चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) ने जुलाई में अपने 35 वर्षों के संवाद संबंधों की वर्षगांठ मनाई। यह एक अत्यंत सफल साझेदारी रही है। वर्ष 2022 में दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया।
इस अवसर पर यह विचार करना उपयोगी होगा कि चीन और आसियान के बीच इस सफलता के प्रमुख कारण क्या हैं तथा भविष्य की संभावनाएँ कैसी हैं। आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 को हुई थी। प्रारंभिक वर्षों में चीन का दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रति दृष्टिकोण सतर्क और कुछ हद तक संदेहपूर्ण था। किंतु नेतृत्व परिवर्तन, विशेषकर देंग शियाओपिंग के दौर में चीन ने पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने की नीति अपनाई। इसी सोच के अंतर्गत आसियान के साथ भी सहयोग बढ़ा और दोनों पक्षों ने विश्वास एवं परस्पर सम्मान पर आधारित संबंध विकसित किए।

चीन के लिए आसियान का महत्व
- पहला, आसियान चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024 में दोनों पक्षों के बीच व्यापार का मूल्य लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। इससे चीन के उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिला।
- दूसरा, आसियान चीन के लिए निवेश का एक प्रमुख स्रोत है। 2024 में चीन ने यूरोपीय संघ और अमेरिका की तुलना में आसियान में अधिक निवेश किया। भविष्य में निवेश सहयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।
- तीसरा, आसियान चीन के विनिर्माण उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है।
- चौथा, मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य चीन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं। चीन के अधिकांश आयात-निर्यात इन्हीं मार्गों से होकर गुजरते हैं।
साझा हित और सहयोग
- चीन और आसियान दोनों ही बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, क्षेत्रीय स्थिरता तथा आर्थिक विकास के समर्थक हैं। दक्षिण चीन सागर को लेकर मतभेद अवश्य हैं, किंतु दोनों पक्ष इन विवादों का समाधान संवाद और विश्वास निर्माण के माध्यम से करना चाहते हैं।
- आसियान की विदेश नीति स्वतंत्रता और तटस्थता पर आधारित है। यह किसी सैन्य गुट का हिस्सा नहीं बनना चाहता तथा सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है। चीन भी इस दृष्टिकोण का सम्मान करता है।
व्यापार और संपर्क का महत्व
- व्यापार इस क्षेत्र की आर्थिक जीवनरेखा है। चीन न केवल आसियान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, बल्कि निवेश, प्रौद्योगिकी और पर्यटन का भी प्रमुख स्रोत है। लाखों चीनी पर्यटक प्रतिवर्ष आसियान देशों की यात्रा करते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है।
- चीन ने बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क (Connectivity) को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सड़क, रेल, बंदरगाह और डिजिटल अवसंरचना परियोजनाओं ने दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को नई गति प्रदान की है।
सहयोग के नए क्षेत्र
भविष्य में चीन और आसियान निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ा सकते हैं
- आसियान डिजिटल इकोनॉमी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (DEFA)
- आसियान पावर ग्रिड
- हरित ऊर्जा एवं ऊर्जा संक्रमण
- आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) की मजबूती
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकी
- जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास
- शिक्षा, अनुसंधान और युवा आदान-प्रदान
- स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक नीति सहयोग
विश्वास : साझेदारी की आधारशिला
- दीर्घकालिक सहयोग केवल आर्थिक हितों से नहीं, बल्कि विश्वास (Trust) से भी संचालित होता है। चीन और आसियान को पारदर्शिता, संवाद तथा परस्पर सम्मान को और मजबूत करना होगा।
- शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन तथा जन-से-जन संपर्क (People-to-People Connectivity) इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
चीन की विदेश नीति के प्रमुख सिद्धांत (Principles of China’s Foreign Policy)
- चीन की विदेश नीति पिछले एक दशक में केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रही है, बल्कि उसने वैश्विक शासन (Global Governance), विकास, सुरक्षा तथा सभ्यतागत संवाद पर आधारित एक व्यापक दृष्टिकोण विकसित किया है।
- राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के नेतृत्व में चीन ने कई नई विदेश नीति पहलों को प्रस्तुत किया है, जिनका उद्देश्य चीन की वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करना तथा एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
