भारत और इटली के संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ (Special Strategic Partnership) तक उन्नत किया जाना केवल एक कूटनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति में दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का संकेत है।
यह साझेदारी व्यापार, रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक संपर्क (connectivity) के नए आयाम खोलती है। विशेष रूप से IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) के संदर्भ में इटली भारत के लिए यूरोप का रणनीतिक प्रवेश द्वार बनकर उभर रहा है।
रणनीतिक उन्नयन: संबंधों का नया चरण
- भारत और इटली ने अपने संबंधों को ‘Strategic Partnership’ से आगे बढ़ाकर ‘Special Strategic Partnership’ का दर्जा दिया है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देश अब केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि दीर्घकालिक भू-राजनीतिक और सुरक्षा साझेदारी विकसित करना चाहते हैं।
- इसके तहत Joint Strategic Action Plan 2025-2029 लागू किया जाएगा, जिसकी समीक्षा विदेश मंत्रियों के स्तर पर होगी। यह संस्थागत तंत्र संबंधों को निरंतर गति और नीति-समन्वय प्रदान करेगा।
भारत के लिए इटली का महत्व (Significance of Italy for India)
IMEC का पश्चिमी आधार (Western Anchor of the IMEC)
- रेड सी और स्वेज नहर क्षेत्र में लगातार बढ़ती सुरक्षा अस्थिरताओं के बीच IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) एक बहु-माध्यमीय (multi-modal) वैकल्पिक संपर्क मार्ग प्रदान करता है।
- भूमध्यसागर (Mediterranean) में इटली की भौगोलिक स्थिति उसे भारत के लिए मध्य पूर्व से होकर गुजरने वाले वस्तुओं, ऊर्जा और डेटा केबलों का स्वाभाविक एवं सबसे इच्छुक यूरोपीय प्रवेश द्वार बनाती है।
- वर्ष 2023 के अंत में इटली के चीन की Belt and Road Initiative (BRI) से बाहर निकलने से उत्पन्न रणनीतिक शून्य को भारत भरने का प्रयास कर रहा है।
- IMEC में इटली को आधार बनाकर भारत इंडो-पैसिफिक और भूमध्यसागरीय क्षेत्र को संरचनात्मक रूप से जोड़ रहा है, जिससे दक्षिणी यूरोप में चीन के लॉजिस्टिक वर्चस्व को चुनौती मिलती है।
रक्षा आत्मनिर्भरता का स्तंभ (Pillar for Defence Indigenization)
- इटली के पास उन्नत एवं विशिष्ट सैन्य तकनीकें हैं, जो भारत की ‘Make in India’ रक्षा नीति के लिए अत्यंत पूरक हैं।
- विशेषकर तब, जब भारत अपनी पारंपरिक रूसी रक्षा निर्भरता को कम करने का प्रयास कर रहा है।
- रडार प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) और हेलीकॉप्टर तकनीक में इटली की विशेषज्ञता भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह सहयोग भारत को उन पश्चिमी प्रतिबंधों (जैसे CAATSA) के जोखिम से भी बचाता है, जो रूसी या अत्यधिक नियंत्रित अमेरिकी तकनीकों के साथ जुड़े होते हैं।
यूरोपीय संघ (EU) के भीतर भू–राजनीतिक लाभ
- ब्रेक्सिट के बाद भारत को यूरोपीय संघ के जटिल व्यापारिक और नियामक ढांचे में मजबूत सहयोगियों की आवश्यकता है।
- हालांकि फ्रांस यूरोप में भारत का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है, लेकिन केवल पेरिस पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
- EU की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण इटली, यूरोपीय संसद और परिषद में भारत के लिए महत्वपूर्ण संतुलनकारी शक्ति प्रदान करता है।
- विशेष रूप से भारत–EU Free Trade Agreement (FTA) को आगे बढ़ाने में इटली की भूमिका अहम हो सकती है।
इसके अलावा, Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) जैसी संरक्षणवादी EU नीतियों के खिलाफ भारत को समर्थन देने में भी इटली महत्वपूर्ण साझेदार है, ताकि भारतीय औद्योगिक निर्यातों पर अनुचित दबाव न पड़े।
तकनीकी संप्रभुता और हरित परिवर्तन (Technological Sovereignty and Green Transition)
- इटली प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) में वैश्विक अग्रणी देशों में शामिल है।
- यह भारत के औद्योगिक और विनिर्माण लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाता है।
- भारत में दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Elements) के पर्याप्त भंडार नहीं हैं, जबकि इटली इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-Waste) से महत्वपूर्ण खनिज निकालने की उन्नत तकनीक रखता है।
- इटली के साथ साझेदारी भारत को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए मजबूत एवं टिकाऊ सप्लाई चेन विकसित करने में मदद करेगी, जिससे चीन के खनिज प्रसंस्करण एकाधिकार को चुनौती दी जा सकेगी।
वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के बीच सेतु (Bridging the Global North and Global South)
- इटली की ‘Mattei Plan’ अफ्रीका के लिए गैर-शोषणकारी एवं विकासोन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित है।
