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AFSPA: विशेष शक्तियाँ, प्रावधान और लागू होने वाले क्षेत्र

सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम, 1958 (Armed Forces Special Powers Act, 1958 – AFSPA) क्या है?

सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम, 1958 (Armed Forces Special Powers Act, 1958 – AFSPA) भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार प्रदान करना है, जिन्हें सरकार द्वारा “अशांत क्षेत्र” (Disturbed Area) घोषित किया गया हो।

AFSPA मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद (Insurgency), सशस्त्र विद्रोह और गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए लागू किया गया। हालांकि, इसके तहत सुरक्षा बलों को प्राप्त असाधारण शक्तियों और कानूनी संरक्षण के कारण यह कानून लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़ी बहस का विषय रहा है।

AFSPA चर्चा में क्यों है?

सितंबर 2026 में केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में AFSPA की अवधि को 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने के लिए बढ़ाया है।

मणिपुर में स्थिति

  • मणिपुर के लगभग पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है, लेकिन पाँच घाटी जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है।
  • यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मणिपुर में 3 मई 2023 से जातीय संघर्ष (Ethnic Conflict) की गंभीर स्थिति बनी हुई है।

नागालैंड में स्थिति

  • नागालैंड में AFSPA नौ जिलों तथा पाँच अन्य जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों में जारी है।

अरुणाचल प्रदेश में स्थिति

  • अरुणाचल प्रदेश में AFSPA तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों में लागू है। इसके अतिरिक्त असम की सीमा से लगे नामसाई जिले के नामसाई, महादेवपुर और चौखाम पुलिस थाना क्षेत्रों में भी इसका प्रयोग जारी है।
  • इस प्रकार, 2026 में AFSPA का प्रयोग पूरे पूर्वोत्तर में समान रूप से नहीं, बल्कि मुख्यतः उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जिन्हें सरकार सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील मानती है।

AFSPA क्या है?

  • AFSPA एक ऐसा कानून है जो सरकार को किसी क्षेत्र को “अशांत क्षेत्र” (Disturbed Area) घोषित करने की स्थिति में वहाँ सशस्त्र बलों को कुछ विशेष शक्तियाँ प्रदान करने की अनुमति देता है।
  • यह कानून मूल रूप से 1958 में बनाया गया था। इसका प्रारंभिक उद्देश्य नागा पहाड़ियों (Naga Hills) में चल रहे सशस्त्र विद्रोह से निपटना था। इसके बाद असम तथा पूर्वोत्तर के अन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रयोग किया गया।
  • AFSPA का मूल आधार यह है कि सामान्य परिस्थितियों में पुलिस और प्रशासन जिन शक्तियों का प्रयोग करते हैं, उनसे अलग परिस्थितियों में सशस्त्र विद्रोह या गंभीर आंतरिक सुरक्षा संकट से निपटने के लिए सेना को अतिरिक्त अधिकारों की आवश्यकता हो सकती है।

AFSPA के अंतर्गत सशस्त्र बलों को कौन–सी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं?

जब किसी क्षेत्र को AFSPA के अंतर्गत अशांत क्षेत्र घोषित किया जाता है, तब वहाँ तैनात सशस्त्र बलों को कुछ विशेष शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।

  1. बल प्रयोग करने की शक्ति

सुरक्षा बलों को ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध बल प्रयोग करने की शक्ति मिलती है जो लागू निषेधात्मक आदेशों (Prohibitory Orders) का उल्लंघन कर रहा हो। निर्धारित परिस्थितियों में यह बल प्रयोग घातक बल (Lethal Force) तक हो सकता है।

यह AFSPA की सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद शक्तियों में से एक है, क्योंकि सामान्य कानून-व्यवस्था की तुलना में इसमें सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार प्राप्त होते हैं।

  1. बिना वारंट गिरफ्तारी

AFSPA के अंतर्गत सुरक्षा बलों को कुछ निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ्तार करने की शक्ति प्राप्त होती है।

इसका उद्देश्य उन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करना है जहाँ तत्काल गिरफ्तारी आवश्यक समझी जाती है।

  1. बिना वारंट तलाशी

सुरक्षा बलों को कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट परिसर में प्रवेश करने और तलाशी लेने का अधिकार भी मिलता है।

इसका उपयोग हथियारों, गोला-बारूद, संदिग्ध व्यक्तियों या विद्रोही गतिविधियों से संबंधित सामग्री की तलाश के लिए किया जा सकता है।

