नई दिल्ली में आयोजित 11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड की बढ़ती सामरिक भूमिका को पुनः स्पष्ट किया।
- बैठक ऐसे समय में हुई जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और दक्षिण चीन सागर में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं।
- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला, तकनीकी सहयोग तथा आपदा प्रबंधन से जुड़ी नई पहलों की घोषणा की।
- क्वाड अब केवल संवाद मंच न रहकर एक उभरती हुई ‘इंडो-पैसिफिक सुरक्षा संरचना’ का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
- भारत के लिए यह मंच चीन की बढ़ती समुद्री एवं रणनीतिक आक्रामकता के विरुद्ध संतुलन स्थापित करने का माध्यम है।
क्वाड बैठक 2026 के प्रमुख परिणाम
- समुद्री एवं ट्रांसनेशनल सुरक्षा
- इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (IPMSC) की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी को मजबूत करना है।
- इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (IPMDA) का विस्तार करते हुए ‘कॉमन ऑपरेटिंग पिक्चर’ विकसित करने का निर्णय लिया गया।
- भारत अगले ‘Quad-at-Sea Ship Observer Mission’ की मेजबानी करेगा।
- ऑस्ट्रेलिया 2026 में ‘Quad Counterterrorism Tabletop Exercise’ आयोजित करेगा।
- यह सहयोग अवैध मछली पकड़ने, समुद्री तस्करी, ड्रोन खतरे तथा राज्य-प्रायोजित आतंकवाद से निपटने में सहायक होगा।
- आर्थिक समृद्धि एवं आपूर्ति शृंखला सुरक्षा
- ‘Quad Critical Minerals Initiative Framework’ स्थापित किया गया, जिससे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और प्रसंस्करण को सुरक्षित बनाया जाएगा।
- यह पहल चीन पर निर्भरता कम करने तथा वैश्विक ‘China+1 Strategy’ को समर्थन देती है।
- इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पहल के तहत 25 मिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की गई।
- फिजी के साथ मिलकर बंदरगाह अवसंरचना उन्नयन और समुद्री केबल नेटवर्क विस्तार की योजना बनाई गई।
- आपूर्ति शृंखला लचीलापन बढ़ाकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता स्थापित करने का प्रयास किया गया।
- उभरती प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सहयोग
- क्वाड देशों ने डिजिटल पहचान मानकों (Digital Identity Standards) पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।
- सीमा-पार तकनीकी संचालन को सरल बनाने हेतु ‘Translation Guide’ विकसित किया जाएगा।
- AI-ENGAGE पहल के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स आधारित कृषि परियोजनाओं को सहायता दी गई।
- खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता बढ़ाने हेतु 6 मिलियन डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
- साइबर सुरक्षा, 5G/6G नेटवर्क तथा सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना पर भी सहयोग को बढ़ावा दिया गया।
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)
- क्वाड देशों ने आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के क्षेत्र में संयुक्त क्षमताओं को मजबूत किया।
- 2025 होनोलूलू टेबलटॉप अभ्यास से प्राप्त अनुभवों को नई रणनीति में शामिल किया गया।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने हेतु स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण की घोषणा की गई।
- आपदा राहत कार्यों के लिए 50 मिलियन डॉलर से अधिक की सहायता प्रदान की गई।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
क्वाड/Quadrilateral Security Dialogue क्या है?