- यह भारत की अफ्रीका में Digital Public Infrastructure (DPI), विकास सहायता और ऋण सहयोग जैसी पहलों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है।
- भारत और इटली मिलकर अफ्रीकी देशों को चीन की ‘Debt Trap Diplomacy’ के स्थान पर एक पारदर्शी, क्षमता-विकास आधारित और टिकाऊ विकास मॉडल प्रदान कर सकते हैं।
AI, नवाचार और तकनीकी साझेदारी
- दोनों देशों ने ‘INNOVIT India’ नामक नवाचार मंच स्थापित करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप, विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
- भारत और इटली ने मानव-केंद्रित Artificial Intelligence (AI) के विकास पर भी जोर दिया है। यह सहयोग भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक और डेटा गवर्नेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग
- हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Transition) वर्तमान वैश्विक राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। इसी संदर्भ में भारत और इटली ने क्रिटिकल मिनरल्स और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग पर समझौता किया है।
- ग्रीन हाइड्रोजन, स्मार्ट ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग भारत को स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति तथा चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
FAO Agricola Medal: भारत की कृषि कूटनीति
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को FAO द्वारा Agricola Medal 2026 प्रदान किया जाना भारत की कृषि और खाद्य सुरक्षा नीतियों की वैश्विक मान्यता है।
- FAO ने भारत की 80 करोड़ लोगों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाने की क्षमता, PM-KISAN, प्राकृतिक खेती और International Year of Millets 2023 जैसी पहलों की सराहना की। इससे भारत की ‘Global South Leader’ की छवि और मजबूत हुई है।
एग्रीकोला मेडल (Agricola Medal) क्या होता है?
- यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक द्वारा प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह पुरस्कार उन असाधारण वैश्विक नेताओं को दिया जाता है जिन्होंने भूख उन्मूलन, गरीबी कम करने तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति हेतु ठोस प्रतिबद्धता और प्रभावी कार्य किए हों।
- यह पुरस्कार भारत की विज्ञान-आधारित कृषि पद्धति को वैश्विक मान्यता प्रदान करता है।
- इस पुरस्कार में भारत द्वारा पुनर्योजी (Regenerative) एवं प्राकृतिक खेती की दिशा में किए गए संरचनात्मक बदलावों की प्रशंसा की गई।
- साथ ही, पोषक तत्वों से भरपूर एवं जलवायु-अनुकूल फसलों (Millets) को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी सराहा गया। इसका परिणाम ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष 2023’ के रूप में सामने आया, जिसे FAO के सहयोग से मनाया गया।
‘Four Betters’ Framework के साथ सामंजस्य
भारत ने FAO के कृषि-खाद्य प्रणाली परिवर्तन संबंधी ‘Four Betters’ ढांचे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसका उद्देश्य है:
- Better Production (बेहतर उत्पादन)
- Better Nutrition (बेहतर पोषण)
- Better Environment (बेहतर पर्यावरण)
- Better Life (बेहतर जीवन)
ताकि विकास प्रक्रिया में कोई भी व्यक्ति पीछे न रह जाए।
प्रमुख चुनौतियाँ
- हालांकि संबंधों में तेजी आई है, लेकिन कुछ संरचनात्मक चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। पश्चिम एशिया की अस्थिरता IMEC की व्यवहारिकता को प्रभावित कर सकती है।
- इसके अतिरिक्त, EU का Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM), डेटा संरक्षण कानूनों का अंतर (GDPR बनाम DPDP Act) और Social Security Agreement का अभाव भारतीय पेशेवरों और व्यापार के लिए बाधाएँ उत्पन्न करते हैं।
आगे की राह
- भारत और इटली को रक्षा अनुसंधान, साइबर सुरक्षा, AI गवर्नेंस और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में गहरे संस्थागत सहयोग की आवश्यकता होगी।
- यदि दोनों देश IMEC, हरित प्रौद्योगिकी और डिजिटल साझेदारी को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो यह संबंध यूरोप और इंडो-पैसिफिक के बीच एक नए रणनीतिक पुल के रूप में उभर सकता है।
निष्कर्ष
भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी बदलती विश्व व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक विकास है। यह केवल द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की व्यापक यूरोप नीति, कनेक्टिविटी कूटनीति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। इटली के साथ यह साझेदारी भारत को यूरोप में रणनीतिक आधार, तकनीकी सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक प्रभावशाली स्थिति प्रदान कर सकती है।
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