in , , ,

भारत, AI गवर्नेंस और ग्लोबल साउथ की आवाज़

India, AI Governance, and the Voice of the Global South

भारत ने फरवरी 2026 में India AI Impact Summit 2026 का आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य AI पर वैश्विक विमर्श को केवल विकसित देशों के दृष्टिकोण तक सीमित न रखकर Global South अर्थात विकासशील देशों की आवश्यकताओं और चुनौतियों के अनुरूप दिशा प्रदान करना था। भारत ने प्रारम्भ में समावेशी, न्यायपूर्ण और मानव-केंद्रित AI शासन की वकालत की, परन्तु सम्मेलन के बाद उसकी नीति में आए बदलाव ने अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं।

वैश्विक AI शासन (Global AI Governance) की आवश्यकता

  • AI का प्रभाव किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। इंटरनेट की तरह AI भी वैश्विक तकनीक है, जिसका प्रभाव सीमाओं को पार करता है। यदि किसी देश में विकसित AI मॉडल विश्वभर में उपयोग किए जाते हैं, तो उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी वैश्विक होंगे। इसलिए AI के लिए केवल राष्ट्रीय कानून पर्याप्त नहीं हैं; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा नियमों और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता है।
  • AI शासन का उद्देश्य केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि AI मानवाधिकारों, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता के सिद्धांतों के अनुरूप विकसित हो। इसके अंतर्गत डेटा सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, निष्पक्षता, साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषय आते हैं।

AI शासन पर प्रारम्भिक वैश्विक प्रयास

पिछले कुछ वर्षों में AI पर कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुए।

  • 2023 में Bletchley Park Summit (ब्रिटेन) का मुख्य फोकस अत्यधिक शक्तिशाली AI प्रणालियों से उत्पन्न अस्तित्वगत (Existential) जोखिमों पर था। इसमें यह चिंता व्यक्त की गई कि भविष्य में अत्यधिक विकसित AI मानव समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
  • इसके बाद Seoul Summit (2024) और Paris Summit (2025) में भी AI सुरक्षा, उन्नत मॉडल, तकनीकी मानक और जोखिम प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया।
  • इन सम्मेलनों में मुख्यतः विकसित देशों और बड़ी तकनीकी कंपनियों का दृष्टिकोण प्रमुख रहा। विकासशील देशों की समस्याएँ जैसे डिजिटल असमानता, सीमित संसाधन, तकनीकी निर्भरता और नियामकीय क्षमता की कमी पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया।

India AI Impact Summit 2026 : एक नई सोच

  • भारत द्वारा आयोजित AI Impact Summit 2026 का दृष्टिकोण पूर्ववर्ती सम्मेलनों से भिन्न था।
  • भारत ने यह तर्क दिया कि AI पर चर्चा केवल भविष्य के काल्पनिक खतरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वर्तमान में विकासशील देशों के सामने उपस्थित वास्तविक समस्याओं पर भी केंद्रित होनी चाहिए।

भारत ने विशेष रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर बल दिया

  • AI तक समान पहुँच (Equitable Access)
  • समावेशी विकास
  • डिजिटल असमानता को कम करना
  • स्थानीय भाषाओं के लिए AI मॉडल विकसित करना
  • छोटे और विकासशील देशों की क्षमता निर्माण
  • सार्वजनिक हित आधारित AI
  • वैश्विक दक्षिण की भागीदारी

यह दृष्टिकोण भारत को विकासशील देशों के स्वाभाविक नेता के रूप में प्रस्तुत करता था।

Global South की अवधारणा और भारत की भूमिका

  • Global South शब्द उन देशों के लिए प्रयुक्त होता है जो ऐतिहासिक रूप से उपनिवेशवाद, आर्थिक विषमता और तकनीकी निर्भरता जैसी चुनौतियों से प्रभावित रहे हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका के अधिकांश देश शामिल हैं।
  • भारत स्वयं औपनिवेशिक इतिहास, विशाल जनसंख्या, विकास संबंधी चुनौतियों तथा निम्न प्रति व्यक्ति आय के कारण Global South का महत्वपूर्ण सदस्य है।
  • पिछले कुछ वर्षों में भारत ने G-20, International Solar Alliance, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure), वैक्सीन मैत्री तथा विकास साझेदारी कार्यक्रमों के माध्यम से Global South की आवाज़ बनने का प्रयास किया है। AI शासन में भी यही अपेक्षा थी कि भारत विकासशील देशों के हितों का नेतृत्व करेगा।

सम्मेलन के बाद भारत की बदलती रणनीति

  • हालाँकि सम्मेलन के दौरान भारत ने Global South की प्राथमिकताओं को प्रमुखता दी, लेकिन बाद में उसकी रणनीति में परिवर्तन दिखाई देने लगा।
  • भारत का ध्यान धीरे-धीरे AI विकास हेतु विदेशी निवेश आकर्षित करने, बड़े डेटा केंद्र (Data Centres) स्थापित करने तथा घरेलू AI बाज़ार के विस्तार पर केंद्रित हो गया।
  • इसके साथ ही भारत ने स्वयं को Global South के प्रतिनिधि के बजाय “Middle Power” के रूप में प्रस्तुत करना प्रारम्भ किया।