- क्वाड (Quadrilateral Security Dialogue) भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का एक अनौपचारिक रणनीतिक समूह है।
- इसका उद्देश्य ‘मुक्त, खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र’ सुनिश्चित करना है।
- यह मंच लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और स्वतंत्र नौवहन को बढ़ावा देता है।
- क्वाड किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन की तरह नहीं बल्कि सहयोग आधारित मंच है।
- इसका फोकस समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास और आपदा प्रबंधन पर है।
विकास यात्रा
- 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद मानवीय सहायता समन्वय के रूप में इसकी शुरुआत हुई।
- 2007 में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने ‘एशिया के लोकतांत्रिक चतुर्भुज’ की अवधारणा प्रस्तुत की।
- चीन की बढ़ती आक्रामकता के कारण 2017 में इसका पुनरुत्थान हुआ।
- 2021 में ‘Spirit of the Quad’ दस्तावेज अपनाया गया।
- आज क्वाड हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय मंच बन चुका है।
समकालीन वैश्विक व्यवस्था में क्वाड
- चीन की आक्रामकता के विरुद्ध संतुलन
- क्वाड दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की आक्रामक गतिविधियों का संतुलन स्थापित करता है।
- यह नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है।
- समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विवाद समाधान को बढ़ावा देता है।
- हिंद महासागर में चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति पर निगरानी रखता है।
- क्षेत्रीय देशों को रणनीतिक विकल्प प्रदान करता है।
- आर्थिक एवं आपूर्ति शृंखला सुरक्षा
- क्वाड महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहा है।
- यह चीन-निर्भर वैश्विक विनिर्माण प्रणाली के विकल्प विकसित कर रहा है।
- सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव (SCRI) आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देता है।
- ब्लू डॉट नेटवर्क के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।
- भारत के लिए वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
भारत के लिए क्वाड का महत्व
- चीन के विरुद्ध रणनीतिक संतुलन
- क्वाड भारत को चीन की ‘String of Pearls’ रणनीति का मुकाबला करने में सहायता प्रदान करता है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति मजबूत होती है।
- समुद्री निगरानी और खुफिया साझेदारी में वृद्धि होती है।
- चीन की ‘ग्रे-ज़ोन’ गतिविधियों पर नियंत्रण संभव होता है।
- भारत की ‘Act East Policy’ को रणनीतिक समर्थन मिलता है।
- रणनीतिक स्वायत्तता का संरक्षण
- क्वाड की अनौपचारिक प्रकृति भारत को स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने की अनुमति देती है।
- भारत किसी बाध्यकारी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनता।
- अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलता है।
- भारत अपनी बहुध्रुवीय विदेश नीति को संतुलित रख सकता है।
- इससे भारत की ‘Strategic Autonomy’ की अवधारणा मजबूत होती है।
क्वाड के समक्ष चुनौतियाँ
- संस्थागत कमजोरी
- क्वाड के पास स्थायी सचिवालय और बाध्यकारी चार्टर का अभाव है।
- सदस्य देशों की घरेलू राजनीति इसके भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
- नियमित शिखर सम्मेलनों की निरंतरता चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
- निर्णयों के क्रियान्वयन में संस्थागत बाधाएँ दिखाई देती हैं।
- यह अभी पूर्ण विकसित संगठन के रूप में स्थापित नहीं हो पाया है।
- विभिन्न रणनीतिक प्राथमिकताएँ
- अमेरिका और जापान का ध्यान ताइवान एवं दक्षिण चीन सागर पर केंद्रित है।
- भारत की प्राथमिक चिंता LAC और हिंद महासागर क्षेत्र है।
- ऑस्ट्रेलिया प्रशांत द्वीपों पर अधिक ध्यान देता है।
- साझा रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करना कठिन है।
- विभिन्न भौगोलिक प्राथमिकताओं के कारण समन्वय में चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
क्वाड को सुदृढ़ करने के उपाय
- संस्थागत ढांचे को मजबूत करना
- स्थायी सचिवालय की स्थापना आवश्यक है।
- वार्षिक शिखर सम्मेलनों की नियमितता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु समर्पित तंत्र विकसित करना होगा।
- सदस्य देशों के बीच नीति समन्वय को बढ़ावा देना होगा।
- दीर्घकालिक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।
- आर्थिक एवं सामरिक सहयोग का विस्तार
- मालाबार नौसैनिक अभ्यास के दायरे को विस्तारित किया जाना चाहिए।
- आपूर्ति शृंखला परियोजनाओं को वास्तविक धरातल पर लागू करना आवश्यक है।
- तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करना होगा।
- ASEAN देशों के साथ विश्वास निर्माण बढ़ाना चाहिए।
- ‘Quad Plus’ तंत्र के माध्यम से अन्य साझेदार देशों को जोड़ना चाहिए।
निष्कर्ष
- क्वाड आज हिंद-प्रशांत क्षेत्र की उभरती सुरक्षा संरचना का प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
- यह समुद्री सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता, तकनीकी सहयोग तथा आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- भारत के लिए क्वाड रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए चीन के विरुद्ध संतुलन स्थापित करने का प्रभावी मंच है।
- हालांकि संस्थागत कमजोरी, विविध रणनीतिक प्राथमिकताएँ तथा आर्थिक चुनौतियाँ इसके समक्ष प्रमुख बाधाएँ हैं।
- दीर्घकालिक सफलता के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय विश्वास निर्माण को मजबूत करना आवश्यक होगा।
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