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भारत-अमेरिका संबंध : रणनीतिक अभिसरण से ‘मैनेज्ड पार्टनरशिप’ तक

(The Hindu में प्रकाशित संपादकीय, 28 मई 2026 के विश्लेषण पर आधारित)

28 मई 2026 को The Hindu में प्रकाशित संपादकीयNavigating India-US Ties’ के अनुसार भारत-अमेरिका संबंध पिछले लगभग तीन दशकों में निरंतर गहरे हुए हैं, किंतु हाल के वर्षों में अमेरिका की ‘America First’ नीति, व्यापारिक संरक्षणवाद, वीज़ा प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के कारण नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

  • भारत और अमेरिका के संबंध आज केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific), वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Supply Chain), उभरती प्रौद्योगिकियों (Emerging Technologies), जलवायु परिवर्तन तथा वैश्विक शक्ति संतुलन से भी जुड़े हुए हैं।
  • वर्तमान में दोनों देशों के संबंधों को विशेषज्ञों द्वारा ‘Managed Partnership’ (2026) कहा जा रहा है, जहाँ मतभेदों के बावजूद रक्षा, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग को जारी रखा जा रहा है।

भारतअमेरिका संबंधों का विकास

  1. शीत युद्ध काल (1947-1991) : अविश्वास और वैचारिक दूरी
  • 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की नीति अपनाई, जबकि अमेरिका ने सोवियत संघ के विरुद्ध सैन्य गठबंधनों की रणनीति अपनाई।
  • 1954 में पाकिस्तान SEATO (South East Asia Treaty Organization) में शामिल हुआ तथा 1955 में CENTO का सदस्य बना, जिससे अमेरिका-पाकिस्तान सामरिक निकटता बढ़ी।
  • 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान अमेरिका ने अपना 7वाँ बेड़ा (7th Fleet) बंगाल की खाड़ी में भेजा, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में गंभीर अविश्वास उत्पन्न हुआ।
  • 18 मई 1974 को भारत ने राजस्थान के पोखरण में ‘Smiling Buddha’ नामक पहला परमाणु परीक्षण किया। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर तकनीकी एवं परमाणु प्रतिबंध लगाए।
  1. शीत युद्ध के बाद पुनर्संतुलन (1991-1999)
  • 1991 में सोवियत संघ के विघटन तथा भारत में आर्थिक उदारीकरण (Liberalization) के बाद दोनों देशों के संबंधों में नई शुरुआत हुई।
  • मई 1998 में भारत द्वारा पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए जाने के बाद अमेरिका ने पुनः प्रतिबंध लगाए, किंतु उसी वर्ष जसवंत सिंहस्ट्रोब टैल्बोट संवाद (1998-2000) प्रारंभ हुआ जिसने संबंध सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1999 कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान पर दबाव डालकर उसकी सेना को पीछे हटने के लिए कहा, जिसे भारत-अमेरिका संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
  1. रणनीतिक पुनर्स्थापन एवं परमाणु समझौता (2000-2008)
  • मार्च 2000 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में ऐतिहासिक परिवर्तन का संकेत दिया।
  • 18 जुलाई 2005 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के बीच ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते की घोषणा हुई।
  • 2008 में 123 Civil Nuclear Agreement संपन्न हुआ, जिससे भारत को NPT पर हस्ताक्षर किए बिना वैश्विक परमाणु व्यापार में भाग लेने की अनुमति मिली।
  • 2008 में NSG (Nuclear Suppliers Group) द्वारा भारत को विशेष छूट प्रदान की गई, जो भारतीय विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि थी।
  1. रक्षा सहयोग का संस्थानीकरण (2009-2016)
  • 2012 में भारत-अमेरिका रक्षा व्यापार लगभग 1 अरब डॉलर से बढ़कर अगले दशक में 20 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
  • 2016 में दोनों देशों ने LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) पर हस्ताक्षर किए।
  • इस समझौते ने दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य अड्डों के उपयोग की सुविधा प्रदान की।
  • इसी अवधि में अमेरिका ने भारत को Major Defense Partner (2016) का दर्जा दिया।
  1. तकनीकी एवं रणनीतिक साझेदारी का विस्तार (2017-2024)
  • 2017 में क्वाड (Quad) को पुनर्जीवित किया गया, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
  • 2018 में COMCASA समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसने सुरक्षित सैन्य संचार प्रणाली की सुविधा प्रदान की।
  • 2020 में BECA समझौता हुआ, जिसके तहत भू-स्थानिक एवं उपग्रह डेटा साझा किया जाने लगा।
  • मई 2022 में iCET (Initiative on Critical and Emerging Technologies) की घोषणा की गई।
  • 2023 में GE Aerospace और HAL के बीच GE F-414 Jet Engine के सह-उत्पादन संबंधी समझौता हुआ।

भारतअमेरिका संबंधों में अभिसरण (Convergence)

