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भारत-बेल्जियम संबंध

(बदलते वैश्विक परिदृश्य में रणनीतिक साझेदारी)

भारत और बेल्जियम के बीच संबंध लंबे समय से व्यापार, विज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित रहे हैं। हालांकि, बदलते वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों के संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक साझेदारी से आगे बढ़कर रक्षा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, हरित हाइड्रोजन, डीप टेक्नोलॉजी, निवेश और वैश्विक शासन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहे हैं। सितंबर 2026 में बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ने इस बदलती साझेदारी को और गति प्रदान की। इस यात्रा के दौरान भारत और बेल्जियम ने संयुक्त वक्तव्य, निवेश फास्ट-ट्रैक तंत्र तथा रक्षा सहयोग से संबंधित कई महत्वपूर्ण समझौतों और पहलों को आगे बढ़ाया।

भारतबेल्जियम संबंधों की बदलती प्रकृति

  • भारत और बेल्जियम के संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार दोनों देशों के बीच स्थापित राजनयिक संबंध हैं। बेल्जियम उन शुरुआती यूरोपीय देशों में शामिल था, जिसने स्वतंत्र भारत के साथ 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। समय के साथ यह संबंध कानून के शासन, संघवाद और बहुलवाद जैसे मूल्यों पर आधारित व्यापक साझेदारी में विकसित हुआ है।
  • पहले भारत और बेल्जियम के आर्थिक संबंधों में हीरा व्यापार की प्रमुख भूमिका थी। एंटवर्प और सूरत तथा मुंबई के बीच हीरा व्यापार दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी की पहचान रहा है। किंतु वर्तमान समय में यह संबंध केवल हीरा व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश महत्वपूर्ण खनिज, जीवन विज्ञान, परमाणु ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और डीप टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
  • भारत और बेल्जियम के बीच आर्थिक सहयोग के लिए 1997 में स्थापित भारतBLEU संयुक्त आर्थिक आयोग (Joint Economic Commission) एक प्रमुख संस्थागत तंत्र है। यह आयोग दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग का विस्तार

  • भारत–बेल्जियम संबंधों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग एक नया और महत्वपूर्ण आयाम बनकर उभरा है। दोनों देश नियमित सैन्य आदान-प्रदान, स्टाफ वार्ता तथा रक्षा-औद्योगिक सहयोग के माध्यम से अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। बेल्जियम ने भारत को यह आश्वासन भी दिया है कि वह पाकिस्तान को रक्षा उपकरण अथवा सैन्य प्रौद्योगिकी की आपूर्ति नहीं करेगा।
  • समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ रहा है। नवंबर 2026 में बेल्जियम के फ्रिगेट LEOPOLD I की भारत में तैनाती की योजना दोनों देशों के बढ़ते समुद्री सहयोग को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने निवासी रक्षा अताशे नियुक्त किए हैं, जिससे रक्षा संवाद को संस्थागत रूप से और मजबूत किया जा सकेगा।
  • भारत और बेल्जियम ने एक रक्षा रूपरेखा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (BDSI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के बीच समझौता ज्ञापन किया गया है। इसके अंतर्गत हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों तथा ड्रोन-रोधी प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
  • यह सहयोग भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उद्देश्य केवल तैयार रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित रहने के बजाय सह-विकास, तकनीकी सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना है।
  • आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और साइबर अपराध जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और बेल्जियम की संघीय पुलिस के बीच सहयोग तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की दिशा में चर्चा इसी व्यापक सुरक्षा सहयोग का हिस्सा है।

आर्थिक, निवेश और तकनीकी सहयोग

भारत और बेल्जियम के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए Investment Fast-Track Mechanism शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य निवेश संबंधी बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश को अधिक सुगम बनाना है।

इस संदर्भ में बेल्जियम की Federal Holding and Investment Company (SFPIM) और भारत के National Investment and Infrastructure Fund (NIIF) के बीच सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित भारतबेल्जियम आर्थिक एवं निवेश गलियारा दोनों देशों के बीच पूंजी प्रवाह और निवेश को बढ़ावा दे सकता है।

2025–26 में भारत और बेल्जियम के बीच द्विपक्षीय व्यापार 13.01 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। दोनों देशों ने आने वाले पाँच वर्षों में व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पारंपरिक हीरा व्यापार पर निर्भरता कम करते हुए महत्वपूर्ण खनिज, जीवन विज्ञान और परमाणु ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में व्यापार के विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है।

बेल्जियम का Port of Antwerp-Bruges भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इसे यूरोप में भारतीय निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक प्रवेश-द्वार के रूप में विकसित करने की संभावनाएँ हैं। इसके साथ हरित हाइड्रोजन, समुद्री सेवाओं और अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है।