ये सिद्धांत चीन–आसियान संबंधों की दिशा और प्रकृति को भी गहराई से प्रभावित करते हैं।

- Good Neighbourhood Policy (अच्छे पड़ोसी की नीति)
Good Neighbourhood Policy का मूल उद्देश्य चीन के पड़ोसी देशों के साथ विश्वास, सहयोग और स्थिरता पर आधारित संबंध विकसित करना है। चीन मानता है कि उसके आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पड़ोसी क्षेत्रों में शांति और स्थिरता आवश्यक है। इसलिए वह सीमावर्ती देशों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा विवादों को संवाद के माध्यम से हल करने पर बल देता है।
मुख्य विशेषताएँ
- पड़ोसी देशों के साथ दीर्घकालिक मैत्रीपूर्ण संबंधों का निर्माण।
- आर्थिक संपर्क, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना।
- क्षेत्रीय अवसंरचना (Infrastructure) एवं संपर्क (Connectivity) का विस्तार।
- पारस्परिक सम्मान और संप्रभुता के सिद्धांत का पालन।
आसियान चीन के लिए सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी क्षेत्रों में से एक है। Belt and Road Initiative (BRI) के अंतर्गत रेल, सड़क, बंदरगाह तथा डिजिटल अवसंरचना परियोजनाएँ इसी नीति का हिस्सा हैं। चीन–लाओस रेलवे और इंडोनेशिया की जकार्ता–बांडुंग हाई-स्पीड रेलवे इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- यद्यपि चीन मैत्रीपूर्ण संबंधों की बात करता है, लेकिन दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में उसके दावे, कृत्रिम द्वीपों का निर्माण और सैन्य गतिविधियाँ कई आसियान देशों की चिंताओं का कारण बनी हुई हैं। इससे Good Neighbourhood Policy की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।
- Community with a Shared Future for Mankind (मानवता के साझा भविष्य का समुदाय)
यह अवधारणा राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा प्रस्तुत की गई थी। इसका मूल विचार यह है कि आज की दुनिया परस्पर निर्भर (Interdependent) है, इसलिए किसी भी देश की समृद्धि, सुरक्षा और विकास अन्य देशों से अलग नहीं हो सकते। जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद, खाद्य संकट तथा आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का समाधान केवल वैश्विक सहयोग से ही संभव है।
मुख्य विशेषताएँ
- साझा विकास और सामूहिक समृद्धि।
- वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार।
- जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास पर सहयोग।
- विकासशील देशों की अधिक भागीदारी।
- बहुपक्षवाद (Multilateralism) को बढ़ावा।
चीन इस अवधारणा के माध्यम से आसियान देशों के साथ साझा आर्थिक विकास, डिजिटल सहयोग, हरित ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने का प्रयास करता है। महामारी के दौरान वैक्सीन आपूर्ति और स्वास्थ्य सहयोग को भी इसी दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया।
पश्चिमी देशों का तर्क है कि यह अवधारणा चीन के वैश्विक प्रभाव को वैधता प्रदान करने तथा मौजूदा उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (Liberal International Order) के विकल्प के रूप में प्रस्तुत की जाती है।
- Win–Win Cooperation (पारस्परिक लाभ पर आधारित सहयोग)
Win–Win Cooperation चीन की विदेश नीति का एक प्रमुख सिद्धांत है, जिसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय संबंध शून्य–योग (Zero-Sum) प्रतिस्पर्धा पर नहीं, बल्कि साझा लाभ (Mutual Benefit) पर आधारित होने चाहिए। चीन का दावा है कि उसके विकास से अन्य देशों को भी आर्थिक अवसर प्राप्त होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
- व्यापार एवं निवेश के माध्यम से साझा आर्थिक लाभ।
- अवसंरचना विकास में सहयोग।
- तकनीकी एवं औद्योगिक साझेदारी।
- विकासशील देशों के साथ क्षमता निर्माण (Capacity Building)।
चीन–आसियान मुक्त व्यापार समझौता (ACFTA), RCEP, डिजिटल अर्थव्यवस्था, औद्योगिक पार्क, ई-कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग Win–Win Cooperation की व्यावहारिक अभिव्यक्तियाँ हैं। दोनों पक्षों का उद्देश्य आर्थिक विकास के माध्यम से पारस्परिक लाभ सुनिश्चित करना है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि व्यवहार में लाभ का वितरण हमेशा समान नहीं होता। कुछ छोटे देशों में चीन पर ऋण निर्भरता (Debt Dependency) बढ़ाने, व्यापार असंतुलन और आर्थिक प्रभाव बढ़ाने के आरोप लगाए जाते हैं।
- Global Development Initiative (GDI) – वैश्विक विकास पहल
Global Development Initiative (GDI) की घोषणा राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान की। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति को गति देना तथा विकासशील देशों को विकास संबंधी सहयोग प्रदान करना है।
