1 जून 2026 से प्रभावी हुआ भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) भारत की व्यापारिक एवं आर्थिक कूटनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जब संरक्षणवाद (Protectionism), भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं, तब ऐसे व्यापारिक समझौते केवल आयात-निर्यात को बढ़ाने का माध्यम नहीं रह जाते, बल्कि वे आर्थिक सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी तथा राष्ट्रीय विकास के महत्वपूर्ण उपकरण बन जाते हैं।
भारत-ओमान CEPA भी इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके माध्यम से भारत अपने निर्यात बाजारों का विस्तार करने, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने, रोजगार सृजित करने तथा पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहा है।
भारत–ओमान संबंध : ऐतिहासिक विरासत से आधुनिक आर्थिक साझेदारी तक
- भारत और ओमान के संबंध सदियों पुराने समुद्री व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा मानवीय संपर्कों पर आधारित रहे हैं। अरब सागर के माध्यम से दोनों देशों के व्यापारी समुदायों के बीच प्राचीन काल से ही घनिष्ठ संपर्क स्थापित रहे हैं।
- वर्तमान समय में भी लगभग सात लाख भारतीय ओमान में निवास करते हैं, जिनमें व्यापारी, पेशेवर, तकनीकी विशेषज्ञ तथा श्रमिक शामिल हैं। भारतीय प्रवासी समुदाय प्रतिवर्ष लगभग 2 अरब डॉलर की राशि भारत भेजता है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाती है।
- इसके अतिरिक्त ओमान में 6,000 से अधिक भारतीय कंपनियाँ सक्रिय हैं, जो ऊर्जा, निर्माण, व्यापार, सेवाओं तथा विनिर्माण क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इस
- प्रकार भारत-ओमान संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक आयामों से भी जुड़े हुए हैं। CEPA इन बहुआयामी संबंधों को एक नई संस्थागत संरचना प्रदान करता है।

CEPA की प्रमुख विशेषताएँ : व्यापारिक अवसरों का व्यापक विस्तार
- इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि ओमान ने भारत को 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त (Duty-Free) बाजार पहुंच प्रदान की है, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है।
- इससे पहले केवल 3 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ही ओमान में शून्य शुल्क पर प्रवेश प्राप्त था। परिणामस्वरूप भारतीय वस्तुएँ, जिन पर पहले 5 प्रतिशत आयात शुल्क लगता था, अब अधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य पर ओमानी बाजार में उपलब्ध हो सकेंगी।
- यह व्यवस्था भारतीय निर्यातकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी क्योंकि इससे भारतीय उत्पादों की लागत कम होगी, बाजार हिस्सेदारी बढ़ेगी तथा निर्यात में वृद्धि होगी।
- विशेष रूप से ऐसे समय में जब पारंपरिक निर्यात बाजार आर्थिक मंदी और संरक्षणवादी नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं, ओमान जैसा स्थिर और आयात-निर्भर बाजार भारत के लिए नए अवसर प्रदान करता है।
MSME क्षेत्र और विनिर्माण उद्योग को नई गति
- भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) रोजगार तथा निर्यात दोनों के प्रमुख स्रोत हैं।
- CEPA के माध्यम से लोहे एवं इस्पात, वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा उद्योग, ऑटो कंपोनेंट्स तथा औद्योगिक मशीनरी जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
- ओमान में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होने से भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा, नए निवेश आकर्षित होंगे तथा स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
- यह समझौता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी प्रत्यक्ष रूप से समर्थन प्रदान करता है क्योंकि निर्यात वृद्धि घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाती है।
श्रम–प्रधान क्षेत्रों में रोजगार सृजन की अपार संभावनाएँ
- भारत-ओमान CEPA का सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक प्रभाव रोजगार सृजन के रूप में देखने को मिल सकता है। वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र, जो भारत के सबसे बड़े रोजगार प्रदाता उद्योगों में से एक है, इस समझौते से विशेष रूप से लाभान्वित होगा।
- तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, करूर, भदोही, मुरादाबाद, जयपुर तथा अहमदाबाद जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों में निर्यात मांग बढ़ने से उत्पादन गतिविधियाँ तेज होंगी तथा नए रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे। इसके साथ ही पारंपरिक बुनकरों, कारीगरों तथा हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों को भी लाभ प्राप्त होगा।
- चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग में भी निर्यात वृद्धि से तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक तथा मध्य प्रदेश के उत्पादन केंद्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसी प्रकार रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में शुल्क बाधाओं के समाप्त होने से भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।
- उद्योग अनुमानों के अनुसार अगले तीन वर्षों में लगभग 150 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त निर्यात की संभावना है, जिससे गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के आभूषण उद्योगों में नए रोजगार सृजित होंगे।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए संतुलित दृष्टिकोण