Middle Power की अवधारणा

  • अंतरराष्ट्रीय संबंधों में Middle Power ऐसे देशों को कहा जाता है जो न तो महाशक्ति (Superpower) होते हैं और न ही छोटे या कमजोर राष्ट्र। वे क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने का प्रयास करते हैं।
  • भारत की आकांक्षा है कि उसे जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा यूरोपीय देशों की तरह एक प्रभावशाली तकनीकी और रणनीतिक शक्ति के रूप में देखा जाए।
  • किन्तु इस दृष्टिकोण के समक्ष कुछ चुनौतियाँ हैं।
  • भारत अभी भी प्रति व्यक्ति आय, अनुसंधान निवेश, सेमीकंडक्टर निर्माण, उच्च तकनीक उत्पादन तथा AI नवाचार के क्षेत्र में विकसित देशों से काफी पीछे है।
  • इसलिए अनेक विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी Global South नेतृत्व क्षमता में निहित है, न कि विकसित देशों की श्रेणी में स्वयं को स्थापित करने में।

Pax Silica और भारत

  • सम्मेलन के बाद भारत द्वारा Pax Silica पहल से जुड़ना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परिवर्तन माना गया।
  • Pax Silica का उद्देश्य अमेरिकी नेतृत्व वाले सेमीकंडक्टर एवं AI आपूर्ति तंत्र (Supply Chain) को मजबूत करना है।
  • इसके अंतर्गत भारत ने नवाचार-समर्थक (Pro-Innovation) और अपेक्षाकृत हल्के नियामक (Light Regulation) दृष्टिकोण को अपनाने की सहमति व्यक्त की।
  • यद्यपि इससे निवेश आकर्षित हो सकता है, लेकिन इसके साथ यह आशंका भी जुड़ी है कि भारत की नीति-निर्माण स्वतंत्रता (Strategic Autonomy) सीमित हो सकती है।
  • यदि नियमन अत्यधिक उदार होगा तो बड़ी विदेशी कंपनियाँ भारतीय डेटा, संसाधनों और बाज़ार का अधिक लाभ उठा सकती हैं।

क्या अमेरिका विश्वसनीय AI साझेदार है?

  • संयुक्त राज्य अमेरिका AI अनुसंधान और नवाचार का वैश्विक नेता है। OpenAI, Google DeepMind, Microsoft, Meta, Anthropic जैसी प्रमुख कंपनियाँ अमेरिकी हैं।
  • लेकिन अमेरिकी विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य अपनी तकनीकी कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखना भी है।
  • अतीत में सोशल मीडिया के क्षेत्र में भी अमेरिका ने वैश्विक नियमन का विरोध किया था क्योंकि इससे उसकी कंपनियों पर नियंत्रण बढ़ सकता था।
  • परिणामस्वरूप अनेक देशों में फेक न्यूज़, डेटा दुरुपयोग, चुनावी हस्तक्षेप और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी समस्याएँ बढ़ीं।
  • विशेषज्ञों को आशंका है कि AI के क्षेत्र में भी यही स्थिति दोहराई जा सकती है।

भारत की वर्तमान तकनीकी चुनौतियाँ

  • भारत डिजिटल सेवाओं में अग्रणी है, लेकिन अत्याधुनिक AI मॉडल विकसित करने की क्षमता अभी सीमित है।
  • भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अभी मुख्यतः असेंबली और पैकेजिंग तक सीमित है। अत्याधुनिक चिप निर्माण में वह ताइवान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान से काफी पीछे है।
  • AI अनुसंधान पर निवेश भी विकसित देशों की तुलना में कम है।
  • उच्च प्रदर्शन कम्प्यूटिंग (High Performance Computing), GPU अवसंरचना और विशाल प्रशिक्षण डेटा तक पहुँच भी सीमित है।
  • यदि इन क्षेत्रों में निवेश नहीं बढ़ाया गया तो भारत लंबे समय तक विदेशी AI तकनीकों पर निर्भर रह सकता है।

संयुक्त राष्ट्र Global Dialogue on AI Governance

  • जुलाई 2026 में जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र AI संवाद भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
  • यह मंच विभिन्न देशों, तकनीकी कंपनियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज संगठनों को AI शासन के साझा नियम विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।
  • भारत इस मंच पर Global South की सामूहिक आवाज़ को मजबूत कर सकता है।

भारत को किन सिद्धांतों की वकालत करनी चाहिए?

  • भारत को ऐसा AI मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए जिसमें विकास, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन हो।
  • भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI का लाभ केवल विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि विकासशील देशों को भी तकनीक, वित्त, अनुसंधान और क्षमता निर्माण में समान अवसर मिले।
  • स्थानीय भाषाओं, स्थानीय डेटा, सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना तथा ओपन-सोर्स AI को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
  • भारत को डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty), एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता तथा उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा पर भी विशेष बल देना चाहिए।

निष्कर्ष

AI आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति संतुलन, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक विकास का प्रमुख निर्धारक बनेगी। भारत के सामने विकल्प स्पष्ट है या तो वह विदेशी तकनीकी शक्तियों का उपभोक्ता बनकर सीमित भूमिका निभाए, अथवा अपने लोकतांत्रिक मूल्यों, डिजिटल अनुभव और Global South के विश्वास के आधार पर एक स्वतंत्र और नैतिक AI शासन मॉडल का नेतृत्व करे।

यदि भारत निवेश और नवाचार के साथ-साथ न्याय, समानता और सहयोग को भी समान महत्व देता है, तो वह AI युग में केवल एक तकनीकी शक्ति ही नहीं, बल्कि एक उत्तरदायी वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकता है। यही दृष्टिकोण भारत को “AI for All” और “AI for Global Good” की दिशा में अग्रसर करेगा।


Discover more from Politics by RK: Ultimate Polity Guide for UPSC and Civil Services

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

What do you think?

जॉन रॉल्स: सिद्धांत और लेखन

इंडो-पैसिफिक में भारत की “जी माइनस टू” रणनीति