AFSPA के अंतर्गत कानूनी संरक्षण

  • AFSPA की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका धारा 7 से जुड़ा कानूनी संरक्षण है।
  • इसके अनुसार, AFSPA के अंतर्गत किए गए या किए जाने का दावा किए गए कार्यों के संबंध में किसी व्यक्ति के विरुद्ध अभियोजन या कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति (Prior Sanction) आवश्यक होती है।
  • यही प्रावधान AFSPA को लेकर होने वाली बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • समर्थकों के अनुसार, कठिन और जोखिमपूर्ण सुरक्षा अभियानों में कार्यरत जवानों को बाद में होने वाली अनावश्यक कानूनी कार्यवाही से सुरक्षा की आवश्यकता हो सकती है। दूसरी ओर, आलोचकों का तर्क है कि इस प्रकार का संरक्षण जवाबदेही (Accountability) और न्याय तक पहुँच को प्रभावित कर सकता है।
  • इसलिए AFSPA की बहस केवल सुरक्षा बलों की शक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवाधिकार, जवाबदेही, कानून का शासन और नागरिक स्वतंत्रता भी शामिल हैं।

“अशांत क्षेत्र” कौन घोषित कर सकता है?

  • AFSPA के अंतर्गत धारा 3 किसी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित करने की व्यवस्था करती है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के पास अशांत क्षेत्र घोषित करने की शक्ति हो सकती है।
  • इसी कारण किसी राज्य में AFSPA का भौगोलिक विस्तार हमेशा केवल केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित नहीं होता रहा है।

मणिपुर का उदाहरण

  • मणिपुर में लंबे समय तक राज्य सरकार स्वयं अशांत क्षेत्र से संबंधित अधिसूचनाएँ जारी करती रही थी। राज्य में AFSPA 1981 से लागू था।
  • हालांकि, 3 मई 2023 के जातीय संघर्ष के बाद स्थिति में परिवर्तन आया और केंद्र सरकार की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण दिखाई दी।

विभिन्न राज्यों में AFSPA की वर्तमान स्थिति

राज्यAFSPA की स्थिति
मणिपुरपूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है, लेकिन पाँच घाटी जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्र बाहर हैं।
नागालैंडनौ जिलों तथा पाँच अन्य जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों में लागू है।
अरुणाचल प्रदेशतिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों तथा नामसाई जिले के कुछ पुलिस थाना क्षेत्रों में लागू है।
असमअशांत क्षेत्र की अधिसूचना राज्य सरकार द्वारा जारी की जाती है।
त्रिपुराAFSPA को 2015 में पूरी तरह हटा दिया गया।
मेघालयलगभग 27 वर्षों तक लागू रहने के बाद 1 अप्रैल 2018 से हटा दिया गया।
जम्मू–कश्मीरयहाँ अलग कानून, Jammu and Kashmir Armed Forces (Special Powers) Act, 1990, लागू होता है।

इससे स्पष्ट होता है कि AFSPA का प्रयोग भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्यों में समान रूप से नहीं किया जा रहा है। इसका विस्तार सुरक्षा परिस्थितियों और संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं के आधार पर बदलता रहा है।

मणिपुर में AFSPA का बदलता स्वरूप

  • मणिपुर AFSPA के बदलते भौगोलिक विस्तार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
  • यहाँ पिछले दो दशकों में AFSPA के विस्तार और संकुचन दोनों देखने को मिले हैं।

2004: इम्फाल नगरपालिका क्षेत्र से वापसी

  • 2004 में AFSPA को इम्फाल नगरपालिका क्षेत्र से हटा लिया गया था।
  • यह कदम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण था कि इससे राज्य के अपेक्षाकृत शांत माने जाने वाले शहरी क्षेत्र को AFSPA के दायरे से बाहर किया गया।

अप्रैल 2022 से अप्रैल 2023: बड़ा विस्तार से हटाव

  • अप्रैल 2022 से अप्रैल 2023 के बीच मणिपुर घाटी के सभी पुलिस थाना क्षेत्रों से AFSPA वापस लिया गया।
  • इस वापसी के पीछे सुरक्षा स्थिति में सुधार और जनता में सुरक्षा की बेहतर भावना को प्रमुख आधार बताया गया।
  • हालांकि, राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में AFSPA लागू रहा और वहाँ अशांत क्षेत्र की अधिसूचनाएँ समय-समय पर जारी होती रहीं।
  • इस प्रकार 2023 से पहले मणिपुर में AFSPA के संबंध में एक क्रमिक संकुचन (Gradual Contraction) की प्रक्रिया दिखाई दे रही थी।
  • 3 मई 2023 को मणिपुर में गंभीर जातीय संघर्ष शुरू हुआ। इसके बाद राज्य की सुरक्षा स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया। इस संघर्ष के बाद AFSPA के भौगोलिक विस्तार में फिर से वृद्धि हुई।

नवंबर 2024 में पुनः लागू किया जाना

  • नवंबर 2024 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर के पाँच जिलों में स्थित छह पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू किया। ये ऐसे क्षेत्र थे जहाँ से पहले AFSPA हटाया जा चुका था।
  • यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इस बार संबंधित अधिसूचना केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से आई थी।
  • उस समय की मणिपुर सरकार ने इस निर्णय पर सहमति नहीं जताई थी और लगभग तुरंत इसके पुनर्विचार तथा वापसी की मांग की थी।
  • इससे यह प्रश्न सामने आया कि आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकार तथा राजनीतिक सहमति का संतुलन किस प्रकार बनाया जाए।

नागालैंड में AFSPA क्यों जारी है?

