लगभग छह दशकों तक वामपंथी उग्रवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा तथा विकास के समक्ष एक गंभीर चुनौती बना रहा, विशेषकर उन जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जहाँ हिंसा, कमजोर संपर्क व्यवस्था तथा सार्वजनिक सेवाओं की सीमित उपलब्धता थी। बिखरी हुई एवं घटनाकेंद्रित प्रतिक्रियाओं के स्थान पर व्यापक एवं समन्वित रणनीति अपनाई गई, जिसने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के साथ-साथ उग्रवाद के संरचनात्मक कारणों का भी समाधान किया। इसके परिणामस्वरूप 31 मार्च 2026 को भारत प्रभावी रूप से नक्सलवाद से मुक्त हो गया।
रणनीतिक ढाँचा (Strategic Framework)
यह परिवर्तन तीन परस्पर पूरक एवं सुदृढ़ स्तंभों पर आधारित था;
- विश्वास (Vishwaas): सुदृढ़ सुरक्षा अभियानों, विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय, संगठित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रमों तथा स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से लोगों का विश्वास पुनः स्थापित किया गया।
- निर्माण (Nirman): दूरस्थ एवं पूर्व में प्रभावित क्षेत्रों में भौतिक एवं डिजिटल संपर्क, सुशासन की उपस्थिति, आधारभूत संरचना तथा आजीविका के अवसरों का विस्तार किया गया।
- जन कल्याण (Jan Kalyan): कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पहुँच, गरिमापूर्ण जीवन, सांस्कृतिक समावेशन तथा प्रभावित समुदायों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने को प्राथमिकता दी गई।
समन्वित दृष्टिकोण (Integrated Approach)
इन तीनों स्तंभों ने एक-दूसरे को सुदृढ़ बनाया;
- सुरक्षा ने विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया।
- विकास ने जनता का राज्य पर विश्वास मजबूत किया।
- बढ़े हुए विश्वास ने कल्याणकारी योजनाओं के अधिक तेज एवं प्रभावी क्रियान्वयन को संभव बनाया।
इस प्रकार, सुरक्षा, विकास और विश्वास एक-दूसरे से जुड़े हुए विकास-चक्र (Chain of Progress) के रूप में कार्य करते रहे।
सिकुड़ता हुआ LWE (Left-Wing Extremism) प्रभाव क्षेत्र
वामपंथी उग्रवाद से आशय माओवादी/नक्सली हिंसक आंदोलनों से है, जिनका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से राज्य व्यवस्था को उखाड़ फेंकना है।
- वर्ष 2014 में 126 LWE-प्रभावित जिले थे, जो 2026 तक घटकर केवल 2 रह गए।
- सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 35 से घटकर शून्य हो गई।
- नक्सली घटनाएँ 2014 में 870 से घटकर 2025 में 234 रह गईं।
- इसी अवधि में मृत्यु संख्या 310 से घटकर 100 रह गई।
- जबकि 2010 में हिंसा अपने चरम पर थी, जब 1,936 घटनाएँ और 1,005 मौतें दर्ज की गई थीं।
सुरक्षा वातावरण में सुधार
निरंतर सुरक्षा अभियानों, विकासात्मक उपायों तथा बेहतर शासन व्यवस्था ने
- नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया।
- जनता का विश्वास पुनर्स्थापित किया।
- पूर्व में प्रभावित क्षेत्रों में शांति, संपर्क व्यवस्था तथा सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार किया।
‘विश्वास’ बढ़ाया जिसका उद्देश्य संवेदनशील एवं दूरस्थ क्षेत्रों में राज्य की सतत उपस्थिति सुनिश्चित करना, सुरक्षा एजेंसियों एवं प्रशासनिक संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाना तथा स्थानीय समुदायों एवं राज्य के बीच लंबे समय से चले आ रहे विश्वास के अंतर को समाप्त करना था।
वामपंथी उग्रवाद की शुरुआत
- वामपंथी उग्रवाद की शुरुआत 1967 के पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी विद्रोह से हुई।
- यह माओवादी विचारधारा तथा सशस्त्र क्रांति के सिद्धांत से प्रेरित था।
- वर्ष 2004 में कई उग्रवादी संगठनों के विलय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) [CPI (Maoist)] का गठन हुआ, जिसने LWE को भारत की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौती बना दिया।

