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माइकल ओकशॉट/Michael Oakeshott (1901–1990)

माइकल ओकशॉट का राजनीतिक दर्शन

माइकल ओकशॉट 20वीं शताब्दी के उन महत्वपूर्ण राजनीतिक दार्शनिकों में से हैं जिन्होंने आधुनिक राजनीति में व्याप्त अतितर्कवाद (over-rationalism) की आलोचना करते हुए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

  • उनका चिंतन मुख्यतः इस विचार पर आधारित है कि राजनीति को किसी निश्चित विचारधारा, वैज्ञानिक विधि या तकनीकी योजना के माध्यम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मूलतः मानव व्यवहार, परंपरा और ऐतिहासिक अनुभव से निर्मित एक जटिल गतिविधि है।
  • ओकशॉट का यह दृष्टिकोण उन्हें उन विचारकों से अलग करता है जो राजनीति को ‘इंजीनियरिंग’ या ‘सामाजिक विज्ञान’ के रूप में देखते हैं। वे राजनीति को एक ऐसी कला (art) के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिसमें विवेक, अनुभव और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना आवश्यक होता है।

ज्ञानमीमांसा (Epistemology: Modes of Experience)

ओकशॉट का ज्ञानमीमांसीय दृष्टिकोण उनकी प्रसिद्ध कृति Experience and Its Modes में विस्तृत रूप से प्रस्तुत होता है, जहाँ वे यह तर्क देते हैं कि मानव अनुभव को विभिन्न ‘मोड्स’ (modes) में समझा जा सकता है, जैसे; वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और व्यावहारिक।

  • उनके अनुसार इन सभी ज्ञान-रूपों की अपनी-अपनी सीमाएँ और कार्यक्षेत्र होते हैं, और किसी एक रूप को अन्य सभी पर थोपना गलत है।
  • विशेष रूप से वे ‘प्रैक्टिकल नॉलेज’ (practical knowledge) पर जोर देते हैं, जो केवल लिखित नियमों या सिद्धांतों के माध्यम से नहीं सीखा जा सकता, बल्कि यह अभ्यास, परंपरा और निरंतर अनुभव के माध्यम से विकसित होता है।
  • इस प्रकार, ओकशॉट यह स्पष्ट करते हैं कि राजनीति में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि व्यावहारिक समझ और ऐतिहासिक संवेदनशीलता भी आवश्यक होती है।

Rationalism in Politics की आलोचना

ओकशॉट की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली अवधारणा ‘Rationalism in Politics’ की आलोचना है, जिसमें वे यह तर्क देते हैं कि आधुनिक युग में राजनेता और विचारक यह मानने लगे हैं कि समाज को पूर्ण रूप से तर्कसंगत सिद्धांतों के आधार पर डिजाइन किया जा सकता है।

  • ओकशॉट इस दृष्टिकोण को खतरनाक मानते हैं, क्योंकि यह मानव अनुभव की जटिलता और ऐतिहासिक निरंतरता की अनदेखी करता है। उनके अनुसार, ‘रैशनलिस्ट’ यह मानते हैं कि सभी समस्याओं का समाधान कुछ सार्वभौमिक नियमों के माध्यम से किया जा सकता है, जबकि वास्तविकता यह है कि समाज में परिवर्तन धीरे-धीरे और परंपरा के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए होता है।
  • इस प्रकार, ओकशॉट का यह तर्क आधुनिक योजनाबद्ध राजनीति और आदर्शवादी सामाजिक इंजीनियरिंग के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में सामने आता है।