यूरोपीय संघ के संदर्भ में बेल्जियम का रणनीतिक महत्व

  • भारत के लिए बेल्जियम का महत्व केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। बेल्जियम यूरोपीय संघ और NATO जैसे महत्वपूर्ण यूरोपीय संस्थागत एवं सुरक्षा ढाँचों का केंद्र है। इसलिए ब्रुसेल्स के साथ मजबूत संबंध भारत को यूरोपीय संस्थाओं और व्यापक यूरोपीय रणनीतिक ढाँचों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में सहायता प्रदान करते हैं।
  • इसी कारण बेल्जियम को भारत के लिए “Gateway to Europe” के रूप में देखा जा सकता है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, जलवायु और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने में बेल्जियम की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
  • दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन करने पर भी सहमति व्यक्त की है। भारत 2028–29 के लिए और बेल्जियम 2037–38 के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत कर रहा है। बेल्जियम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए भी अपना समर्थन दोहराया है।
  • इसके अलावा, भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के निष्कर्ष और 2030 के लिए संयुक्त भारत–EU व्यापक रणनीतिक एजेंडा का स्वागत दोनों देशों के बीच यूरोपीय संघ के व्यापक संदर्भ में बढ़ते रणनीतिक समन्वय को दर्शाता है।

सेमीकंडक्टर और डीप टेक्नोलॉजी में सहयोग

  • आज के तकनीकी और भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा के दौर में सेमीकंडक्टर उद्योग किसी भी देश की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। इस संदर्भ में बेल्जियम का Interuniversity Microelectronics Centre (imec) भारत के लिए विशेष महत्व रखता है।
  • imec नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व का एक प्रमुख स्वतंत्र अनुसंधान केंद्र है। भारत अपने सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने के लिए बेल्जियम की इस विशेषज्ञता का लाभ उठा सकता है।
  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन, ChipIN Centre और C-DAC जैसी संस्थाओं के साथ imec के सहयोग से चिप डिजाइन, उन्नत पैकेजिंग और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में नई संभावनाएँ पैदा हो सकती हैं। इससे भारत की आयात-निर्भरता कम करने तथा एक स्वदेशी और संकट-प्रतिरोधी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
  • हालांकि, चुनौती यह है कि यह सहयोग केवल अनुसंधान और अकादमिक स्तर तक सीमित न रह जाए। भारत को संयुक्त बौद्धिक संपदा स्वामित्व, सह-वित्तपोषित R&D और वाणिज्यिक उत्पादन जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना होगा।

हरित संक्रमण और जलवायु सहयोग

  • जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्र में भी भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं। बेल्जियम की स्वच्छ प्रौद्योगिकी संबंधी विशेषज्ञता भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के लिए उपयोगी हो सकती है।
  • दोनों देश हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और अपतटीय पवन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। इन क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग और निवेश भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान दे सकता है।
  • इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे समुद्री क्षेत्रों में जैव विविधता के संरक्षण से संबंधित BBNJ Agreement का समर्थन किया है। इससे भारत–बेल्जियम सहयोग का पर्यावरणीय और समुद्री शासन से जुड़ा आयाम भी सामने आता है।

ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंध

  • भारत और बेल्जियम के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति और आर्थिक हितों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि इनके ऐतिहासिक और मानवीय आयाम भी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने फ्लैंडर्स फील्ड्स में अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उनके योगदान और बलिदान की स्मृति में 2011 में Ypres में Menin Gate के निकट एक भारतीय स्मारक स्तंभ स्थापित किया गया।
  • शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग मौजूद है। भारतीय और बेल्जियम के विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक साझेदारियाँ हैं तथा 1973 का सांस्कृतिक समझौता दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का आधार प्रदान करता है।
  • बेल्जियम में भारतीय प्रवासी समुदाय भी दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेल्जियम में 24,000 से अधिक भारतीय रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में IT पेशेवर और विद्यार्थी शामिल हैं। कुशल श्रमशक्ति की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए दोनों देश Migration and Mobility Agreement को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

भारतबेल्जियम संबंधों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ

  • हालांकि भारत और बेल्जियम के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, फिर भी कई चुनौतियाँ मौजूद हैं। सबसे पहली चुनौती दोनों देशों के बीच पारंपरिक हीरा व्यापार पर अत्यधिक निर्भरता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में परिवर्तन और ट्रेसबिलिटी संबंधी बढ़ती आवश्यकताएँ भारतीय MSMEs के लिए अतिरिक्त अनुपालन लागत पैदा कर सकती हैं। इसलिए भारत को अपने निर्यात बाजार और उत्पादों में विविधता लाने की आवश्यकता है।
  • दूसरी चुनौती यूरोपीय संघ के नए पर्यावरणीय नियमों से संबंधित है। Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) तथा European Union Deforestation Regulation (EUDR) भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ा सकते हैं और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं के रूप में कार्य कर सकते हैं। भारत को यूरोपीय संघ के साथ नियामक समकक्षता, कार्बन लेखांकन और संक्रमणकालीन सहायता जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना होगा।
  • रक्षा क्षेत्र में भी वास्तविक सह-विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। बौद्धिक संपदा संबंधी प्रतिबंध और EU के dual-use controls कई बार सहयोग को केवल लाइसेंस-आधारित विनिर्माण तक सीमित कर सकते हैं। इसलिए संयुक्त उपक्रमों और iDEX जैसी पहलों के माध्यम से सह-विकास तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना आवश्यक होगा।
  • निवेश के क्षेत्र में कमजोर विवाद-समाधान तंत्र तथा निवेश संरक्षण की कमी बेल्जियम के संस्थागत निवेश को प्रभावित कर सकती है। इसलिए SFPIM–NIIF आर्थिक गलियारे को प्रभावी रूप से लागू करना और हरित हाइड्रोजन, अपतटीय पवन ऊर्जा तथा अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक पूंजी आकर्षित करना आवश्यक है।
  • सेमीकंडक्टर और डीप टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी यह सुनिश्चित करना होगा कि बेल्जियम के imec के साथ सहयोग केवल अनुसंधान तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक व्यावसायीकरण हो। इसके लिए संयुक्त IP स्वामित्व, सह-वित्तपोषित R&D और वाणिज्यिक फैब गठबंधन विकसित किए जा सकते हैं।

