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भारत-साइप्रस सबंध: रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत

साझेदारी रक्षा, व्यापार, साइबर सुरक्षा, डिजिटल भुगतान और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों तक

मई 2026 में साइप्रस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया। यह भारत की बढ़ती वैश्विक और सामरिक भूमिका को दर्शाता है।

  • यह साझेदारी रक्षा, व्यापार, साइबर सुरक्षा, डिजिटल भुगतान और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित है। इससे दोनों देशों के संबंध अधिक व्यापक और गहरे होंगे।
  • भारत पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। साइप्रस इस क्षेत्र में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी बनकर उभरा है।

साइप्रस का परिचय

  • साइप्रस पूर्वी भूमध्यसागर में स्थित एक द्वीपीय देश है। इसकी स्थिति यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच होने के कारण यह सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह यूरोपीय संघ (EU) का सदस्य देश है। इसलिए यह भारत के लिए यूरोपीय बाजार और संस्थाओं तक पहुँच का माध्यम बनता है।
  • साइप्रस प्राकृतिक संसाधनों जैसे तांबा, जिप्सम, नमक और संगमरमर से समृद्ध है। इसकी राजधानी निकोसिया (Nicosia) है।

भारतसाइप्रस संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • भारत और साइप्रस ने 1962 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। तब से दोनों देशों के बीच मित्रतापूर्ण और स्थिर संबंध बने हुए हैं।
  • दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के सक्रिय सदस्य रहे हैं। उन्होंने उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के विरुद्ध समान विचारधारा साझा की है।
  • भारत ने साइप्रस की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया है। वहीं साइप्रस ने UNSC और NSG जैसे मुद्दों पर भारत का समर्थन किया है।

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

(i) पाँच वर्षीय रक्षा रोडमैप (2026-2031)

  • दोनों देशों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने हेतु 2026-2031 का रोडमैप तैयार किया। इसका उद्देश्य रक्षा उद्योगों और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करना है।
  • इस योजना के तहत संयुक्त अनुसंधान, रक्षा उत्पादन और सैन्य सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे दोनों देशों की सामरिक क्षमता में वृद्धि होगी।
  • भारतीय रक्षा कंपनियों को यूरोप के रक्षा बाजार तक पहुँचने का अवसर मिलेगा। यह भारत के रक्षा निर्यात को भी प्रोत्साहित करेगा।

(ii) भारतीय रक्षा निर्यात के अवसर

  • साइप्रस ने भारतीय ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों में रुचि दिखाई है। इससे भारत के स्वदेशी रक्षा उपकरणों को नया अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।
  • भारत ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा निर्यात बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। साइप्रस इसमें यूरोप के प्रवेश द्वार की भूमिका निभा सकता है।
  • इससे भारत की रक्षा तकनीक की वैश्विक विश्वसनीयता और रणनीतिक प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।

(iii) आतंकवाद एवं साइबर सुरक्षा सहयोग

  • दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति व्यक्त की। इसका उद्देश्य सुरक्षा खतरों से मिलकर निपटना है।
  • साइबर सुरक्षा संवाद के माध्यम से डिजिटल ढाँचे और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा मजबूत की जाएगी। यह आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए आवश्यक है।
  • खुफिया जानकारी साझा करने से दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ेगा। इससे आतंकवादी गतिविधियों पर नियंत्रण आसान होगा।

(iv) समुद्री सुरक्षा एवं नौसैनिक सहयोग

  • भारतीय नौसेना के INS Trikand ने साइप्रस के साथ PASSEX अभ्यास किया। इससे दोनों देशों की नौसैनिक साझेदारी मजबूत हुई।
  • पूर्वी भूमध्यसागर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा मार्गों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ भारत की उपस्थिति सामरिक दृष्टि से लाभकारी है।
  • समुद्री सुरक्षा सहयोग से व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग

(i) IMEEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor)

  • IMEEC भारत, मध्य-पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। साइप्रस इसमें एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
  • यह परियोजना चीन की Belt and Road Initiative (BRI) का वैकल्पिक मार्ग मानी जा रही है। इससे भारत की वैश्विक कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
  • IMEEC से भारत को यूरोप तक तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला व्यापार मार्ग प्राप्त होगा।

(ii) डिजिटल भुगतान सहयोग

  • भारत के UPI और यूरोप की TIPS प्रणाली के बीच सहयोग पर सहमति बनी है। इससे सीमा-पार डिजिटल भुगतान सरल होंगे।
  • यह पहल भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगी। इससे व्यापार और पर्यटन दोनों को लाभ मिलेगा।
  • डिजिटल आर्थिक सहयोग दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को और मजबूत करेगा।

(iii) व्यापार एवं निवेश

  • 2024-25 में भारत और साइप्रस के बीच लगभग 140 मिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। यह आर्थिक संबंधों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
  • भारत मुख्य रूप से दवाइयाँ, रसायन और मशीनरी निर्यात करता है। वहीं साइप्रस धातु और मशीनरी उत्पाद भारत को भेजता है।
  • मुंबई में Cyprus Trade Center की स्थापना से व्यापार और निवेश संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)