- 2004 से 2014 का दशक वामपंथी उग्रवाद की सबसे हिंसक अवधि में से एक था।
- 2010 में हिंसा अपने चरम पर पहुँची, जब 1,936 घटनाएँ तथा 720 नागरिकों की मृत्यु दर्ज की गई।
- वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि नक्सलवाद भारत की सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती है, जिसका भौगोलिक विस्तार कश्मीर एवं पूर्वोत्तर के उग्रवाद से भी अधिक था।
राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना (National Policy and Action Plan)
वर्ष 2015 में वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटने हेतु राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना (National Policy and Action Plan) लागू की गई। इसने पहले की अस्थायी (Ad hoc) और बिखरी हुई प्रतिक्रियाओं के स्थान पर समग्र सरकारी (Whole-of-Government) दृष्टिकोण पर आधारित एक संगठित एवं संरचित ढाँचा स्थापित किया।
सुरक्षा एवं विकासात्मक उपाय (Security and Development Measures)
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) की तैनाती बढ़ाई गई।
- सुरक्षा बलों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
- Security Related Expenditure (SRE), Special Infrastructure Scheme (SIS) तथा Special Central Assistance (SCA) जैसी योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
- साथ ही, वामपंथी उग्रवाद के सामाजिक एवं आर्थिक कारणों के समाधान पर भी समान रूप से बल दिया गया।
त्रि–आयामी रणनीति (Three-Pronged Approach)
पहली बार भारत ने निम्नलिखित तीन आधारों पर समन्वित रणनीति अपनाई-
- संवाद (Dialogue)
- सुरक्षा (Security)
- समन्वय (Coordination)
इसमें गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने केंद्रीय नेतृत्व प्रदान करते हुए नीति-निर्माण एवं क्रियान्वयन में बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया।
समयबद्ध उपलब्धि (Time-Bound Achievement)
24 अगस्त 2024 को 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल–मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
यह लक्ष्य निम्नलिखित उपायों के माध्यम से प्राप्त किया गया;
- सुरक्षा अभियानों को तेज करना।
- विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना।
- आधारभूत संरचना का विस्तार करना।
- विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में तेजी लाना।

‘ट्रेस–टार्गेट–न्यूट्रलाइज़‘ सिद्धांत (Trace–Target–Neutralise Doctrine)
सरकार ने “Trace, Target, Neutralise” रणनीति अपनाई, जिसमें खुफिया सूचना आधारित अभियान, निरंतर सुरक्षा कार्रवाई, तथा नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों पर पुनः राज्य का नियंत्रण स्थापित करना मुख्य उद्देश्य रहे।
निम्नलिखित खुफिया-आधारित अभियानों के माध्यम से माओवादी गढ़ों को ध्वस्त किया गया;
- Operation Black Forest
- Operation Octopus
- Operation Double Bull
- Operation Thunderstorm
- Operation Bhimbarg
- Operation Chakrabandha
इन अभियानों से प्रभावित क्षेत्रों में शासन की पुनः स्थापना संभव हुई।
प्रमुख उपलब्धियाँ (Major Operational Gains)
- Operation Black Forest में 30 से अधिक माओवादी मारे गए, जिसके बाद गिरफ्तारी एवं आत्मसमर्पण की संख्या में वृद्धि हुई।
- Operation Double Bull के परिणामस्वरूप गुमला, लोहरदगा एवं लातेहार जिले नक्सल-मुक्त घोषित किए गए।

‘निर्माण (NIRMAN)’ ने LWE-प्रभावित क्षेत्रों में नए भविष्य का निर्माण कैसे किया?
निर्माण (Nirman) का उद्देश्य दूरस्थ एवं नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी, सार्वजनिक सेवाओं तथा प्रशासनिक पहुँच का विस्तार करना था, ताकि इन क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास एवं शासन व्यवस्था से जोड़ा जा सके।
नक्सलवाद का अंत केवल सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं था। इसका व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि;
- जनजातीय समुदायों को भी महानगरों के समान बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों।
- बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर अवसर प्राप्त हों।
- स्थानीय लोगों के लिए सम्मानजनक एवं सुरक्षित भविष्य का निर्माण हो।
- वर्ष 2014 के बाद नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में 12,249 किमी से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया।
- 17,319 किमी सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें लगभग ₹20,557 करोड़ का निवेश किया गया।
- दूरसंचार विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 9,600 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए।
- इससे डिजिटल विभाजन (Digital Divide) कम हुआ तथा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तक पहुँच आसान हुई।
- सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के 46,592 गाँवों में से 44,728 गाँवों तक मोबाइल नेटवर्क पहुँच गया।
- अर्थात लगभग 96% गाँव मोबाइल संपर्क से जुड़ गए।
- इससे आर्थिक गतिविधियों एवं सामाजिक सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
सामुदायिक सहभागिता (Community Engagement)
राज्य एवं जनजातीय समाज के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए;
- Tribal Youth Exchange Programme
- Media Plan Scheme के अंतर्गत लगभग ₹50.45 करोड़ की विभिन्न पहलें संचालित की गईं।
इन कार्यक्रमों ने
- संवाद को मजबूत किया।
- जन-जागरूकता बढ़ाई।
- स्थानीय समुदायों और शासन के बीच सहयोग को सुदृढ़ किया।
परिवर्तन को गति देने वाली प्रमुख पहलें (Targeted Initiatives Accelerating the Transformation)

निष्कर्ष
भारत का वामपंथी उग्रवाद (LWE) के विरुद्ध अभियान यह दर्शाता है कि आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का स्थायी समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि सुरक्षा, सुशासन, समावेशी विकास और जनविश्वास के समन्वित मॉडल से संभव है। ‘विश्वास–निर्माण–जन कल्याण‘ पर आधारित रणनीति ने प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा को कम करने, शासन की पहुँच बढ़ाने, जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भविष्य में इस उपलब्धि को स्थायी बनाए रखने के लिए जनजातीय अधिकारों की रक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार सृजन, प्रभावी स्थानीय शासन तथा सतत विकास पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक होगा। इससे न केवल नक्सलवाद की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा, बल्कि सुरक्षित, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा भी सुदृढ़ होगी।
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