- CEPA का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि भारत ने अपने संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। भारत ने गेहूँ, चावल, मक्का, मोटे अनाज, डेयरी उत्पाद, फल एवं सब्जियों जैसे संवेदनशील उत्पादों पर टैरिफ रियायतें नहीं दी हैं। इससे घरेलू किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा मिलेगी और कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- दूसरी ओर, मक्खन, शहद, मीठे बिस्कुट, अंडे आदि उत्पादों के निर्यात में भारतीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई आर्थिक गतिविधियों का विकास संभव होगा। यह समझौता कृषि संरक्षण और निर्यात प्रोत्साहन के बीच संतुलन स्थापित करने का एक सफल उदाहरण प्रस्तुत करता है।
जैविक कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए नए अवसर
- भारत के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (National Programme for Organic Production – NPOP) की मान्यता CEPA का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इससे भारतीय जैविक उत्पादों को ओमान के बाजार में प्रवेश प्राप्त करना आसान होगा। चूँकि ओमान खाद्य आयात पर अत्यधिक निर्भर देश है, इसलिए भारतीय जैविक उत्पादों के लिए वहाँ व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।
- इसी प्रकार समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में भी यह समझौता महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। वर्तमान में ओमान के समुद्री आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है, जबकि झींगा, फ्रोजन कटलफिश तथा अन्य समुद्री उत्पादों की पर्याप्त मांग मौजूद है। निर्यात बढ़ने से मत्स्य पालन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स तथा परिवहन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
औषधि उद्योग और पारंपरिक चिकित्सा का वैश्वीकरण
- भारत विश्व के प्रमुख जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है। CEPA के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि जिन भारतीय दवाओं को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) जैसे प्रतिष्ठित नियामक संस्थानों से स्वीकृति प्राप्त है, उन्हें ओमान में स्वतः विपणन प्राधिकरण (Automatic Marketing Authorization) प्राप्त होगा।
- इससे भारतीय औषधि कंपनियों की बाजार पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ओमान में गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग और संयुक्त अनुसंधान की व्यवस्था भारत की आयुर्वेदिक तथा अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
सेवा क्षेत्र और पेशेवरों की गतिशीलता में वृद्धि
- भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति केवल वस्तुओं के निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन तथा पेशेवर सेवाओं में भी भारत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। CEPA के अंतर्गत ओमान ने इन क्षेत्रों में सार्थक बाजार पहुंच प्रदान की है।
- इसके अतिरिक्त भारतीय पेशेवरों और कर्मचारियों की आवाजाही को भी सुगम बनाया गया है। उदाहरण के लिए, इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफरी (Intra-Corporate Transferees) की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। इससे भारतीय आईटी विशेषज्ञों, प्रबंधकों, इंजीनियरों तथा अन्य कुशल पेशेवरों के लिए ओमान में रोजगार और करियर के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
भारत–ओमान CEPA का सामरिक महत्व
- यह समझौता केवल एक आर्थिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत की व्यापक सामरिक और विदेश नीति का महत्वपूर्ण अंग है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीय समुदाय तथा व्यापारिक हितों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। CEPA के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में अपनी आर्थिक उपस्थिति को सुदृढ़ कर रहा है।
- यह समझौता वैश्विक संरक्षणवाद के बढ़ते वातावरण में व्यापारिक साझेदारियों के विविधीकरण को भी प्रोत्साहित करता है। साथ ही यह भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करने, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने तथा वैश्विक विनिर्माण एवं सेवा केंद्र बनने की दिशा में सहायता प्रदान करता है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आधुनिक युग में व्यापारिक समझौते केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक कूटनीति और रणनीतिक प्रभाव विस्तार के महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं।
निष्कर्ष
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता भारत की आर्थिक कूटनीति, निर्यात-उन्मुख विकास रणनीति तथा वैश्विक आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता व्यापार विस्तार, निवेश संवर्धन, रोजगार सृजन, कृषि एवं MSME विकास, सेवा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता तथा सामरिक साझेदारी को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। ऐसे समय में जब विश्व अर्थव्यवस्था विभाजित और अनिश्चितताओं से घिरी हुई है, CEPA जैसे समझौते भारत को अधिक लचीली, प्रतिस्पर्धी तथा वैश्विक रूप से एकीकृत अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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