  • साइप्रस भारत में विदेशी निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। अप्रैल 2000 से जून 2025 तक लगभग 15.76 बिलियन डॉलर का निवेश भारत में आया।
  • यह निवेश सेवाओं, सॉफ्टवेयर, रियल एस्टेट और फार्मा क्षेत्रों में केंद्रित रहा है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
  • साइप्रस भारत के लिए यूरोपीय निवेश आकर्षित करने का एक प्रमुख माध्यम बन सकता है।

कर एवं वित्तीय सहयोग

Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA)

  • DTAA का उद्देश्य दोहरे कराधान को रोकना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। इससे व्यापारिक पारदर्शिता में सुधार हुआ है।
  • संशोधित समझौते के बाद राउंड-ट्रिपिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया गया। इससे भारत की वित्तीय सुरक्षा मजबूत हुई।
  • भारत ने साइप्रस को ‘Notified Jurisdictional Area’ सूची से हटाकर निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।

Category-I FPI Status

  • SEBI ने साइप्रस को Category-I Foreign Portfolio Investor का दर्जा दिया है। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक सरल और विश्वसनीय बनेगी।
  • यह दर्जा भारत के पूंजी बाजार में विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा। यूरोपीय निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
  • इससे भारत और साइप्रस के बीच वित्तीय सहयोग और गहरा होगा।

स्वास्थ्य एवं मानवीय सहयोग

BHISM Cube

  • भारत ने साइप्रस को BHISM Cube नामक आधुनिक मोबाइल अस्पताल उपहार में देने की घोषणा की। यह आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए उपयोगी है।
  • इस पहल से भारत की ‘Health Diplomacy’ को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मानवीय सहायता में भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत होगी।
  • यह भारत की स्वदेशी तकनीकी और चिकित्सा क्षमता का भी प्रदर्शन करता है।

अंतरिक्ष सहयोग

  • दोनों देशों ने पहला ‘India-Cyprus Space Day’ मनाया। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • सैटेलाइट तकनीक, डेटा साझेदारी और वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे दोनों देशों की तकनीकी क्षमता मजबूत होगी।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग भविष्य में नई संयुक्त परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

प्रवासन एवं भारतीय प्रवासी

  • साइप्रस में लगभग 15,500 भारतीय रहते हैं। ये लोग शिक्षा, व्यवसाय और रोजगार के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।
  • दोनों देशों ने Migration and Mobility Partnership को जल्द पूरा करने पर सहमति जताई। इससे लोगों की आवाजाही आसान होगी।
  • Social Security Agreement भारतीय कामगारों को सामाजिक सुरक्षा और कानूनी लाभ प्रदान करेगा।

भारत के लिए साइप्रस का रणनीतिक महत्व

(i) तुर्कीपाकिस्तान धुरी का संतुलन

  • तुर्की अक्सर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता है। ऐसे में साइप्रस भारत के लिए रणनीतिक संतुलनकारी सहयोगी बनता है।
  • भारत साइप्रस की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है। इससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास मजबूत हुआ है।
  • यह सहयोग भारत की पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करता है।

(ii) यूरोप में भारत की पहुँच

  • साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारत के लिए यूरोप का प्रवेश द्वार माना जाता है। इससे भारत को यूरोपीय बाजार तक आसान पहुँच मिलती है।
  • व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। यह भारत-EU संबंधों को भी मजबूती देता है।
  • साइप्रस भारत की यूरोपीय रणनीति में एक महत्वपूर्ण भागीदार बन गया है।

(iii) ऊर्जा एवं समुद्री सुरक्षा

  • पूर्वी भूमध्यसागर ऊर्जा संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है। भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है।
  • समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। साइप्रस इसमें रणनीतिक सहयोग प्रदान करता है।
  • नौसैनिक सहयोग से हिंद महासागर से यूरोप तक भारत की समुद्री पहुँच मजबूत होगी।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं। इसका प्रभाव व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
  • चीन की BRI परियोजना भारत के IMEEC के लिए रणनीतिक चुनौती प्रस्तुत करती है। इससे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
  • साइबर सुरक्षा, आतंकवाद और अवैध वित्तीय गतिविधियाँ दोनों देशों के लिए प्रमुख सुरक्षा चिंताएँ हैं।

आगे की राह

  • भारत और साइप्रस को IMEEC परियोजना को शीघ्र लागू करना चाहिए। इससे व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।
  • रक्षा, साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता है। इससे रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी।
  • EU-India FTA और निवेश सहयोग का लाभ उठाकर आर्थिक संबंधों का विस्तार किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

  • भारत-साइप्रस संबंध अब केवल द्विपक्षीय संबंध नहीं बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी बन चुके हैं। यह भारत की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • साइप्रस भारत के लिए यूरोप, पश्चिम एशिया और भूमध्यसागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र के रूप में उभरा है।
  • रक्षा, व्यापार, डिजिटल भुगतान और समुद्री सुरक्षा में बढ़ता सहयोग भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा।

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