  1. रक्षा एवं सामरिक सहयोग
  • 2025 में दोनों देशों ने 10-वर्षीय रक्षा साझेदारी ढाँचे (2025-2035) का नवीनीकरण किया।
  • मई 2026 में Underwater Domain Awareness Roadmap पर सहमति बनी।
  • भारत आज अमेरिका से P-8I Poseidon, Apache Helicopters, Chinook Helicopters, MH-60R Helicopters जैसे अत्याधुनिक रक्षा उपकरण प्राप्त कर रहा है।
  • रक्षा व्यापार 2008 में लगभग 500 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 तक 25 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।
  1. TRUST Initiative (2025)
  • 2025 में iCET को उन्नत कर TRUST (Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology) पहल शुरू की गई।
  • इसके अंतर्गत:
    • Artificial Intelligence (AI)
    • Quantum Computing
    • Semiconductors
    • Space Technology
    • Cyber Security

में संयुक्त अनुसंधान किया जा रहा है।

  • ISRO-NASA का NISAR Mission (2025-26) इस सहयोग का प्रमुख उदाहरण है।
  1. हिंदप्रशांत और क्वाड
  • मार्च 2021 में पहला Quad Leaders’ Summit आयोजित हुआ।
  • 2024 Wilmington Declaration तथा 2026 Quad Foreign Ministers Meeting में समुद्री सुरक्षा, Critical Minerals और Supply Chain Resilience पर बल दिया गया।
  • दोनों देश ‘Free, Open and Inclusive Indo-Pacific’ के पक्षधर हैं।
  1. व्यापार एवं निवेश
  • अमेरिका लगातार भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।
  • 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 190-200 अरब डॉलर के स्तर तक पहुँच गया।
  • दोनों देशों ने 2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया है।
  1. भारतीय प्रवासी समुदाय
  • 2026 तक अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 50 लाख (5 Million+) लोग निवास कर रहे हैं।
  • भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका की:
    • टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री
    • चिकित्सा क्षेत्र
    • अकादमिक संस्थानों
    • राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारतअमेरिका संबंधों में प्रमुख मतभेद

  1. रणनीतिक स्वायत्तता बनाम अमेरिकी अपेक्षाएँ
  • भारत की विदेश नीति का आधार Strategic Autonomy है।
  • रूसयूक्रेन युद्ध (2022-वर्तमान) के दौरान भारत ने रूस से ऊर्जा आयात जारी रखा।
  • 2025-26 में भी भारत रूस से कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार बना रहा।
  • अमेरिका चाहता है कि भारत पश्चिमी प्रतिबंधों के अनुरूप अधिक स्पष्ट रुख अपनाए।
  1. व्यापारिक संरक्षणवाद
  • 2025 में अमेरिका ने भारतीय स्टील एवं वस्त्र उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए।
  • कुछ चरणों में भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50% तक बढ़ाया गया, जिसे बाद में कम किया गया।
  • इससे भारतीय निर्यातकों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ा।
  1. पाकिस्तान कारक
  • 2026 पश्चिम एशिया संकट के दौरान अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के साथ बढ़ते सुरक्षा संवाद ने भारत की चिंता बढ़ाई।
  • भारत नहीं चाहता कि अमेरिका पुनः ‘Hyphenation Policy’ अपनाए।
  1. वीज़ा एवं आव्रजन मुद्दे
  • सितंबर 2025 में H-1B Visa शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई।
  • 2026 में EB-2 Visa श्रेणी भारतीय आवेदकों के लिए वार्षिक सीमा पूरी होने के कारण अस्थायी रूप से बंद घोषित कर दी गई।
  • इससे भारतीय IT एवं तकनीकी पेशेवर प्रभावित हुए।

भारतअमेरिका संबंधों को मजबूत करने के उपाय

  1. 500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करना
  • 2030 तक निर्धारित व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाए।
  • गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को कम किया जाए।
  1. Critical Minerals Partnership का क्रियान्वयन
  • मई 2026 Critical Minerals Framework को शीघ्र लागू किया जाए।
  • लिथियम, कोबाल्ट एवं दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति शृंखला में सहयोग बढ़ाया जाए।
  1. रक्षा सहउत्पादन को बढ़ावा
  • GE F-414 परियोजना की तरह संयुक्त रक्षा उत्पादन को विस्तारित किया जाए।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) को सरल बनाया जाए।
  1. वीज़ा एवं प्रतिभा गतिशीलता सुधार
  • H-1B और EB-2 श्रेणी में भारतीय पेशेवरों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
  • उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए विशेष Mobility Framework विकसित किया जाए।

निष्कर्ष

भारत-अमेरिका संबंध आज ‘Strategic Convergence’ और ‘Transactional Frictions’ के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

  • रक्षा, तकनीक, हिंद-प्रशांत सुरक्षा, Critical Minerals और Supply Chain Resilience जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के हित गहराई से जुड़े हुए हैं।
  • यद्यपि रणनीतिक स्वायत्तता, व्यापारिक संरक्षणवाद और वीज़ा प्रतिबंध जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, फिर भी दोनों देशों ने यह समझ विकसित की है कि वैश्विक शक्ति संतुलन, चीन की बढ़ती चुनौती और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में उनकी साझेदारी केवल विकल्प नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है।
  • अतः भविष्य में भारत-अमेरिका संबंधों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश अपने मतभेदों को नियंत्रित करते हुए साझा हितों को किस हद तक संस्थागत और दीर्घकालिक रूप दे पाते हैं।

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