भारत के लिए आगे की राह

  • भारत–बेल्जियम संबंधों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दोनों देशों को पारंपरिक व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़कर रणनीतिक, तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी पर ध्यान देना होगा। विशेष रूप से रक्षा सह-विकास, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन, महत्वपूर्ण खनिज और डीप टेक्नोलॉजी भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हो सकते हैं।
  • भारत को बेल्जियम की यूरोपीय संस्थागत स्थिति का उपयोग भारत–EU संबंधों को मजबूत करने के लिए भी करना चाहिए। व्यापार और प्रौद्योगिकी से लेकर जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा तक, बेल्जियम भारत के लिए यूरोपीय संस्थाओं के साथ संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
  • साथ ही, भारत को निवेश संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नियामक सहयोग से जुड़ी बाधाओं को कम करने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करना होगा। इससे दोनों देशों के बीच केवल व्यापार की मात्रा ही नहीं, बल्कि संबंधों की रणनीतिक गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

निष्कर्ष

भारत–बेल्जियम संबंध वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। जहां एक ओर हीरा व्यापार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का पारंपरिक आधार रहा है, वहीं दूसरी ओर रक्षा, सेमीकंडक्टर, डीप टेक्नोलॉजी, हरित हाइड्रोजन, महत्वपूर्ण खनिज और निवेश जैसे नए क्षेत्र इस साझेदारी को अधिक व्यापक और रणनीतिक बना रहे हैं।

बेल्जियम की EU और NATO के संदर्भ में संस्थागत भूमिका भारत के लिए इसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। भारत बेल्जियम के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ इसका उपयोग व्यापक भारत–EU रणनीतिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है।

अतः भारत–बेल्जियम संबंधों को केवल एक पारंपरिक द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी के रूप में नहीं, बल्कि भारत की यूरोप नीति, तकनीकी आत्मनिर्भरता, रक्षा आधुनिकीकरण और हरित संक्रमण की व्यापक रणनीति के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में समझना चाहिए।

MCQs

प्रश्न 1. भारत और बेल्जियम के बीच आर्थिक सहयोग के लिए 1997 में कौन-सा संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया था?

(A) भारत–बेल्जियम रणनीतिक परिषद
(B) भारत–BLEU संयुक्त आर्थिक आयोग
(C) भारत–EU आर्थिक परिषद
(D) भारत–बेल्जियम निवेश प्राधिकरण

सही उत्तर: (B) भारतBLEU संयुक्त आर्थिक आयोग

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा बेल्जियम के साथ भारत के उभरते तकनीकी सहयोग का प्रमुख क्षेत्र है?

(A) सेमीकंडक्टर और डीप टेक्नोलॉजी
(B) केवल कपड़ा उद्योग
(C) केवल कृषि उत्पादन
(D) केवल पर्यटन

सही उत्तर: (A) सेमीकंडक्टर और डीप टेक्नोलॉजी

प्रश्न 3. भारत के लिए बेल्जियम को “Gateway to Europe” के रूप में देखने का प्रमुख कारण क्या है?

(A) बेल्जियम एशिया का सबसे बड़ा बाजार है
(B) बेल्जियम यूरोपीय संघ और NATO के महत्वपूर्ण संस्थागत ढाँचों का केंद्र है
(C) बेल्जियम भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है
(D) बेल्जियम भारत को सैन्य गठबंधन में शामिल करना चाहता है

सही उत्तर: (B) बेल्जियम यूरोपीय संघ और NATO के महत्वपूर्ण संस्थागत ढाँचों का केंद्र है

प्रश्न 4. भारत–बेल्जियम रक्षा सहयोग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र प्रस्तावित सहयोग का हिस्सा है?

(A) रडार एवं इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर
(B) केवल परमाणु हथियारों का निर्माण
(C) केवल सैन्य वर्दी का उत्पादन
(D) केवल सैनिकों का खेल प्रशिक्षण

सही उत्तर: (A) रडार एवं इलेक्ट्रोऑप्टिकल सेंसर

प्रश्न 5. भारत–बेल्जियम आर्थिक संबंधों के सामने निम्नलिखित में से कौन-सी चुनौती यूरोपीय संघ के पर्यावरणीय नियमों से संबंधित है?

(A) CBAM और EUDR
(B) NATO और QUAD
(C) SAARC और BIMSTEC
(D) G20 और BRICS

सही उत्तर: (A) CBAM और EUDR


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