GDI के माध्यम से चीन आसियान देशों में हरित ऊर्जा, कृषि, डिजिटल अवसंरचना, औद्योगिक विकास तथा गरीबी उन्मूलन परियोजनाओं को बढ़ावा देना चाहता है। यह क्षेत्रीय आर्थिक असमानताओं को कम करने का भी प्रयास है।
यह पहल विकासशील देशों के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग के नए अवसर प्रदान करती है और चीन को वैश्विक विकास भागीदार के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती है।
- Global Security Initiative (GSI) – वैश्विक सुरक्षा पहल
Global Security Initiative (GSI) की घोषणा 2022 में की गई। इसका उद्देश्य एक ऐसी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है जो सैन्य गठबंधनों और शक्ति-संतुलन की राजनीति के बजाय साझा, व्यापक और सतत सुरक्षा (Common, Comprehensive and Sustainable Security) पर आधारित हो।
मुख्य सिद्धांत
- सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन।
- संवाद एवं कूटनीति द्वारा विवादों का समाधान।
- पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटना।
- आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग।
आसियान के साथ समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में चीन GSI के अनुरूप सहयोग बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। हालाँकि, दक्षिण चीन सागर विवाद इस पहल की विश्वसनीयता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कुछ देशों का मानना है कि GSI का उद्देश्य अमेरिकी सुरक्षा गठबंधनों (जैसे AUKUS और Quad) के प्रभाव को संतुलित करना तथा चीन-केंद्रित सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
- Global Civilization Initiative (GCI) – वैश्विक सभ्यता पहल
Global Civilization Initiative (GCI) की घोषणा 2023 में की गई। यह चीन की नवीनतम वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद, परस्पर सम्मान और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
मुख्य उद्देश्य
- सभी सभ्यताओं के प्रति समान सम्मान।
- सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार करना।
- सभ्यताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना।
- शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और जन-से-जन संपर्क का विस्तार।
- वैचारिक टकराव के स्थान पर सांस्कृतिक सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करना।
चीन और आसियान के बीच छात्र आदान-प्रदान, विश्वविद्यालय सहयोग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पर्यटन और मीडिया सहयोग GCI के प्रमुख आयाम हैं। चीन स्वयं को एशियाई सभ्यताओं के साझा विकास का समर्थक बताता है।
कुछ विशेषज्ञों का मत है कि GCI चीन की Soft Power और वैचारिक प्रभाव को बढ़ाने का माध्यम भी है। पश्चिमी देशों में इसे चीन की वैकल्पिक वैश्विक कथा (Alternative Global Narrative) के रूप में देखा जाता है।
भारत के लिए चीन–आसियान संबंधों का महत्व
- चीन-आसियान संबंध भारत की आर्थिक, सामरिक एवं विदेश नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आसियान भारत की Act East Policy और इंडो–पैसिफिक दृष्टिकोण का केंद्र है।
- चीन और आसियान के बीच बढ़ते व्यापार, निवेश एवं आपूर्ति शृंखला (Supply Chains) भारत के लिए अवसरों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा की नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न करते हैं।
- दक्षिण चीन सागर, समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय शक्ति–संतुलन से जुड़े घटनाक्रम भारत के सामरिक हितों और समुद्री व्यापार को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
- भारत को आसियान के साथ संपर्क (Connectivity), डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित विकास तथा रक्षा सहयोग को मजबूत कर क्षेत्रीय उपस्थिति बढ़ानी होगी।
- संतुलित कूटनीति, ASEAN Centrality के समर्थन तथा नियम–आधारित इंडो–पैसिफिक व्यवस्था (Rules-Based Indo-Pacific) को बढ़ावा देकर भारत अपने दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की प्रभावी रक्षा कर सकता है।

निष्कर्ष
चीन और आसियान के संबंध आज एशिया की सबसे सफल क्षेत्रीय साझेदारियों में से एक हैं। व्यापार, निवेश, अवसंरचना, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों पक्षों के साझा भविष्य को और मजबूत बना सकता है। यदि विश्वास, संवाद और पारस्परिक सम्मान की भावना बनी रहती है, तो यह साझेदारी न केवल क्षेत्रीय समृद्धि बल्कि व्यापक इंडो–पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास की भी आधारशिला बन सकती है।
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