राज्य का सिद्धांत: Civil Association बनाम Enterprise Association

  • ओकशॉट के राजनीतिक दर्शन का एक केंद्रीय तत्व राज्य की उनकी विशिष्ट व्याख्या है, जिसमें वे ‘Civil Association’ और ‘Enterprise Association’ के बीच अंतर करते हैं।
  • उनके अनुसार Civil Association एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें राज्य नागरिकों को किसी विशेष लक्ष्य की ओर निर्देशित नहीं करता, बल्कि केवल सामान्य नियमों का एक ढांचा प्रदान करता है, जिसके भीतर व्यक्ति अपने-अपने उद्देश्यों को स्वतंत्र रूप से प्राप्त कर सकते हैं।
  • इसके विपरीत, Enterprise Association वह व्यवस्था है जिसमें राज्य एक संगठित लक्ष्य निर्धारित करता है और नागरिकों को उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निर्देशित करता है, जैसे कि एक कंपनी या संगठन कार्य करता है।
  • ओकशॉट का मानना है कि आधुनिक राज्य को Civil Association के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विविधता को सुरक्षित रखता है, जबकि Enterprise Association व्यक्तिगत स्वायत्तता को सीमित कर सकता है।

स्वतंत्रता की अवधारणा (Freedom)

  • ओकशॉट के अनुसार स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल बाधाओं की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति नियमों के भीतर रहते हुए अपने जीवन को स्वतंत्र रूप से संचालित कर सके। वे इस विचार को खारिज करते हैं कि कानून और स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोधी हैं।
  • इसके विपरीत, वे यह तर्क देते हैं कि कानून स्वतंत्रता का संरक्षक है, क्योंकि यह सभी व्यक्तियों के लिए समान नियम स्थापित करता है, जिससे एक व्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरे की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करती।
  • इस प्रकार, ओकशॉट स्वतंत्रता को एक संरचित और संतुलित अवधारणा के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो अराजकता के बजाय व्यवस्था के भीतर विकसित होती है।

परंपरा और व्यवहारिक ज्ञान (Tradition and Practical Knowledge)

  • ओकशॉट के चिंतन में परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि वे इसे सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता का आधार मानते हैं। उनके अनुसार परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत प्रक्रिया है, जो निरंतर अनुभव और अभ्यास के माध्यम से विकसित होती रहती है।
  • वे यह तर्क देते हैं कि कोई भी समाज केवल सैद्धांतिक ज्ञान के आधार पर नहीं चल सकता, क्योंकि व्यवहारिक ज्ञान, जो परंपरा में निहित होता है, समाज के संचालन के लिए अनिवार्य है।
  • इस प्रकार, ओकशॉट का दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि परंपरा और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

कानून, शासन और Rule of Law

  • ओकशॉट के अनुसार कानून का कार्य नागरिकों को निर्देश देना नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसा ढांचा प्रदान करना है, जिसमें वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
  • वे ‘Rule of Law’ की अवधारणा का समर्थन करते हुए यह स्पष्ट करते हैं कि कानून को सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और यह किसी विशेष उद्देश्य या विचारधारा को लागू करने का माध्यम नहीं होना चाहिए।
  • इस प्रकार, वे कानून को एक तटस्थ और निष्पक्ष व्यवस्था के रूप में देखते हैं, जो समाज में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है।

आलोचना (Critical Evaluation)

  • ओकशॉट के विचारों की आलोचना करते हुए कई विद्वानों ने यह तर्क दिया है कि उनका दृष्टिकोण अत्यधिक रूढ़िवादी है और वह सामाजिक परिवर्तन तथा सुधार की आवश्यकता को पर्याप्त महत्व नहीं देता।
  • यह भी कहा गया है कि उनका परंपरा पर अत्यधिक जोर प्रगतिशील नीतियों और नवाचार को बाधित कर सकता है।
  • इसके अतिरिक्त, उनका सिद्धांत कई बार व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट दिशा प्रदान नहीं करता, क्योंकि वे किसी निश्चित नीति या कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते।

समकालीन प्रासंगिकता (Contemporary Relevance)