  • नागालैंड में AFSPA का संबंध लंबे समय से वहाँ मौजूद सशस्त्र विद्रोही संगठनों और नागा राजनीतिक प्रश्न से जुड़ा रहा है।
  • केंद्र सरकार ने नागा राजनीतिक समाधान के लिए विभिन्न संगठनों के साथ बातचीत की है। इनमें प्रमुख रूप से National Socialist Council of Nagaland (Isak-Muivah) NSCN-IM तथा Naga National Political Groups (NNPGs) शामिल हैं।
  • नागा शांति प्रक्रिया के अंतिम समाधान को लेकर बनी अनिश्चितता को भी AFSPA के बने रहने से जोड़कर देखा गया है।
  • इस प्रकार नागालैंड में AFSPA का प्रश्न केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह उग्रवाद, राजनीतिक वार्ता और लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय राजनीतिक प्रश्न से भी जुड़ा हुआ है।

अरुणाचल प्रदेश में AFSPA क्यों जारी है?

  • अरुणाचल प्रदेश में AFSPA का प्रयोग मुख्य रूप से उन जिलों और क्षेत्रों में केंद्रित रहा है जहाँ उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों या उनकी आवाजाही से संबंधित सुरक्षा चिंताएँ रही हैं।
  • विशेष रूप से असम की सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी देखी गई है।
  • इसलिए अरुणाचल प्रदेश में AFSPA का विस्तार पूरे राज्य में समान रूप से नहीं है, बल्कि विशिष्ट सुरक्षा–संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित है।

पूर्वोत्तर भारत में AFSPA का बदलता स्वरूप

  • AFSPA को समझने के लिए यह देखना आवश्यक है कि इसका प्रयोग स्थिर नहीं रहा है।
  • पूर्वोत्तर भारत में इसके इतिहास को मोटे तौर पर विस्तार, संकुचन और पुनः विस्तार की प्रक्रिया के रूप में समझा जा सकता है।
  • त्रिपुरा में 2015 में इसे पूरी तरह हटा दिया गया। मेघालय में 2018 में इसे समाप्त किया गया। मणिपुर में भी विभिन्न चरणों में इसके क्षेत्र को कम किया गया, लेकिन 2023 के बाद सुरक्षा स्थिति में बदलाव के कारण इसका विस्तार फिर हुआ।
  • इससे यह स्पष्ट होता है कि AFSPA की भौगोलिक सीमा जमीनी सुरक्षा परिस्थितियों के साथ बदलती रही है।

AFSPA और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतंत्रता

AFSPA पर बहस को केवल “AFSPA के पक्ष” या “AFSPA के विरोध” के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। एक ओर, सरकार और सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से उग्रवाद और सशस्त्र हिंसा जैसी परिस्थितियों में सुरक्षा बलों को त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष शक्तियों की आवश्यकता हो सकती है। दूसरी ओर, नागरिक स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से यह प्रश्न उठता है कि असाधारण शक्तियों के प्रयोग के साथ पर्याप्त जवाबदेही, पारदर्शिता और कानूनी निगरानी किस प्रकार सुनिश्चित की जाए।

इसलिए AFSPA की चर्चा में निम्नलिखित मुद्दे महत्वपूर्ण हैं:

राष्ट्रीय सुरक्षा: उग्रवाद और सशस्त्र हिंसा से निपटने के लिए प्रभावी सुरक्षा कार्रवाई।

नागरिक स्वतंत्रता: गिरफ्तारी, तलाशी और बल प्रयोग जैसी शक्तियों के दुरुपयोग की संभावना।

जवाबदेही: सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई की स्वतंत्र और प्रभावी जांच का प्रश्न।

कानून का शासन: असाधारण परिस्थितियों में भी कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक संस्थाओं की भूमिका।

संघवाद: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अशांत क्षेत्र घोषित करने और AFSPA लागू करने से संबंधित अधिकारों का प्रश्न।

मानवाधिकार: सुरक्षा अभियानों के दौरान नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा।

निष्कर्ष

AFSPA की कहानी भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा परिस्थितियों और कानून के बदलते भौगोलिक प्रयोग की कहानी है। मणिपुर इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ कई वर्षों तक AFSPA के दायरे में क्रमिक कमी हुई, लेकिन 2023 के जातीय संघर्ष के बाद इसके विस्तार की प्रक्रिया फिर शुरू हुई।

नागालैंड में इसका संबंध लंबे समय से चले आ रहे नागा राजनीतिक प्रश्न और शांति वार्ता से जुड़ा है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में इसका प्रयोग मुख्यतः कुछ सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित है।

 


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