सदी के ऐतिहासिक चोल-काल के ताम्रपत्र आधिकारिक तौर पर भारत को सौंपे।
- गुजरात के लोथल में बन रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के विकास के लिए एम्स्टर्डम के राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय के साथ समझौता किया गया।
भारत और स्वीडन:
- भारत और स्वीडन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक पूर्ण ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर अपग्रेड किया।
- भारत-स्वीडन संयुक्त कार्य योजना 2026-2030′ को मंजूरी दी।
- दोनों देशों ने ‘स्वीडन-भारत प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर’ (SITAC) लॉन्च किया।
- भारत-स्वीडन संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (ISJSTC) की स्थापना का निर्णय।
- इसरो और स्वीडिश राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्राधिकरण के बीच भारत के आगामी ‘शुक्रयान’ मिशन को लेकर बड़ा समझौता

भारत और नॉर्वे:
- भारत और नॉर्वे ने अपने संबंधों को ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर अपग्रेड किया।
- यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा थी।
- नॉर्वे आधिकारिक तौर पर भारत के ‘इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव’ (IPOI) में शामिल हो गया।
- नॉर्वे की संस्था ‘एमराल्ड जियोमॉडलिंग’ से भारत की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भू-विज्ञान आधारित समाधान विकसित करने हेतु 5-वर्षीय समझौता हुआ।
भारत और इटली:
- भारत और इटली ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर अपग्रेड किया।
- दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
- भारत से इटली जाने वाली नर्सों की गतिशीलता और रोजगार प्रक्रिया को सुगम बनाने हेतु एक ‘साझा आशय घोषणा’ पर हस्ताक्षर।
- वर्ष 2027 को आधिकारिक तौर पर “भारत-इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की गई।
- लोथल में बन रहे ‘राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर’ (NMHC) के विकास में सहयोग के लिए इटली से भी समझौता।
द्विपक्षीय संबंधों में साझेदारी का स्तर:
- रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership): जब दो देश यह मानते हैं कि उनके दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित (जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक नीतियां) एक-दूसरे से जुड़े हैं, तो वे ‘रणनीतिक साझेदारी’ करते हैं।उदाहरण: भारत और नीदरलैंड
- हरित रणनीतिक साझेदारी (Green Strategic Partnership): यह एक ऐसी साझेदारी है जहां दो देश आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा और सतत विकास को अपने द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में रखते हैं।उदाहरण: भारत और norve
- विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership): यह स्तर दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच न केवल रणनीतिक हित समान हैं, बल्कि उनके बीच ऐतिहासिक विश्वास, अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों (जैसे परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष कूटनीति) में गहरा सहयोग और वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे का बिना शर्त समर्थन शामिल है।उदाहरण: भारत और इटली
- व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership – CSP):जब दो देशों का आपसी सहयोग केवल उनके अपने देशों या क्षेत्रों के विकास के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को आकार देने के लिए होता है, तो इसे ‘वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ कहते हैं। उदाहरण: भारत और यूएई
तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन
- 19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो के सिटी हॉल में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित हुआ।
- इस सम्मेलन की मेजबानी नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोर ने की।
- इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित नॉर्डिक क्षेत्र के सभी पांच देशों (नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड) के शासनाध्यक्ष शामिल हुए।
- भारत और नॉर्डिक देशों ने सामूहिक रूप से अपने बहुपक्षीय संबंधों को ‘विश्वसनीय हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर अपग्रेड करने की आधिकारिक घोषणा की।
- आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और नॉर्डिक ब्लॉक ने एकजुट होकर “नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स” का कड़ा संदेश जारी किया।
- सभी पांचों नॉर्डिक देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का पुरजोर समर्थन किया और भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल करने पर बल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी को मिले पुरस्कार/सम्मान:
- स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया ने पीएम मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक शाही सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार – कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया।यह सम्मान पाने वाले मोदी जी पहले एशियाई नेता।
- नॉर्वे के राजा किंग हेराल्ड पंचम ने ओस्लो में आयोजित एक विशेष राजकीय समारोह में पीएम मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से विभूषित किया।यह पीएम मोदी को प्राप्त होने वाला 32वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मान बना।
- संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) मुख्यालय के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान के लिए ‘एग्रिकोला पुरस्कार‘ (Agricola Award) से भी सम्मानित किया गया।
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