  • वर्तमान वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में, जहाँ वैचारिक ध्रुवीकरण और अत्यधिक योजनाबद्ध नीतियाँ देखने को मिलती हैं, ओकशॉट का दृष्टिकोण अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। उनका यह विचार कि राजनीति को परंपरा, अनुभव और व्यावहारिक समझ के आधार पर संचालित किया जाना चाहिए, आज के लोकतांत्रिक शासन के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है।
  • विशेष रूप से, उनकी ‘Civil Association’ की अवधारणा आधुनिक उदार लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है।

Immanuel Kant और Michael Oakeshott तुलनात्मक तालिका

आधार (Basis)KantOakeshott
दार्शनिक परंपराप्रबोधन (Enlightenment) और तर्कवाद से प्रभावितपरंपरावाद और अनुभववाद से प्रभावित
ज्ञान का स्रोतबुद्धि (Reason) और सार्वभौमिक सिद्धांतअनुभव (Experience) और परंपरा
राजनीति की प्रकृतिनैतिक सिद्धांतों पर आधारितव्यावहारिक गतिविधि (Practical Activity)
नैतिकता का आधारकर्तव्य (Duty) और सार्वभौमिक नियमकोई निश्चित नैतिक सूत्र नहीं, संदर्भ आधारित
मुख्य सिद्धांतCategorical ImperativeRationalism in Politics की आलोचना
राज्य की अवधारणानैतिक संस्था (Moral Institution)Civil Association (नियम आधारित ढांचा)
राज्य का उद्देश्यन्याय और नैतिकता की स्थापनास्थिरता और व्यवस्था बनाए रखना
स्वतंत्रता की अवधारणानैतिक नियमों के पालन में स्वतंत्रतानियमों के भीतर व्यावहारिक स्वतंत्रता
कानून का दृष्टिकोणनैतिकता से जुड़ा हुआतटस्थ नियमों का ढांचा
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोणविश्व शांति (Perpetual Peace)अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर सीमित ध्यान
परिवर्तन का दृष्टिकोणतर्कसंगत सुधार संभवक्रमिक और परंपरागत परिवर्तन
दृष्टिकोण की प्रकृतिआदर्शवादी (Idealist)यथार्थवादी/रूढ़िवादी (Practical-Conservative)

निष्कर्ष (Conclusion)

  • इस प्रकार, Michael Oakeshott का दर्शन एक गहन और संतुलित राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो तर्क और परंपरा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
  • उनका चिंतन यह स्पष्ट करता है कि राजनीति को किसी कठोर सिद्धांत या योजना के माध्यम से नहीं समझा जा सकता, बल्कि यह एक जीवंत और विकसित होती हुई प्रक्रिया है, जिसमें अनुभव, परंपरा और विवेक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • उनके विचार आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत और लोकतांत्रिक शासन के लिए एक महत्वपूर्ण वैचारिक आधार प्रदान करते हैं।

Exam Facts

  1. माइकल ओकशॉट 20वीं शताब्दी के प्रमुख ब्रिटिश राजनीतिक दार्शनिक थे।
  2. ओकशॉट ने ‘Rationalism in Politics’ की आलोचना की।
  3. उनके अनुसार राजनीति एक ‘practical activity’ है, न कि वैज्ञानिक प्रक्रिया।
  4. ओकशॉट ने Experience and Its Modes में ज्ञान के विभिन्न रूपों की व्याख्या की।
  5. उन्होंने ‘practical knowledge’ को सैद्धांतिक ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण माना।
  6. ओकशॉट ने राज्य को ‘Civil Association’ के रूप में परिभाषित किया।
  7. उन्होंने ‘Enterprise Association’ को एक उद्देश्य-आधारित राज्य के रूप में बताया।
  8. ओकशॉट के अनुसार कानून स्वतंत्रता का संरक्षक होता है।
  9. उन्होंने परंपरा और ऐतिहासिक अनुभव को राजनीति का आधार माना।
  10. ओकशॉट परिवर्तन को क्रमिक और सतत प्रक्रिया के रूप में देखते हैं।

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